शिशुपन, बचपन, यौवन बीत गया,
चौथा पन भी अब मेरा बीत रहा है,
जीवन एक एक पल घटा जा रहा है,
जैसे जैसे उम्र का हर पल बीत रहा है।

उम्र का विचार यह समझाता है,
अब जिन्दगी की शाम हो गई है,
मगर ये दिल है जो कहता है कि
महफ़िल शाम से ही शुरू होती है।

दिल जो कहता है वह भी सही है,
शाम की फ़िक्र, रात न बेकार हो,
क्या पता क्या कि कल उठने पर,
सूर्योदय का फिर दीदार हो न हो।

आशा निराशा, उम्र का यह मंजर,
दिल चाहता कुछ है होता कुछ है,
दिल की सुने या वास्तविकता देखें,
ज़िंदगी का यही तो फ़लसफ़ा है।

तभी श्रीकृष्ण जी यह कहते हैं कि
पार्थ कर्म कर, फल की इच्छा न कर,
फल तो मैं ही देने वाला हूँ इसलिए,
आदित्य कर्म धर्म व सत्कर्म कर।

  • डॉ. कर्नल
    आदिशंकर मिश्र, ‘आदित्य’

rkpnews@somnath

Recent Posts

ममता के आतंक का अंत किया भाजपा ने- पवन मिश्र

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा ) पश्चिम बंगाल में भाजपा की ऐतिहासिक विजय के बादबंगाल चुनाव…

7 hours ago

सड़कों के बजट आवंटन में भेदभाव का आर

बलिया (राष्ट्र क़ी परम्परा ) समाजवादी पार्टी के सलेमपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद रमाशंकर राजभर…

7 hours ago

समस्याओं को लेकर सपा ने दी आंदोलन की चेताव

बलिया (राष्ट्र क़ी परम्परा ) सिकंदरपुर समाजवादी पार्टी के नेताओं ने क्षेत्र की विभिन्न जनसमस्याओं…

7 hours ago

आंधी-पानी से गिरे बिजली के पोल, 24 घंटे से ठप विद्युत आपूर्ति, लोगों में आक्रोश

बलिया (राष्ट्र क़ी परम्परा ) सुखपुरा में सोमवार की शाम आई तेज आंधी और बारिश…

7 hours ago

नाली निर्माण के दौरान बिजली का खंभा गिरा दोपहिया वाहन क्षतिग्रस्त

बरहज/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)तहसील क्षेत्र ग्राम कपरवार तिराहे के नजदीक नाली निर्माण कार्य के दौरान एक…

7 hours ago