जनपद का चिकित्सा विभाग: संसाधनों की कमी, चुनौतियाँ और सुधार की दिशा में प्रयास

बलिया(राष्ट्र की परम्परा)

बलिया जनपद का चिकित्सा विभाग ग्रामीण व शहरी आबादी को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में निरंतर प्रयासरत है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि विभाग कई प्रकार की कमियों और चुनौतियों से जूझ रहा है। बढ़ती जनसंख्या, सीमित संसाधन और मानवबल की कमी के कारण स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर असर पड़ रहा है। इसके बावजूद विभाग द्वारा इन कमियों को दूर करने के लिए चरणबद्ध प्रयास भी किए जा रहे हैं।सबसे बड़ी समस्याचिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी है। जिला अस्पताल से लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) तक विशेषज्ञ डॉक्टरों के कई पद रिक्त हैं। खासकर स्त्री रोग विशेषज्ञ, एनेस्थेटिस्ट, बाल रोग विशेषज्ञ और रेडियोलॉजिस्ट की कमी के कारण मरीजों को या तो जिला अस्पताल रेफर किया जाता है या निजी अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ता है। ग्रामीण क्षेत्रों में 24 घंटे की आपात सेवाएं कागजों तक सीमित रह जाती हैं। इसके अलावा, कई स्वास्थ्य केंद्रों पर आधुनिक जांच सुविधाओं का अभाव है। एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड और पैथोलॉजी जांच की सीमित व्यवस्था के चलते मरीजों को निजी जांच केंद्रों पर निर्भर होना पड़ता है, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ता है। दवाओं की उपलब्धता में भी कभी-कभी कमी देखने को मिलती है, हालांकि जनऔषधि केंद्रों के माध्यम से सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।अस्पताल भवनों की स्थिति भी एक गंभीर समस्या है। कई पीएचसी और उपकेंद्र जर्जर हालत में हैं, जहां साफ-सफाई, पेयजल और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी मरीजों के साथ-साथ कर्मचारियों के लिए भी परेशानी का कारण बनती है। एंबुलेंस सेवाओं की संख्या सीमित होने से दूर-दराज के गांवों से मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
इन तमाम कमियों के बीच चिकित्सा विभाग सुधार की दिशा में कदम भी उठा रहा है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत नए स्वास्थ्य केंद्रों के निर्माण, पुराने भवनों के कायाकल्प और उपकरणों की खरीद की प्रक्रिया चल रही है। टेलीमेडिसिन सेवाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंच सके। इसके साथ ही आशा और एएनएम कार्यकर्ताओं के माध्यम से टीकाकरण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जा रहा है।
इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) बलिया ने कहा, “यह सही है कि जनपद में चिकित्सकों और संसाधनों की कमी एक चुनौती है, लेकिन सरकार के निर्देशों के अनुसार इसे दूर करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। रिक्त पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है, स्वास्थ्य केंद्रों पर आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं और मरीजों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए मॉनिटरिंग भी बढ़ाई गई है। हमारा लक्ष्य है कि आम जनता को सुलभ, सस्ती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।”
कुल मिलाकर, बलिया जनपद का चिकित्सा विभाग चुनौतियों के दौर से गुजर रहा है, लेकिन सरकारी योजनाओं और प्रशासनिक प्रयासों के माध्यम से हालात सुधारने की दिशा में उम्मीद की किरण भी दिखाई दे रही है।

rkpnews@somnath

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