डॉ. के. एम. सिंह ने किसानों को पौधों के संरक्षण का बताया उपाय

कार्यक्रम का आयोजन केंद्र के डॉ. के. एम. सिंह ने किया

बहराइच (राष्ट्र की परम्परा) जनपद के नानपारा के
आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रोद्योगिक विश्वविद्यालय द्वारा संचालित कृषि विज्ञान केन्द्र नानपारा के कार्य क्षेत्र में आने वाले ग्राम सिलेटरगंज बिकास खंड बलहा में विश्व ,मृदा कार्यक्रम का आयोजन पर केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. के. एम. सिंह के मार्गदर्शन में किया गया। उन्होंने बताया कि मृदा एक जीवित माध्यम क्या है l पौधों की वृद्धि के लिये आवश्यक पोषक तत्वों के प्राकृतिक स्त्रोत के रूप में कार्य करती हैl खनिज, जैविक पदार्थ जल एवं वायु मृदा के घटक हैं। जिनकी मात्रा मृदा में घटती-बढती रहती हैl भूमि का उसकी क्षमता से अधिक दोहन होने के दुष्प्रभावों से मृदा उर्वरकता स्तर में कमी द्वितीय एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों की बढ़ती हुई कमी जीवांश कार्बन के स्तर में कमी एवं मृदा स्वास्थ्य में गिरावट के रूप में सामने आ रहे हैं।
केन्द्र की गृह वैज्ञानिक रेनु आर्या ने कृषकों को मृदा स्वास्थ्य का अर्थ समझाते हुए कहा कि मृदा के उन सभी प्रभावों जिनके आधार पर फसल का उत्पादन अच्छा हो सके और जिसमें पौधों की वृद्धि एवं विकास के सभी गुण उपस्थित हो तथा जीवों की संख्या और उनकी क्रियाशीलता आदर्श स्तर की हो वही स्वस्थ्य मृदा है। पौधों के सभी आवश्यक पोषक तत्वों को सन्तुलित मात्रा में उपलब्ध कराना स्वस्थ मृदा का गुण है। केन्द्र के पौध संरक्षण वैज्ञानिक डॉ. हर्षिता ने बताया की मृदा मे पादप और विभिन्न प्रकार के जीव-जन्तु विद्यमान है। मृदा में केचुएं तथा सूक्ष्मदर्शीय जीव जैसे प्रोटोजोआ ,जीवाणु फफूंद, शैवाल तथा एक्टीनोमाइटिज आदि बहुत मात्रा में रहते है। ये जीव, जीवांश पदार्थ को भोजन के रूप में ग्रहण करते है तथा इन्हीं के कारण पोषक तत्वों की घुलनशीलता व पौधों को उपलब्धता होती है। उन्होंने कृषकों को एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन अपनाने की सलाह दी और कम से कम कीटनाशकों का प्रयोग करने को कहा जिससे मृदा स्वस्थ रहे और हमारा भोजन भी विषरहित हो। रावे छात्र विकास कुमार यादव, सुमित सिंह, मुदित सिंह और मुकारिम अहमद ने कार्यक्रम में सहयोग किया।प्रगतिशील कृषक राम मनोहर सिंह, मायाराम, मुन्ना लाल गुप्ता, राजेंद्र वर्मा, मनीष कुमार, राम केवल आदि उपस्थित रहे।

rkpnews@somnath

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