विकसित भारत–रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा

125 दिनों की रोजगार गारंटी, पारदर्शी भुगतान और टिकाऊ विकास पर केंद्रित ऐतिहासिक पहल

कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा)। ग्रामीण भारत को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित विकसित भारत–रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) को एक दूरदर्शी और युगांतकारी कदम बताया गया है। जनपद कुशीनगर के प्रभारी मंत्री एवं उत्तर प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) उद्यान, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार एवं कृषि निर्यात दिनेश प्रताप सिंह ने इसे मनरेगा से आगे बढ़कर ग्रामीण आजीविका को स्थायी आधार देने वाला कानून करार दिया।
प्रेसवार्ता के दौरान मंत्री ने कहा कि यह नया मिशन ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, आय सुरक्षा और टिकाऊ परिसंपत्तियों के निर्माण को एक साथ मजबूती देगा। इस विधेयक के अंतर्गत 18 वर्ष से अधिक आयु के इच्छुक ग्रामीण नागरिकों को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी दी जाएगी, जो वर्तमान मनरेगा की 100 दिनों की सीमा से कहीं अधिक है। इससे ग्रामीण परिवारों की वार्षिक आय में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है।

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उन्होंने बताया कि विकसित भारत–रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन के तहत कार्यों को चार प्रमुख श्रेणियों—जल सुरक्षा, ग्रामीण अवसंरचना, आजीविका आधारित कार्य और जलवायु परिवर्तन से निपटने वाले कार्यों—में विभाजित किया गया है। प्रत्येक ग्राम पंचायत को ग्राम पंचायत विकास योजना तैयार करना अनिवार्य होगा, जिसे पीएम गति शक्ति जैसी राष्ट्रीय डिजिटल प्रणालियों से जोड़ा जाएगा, ताकि योजनाओं का बेहतर समन्वय और निगरानी सुनिश्चित हो सके।
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि मजदूरी भुगतान पूरी तरह डिजिटल होगा। आधार और बायोमेट्रिक सत्यापन के माध्यम से मजदूरी सीधे श्रमिकों के बैंक खातों में भेजी जाएगी, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगेगा। निर्धारित समय में रोजगार उपलब्ध न होने की स्थिति में बेरोजगारी भत्ता देना भी कानूनन अनिवार्य होगा।
वित्तीय व्यवस्था पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि सामान्य राज्यों के लिए केंद्र और राज्य के बीच व्यय अनुपात 60:40 रहेगा, जबकि उत्तर-पूर्वी एवं हिमालयी राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। आपदा की स्थिति में अतिरिक्त केंद्रीय सहायता का भी प्रावधान होगा, जिससे राज्यों पर अनावश्यक वित्तीय दबाव नहीं पड़ेगा।

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प्रेसवार्ता के अंत में प्रभारी मंत्री ने कहा कि विकसित भारत–रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन गांव, किसान और श्रमिक—तीनों के हितों का संतुलन बनाते हुए ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर, सशक्त और टिकाऊ विकास की ओर ले जाने वाला मजबूत आधार बनेगा।

Editor CP pandey

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