अमेरिका के बिना यूरोप असुरक्षित: NATO प्रमुख रुटे

ब्रसेल्स (राष्ट्र की परम्परा)। NATO के महासचिव मार्क रुटे ने यूरोप की सुरक्षा को लेकर बेहद साफ और सख्त संदेश दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अमेरिका के बिना यूरोप अपनी रक्षा नहीं कर सकता। रुटे ने यूरोपीय नेताओं को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर कोई यह सोचता है कि यूरोप या यूरोपीय संघ अकेले अपनी सुरक्षा संभाल सकता है, तो वह “सपनों की दुनिया” में जी रहा है।
यूरोपीय संघ के सांसदों को संबोधित करते हुए रुटे ने कहा कि यूरोप और अमेरिका एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं और NATO की मजबूती इसी साझेदारी पर टिकी हुई है।

अमेरिका के बिना सुरक्षा नामुमकिन: मार्क रुटे

ब्रसेल्स में दिए अपने संबोधन में NATO महासचिव ने कहा,
“अगर किसी को लगता है कि यूरोप अमेरिका के बिना खुद को बचा सकता है, तो वह सपना ही देखता रहे। ऐसा मुमकिन नहीं है।”
उन्होंने दो टूक कहा कि यूरोप को अमेरिका की जरूरत है और अमेरिका को यूरोप की, और यही NATO की असली ताकत है। रुटे के इस बयान को ऐसे समय में बेहद अहम माना जा रहा है, जब ट्रांस-अटलांटिक रिश्तों में तनाव की खबरें सामने आ रही हैं।

NATO के भीतर क्यों बढ़ा तनाव?

हाल के हफ्तों में NATO के भीतर तनाव बढ़ने की बड़ी वजह अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान रहे हैं। ट्रंप ने डेनमार्क के अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र ग्रीनलैंड को अमेरिका के नियंत्रण में लेने की बात कही थी।
इसके अलावा, ग्रीनलैंड का समर्थन करने वाले यूरोपीय देशों पर नए टैरिफ लगाने की धमकी भी दी गई थी। हालांकि, बाद में एक शुरुआती समझौते के बाद इन टैरिफ को फिलहाल रोक दिया गया। इस पूरे घटनाक्रम में मार्क रुटे की भूमिका अहम बताई जा रही है, जिन्होंने हालात को संभालने की कोशिश की।

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NATO की रीढ़: आर्टिकल 5 क्या है?

NATO के 32 सदस्य देशों के बीच एक बेहद अहम सुरक्षा प्रावधान है—आर्टिकल 5।
इस नियम के तहत अगर NATO के किसी एक सदस्य देश पर हमला होता है, तो बाकी सभी सदस्य देश उसे अपनी जिम्मेदारी मानते हुए उसकी रक्षा के लिए आगे आते हैं।
यही वजह है कि आर्टिकल 5 को NATO की सबसे बड़ी ताकत और सामूहिक सुरक्षा की गारंटी माना जाता है।

रक्षा खर्च बढ़ाने पर बनी सहमति

जुलाई में हेग में आयोजित NATO शिखर सम्मेलन के दौरान यूरोपीय देशों और कनाडा ने अमेरिका के दबाव में रक्षा खर्च बढ़ाने पर सहमति जताई।
स्पेन को छोड़कर NATO के लगभग सभी सदस्य देशों ने यह वादा किया है कि वे अगले 10 वर्षों में अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए ज्यादा निवेश करेंगे। अमेरिका लंबे समय से यह मांग करता रहा है कि यूरोप अपनी सुरक्षा का ज्यादा बोझ खुद उठाए।

2035 तक GDP का 5% रक्षा और सुरक्षा पर खर्च

NATO देशों के बीच यह भी सहमति बनी है कि वे 2035 तक कुल GDP का 5% रक्षा और सुरक्षा से जुड़ी जरूरतों पर खर्च करेंगे।
इसमें—

• 3.5% GDP सीधे रक्षा खर्च पर

• 1.5% GDP सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं पर

खर्च किया जाएगा। इसे NATO के इतिहास में रक्षा निवेश को लेकर एक बड़ा और निर्णायक कदम माना जा रहा है।

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अकेले चलना है तो 10% खर्च करना होगा: रुटे

मार्क रुटे ने यूरोप को एक और सख्त चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अगर यूरोप वाकई अमेरिका के बिना आगे बढ़ना चाहता है, तो 5% GDP खर्च भी नाकाफी होगा।

रुटे ने कहा,
“अगर आप अकेले चलना चाहते हैं, तो आपको 10% खर्च करना होगा। इसके साथ-साथ खुद की परमाणु क्षमता भी विकसित करनी होगी, जिस पर अरबों यूरो खर्च होंगे।”
यह बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि अमेरिका के बिना यूरोप को अपनी सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह से नए सिरे से खड़ी करनी पड़ेगी।

अमेरिका की परमाणु छतरी के बिना यूरोप असुरक्षित

NATO महासचिव ने अमेरिका की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि यूरोप की सबसे बड़ी सुरक्षा गारंटी अमेरिका की परमाणु छतरी है।

उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा,
“अगर अमेरिका नहीं हुआ, तो हमारी आज़ादी की आखिरी गारंटी भी चली जाएगी। फिर… गुड लक।”
रुटे के इस बयान को यूरोप के लिए एक कड़ा रियलिटी चेक माना जा रहा है।

यूरोप के लिए बड़ा सवाल

मार्क रुटे के बयानों ने यूरोप के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—
क्या यूरोप अमेरिका पर निर्भर रहना जारी रखेगा या फिर अपनी सुरक्षा के लिए भारी कीमत चुकाने को तैयार होगा?

फिलहाल संकेत साफ हैं कि NATO की मौजूदा संरचना में अमेरिका की भूमिका को नजरअंदाज करना यूरोप के लिए आसान नहीं होगा।

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Karan Pandey

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