Wednesday, February 18, 2026
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मुठभेड़ या फर्ज़ी एनकाउंटर? घायल बदमाश ने पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप

सीवान (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) नगर थाना क्षेत्र के लक्ष्मीपुर में शनिवार और रविवार की दरमियानी रात को पुलिस और बदमाश के बीच हुई मुठभेड़ का मामला अब नया मोड़ ले चुका है। पुलिस की गोली से घायल हुए बदमाश सुनील कुमार सिंह ने पुलिस पर ही गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या यह मुठभेड़ असली थी या फिर एक फर्ज़ी एनकाउंटर?

पुलिस की ओर से मुठभेड़ का दावा

नगर थाना इंस्पेक्टर राजू कुमार के अनुसार, लक्ष्मीपुर निवासी कुख्यात बदमाश सुनील कुमार सिंह को शनिवार देर शाम गिरफ्तार किया गया था। पुलिस के मुताबिक, सुनील एमएम कॉलोनी निवासी अशरफ को गोली मारने की साजिश रच रहा था। इसी सिलसिले में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
गिरफ्तारी के बाद हथियार बरामदगी और पूछताछ के लिए जब पुलिस टीम उसे लक्ष्मीपुर ले गई, तो उसने वहां पिस्तौल से फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस ने जवाबी कार्रवाई करते हुए फायरिंग की, जिसमें एक गोली सुनील के पैर में जा लगी। घायल अवस्था में उसे सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है।

सुनील कुमार का पलटवार: “मुझे पुलिस ने जबरन गोली मारी”

इस पूरी घटना पर घायल सुनील कुमार सिंह ने अस्पताल में मीडिया से बातचीत करते हुए पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सुनील ने बताया कि वह पहले से कुछ आपराधिक मामलों में आरोपित है, जिनमें चोरी जैसे केस शामिल हैं, लेकिन उसके ऊपर लगाए गए हत्या की साजिश के आरोप पूरी तरह झूठे हैं।

उसका कहना है कि उसे नगर थाना प्रभारी राजू कुमार ने शनिवार को गिरफ्तार किया और थाने में जबरन बंद रखा गया। रविवार सुबह उसे एसटीएफ प्रभारी विनोद कुमार और राजू कुमार ने मिलकर उसके घर लक्ष्मीपुर ले जाकर जानबूझकर गोली मारी। उसके अनुसार, गोली मारने के बाद वही पुलिसकर्मी उसे अस्पताल भी लेकर आए।

अब उठ रहे हैं सवाल

इस आरोप के बाद मुठभेड़ की सच्चाई पर सवाल खड़े हो गए हैं। यदि सुनील कुमार के दावे सही हैं, तो यह एक गंभीर मामला बन सकता है जिसमें उच्चस्तरीय जांच की आवश्यकता होगी। वहीं, पुलिस का कहना है कि उन्होंने अपनी आत्मरक्षा में फायरिंग की थी।

जांच की मांग तेज

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। घायल बदमाश और पुलिस दोनों के बयान परस्पर विरोधाभासी हैं, ऐसे में सच्चाई तक पहुंचने के लिए सीसीटीवी फुटेज, फोरेंसिक रिपोर्ट और स्वतंत्र जांच जरूरी मानी जा रही है।

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