📌 13 फरवरी को हुए प्रमुख निधन: इतिहास में दर्ज महान व्यक्तित्वों को श्रद्धांजलि
13 फरवरी भारतीय और विश्व इतिहास में एक ऐसा दिन है, जब विभिन्न क्षेत्रों में अमूल्य योगदान देने वाले कई महान व्यक्तित्वों का निधन हुआ। साहित्य, संगीत, खेल, पर्यावरण, कला और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े इन लोगों ने अपने-अपने क्षेत्र में अमिट छाप छोड़ी। आज के इस लेख में 13 फरवरी को हुए प्रमुख निधन के बारे में विस्तृत और प्रमाणिक जानकारी प्रस्तुत की जा रही है।
🕯️ 13 फरवरी को हुए प्रमुख निधन – विस्तृत विवरण
दत्ताजी राव गायकवाड़ (2024)
भारतीय क्रिकेट के पूर्व दिग्गज खिलाड़ी दत्ताजी राव गायकवाड़ ने देश के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रिकेट खेला। वे तकनीकी रूप से सशक्त बल्लेबाज माने जाते थे और भारतीय क्रिकेट के विकास में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा।
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डॉ. राजेन्द्र कुमार पचौरी (2020)
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध पर्यावरणविद डॉ. पचौरी जलवायु परिवर्तन पर वैश्विक बहस का प्रमुख चेहरा रहे। वे IPCC के अध्यक्ष भी रहे और पर्यावरण संरक्षण के लिए आजीवन कार्य किया।
ओ. एन. वी. कुरुप (2016)
मलयालम साहित्य के महान कवि और गीतकार ओ. एन. वी. कुरुप की रचनाएं मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक यथार्थ को गहराई से दर्शाती हैं। उन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।
डॉ. तुलसीराम (2015)
दलित साहित्य को नई दिशा देने वाले डॉ. तुलसीराम अपने आत्मकथात्मक लेखन के लिए प्रसिद्ध थे। उनकी रचनाओं ने सामाजिक असमानता पर गहन विमर्श को जन्म दिया।
अख़लाक़ मुहम्मद ख़ान ‘शहरयार’ (2012)
उर्दू के मशहूर शायर शहरयार की ग़ज़लों और नज़्मों में प्रेम, दर्शन और जीवन का गहरा अनुभव झलकता है। फ़िल्मी गीतों के माध्यम से भी उन्होंने विशेष पहचान बनाई।
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राजेंद्र नाथ (2008)
हिंदी सिनेमा के लोकप्रिय हास्य कलाकार राजेंद्र नाथ ने कई दशकों तक दर्शकों को हँसाया। उनकी सहज कॉमिक टाइमिंग उन्हें विशिष्ट बनाती थी।
उस्ताद अमीर ख़ाँ (1974)
हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के महान गायक उस्ताद अमीर ख़ाँ ने इंदौर घराने को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया। उनकी गायकी आज भी संगीत प्रेमियों के लिए प्रेरणा है।
असित कुमार हाल्दार (1964)
प्रसिद्ध आधुनिक चित्रकार असित कुमार हाल्दार ने भारतीय कला को वैश्विक पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई। उनकी चित्रकला में भावनात्मक गहराई दिखाई देती है।
सर सुंदर लाल (1918)
प्रसिद्ध विधिवेत्ता और सार्वजनिक कार्यकर्ता सर सुंदर लाल सामाजिक सुधार और शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय रहे।
बुधु भगत (1832)
लरका विद्रोह के प्रमुख नेता बुधु भगत ने आदिवासी अधिकारों के लिए संघर्ष किया और ब्रिटिश शासन के विरुद्ध क्रांतिकारी आंदोलन का नेतृत्व किया।
📚 13 फरवरी का इतिहास क्यों है महत्वपूर्ण?
13 फरवरी को हुए निधन हमें यह याद दिलाते हैं कि समाज, संस्कृति और राष्ट्र निर्माण में इन विभूतियों का योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। यह दिन नई पीढ़ी को प्रेरणा लेने का अवसर भी प्रदान करता है।
⚠️ अस्वीकरण (Disclaimer)
प्रस्तुत जानकारी विभिन्न ऐतिहासिक स्रोतों एवं गहन छानबीन के आधार पर तैयार की गई है। फिर भी किसी भी प्रकार की त्रुटि के लिए हम पूर्णतः जिम्मेदार नहीं हैं। हम किसी भी प्रकार के 100 प्रतिशत प्रमाणित दावे का समर्थन नहीं करते।
