नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में अवैध कब्जों के खिलाफ प्रशासन ने एक सख्त और निर्णायक संदेश दिया है। दिल्ली हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेश के अनुपालन में दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने छह और सात जनवरी की दरमियानी रात एक व्यापक अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया। इस कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगाड़ने की कोशिश की गई, लेकिन पुलिस और प्रशासन ने संयम के साथ हालात पर काबू पाया।
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प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, एमसीडी का यह अभियान मध्य दिल्ली के एक संवेदनशील इलाके में प्रस्तावित था। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर पहले से ही पुलिस बल की तैनाती कर दी गई थी। हालांकि, एमसीडी का भारी साजो-सामान और बुलडोजर मौके पर पहुंचने से पहले ही करीब 100 से 150 लोगों की भीड़ वहां इकट्ठा हो गई। स्थिति उस वक्त तनावपूर्ण हो गई जब अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया का विरोध करते हुए कुछ असामाजिक तत्वों ने पत्थरबाजी शुरू कर दी।
बताया जा रहा है कि हालात बेकाबू होते देख पुलिस को न्यूनतम बल प्रयोग करना पड़ा। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के सीमित इस्तेमाल के बाद स्थिति नियंत्रित की गई। इस घटना में पांच पुलिसकर्मी घायल हुए, जिन्हें तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अब तक 10 उपद्रवियों को हिरासत में लिया है और सीसीटीवी तथा ड्रोन फुटेज के आधार पर अन्य की पहचान कर कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
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पुलिस उपायुक्त (मध्य) निधिन वलसन ने स्पष्ट किया कि यह पूरी कार्रवाई पूर्व नियोजित थी और एमसीडी ने प्रस्तावित विध्वंस की सूचना पहले ही पुलिस को दे दी थी। उन्होंने बताया कि अदालत ने फैज़-ए-इलाही मस्जिद के पास स्थित एक बैंक्वेट हॉल और एक औषधालय को अवैध घोषित किया था। यही संरचनाएं सरकारी जमीन पर बनी थीं और इन्हें हटाने का आदेश दिया गया था।
एमसीडी उपायुक्त विवेक कुमार ने जानकारी दी कि इस अभियान के तहत लगभग 36,000 वर्ग फुट अतिक्रमित क्षेत्र को मुक्त कराया गया। इस क्षेत्र में एक निदान केंद्र, एक विवाह भवन और दो मजबूत चारदीवारियां शामिल थीं। उन्होंने साफ कहा कि इस कार्रवाई के दौरान किसी भी धार्मिक स्थल को नुकसान नहीं पहुंचाया गया। मस्जिद पूरी तरह सुरक्षित रही। संरचनाएं अत्यंत मजबूत होने के कारण ध्वस्तीकरण में पूरी रात लग गई।
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प्रशासन के अनुसार, मौके पर अब भी भारी मात्रा में मलबा मौजूद है, जिसे हटाने के लिए विशेष सफाई अभियान चलाया जाएगा। अनुमान है कि यह मलबा 200 से 250 वाहनों में भरा जा सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे को किसी भी आधार पर जायज ठहराया जा सकता है। स्पष्ट है कि यह कार्रवाई किसी समुदाय के विरुद्ध नहीं, बल्कि कानून के पालन और न्यायालय के आदेश के सम्मान में की गई। पुलिस पर पथराव लोकतांत्रिक विरोध नहीं, बल्कि कानून के शासन को चुनौती देने जैसा है।
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दिल्ली में चला यह दिल्ली अतिक्रमण हटाओ अभियान एक स्पष्ट संदेश देता है—सरकारी भूमि पर कब्जा स्वीकार्य नहीं है और अदालत के आदेश सर्वोपरि हैं। प्रशासन ने संयम, दृढ़ता और संवैधानिक दायरे में रहकर यह साबित कर दिया कि कानून से ऊपर कोई नहीं।
