कबीर कुआं एक है पानी भरें अनेक,
बर्तन में ही भेद है, पानी सबमें एक।
जब हिंदू मुस्लिम सहित सभी धर्मों
को मानने वाले अपनी अपनी जाति,
व धर्म को बढ़ावा देने में लगे रहते थे,
ईश्वर एक है तब कबीरदास कहते थे।
हिंदू कहते थे कि उनके राम कृष्ण बड़े हैं,
मुस्लिम कहते थे उनके अल्लाह बड़े हैं,
ईसाई कहते थे उनके ईशू सबसे बड़े हैं,
तब कबीर ने कहा सब समान हैं, एक हैं।
कबीर ने इंसान को एक राह दिखाई,
वो कहते थे कि जग के सभी इंसान,
एक ही जाति और एक ही धर्म के हैं,
और सबसे बड़ा धर्म तो एक सत्य है।
इंसान के रुधिर का रंग लाल होता है,
शरीर भले गोरा या काला हो किसी का,
सोचने की शक्ति भले अलग अलग होगी,
मन व मस्तिष्क की रचना एक जैसी होगी।
शक्तियां एक हैं, सिर्फ नाम अलग हैं,
इसी संदेश के साथ ही कबीरपंथ का
उद्भव हुआ था, सम्मेलन किए जाते थे,
सम्मेलनो में कबीर याद किए जाते थे ।
कबीर का प्राकट्य धाम लहरतारा,
गाँव पूरे उत्तर भारत में मशहूर है,
काशी, मगहर उनके लिये एक थे,
आदित्य उनके लिए ईश्वर एक थे।
•कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’
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