यूपी में बारिश का कहर: 60 घंटे में 56 मौतें, 117 मकान क्षतिग्रस्त; कई जिलों में बाढ़ का खतरा
लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और तेज हवाओं ने कई जिलों में जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। जलभराव, पेड़ गिरने और कच्चे मकानों के क्षतिग्रस्त होने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पिछले करीब 60 घंटे में अतिवृष्टि और आंधी-तूफान से 56 लोगों की मौत की सूचना सामने आई है। वहीं 117 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं, पांच लोग घायल बताए गए हैं और चार पशुहानि दर्ज की गई है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने रविवार, 27 सितंबर को भी प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में भारी बारिश, जबकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई है।
दक्षिण-पूर्वी यूपी के ऊपर बना मौसम सिस्टम सक्रिय
मौसम विभाग के अनुसार दक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेश के ऊपर बना डिप्रेशन उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसके प्रभाव से पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी रह सकता है। हालांकि, यह मौसम तंत्र धीरे-धीरे कमजोर होने की संभावना है।
मौसम विभाग इस सिस्टम की लगातार निगरानी कर रहा है। लखनऊ में स्थापित डॉप्लर मौसम रडार के माध्यम से भी इसकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।
60 घंटे में 56 मौतें, कई जिलों में जनहानि
बारिश और आंधी-तूफान से प्रदेश में पिछले 60 घंटों के दौरान 56 लोगों की मौत की सूचना मिली है। लखीमपुर खीरी में चार लोगों की मौत दर्ज की गई। अयोध्या में दो लोगों की जान गई, जबकि अमेठी, बहराइच, बांदा, बाराबंकी, बस्ती, फतेहपुर, हमीरपुर, हरदोई और कानपुर नगर में एक-एक मौत की सूचना सामने आई है।
प्रशासन की ओर से प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य तेज किए जा रहे हैं। अधिकारियों को संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
बांदा में 32 और जालौन में 21 मकान क्षतिग्रस्त
तेज बारिश और हवाओं का असर लोगों के घरों पर भी पड़ा है। बांदा में 32 मकान क्षतिग्रस्त होने की सूचना है। जालौन में 21 और हरदोई में 14 मकानों को नुकसान पहुंचा है। कई जगह कच्चे मकानों की दीवारें गिरने और पेड़ उखड़ने की घटनाएं सामने आई हैं।
निचले इलाकों में जलभराव के कारण आवागमन प्रभावित हुआ है। लगातार बारिश के चलते ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
63 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश
शनिवार को उत्तर प्रदेश के 63 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई। पिछले 24 घंटे में प्रदेश में सामान्य के मुकाबले करीब 19 गुना अधिक बारिश होने की जानकारी सामने आई है।
लखनऊ में शनिवार सुबह तक 21 घंटे के दौरान 125.8 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। फतेहगढ़ में 224 मिलीमीटर, बांदा में 227.6 मिलीमीटर, नानपारा-बहराइच में 217 मिलीमीटर, हरदोई में 214 मिलीमीटर और कन्नौज में 204 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई।
इन जिलों में अचानक बाढ़ का खतरा
मौसम विभाग ने मध्य और तराई क्षेत्र के कुछ जलग्रहण क्षेत्रों में अगले 24 घंटे के दौरान अचानक बाढ़ का हल्का से मध्यम खतरा जताया है। आजमगढ़, बलिया, गाजीपुर, गोरखपुर, बस्ती, सुल्तानपुर, अयोध्या, गोंडा, हरदोई, लखनऊ, उन्नाव, रायबरेली, बाराबंकी, अमेठी, कौशांबी और चित्रकूट समेत कई जिलों को लेकर सतर्कता बरती जा रही है।
नेपाल में भी भारी बारिश के मद्देनजर उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में विशेष निगरानी रखने को कहा गया है। पूर्वी उत्तर प्रदेश की नदियों का जलस्तर बढ़ने की आशंका के बीच प्रशासन को बाढ़ संभावित क्षेत्रों में तैयारियां मजबूत रखने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने राहत कार्य तेज करने के दिए निर्देश
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बारिश और संभावित बाढ़ से प्रभावित लोगों को तत्काल राहत उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। जनहानि और पशुहानि की स्थिति में नियमानुसार मुआवजा देने तथा बारिश के कारण मकान गिरने से प्रभावित परिवारों को सहायता उपलब्ध कराने को कहा गया है।
मुख्यमंत्री ने फसलों को हुए नुकसान का सर्वे कराकर पात्र किसानों को नियमानुसार राहत देने के निर्देश भी दिए हैं। बाढ़ प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों तक पहुंचाने के साथ वरिष्ठ अधिकारियों को मौके पर रहकर स्थिति की निगरानी करने को कहा गया है।
बिजली व्यवस्था को लेकर भी अलर्ट
लगातार बारिश के बीच बिजली व्यवस्था पर भी नजर रखी जा रही है। स्थानीय स्तर पर आने वाले फॉल्ट को जल्द ठीक करने के निर्देश दिए गए हैं। बिजली से संबंधित समस्या होने पर उपभोक्ताओं से 1912 हेल्पलाइन पर सूचना देने की अपील की गई है।
फिलहाल 27 सितंबर को प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है। मौसम तंत्र के कमजोर होने के साथ बारिश की गतिविधियों में आगे कमी आने की संभावना है, लेकिन बाढ़ संभावित और नदी किनारे के इलाकों में प्रशासन की निगरानी बनी रहेगी।
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