गंदी बस, नाराज यात्री और बाल श्रम: परिवहन निगम पर सवाल

मिठौरा में रोडवेज बस का औचक निरीक्षण: गंदगी देख भड़के अधिकारी, यात्रियों को सड़क पर उतारा गया


महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)।जिले के उपनगर मिठौरा में बुधवार को उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की एक रोडवेज बस का औचक निरीक्षण उस समय सुर्खियों में आ गया, जब बस के भीतर फैली गंदगी और अव्यवस्था देखकर अधिकारी भड़क उठे। बस के फर्श, सीटों और गलियारों में कचरा, बदबू और जमी मैल ने यात्रियों की परेशानी को उजागर कर दिया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अधिकारियों ने तत्काल बस को सेवा से अस्थायी रूप से हटाने का आदेश दिया और सभी यात्रियों को मिठौरा चौराहे पर उतार दिया गया।
यात्रियों को अचानक सड़क पर उतारे जाने से असुविधा और नाराजगी देखने को मिली। कई यात्रियों ने बताया कि रोडवेज बसों की सफाई व्यवस्था लंबे समय से बदहाल है और शिकायतों के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं होती। इस औचक निरीक्षण ने परिवहन निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
नाबालिग बच्चों से कराई गई सफाई, बाल श्रम कानून का उल्लंघन
निरीक्षण के बाद सफाई के दौरान एक और चौंकाने वाला दृश्य सामने आया, जब नाबालिग बच्चों को बस की सफाई करते देखा गया। यह न केवल अमानवीय है, बल्कि बाल श्रम निषेध कानून का सीधा उल्लंघन भी है। मौके पर मौजूद यात्रियों और स्थानीय नागरिकों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई। लोगों का कहना है कि विभागीय लापरवाही का खामियाजा यात्रियों के साथ-साथ मासूम बच्चों को भी भुगतना पड़ रहा है।

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यात्रियों का दर्द: नियमित सफाई केवल कागजों तक
यात्रियों ने बताया कि रोडवेज बसों में नियमित सफाई का दावा सिर्फ फाइलों में सिमटकर रह गया है। गंदी सीटें, दुर्गंध और टूट-फूट के बीच यात्रा करना मजबूरी बन चुका है। यदि समय रहते नियमित निरीक्षण और सफाई होती, तो मिठौरा जैसी शर्मनाक स्थिति पैदा न होती।
अधिकारियों का बयान और कार्रवाई की मांग
घटना के बाद परिवहन निगम के अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि दोषी कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी और भविष्य में किसी भी परिस्थिति में नाबालिग बच्चों से कोई कार्य नहीं कराया जाएगा। वहीं, स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि रोडवेज बसों की नियमित स्वच्छता जांच अनिवार्य की जाए और बाल श्रम के मामलों में जिम्मेदारों पर कानूनी कार्रवाई हो।
मिठौरा की यह घटना सरकारी सेवाओं की जमीनी हकीकत को उजागर करती है। यह प्रशासन के लिए चेतावनी है कि यदि समय रहते सुधार नहीं हुआ, तो जनता का भरोसा डगमगा सकता है।

Editor CP pandey

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