“इतिहास के पन्नों में 17 दिसंबर: युद्ध, क्रांति, विज्ञान और कूटनीति से गढ़ा गया एक यादगार दिन”
इतिहास केवल तिथियों का संग्रह नहीं, बल्कि मानव सभ्यता के संघर्ष, उपलब्धियों और बदलावों की जीवंत कथा है। 17 दिसंबर ऐसी ही एक महत्वपूर्ण तिथि है, जिसने भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के राजनीतिक, सामाजिक, सैन्य और सांस्कृतिक इतिहास को कई बार नई दिशा दी। इस दिन युद्ध थमे, क्रांतियाँ हुईं, वैज्ञानिक संस्थानों की नींव पड़ी और विश्व राजनीति में ऐतिहासिक निर्णय लिए गए। आइए जानते हैं 17 दिसंबर की प्रमुख घटनाओं को विस्तार से।
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2014 – अमेरिका और क्यूबा के बीच 55 साल बाद रिश्तों की बहाली
17 दिसंबर 2014 को वैश्विक राजनीति में एक ऐतिहासिक मोड़ आया, जब अमेरिका और क्यूबा ने पांच दशकों से अधिक समय बाद अपने कूटनीतिक संबंधों को बहाल करने की घोषणा की। शीत युद्ध काल से चले आ रहे तनावों का अंत करते हुए इस फैसले ने न केवल कैरेबियाई क्षेत्र बल्कि पूरी दुनिया में शांति और सहयोग की उम्मीद जगाई। इसे राष्ट्रपति बराक ओबामा की विदेश नीति की बड़ी सफलता माना गया।
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2009 – लेबनान तट पर एमवी डैनी एफ टू जहाज हादसा
लेबनान के समुद्री तट पर 17 दिसंबर 2009 को कार्गो जहाज एमवी डैनी एफ टू के डूबने से भीषण त्रासदी घटी। इस हादसे में 40 लोगों की जान चली गई और 28,000 से अधिक पशुओं की मौत हुई। यह दुर्घटना समुद्री सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल छोड़ गई और पर्यावरणीय नुकसान के कारण भी लंबे समय तक चर्चा में रही।
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2008 – शीला दीक्षित का तीसरी बार मुख्यमंत्री बनना
17 दिसंबर 2008 को शीला दीक्षित ने तीसरी बार दिल्ली की मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। उनका कार्यकाल शहरी विकास, मेट्रो विस्तार और आधारभूत ढांचे के लिए जाना जाता है। इसी दिन केंद्र सरकार ने सुरक्षा बलों में पदोन्नति से जुड़ी नई नीति की घोषणा कर प्रशासनिक ढांचे में सुधार की दिशा में कदम बढ़ाया।
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2005 – भूटान में सत्ता परिवर्तन
इस दिन भूटान के राजा जिग सिग्मे वांगचुक ने सत्ता छोड़कर लोकतांत्रिक व्यवस्था की ओर देश को अग्रसर किया। यह निर्णय एशिया में शांतिपूर्ण सत्ता हस्तांतरण का उदाहरण बना और भूटान के आधुनिक राजनीतिक इतिहास में एक नई शुरुआत मानी गई।
2002 – कश्मीर मुद्दे पर तुर्की का भारत को समर्थन
17 दिसंबर 2002 को तुर्की ने कश्मीर मुद्दे पर भारत का समर्थन कर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की कूटनीतिक स्थिति को मजबूत किया। यह भारत-तुर्की संबंधों में विश्वास और सहयोग की दिशा में एक अहम कदम था।
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2000 – भारत-पाकिस्तान के बीच हॉटलाइन सेवा बहाल
भारत और पाकिस्तान के सैन्य संबंधों में विश्वास बहाली के प्रयासों के तहत दोनों देशों के सेना मुख्यालयों के बीच हॉटलाइन सेवा पुनः शुरू की गई। यह निर्णय सीमा पर तनाव कम करने और संवाद को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लिया गया था।
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1998 – ऑपरेशन डेजर्ट फॉक्स
अमेरिका और ब्रिटेन ने 17 दिसंबर 1998 को ‘ऑपरेशन डेजर्ट फॉक्स’ के तहत इराक पर भीषण बमबारी की। यह कार्रवाई इराक पर हथियार निरीक्षण में सहयोग न करने के आरोपों के चलते की गई और मध्य-पूर्व की राजनीति में लंबे समय तक असर डालने वाली साबित हुई।
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1971 – भारत-पाक युद्ध का अंत
17 दिसंबर 1971 भारत के सैन्य इतिहास में स्वर्णिम दिन के रूप में दर्ज है। इसी दिन भारत-पाक युद्ध समाप्त हुआ, जिसके परिणामस्वरूप बांग्लादेश का जन्म हुआ। यह जीत भारतीय सेना की रणनीतिक क्षमता और साहस का प्रतीक बनी।
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1940 – गांधीजी द्वारा व्यक्तिगत सत्याग्रह स्थगित
महात्मा गांधी ने 17 दिसंबर 1940 को व्यक्तिगत सत्याग्रह आंदोलन को स्थगित कर दिया। यह निर्णय स्वतंत्रता संग्राम की रणनीति में बदलाव का संकेत था, जिससे आगे चलकर ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ जैसी व्यापक जनक्रांति का मार्ग प्रशस्त हुआ।
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1931 – भारतीय सांख्यिकी संस्थान की स्थापना
प्रोफेसर प्रशांत चंद्र महालनोबिस के सपने को साकार करते हुए 17 दिसंबर 1931 को कोलकाता में भारतीय सांख्यिकी संस्थान (ISI) की स्थापना हुई। यह संस्थान भारत में आधुनिक सांख्यिकी और योजना निर्माण की रीढ़ बना।
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1929 – भगत सिंह और राजगुरु की क्रांतिकारी कार्रवाई
इस दिन भगत सिंह और राजगुरु ने ब्रिटिश अधिकारी सांडर्स को गोली मारकर ब्रिटिश हुकूमत को चुनौती दी। यह घटना भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में क्रांतिकारी आंदोलन की सबसे साहसी कार्रवाइयों में गिनी जाती है।
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1907 – भूटान के पहले राजा उग्येन वांगचुक
17 दिसंबर 1907 को उग्येन वांगचुक भूटान के पहले वंशानुगत राजा बने। इसी के साथ भूटान में संगठित राजशाही की नींव पड़ी, जिसने देश को राजनीतिक स्थिरता प्रदान की।
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1803 – ईस्ट इंडिया कंपनी का उड़ीसा पर कब्ज़ा
ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने 17 दिसंबर 1803 को उड़ीसा पर अधिकार कर लिया। यह घटना भारत में औपनिवेशिक विस्तार की एक महत्वपूर्ण कड़ी थी, जिसने आगे चलकर पूरे देश को ब्रिटिश शासन के अधीन कर दिया।
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1398 – तैमूर लंग का दिल्ली पर कब्ज़ा
मंगोल शासक तैमूर लंग ने 17 दिसंबर 1398 को दिल्ली पर कब्ज़ा किया। इस आक्रमण ने दिल्ली सल्तनत को भारी क्षति पहुंचाई और भारतीय उपमहाद्वीप के मध्यकालीन इतिहास को गहरे रूप से प्रभावित किया।
