संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। शक्ति की आराधना का महापर्व शारदीय नवरात्रि सोमवार से आरंभ हाे गया है। मंदिरों के साथ घर-घर में घट स्थापना के साथ प्रथम दिन मां शैलपुत्री की आराधना की गई। कष्टों को हरने वाली मां दुर्गा की पूजा प्रत्येक दिन मां भगवती के नौ स्वरुपों शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री के रुप में जाती है।
बैल पर सवार मां शैलपुत्री की पूजा प्रथम दिन की जाती है। माता दाहिने हाथ में त्रिशूल धारण कर शत्रुओं का नाश करती हैं। अपने कष्टों को दूर करने के लिए नौ दिन तक भक्त आराधना में डूबे रहेंगे।
देवी पुराण के अनुसार मां भगवती की पूजा-अर्चना करते समय सर्वप्रथम कलश व घट की स्थापना करें। धर्मशास्त्रों के अनुसार कलश को सुख-समृद्धि, वैभव और मंगल कामनाओं का प्रतीक माना गया है। कलश के मुख में विष्णुजी का निवास, कंठ में रुद्र, मूल में ब्रह्मा जी स्थित हैं और कलश के मध्य में दैवीय मातृशक्तियां निवास करती हैं।
इस दौरान मंदिरों में भी माँ के भक्तों की भीड़ देखी गई। पूरे दिन मां के जयकारों से घर और मंदिर गूंजते रहे।श्रद्धालु घरों और मंदिरों में कलश स्थापना कर देवी मां की पूजा में तल्लीन हैं।
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