नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) सावन-भादो मास के प्रमुख व्रतों में से एक हरतालिका तीज का पर्व इस वर्ष मंगलवार को मनाया जाएगा। हालांकि इसकी शुरुआत आज (सोमवार) से ही नहाय-खाय की परंपरा के साथ हो चुकी है। सुहागिन महिलाएं इस व्रत को पति की लंबी उम्र और वैवाहिक सुख-समृद्धि की कामना के लिए करती हैं।
परंपरा के अनुसार, नहाय-खाय के दिन व्रती महिलाएं स्नान कर पवित्र भोजन ग्रहण करती हैं और अगले दिन निर्जला व्रत का संकल्प लेती हैं। मंगलवार को महिलाएं सोलह श्रृंगार कर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करेंगी और हरतालिका व्रत कथा का श्रवण करेंगी।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत की शुरुआत स्वयं मां पार्वती ने की थी। कहा जाता है कि भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए माता पार्वती ने कठोर तप कर हरतालिका व्रत रखा था। उनके तप से प्रसन्न होकर महादेव ने उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया। तभी से यह व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है।
पूरे देश में खासकर बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, मध्य प्रदेश और राजस्थान में इस पर्व को बड़े धूमधाम और श्रद्धा से मनाया जाता है। इस अवसर पर मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना होगी और घरों में भी महिलाएं विधि-विधान से भगवान शिव-पार्वती का पूजन कर व्रत करेंगी।
कहा जाता है कि जो भी महिला श्रद्धा और विश्वास के साथ हरतालिका तीज का व्रत करती है, उसके वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और दांपत्य जीवन अटूट रहता है।
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