मझवलिया गांव मे चल रहा श्रीमद्भागवत कथा प्रवचन
भटनी/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। जीव भव रूपी अटवीं अर्थात जंगल में मच्छर की भांति फंसा हुआ है इससे बाहर निकालने के लिए भगवान का आश्रय ग्रहण करना ही पड़ता है। उक्त बातें क्षेत्र के मझवलिया ग्राम में चल रहें श्रीमद् भागवत महापुराण कथा में सोमवार को आचार्य मनमोहन मिश्र ने कही। उन्होंने कहा अजामिल ने अपने बेटे का नाम ऋषियों के कहने पर नारायण रख दिया, केवल पुत्र का नाम नारायण रखने से पुत्र के ही बहाने नित्य नारायण का नाम उच्चारण करता रहता था जिससे उसकी मुक्ति हो गई। भक्त राज प्रह्लाद ने भगवान का ही आश्रय ग्रहण किया जिसके फलस्वरूप उसका पिता बार-बार अपने पुत्र को मारने का प्रयास करता रहता था परंतु भगवान का आश्रय ग्रहण करने से अंत में खंभे को फाड़कर के नर और सिंह के रूप में स्वयं भगवान प्रकट होकर हिरण्यकशिपु का संहार किया तथा अपने भक्त प्रहलाद की रक्षा किया। भक्त राज प्रहलाद के पौत्र राजा बलि ने जब देवराज इंद्र से उनका स्वर्ग छीन लिया तब भगवान श्री हरि के कहने पर देवराज इंद्र ने दैत्यों और देवताओं की सहायता से समुद्र मंथन किया उस समुद्र से चौदह रत्न निकले।रामावतार की कथा का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि “रामों विग्रहवान् धर्म”भगवान राम ही साक्षात धर्म है। अतः धर्म की स्थापना के लिए साधु पुरुषों की रक्षा के लिए और दुष्टों के संहार करने के लिए भगवान का अवतार होता है। इस दौरान डां सर्वानन्द तिवारी चंद्रमणि तिवारी, वासुदेव तिवारी, धर्मेंद्र तिवारी, सूरज पांडेय , अर्जुन मिश्र ,अरूण मिश्र ,उमाशंकर मिश्र अशोक मिश्र , आदि मौजूद रहे।
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