महराजगंज में शुरू हुआ विरासत बचाने का अभियान, आमजन भी बनेंगे भागीदार

ज्ञान भारतम् मिशन से सहेजी जाएगी विरासत: महराजगंज में 75 साल पुरानी पांडुलिपियों का होगा बड़ा सर्वे

📌 महराजगंज से बड़ी पहल: ज्ञान भारतम् मिशन को मिली गति


महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)।जनपद में ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित जिला स्तरीय समिति की बैठक में ज्ञान भारतम् मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तार से चर्चा की गई।
इस बैठक का मुख्य उद्देश्य जिले में बिखरी पड़ी प्राचीन पांडुलिपियों, ताड़पत्रों, दुर्लभ अभिलेखों और ग्रंथों को खोजकर सुरक्षित करना और उन्हें डिजिटल स्वरूप में संरक्षित करना है। प्रशासन ने इस मिशन को एक जनभागीदारी अभियान के रूप में आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है।
📚 75 वर्ष से अधिक पुरानी पांडुलिपियों का सर्वे शुरू
जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण के अंतर्गत जिले में व्यापक स्तर पर अभियान चलाया जाए। इसके तहत—
मठ, मंदिर और आश्रम
विद्यालय एवं महाविद्यालय
पुस्तकालय और शोध संस्थान
निजी संगठनों एवं व्यक्तियों
से संपर्क कर 75 वर्ष से अधिक पुरानी पांडुलिपियों और ग्रंथों की सूची तैयार की जाएगी।
यह सर्वेक्षण सिर्फ दस्तावेजों को एकत्र करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उनकी स्थिति, महत्व और विषयवस्तु का भी आकलन किया जाएगा।
💻 डिजिटलीकरण से सुरक्षित होगी बौद्धिक विरासत
बैठक में बताया गया कि ज्ञान भारतम् मिशन के तहत पांडुलिपियों का—
वैज्ञानिक संरक्षण,डिजिटल स्कैनिंग,कैटालागिंग (सूचीकरण),अभिलेखीकरण
किया जाएगा।
इस प्रक्रिया से सदियों पुरानी ज्ञान परंपरा को न केवल सुरक्षित रखा जाएगा, बल्कि उसे शोधार्थियों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों के लिए भी सुलभ बनाया जाएगा।
जिलाधिकारी ने कहा कि उत्तर प्रदेश प्राचीन ज्ञान, दर्शन और साहित्य की भूमि रहा है, इसलिए इस मिशन में प्रदेश की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।
🔒 स्वामित्व रहेगा सुरक्षित, बढ़ेगा विश्वास
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि इस अभियान के तहत किसी भी पांडुलिपि का स्वामित्व नहीं बदलेगा।
पांडुलिपियां जिस व्यक्ति या संस्था के पास हैं, उनके पास ही रहेंगी।
केवल उनका डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा।
मालिक की पहचान और अधिकार पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे।
यह व्यवस्था लोगों में विश्वास पैदा करेगी और अधिक से अधिक लोग इस अभियान से जुड़ सकेंगे।
🏛️ तीन माह में पूरा होगा सर्वे
बैठक में तय किया गया कि पूरे जिले में सर्वेक्षण कार्य तीन माह के भीतर पूरा किया जाएगा।
तैयार सूची को संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश के अंतर्गत राजकीय अभिलेखागार को भेजा जाएगा, जहां से आगे की प्रक्रिया शुरू होगी।
इसके बाद विशेषज्ञों की टीम संबंधित स्थानों पर जाकर—
पांडुलिपियों का परीक्षण।
संरक्षण कार्य।
डिजिटलीकरण।
सुनिश्चित करेगी।
📱 आमजन की भागीदारी: ऐप से जुड़ें अभियान
ज्ञान भारतम् मिशन को जन-आंदोलन बनाने के लिए प्रशासन ने आम लोगों से भी सहयोग की अपील की है।
अब कोई भी व्यक्ति अपने पास उपलब्ध पुरानी पांडुलिपियों की जानकारी ज्ञान भारतम् ऐप के माध्यम से साझा कर सकता है।
इससे ग्रामीण क्षेत्रों में छिपी अनमोल धरोहरें भी सामने आ सकेंगी।
👥 बैठक में ये अधिकारी रहे उपस्थित
इस महत्वपूर्ण बैठक में कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जिनमें—मुख्य विकास अधिकारी महेंद्र कुमार सिंह ,डीडीओ बी.एन. कन्नौजिया,जिला विद्यालय निरीक्षक प्रदीप कुमार शर्मा
जिला सूचना अधिकारी प्रभाकर मणि त्रिपाठी,डीपीआरओ श्रेया मिश्रा,अधिशासी अधिकारी आलोक कुमार,जवाहर लाल नेहरू पीजी कॉलेज के प्राचार्य अजय कुमार मिश्रा ,सहित अन्य अधिकारी शामिल रहे।
🌟 क्यों खास है ज्ञान भारतम् मिशन?
ज्ञान भारतम् मिशन सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि भारत की हजारों वर्षों पुरानी ज्ञान परंपरा को पुनर्जीवित करने का प्रयास है।
इससे—
दुर्लभ ग्रंथों का संरक्षण होगा।
शोध कार्य को नई दिशा मिलेगी।
युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
महराजगंज में इस मिशन की शुरुआत एक सकारात्मक संकेत है कि अब स्थानीय स्तर पर भी विरासत संरक्षण को प्राथमिकता दी जा रही है।

Editor CP pandey

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