महामृत्युंजय मंत्र भगवान शिव को
प्रसन्न करने वाला विशिष्ट मंत्र है,
इस अमोघ मंत्र का उल्लेख ऋग्वेद
और यजुर्वेद तक में किया गया है।
जो भय व रोगमुक्त जीवन चाहते हैं,
अकाल मृत्यु से बचना चाहते हैं,
वह मनुष्य अमोघ महामृत्युंजय
मंत्र का जाप नियमित करते हैं।
महामृत्युंजय मंत्र भोलेनाथ शिव
का अत्यन्त प्रिय अमोघ मंत्र है,
इस मंत्र जाप से सभी बाधाओं,
परेशानियां से मुक्त हो जाता है।
शिवपुराण व अन्य ग्रंथो में इसका
महत्व विस्तार से बताया गया है।
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे
सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्,
उर्वारुकमिव बन्धनान्
मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्।
महामृत्युंजय मंत्र का अर्थ है कि
हम भगवान शिव की पूजा करते हैं,
जिनके तीन नेत्र हैं, जो सुगंधित हैं,
और शिव ही हमारा पोषण करते हैं।
जैसे फल शाखा के बंधन से मुक्त
हो जाता है वैसे ही हम भी मृत्यु
और नश्वरता से मुक्त हो जायें,
जीवन मृत्यु से मोक्ष मिल जाये।
आदित्य शिवपुराण के अनुसार
मंत्र का 108 बार जाप करने से
मनुष्य नकारात्मकता से दूर होता है,
अधिक से अधिक लाभ प्राप्त होता है।
•कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’
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