Categories: FeaturedScience

डॉ. विक्रम साराभाई: भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक और वैज्ञानिक दृष्टि के अग्रदूत

पुनीत मिश्र

डॉ. विक्रम अंबालाल साराभाई भारत के उन महान वैज्ञानिकों में हैं, जिन्होंने देश को अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाते हुए विश्वस्तरीय पहचान दिलाई। एक प्रख्यात फिजिसिस्ट होने के साथ-साथ वे आधुनिक भारत के वैज्ञानिक विकास के शिल्पकार भी थे। उनका जन्म 12 अगस्त 1919 को अहमदाबाद के एक प्रगतिशील परिवार में हुआ, जहाँ शिक्षा, विज्ञान और सामाजिक दायित्व का वातावरण उन्हें बचपन से ही मिला। प्रारंभिक शिक्षा के बाद उन्होंने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से प्राकृतिक विज्ञान का अध्ययन किया और कॉस्मिक किरणों पर शोध के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक जगत में अपनी अलग पहचान बनाई।
डॉ. विक्रम साराभाई की वैज्ञानिक दृष्टि केवल शोध और प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं थी, बल्कि वे विज्ञान को समाज के व्यापक हित से जोड़कर देखते थे। उनका स्पष्ट मानना था कि अंतरिक्ष विज्ञान का उद्देश्य शक्ति प्रदर्शन नहीं, बल्कि विकासशील देश की समस्याओं का समाधान होना चाहिए। इसी सोच के तहत 1962 में उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुसंधान समिति की स्थापना कर भारत में अंतरिक्ष कार्यक्रम की नींव रखी, जो आगे चलकर इसरो के रूप में विकसित हुआ। केरल के थुंबा में स्थापित रॉकेट प्रक्षेपण केंद्र से भारत ने अंतरिक्ष युग में प्रवेश किया और सीमित संसाधनों के बावजूद आत्मनिर्भरता की दिशा में सशक्त कदम बढ़ाए।
डॉ. विक्रम साराभाई ने उपग्रहों के माध्यम से दूरसंचार, शिक्षा, मौसम पूर्वानुमान और ग्रामीण विकास जैसी योजनाओं की दूरदर्शी परिकल्पना की, जो आज भारत की अंतरिक्ष नीति की रीढ़ मानी जाती हैं। वे विज्ञान के साथ-साथ प्रबंधन और संस्थान निर्माण को भी राष्ट्र निर्माण का महत्वपूर्ण आधार मानते थे। फिजिकल रिसर्च लेबोरेटरी को अंतरराष्ट्रीय स्तर का शोध संस्थान बनाना और भारतीय प्रबंधन संस्थान अहमदाबाद की स्थापना में उनकी भूमिका उनके बहुआयामी व्यक्तित्व को दर्शाती है।
डॉ. विक्रम साराभाई को उनके असाधारण योगदान के लिए पद्म भूषण तथा मरणोपरांत पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। 30 दिसंबर 1971 को उनका असामयिक निधन हो गया, लेकिन उनकी दूरदर्शी सोच आज भी भारत की हर अंतरिक्ष उपलब्धि में जीवित है। डॉ. विक्रम साराभाई केवल भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक ही नहीं, बल्कि उस वैज्ञानिक चेतना के प्रतीक हैं, जिसने विज्ञान को जन-कल्याण और राष्ट्र विकास का सशक्त माध्यम बनाया।

rkpNavneet Mishra

Recent Posts

बरसात से पहले प्रशासन की सक्रियता, कटहरा में वर्षों पुरानी जल निकासी समस्या दूर

ग्रामीणों की शिकायत पर मौके पर पहुंचे नायब तहसीलदार, निरीक्षण कर खुलवाया पानी निकासी का…

3 hours ago

नाबालिग चालकों व मॉडिफाइड साइलेंसर के खिलाफ चला अभियान, तीन वाहन सीज

यातायात पुलिस की सख्तीः 86 हजार रुपये का जुर्माना वसूला, अभिभावकों को दी चेतावनी महराजगंज…

3 hours ago

48 घंटे में पुलिस की सफलता दो नाबालिग बालक सकुशल बरामद

गोरखपुर रेलवे स्टेशन से मिली दोनों की लोकेशन, परिजनों को किया गया सुपुर्द गोरखपुर(राष्ट्र की…

5 hours ago

पशु तस्करों से मुठभेड़ फायरिंग-पथराव के बीच एक गिरफ्तार

पिकअप पलटने से गोवंश की मौत पुलिस की घेराबंदी में तस्कर फरार, दो बाइक व…

5 hours ago

विश्व पर्यावरण दिवस पर सी बी एकेडमी में 51 पौधों का रोपण

बस्ती (राष्ट्र की परम्परा)l बस्ती भानपुर क्षेत्र के अंतर्गत बरगदवा में विश्व पर्यावरण दिवस के…

5 hours ago

विश्व पर्यावरण दिवस पर बीबीएयू में जागरूकता कार्यक्रम, ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत 300 पौधे लगाए गए

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) में विश्व पर्यावरण दिवस पर पर्यावरण…

6 hours ago