एक-एक फाइल खोलकर की गहन जांच
गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)
पर्यटन भवन स्थित कलेक्ट्रेट परिसर उस समय पूरी तरह प्रशासनिक हलचल का केंद्र बन गया, जब मंडलायुक्त अनिल ढींगरा ने जिले के सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्यालय का व्यापक, सघन और बिना किसी औपचारिकता के निरीक्षण किया। मंडलायुक्त ने स्पष्ट संदेश दिया कि निरीक्षण केवल नाममात्र का नहीं होगा, बल्कि हर विभाग की एक-एक फाइल खोलकर बारीकी से जांच की जाएगी।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी दीपक मीणा, अपर आयुक्त जय प्रकाश, अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) सहदेव मिश्र, अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) विनीत कुमार सिंह, मुख्य राजस्व अधिकारी हिमांशु वर्मा तथा सिटी मजिस्ट्रेट उत्कर्ष श्रीवास्तव उपस्थित रहे। मंडलायुक्त ने अधिकारियों को साथ लेकर विभाग दर विभाग निरीक्षण किया और कार्यप्रणाली पर सीधी नजर डाली।
मंडलायुक्त ने भूलेख, कृषि बीमा भुगतान शाखा, संयुक्त कार्यालय, शस्त्र अनुभाग, नजारत आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ, निर्वाचन अभिलेखागार,लेखा एवं कोषागार समन्वय शाखा, आपूर्ति विभाग (खाद्य एवं रसद), समाज कल्याण विभाग, पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग, दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग, स्थापना अनुभाग, प्रोटोकॉल अनुभाग और शिकायत प्रकोष्ठ/जनसुनवाई शाखा की भी विस्तार से समीक्षा की।
निरीक्षण के दौरान मंडलायुक्त ने फाइलों की अद्यतन स्थिति, लंबित प्रकरणों, आदेशों के अनुपालन और दस्तावेजों की गुणवत्ता को स्वयं परखा।
पीएफ–एनपीएस फाइलों की बारीकी से जांच, कर्मचारियों के हित पर जोर
पीएफ और एनपीएस से संबंधित फाइलों की जांच करते हुए मंडलायुक्त ने अंशदान, कटौती, ऑनलाइन अपडेट और भुगतान की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि तकनीकी खामियों या लापरवाही के कारण किसी भी कर्मचारी का आर्थिक हित प्रभावित नहीं होना चाहिए। लंबित प्रकरणों की सूची बनाकर समयबद्ध निस्तारण के निर्देश दिए गए।
कृषि बीमा भुगतान की पूरी प्रक्रिया समझी, भूलेख से जानकारी लेकर किया सत्यापन
कृषि बीमा भुगतान को लेकर मंडलायुक्त ने विशेष गंभीरता दिखाई। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधिकारियों से यह स्पष्ट रूप से जाना कि कृषि बीमा भुगतान की मांग किस प्रक्रिया से शासन तक पहुंचती है। अधिकारियों ने अवगत कराया कि बीमा भुगतान से पहले भूलेख विभाग से किसानों के खातों, खतौनी, भूमि विवरण और पात्रता का सत्यापन किया जाता है।
मंडलायुक्त ने स्वयं भूलेख शाखा से जानकारी लेकर यह देखा कि भूमि अभिलेखों का मिलान किस प्रकार किया जाता है। सत्यापित भूलेखीय आंकड़ों के आधार पर पात्र किसानों की सूची तैयार की जाती है और फिर अन्य मद में आवश्यक धनराशि की मांग का प्रस्ताव शासन को भेजा जाता है।
उन्होंने निर्देश दिए कि भूलेख से प्राप्त जानकारी पूरी तरह शुद्ध और अद्यतन होनी चाहिए, ताकि किसी अपात्र को लाभ न मिले और कोई पात्र किसान भुगतान से वंचित न रहे। यह भी स्पष्ट किया गया कि प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रस्ताव भेजने में किसी स्तर पर अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी।
शस्त्र अनुभाग के निरीक्षण में मंडलायुक्त को बताया गया कि वर्तमान में नए शस्त्र लाइसेंस जारी नहीं किए जा रहे हैं। केवल वरासत के आधार पर शस्त्र हस्तांतरण, गैर जनपदों से स्थानांतरित शस्त्र लाइसेंस और शस्त्र लाइसेंस का नवीनीकरण ही किया जा रहा है। मंडलायुक्त ने शस्त्र से संबंधित फाइलों को स्वयं देखकर यह सुनिश्चित किया कि सभी प्रक्रियाएं शासनादेश और नियमों के अनुरूप हों।
नजारत शाखा में वित्तीय अभिलेखों, भुगतान आदेशों और बजट प्रबंधन की गहन जांच की गई। मंडलायुक्त ने स्पष्ट कहा कि वित्तीय मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सर्वोपरि है। किसी भी प्रकार की अनियमितता या ढिलाई पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
शिकायत प्रकोष्ठ/जनसुनवाई शाखा में प्राप्त आवेदनों और उनके निस्तारण की स्थिति की भी समीक्षा की गई। मंडलायुक्त ने निर्देश दिया कि जनता की शिकायतों का निस्तारण केवल औपचारिक न होकर गुणवत्तापूर्ण और संतोषजनक होना चाहिए।
निरीक्षण में मंडलायुक्त अनिल ढींगरा ने अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में कहा कि कलेक्ट्रेट प्रशासन की रीढ़ है और यहां की कार्यसंस्कृति में किसी भी तरह की लापरवाही, टालमटोल या नियमविरुद्ध कार्य बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। फाइलों के त्वरित निस्तारण, समयबद्ध कार्य और शासन की मंशा के अनुरूप पारदर्शी प्रशासन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
मंडलायुक्त के इस सघन निरीक्षण से कलेक्ट्रेट परिसर में दिनभर सक्रियता बनी रही और अधिकारियों-कर्मचारियों को यह स्पष्ट संदेश मिला कि अब कागजों में नहीं, जमीन पर काम दिखना चाहिए।
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