Wednesday, January 28, 2026
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मतदान से ही सशक्त होगा लोकतंत्र: प्रो. पूनम टंडन

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। राष्ट्रीय सेवा योजना, दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर द्वारा राष्ट्रीय मतदाता दिवस के अवसर पर जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से दो सत्रों में विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करना तथा नागरिकों को मतदान के प्रति प्रेरित करना रहा।
प्रथम सत्र में विश्वविद्यालय परिसर स्थित स्वामी विवेकानन्द योग वाटिका में मतदान शपथग्रहण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता, विभागाध्यक्ष, शिक्षकगण, अधिकारी, कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवक एवं स्वयंसेविकाएं उपस्थित रहीं। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. पूनम टंडन का स्वागत राष्ट्रीय सेवा योजना के समन्वयक डॉ. सत्यपाल सिंह, अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. संदीप दीक्षित, वित्त अधिकारी जय मंगल राव एवं कुल सचिव धीरेन्द्र श्रीवास्तव द्वारा रोज स्टिक भेंट कर किया गया। इसके पश्चात सभी अतिथियों ने स्वामी विवेकानन्द की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित की।
मुख्य अतिथि प्रो. पूनम टंडन ने “मतदान से लोकतंत्र को मजबूती” विषय पर अपने संबोधन में कहा कि प्रत्येक नागरिक का मतदान लोकतंत्र की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि जागरूक एवं सक्रिय मतदाता ही मजबूत लोकतंत्र का निर्माण करता है और इसी के बल पर भारत विकसित राष्ट्रों की श्रेणी में अग्रसर होगा। उद्बोधन के उपरांत कुलपति ने उपस्थित सभी लोगों को निर्भीक, निष्पक्ष एवं जिम्मेदार नागरिक के रूप में मतदान करने की शपथ दिलाई।
कार्यक्रम के पश्चात कार्यक्रम अधिकारी डॉ. श्रीप्रकाश सिंह द्वारा सभी आगंतुकों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
इस अवसर पर प्रो. करूणाकर राम त्रिपाठी, प्रो. आलोक गोयल, डॉ. आलोक कुमार, डॉ. कुसुम रावत, डॉ. स्मृति मल्ल, डॉ. नुपुर सिंह, डॉ. दीपक सिंह, बालेन्द्र यादव, विनीत सिंह, राजेन्द्र मौर्य सहित अनेक शिक्षक, अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में राष्ट्रीय सेवा योजना कार्यालय में ‘माई इंडिया, माई वोट’ विषय पर निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें लगभग 73 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। प्रतिभागियों ने अपने निबंधों के माध्यम से मतदान के महत्व, लोकतांत्रिक मूल्यों तथा राष्ट्र निर्माण में नागरिकों की भूमिका पर अपने विचार प्रस्तुत किए।

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