देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)1857 की पहली स्वतंत्रता संग्राम की क्रांति में अपने प्राणों की आहुति देने वाले अमर शहीदों की स्मृति में आज एक भावपूर्ण आयोजन तहसील बरहज के ग्राम पैना में संपन्न हुआ। इस अवसर पर जिलाधिकारी दिव्या मित्तल ने ऐतिहासिक “शहीद द्वार” का अवलोकन किया और वीर सपूतों एवं सती माताओं को श्रद्धांजलि अर्पित कर उनके अदम्य साहस और देशभक्ति को नमन किया शहीद स्मारक पर पहुँचकर जिलाधिकारी ने गहन भावनाओं के साथ पुष्प अर्पित किए और स्मारक स्थल की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से परिचित होते हुए इसे गौरव का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि “ग्राम पैना की यह पावन भूमि न सिर्फ देवरिया जनपद, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। 1857 की क्रांति में यहां के वीरों ने स्वाधीनता के लिए जिस साहस और बलिदान का परिचय दिया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए अमूल्य प्रेरणा है। ‘शहीद द्वार’ उन बलिदानों की गवाही देता एक सजीव प्रतीक है, जो हमें सदैव अपने कर्तव्यों और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व की याद दिलाता रहेगा।”जिलाधिकारी ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि ऐसे ऐतिहासिक स्थलों का संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार केवल सरकार या प्रशासन का दायित्व नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति का यह नैतिक कर्तव्य है कि वह इन धरोहरों की रक्षा में योगदान दे। उन्होंने स्थानीय नागरिकों एवं युवाओं से आह्वान किया कि वे इस स्मारक की पवित्रता बनाए रखें और इसे प्रेरणा स्थल के रूप में विकसित करें।
कार्यक्रम के दौरान पुलिस अधीक्षक विक्रांत वीर, उपजिलाधिकारी बरहज बिपिन द्विवेदी तथा क्षेत्राधिकारी बरहज अंशुमान श्रीवास्तव इस गरिमामयी अवसर पर उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों ने शहीद द्वार पर माल्यार्पण कर देश की आज़ादी में अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीरों को श्रद्धापूर्वक नमन किया। ग्रामीणजन एवं स्कूली बच्चे आदि उपस्थित रहे।
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