मोदी के दिसंबर कनाडा दौरे की तैयारी, व्यापारिक रिश्तों को नई दिशा देने की कवायद
नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। भारत और कनाडा के बीच पिछले कुछ वर्षों में तनावपूर्ण रहे संबंधों में अब धीरे-धीरे सुधार के संकेत दिखाई दे रहे हैं। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा है कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिसंबर में कनाडा का दौरा कर सकते हैं। यह दौरा दिसंबर के मध्य में होने वाले जी20 शिखर सम्मेलन के आसपास प्रस्तावित बताया गया है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्चस्तरीय सत्र से इतर प्रेस कॉन्फ्रेंस में कार्नी ने भारत के साथ व्यापार वार्ता में हो रही प्रगति का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंध लोगों के बीच संपर्क, सुरक्षा और व्यापार सहित कई क्षेत्रों में महत्वपूर्ण हैं।
कार्नी के मुताबिक प्रस्तावित व्यापार समझौते में वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार, निवेश तथा आर्थिक सहयोग के अन्य क्षेत्र शामिल किए जा सकते हैं। कनाडा अमेरिका से आगे अपने निर्यात बाजारों में विविधता लाने की रणनीति पर काम कर रहा है और भारत को इस दिशा में एक महत्वपूर्ण बाजार के रूप में देख रहा है।
30.4 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार
कनाडा सरकार के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में भारत और कनाडा के बीच वस्तुओं एवं सेवाओं का कुल द्विपक्षीय व्यापार करीब 30.4 अरब डॉलर रहा। इसमें वस्तुओं का व्यापार 13.6 अरब डॉलर का था। कनाडा ने भारत को करीब 3.9 अरब डॉलर का माल निर्यात किया, जबकि भारत से उसका आयात लगभग 9.7 अरब डॉलर रहा।
कनाडा ने वर्ष 2030 तक भारत के साथ सालाना द्विपक्षीय व्यापार को दोगुने से अधिक बढ़ाकर करीब 70 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। भारत की ओर से भी कनाडा को ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिजों और निवेश के लिहाज से अहम साझेदार के रूप में देखा जा रहा है।
ऊर्जा, यूरेनियम और तकनीक पर सहयोग
मार्च में मार्क कार्नी की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, प्रतिभा और रक्षा जैसे क्षेत्रों में कई पहलों पर सहमति जताई थी।
इसी दौरान सस्केचेवान स्थित कंपनी कैमेको और भारत के परमाणु ऊर्जा विभाग के बीच करीब 2.6 अरब डॉलर के दीर्घकालिक यूरेनियम आपूर्ति समझौते की घोषणा भी हुई थी। इससे दोनों देशों के बीच रणनीतिक और ऊर्जा सहयोग के विस्तार का संकेत मिला।
निज्जर विवाद के बाद रिश्तों में बदलाव
भारत-कनाडा संबंधों में वर्ष 2023 में उस समय बड़ा तनाव पैदा हुआ था, जब कनाडा के तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने ब्रिटिश कोलंबिया में खालिस्तानी अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारतीय एजेंटों की संभावित संलिप्तता का आरोप लगाया था। भारत ने इन आरोपों को खारिज किया था।
इस विवाद का असर दोनों देशों के राजनयिक संबंधों के साथ-साथ व्यापार और अन्य सहयोग पर भी पड़ा। हालांकि, मार्क कार्नी के प्रधानमंत्री बनने के बाद कनाडा ने भारत के साथ संबंधों को फिर से मजबूत करने और आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया है।
मार्च में कार्नी की भारत यात्रा वर्ष 2018 के बाद किसी कनाडाई प्रधानमंत्री की पहली द्विपक्षीय यात्रा थी। इसके बाद जून में फ्रांस में जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान मोदी और कार्नी की मुलाकात हुई। दोनों नेताओं ने ऊर्जा, आपूर्ति शृंखला और आर्थिक सहयोग में हुई प्रगति पर चर्चा की। साथ ही रक्षा, सुरक्षा, कानून प्रवर्तन और अन्य संवेदनशील मुद्दों पर संवाद जारी रखने पर सहमति जताई गई।
दिसंबर में प्रस्तावित मोदी की कनाडा यात्रा होती है तो इसे दोनों देशों के बीच व्यापारिक और राजनयिक संबंधों को आगे बढ़ाने के प्रयासों के अगले महत्वपूर्ण चरण के रूप में देखा जाएगा।
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