देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)।
समाज के बीच एक नई चेतना जन्म ले रही है — जहाँ मदद किसी दायित्व से नहीं, बल्कि दिल की पुकार से की जा रही है। देवरिया में सामाजिक सरोकारों की ऐसी लहर उठी है, जिसने यह साबित कर दिया कि यदि इरादे नेक हों, तो छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े बदलाव की नींव रख सकते हैं।
शहर के युवाओं, शिक्षकों और स्वयंसेवी संस्थाओं ने मिलकर “जनसेवा से जनजागरण” की एक नई परंपरा शुरू की है। कोई अनाथ बच्चों को शिक्षा से जोड़ रहा है, कोई वृद्धाश्रम में सेवा दे रहा है, तो कोई गाँव-गाँव जाकर नशा मुक्ति का संदेश फैला रहा है।
इन पहलों ने न केवल समाज को जोड़ने का काम किया है, बल्कि लोगों के भीतर एक-दूसरे के लिए कुछ करने की भावना को फिर से जगाया है।
स्थानीय संगठन “जनचेतना मंच” की संयोजिका ने बताया —
“समाज तभी मजबूत होगा जब हर व्यक्ति अपने भीतर के नागरिक को जगाए। दूसरों की मदद करना आज सबसे बड़ा धर्म है।”
इसी क्रम में पिछले सप्ताह आयोजित “सेवा से स्वाभिमान तक” कार्यक्रम में दर्जनों युवाओं ने सड़क किनारे सफाई अभियान चलाया, झुग्गी बस्तियों में बच्चों को पढ़ाया और रक्तदान शिविरों में भाग लिया।
इन छोटे-छोटे प्रयासों ने देवरिया को नई दिशा दी है — एक ऐसे शहर के रूप में जहाँ संवेदना ही संस्कृति बन गई है और समाज का हर वर्ग एक-दूसरे के साथ खड़ा है।
यह परिवर्तन केवल सेवा का नहीं, बल्कि समझ और सामूहिक जिम्मेदारी का है — जो बताता है कि जब समाज आगे बढ़ता है, तो राष्ट्र स्वयं विकसित होता है।
