Tuesday, January 20, 2026
HomeUncategorizedज्योतिष और आयुर्वेद में चन्द्र देव का दिव्य प्रभाव

ज्योतिष और आयुर्वेद में चन्द्र देव का दिव्य प्रभाव

चन्द्र देव: आयुर्वेद, ज्योतिष और अमृतमयी चेतना का दिव्य संगम
मन, प्राण और प्रकृति के स्वामी चन्द्र देव की शास्त्रोक्त कथा व महिमा


प्रस्तावना:
जब रात्रि अपने आंचल में संसार को समेट लेती है,
जब शोर थम जाता है और मन मौन में उतरने लगता है—
तभी आकाश में प्रकट होते हैं चन्द्र देव।
वह केवल एक ग्रह नहीं,
वह मन के स्वामी,
वह औषधियों के अधिपति,
वह रस, प्राण और शीतलता के साक्षात स्वरूप हैं।
आयुर्वेद उन्हें सोम कहता है,
ज्योतिष उन्हें मनःकारक ग्रह,
और पुराण उन्हें अमृत के धारक देव के रूप में पूजते हैं।

ये भी पढ़ें – “चन्द्र देव क्यों हैं मनुष्य के मन के स्वामी? जानिए पौराणिक रहस्य”

एपिसोड–10 में हम जानेंगे—
👉 चन्द्र देव की शास्त्रोक्त उत्पत्ति कथा
👉 आयुर्वेद में चन्द्र का महत्व
👉 ज्योतिष में चन्द्र की दशा और प्रभाव
👉 चन्द्र देव की महिमा और जीवन से जुड़ा गूढ़ रहस्य
🌙 चन्द्र देव की शास्त्रोक्त उत्पत्ति कथा
(भागवत, विष्णु पुराण एवं ब्रह्माण्ड पुराण के अनुसार)
सृष्टि के प्रारंभ में जब ब्रह्मा जी ने प्रजापति दक्ष को सृष्टि विस्तार का दायित्व सौंपा, तब उनकी 27 कन्याएँ उत्पन्न हुईं।
इन 27 कन्याओं का विवाह चन्द्र देव से हुआ।
ये 27 कन्याएँ ही आगे चलकर बनीं—
27 नक्षत्र
परंतु चन्द्र देव का प्रेम विशेष रूप से रोहिणी से अधिक था।
वे रोहिणी के साथ अधिक समय बिताने लगे।
इससे अन्य नक्षत्र कन्याएँ दुखी हो गईं और अपने पिता दक्ष से शिकायत की।
दक्ष प्रजापति ने चन्द्र देव को समझाया—
“राजा सोम! तुम सभी के पति हो, समान भाव रखो।”
परंतु चन्द्र देव प्रेम में विवश रहे।
क्रोधित होकर दक्ष ने उन्हें क्षय रोग (क्षय = क्षीणता) का श्राप दे दिया।
धीरे-धीरे चन्द्र देव क्षीण होने लगे—
यही कारण है कृष्ण पक्ष।

ये भी पढ़ें – सोम देव का अवतरण: समुद्र मंथन से चन्द्र तक की अद्भुत यात्रा

🌊 शिव की शरण और अमृतमयी वरदान
क्षीण होते चन्द्र देव ने महादेव शिव की शरण ली।
शिव जी करुणा के सागर हैं।
उन्होंने चन्द्र देव को अपने मस्तक पर स्थान दिया।
और देवताओं के आग्रह पर दक्ष का श्राप आंशिक रूप से समाप्त हुआ।
👉 चन्द्र अब पूर्णतः नष्ट नहीं होंगे
👉 वे कृष्ण पक्ष में क्षीण और
👉 शुक्ल पक्ष में पुनः वृद्धि करेंगे
यही है चन्द्र का कलात्मक चक्र।
🔱 इसलिए शिव को कहा गया—
चन्द्रशेखर महादेव
🌿 आयुर्वेद में चन्द्र देव: सोम, रस और प्राण
आयुर्वेद कहता है—
“सोमः प्राणानामाधारः”
चन्द्र देव शरीर में—
मन
रस धातु
शीतलता
ओज
नींद और भावनात्मक संतुलन
का संचालन करते हैं।

ये भी पढ़ें – मन, अमृत और शिव का संगम: शास्त्रों में चन्द्रमा की महिमा का रहस्य

🌿 चन्द्र से जुड़ी आयुर्वेदिक अवधारणाएँ:
शुक्ल पक्ष में औषधियाँ अधिक प्रभावी होती हैं
चन्द्र दोष से—
अनिद्रा
अवसाद
मानसिक चंचलता
हार्मोनल असंतुलन
होता है।
यही कारण है कि प्राचीन वैद्य औषध संग्रह और रस चिकित्सा चन्द्र स्थिति देखकर करते थे।
🔮 ज्योतिष में चन्द्र देव का प्रभाव
चन्द्र केवल ग्रह नहीं,
वह कुंडली की आत्मा है।
चन्द्र दर्शाता है—
मन की प्रवृत्ति
माता से संबंध
स्मरण शक्ति
भावनात्मक परिपक्वता
जनता से जुड़ाव

ये भी पढ़ें – चंद्रमा की उत्पत्ति—दैवी लीला या ब्रह्मांडीय टक्कर का अनकहा रहस्य?

👉 मजबूत चन्द्र—
नेता, चिकित्सक, लेखक, कलाकार
👉 कमजोर चन्द्र—
भ्रम, भय, मानसिक अस्थिरता
चन्द्र की दशा जब शुभ होती है—
मानसिक शांति
लोकप्रियता
आर्थिक स्थिरता
🌙 चन्द्र देव की महिमा: जीवन का शीतल आधार
सूर्य तपाता है,
पर चन्द्र संजीवनी देता है।
यदि सूर्य आत्मा है,
तो चन्द्र मन है।
यदि सूर्य तेज है,
तो चन्द्र करुणा।
चन्द्र बिना जीवन शुष्क हो जाएगा।
वह हमें सिखाते हैं—
“पूर्णता स्थिर नहीं, चक्र में है।”

ये भी पढ़ें – “ऋषि अत्रि के पुत्र से लेकर नासा के शोध तक — चंद्रमा की रहस्यमयी यात्रा”

🙏 चन्द्र उपासना का शास्त्रोक्त महत्व
सोमवार व्रत
चन्द्र मंत्र जाप
दूध, चावल, श्वेत वस्त्र दान
शिव पूजन
👉 मानसिक रोगों में चन्द्र उपासना अत्यंत फलदायी मानी गई है
🌺 निष्कर्ष:
चन्द्र देव हमें सिखाते हैं—
शांत रहकर भी पूर्ण हुआ जा सकता है।
जिसने चन्द्र को समझ लिया,
उसने स्वयं को समझ लिया।

RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments