बेलगावी (राष्ट्र की परम्परा डेस्क )बेलगावी (कर्नाटक)।“ज़रूरत ही आविष्कार की जननी है” – इसे सच कर दिखाया है कर्नाटक के बेलगावी जिले के युवा किसान और इंजीनियर अविनाश देसाई ने। इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद खेती अपनाने वाले देसाई ने खेती-किसानी से जुड़ी एक बड़ी समस्या का हल खोज निकाला। इसी नवाचार के दम पर उन्होंने ट्रैक्टर्स एंड फार्म इक्विपमेंट लिमिटेड (टीएएफई) द्वारा आयोजित मैसी डायनास्टार प्रतियोगिता-सीजन 2 में 16,000 से अधिक प्रतिभागियों को पछाड़ते हुए पहला स्थान हासिल किया है।

गोबर प्रबंधन से मिली प्रेरणा

देसाई ने बताया कि किसानों को गोबर से खाद बनाने में समय और जगह की भारी समस्या होती है। बायो-डाइजेस्टर का उपयोग करने पर उसमें से निकला घोल इतना भारी और पानी से भरा होता है कि उसका प्रबंधन करना मुश्किल हो जाता है। यही वजह है कि बड़े किसान भी अंततः पुराने तरीके यानी गड्ढे में गोबर डालकर एक साल तक सड़ाने की प्रक्रिया पर लौट आते हैं।

नई तकनीक: ‘मोबाइल स्लरी डिवाटरिंग मशीन’

इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार इंजीनियर देसाई ने इस समस्या का समाधान निकाला। उन्होंने ‘मोबाइल स्लरी डिवाटरिंग मशीन’ तैयार की है, जिसे ट्रैक्टर से चलाया जा सकता है। ट्रैक्टर के पीटीओ (पावर टेक-ऑफ) से चलने वाली यह मशीन ‘स्क्रू प्रेस’ तकनीक से बायो-डाइजेस्टर से निकले घोल को तुरंत दो हिस्सों में बांट देती है –

  1. पोषक तत्वों से भरपूर तरल खाद
  2. सूखी खाद

यह तकनीक किसानों के लिए दोहरा लाभ देती है। तरल खाद तुरंत खेतों में उपयोगी हो जाती है, जबकि सूखी खाद लंबे समय तक संरक्षित की जा सकती है।

खेती से गहरा जुड़ाव

बेलगावी जिले के सौदत्ती तालुका के चचादी गांव निवासी अविनाश देसाई का परिवार 100 एकड़ ज़मीन पर गन्ना, चना और ज्वार की खेती करता है। उनके पास कम से कम 20 मवेशी भी हैं। देसाई अपने परिवार की जड़ों को बेलगावी के रत्ता वंश के सेनापति वीरप्पा नायक से जोड़ते हैं।

किसानों के लिए वरदान

देसाई का मानना है कि यह मशीन किसानों की गोबर प्रबंधन की पुरानी समस्या का स्थायी समाधान साबित होगी। अब न केवल खाद बनने में समय बचेगा बल्कि तरल और सूखी खाद दोनों का उपयोग कर किसान अपनी पैदावार और मिट्टी की उर्वरता बढ़ा सकेंगे।