शिशुपन, बचपन, यौवन बीत गया,
चौथा पन भी अब मेरा बीत रहा है,
जीवन एक एक पल घटा जा रहा है,
जैसे जैसे उम्र का हर पल बीत रहा है।
उम्र का विचार यह समझाता है,
अब जिन्दगी की शाम हो गई है,
मगर ये दिल है जो कहता है कि
महफ़िल शाम से ही शुरू होती है।
दिल जो कहता है वह भी सही है,
शाम की फ़िक्र, रात न बेकार हो,
क्या पता क्या कि कल उठने पर,
सूर्योदय का फिर दीदार हो न हो।
आशा निराशा, उम्र का यह मंजर,
दिल चाहता कुछ है होता कुछ है,
दिल की सुने या वास्तविकता देखें,
ज़िंदगी का यही तो फ़लसफ़ा है।
तभी श्रीकृष्ण जी यह कहते हैं कि
पार्थ कर्म कर, फल की इच्छा न कर,
फल तो मैं ही देने वाला हूँ इसलिए,
आदित्य कर्म धर्म व सत्कर्म कर।
गुजरात-महाराष्ट्र के कारोबारियों की यूपी पर नजर, पांच जिलों में टेक्सटाइल पार्क की तैयारी अभिषेक…
गोपालगंज (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)नगर थाना क्षेत्र के जंगलिया मोहल्ले में शनिवार को दो पक्षों…
सिवान (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। एमएच नगर थाना क्षेत्र के पुरैना बलमडीह चंवर में करीब…
बम के धमकी के बाद प्लेटफॉर्म से ट्रेनों तक चला सघन जांच अभियान पटना (राष्ट्र…
जाँच करती पुलिस बलियापुर में ज्वेलर्स से आभूषणों से भरा बैग छीना, बाइक सवार बदमाश…
यूपी के युवाओं के लिए बड़ा ऐलान: छह महीने में एक लाख नियुक्ति पत्र देने…