Friday, February 6, 2026
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29 दिसंबर: इतिहास के पन्नों में अमर वे नाम

29 दिसंबर: इतिहास के पन्नों में अमर वे नाम, जिनके जन्म ने भारत और विश्व को दिशा दी

29 दिसंबर केवल एक तारीख नहीं, बल्कि यह उन महान व्यक्तित्वों की जन्मतिथि है, जिनकी प्रतिभा, विचार और कर्मों ने समाज, साहित्य, सिनेमा, राजनीति और संस्कृति को नई पहचान दी। इस दिन जन्मे लोग अपने-अपने क्षेत्र में युगद्रष्टा सिद्ध हुए। आइए इतिहास के इन महत्वपूर्ण जन्मदिनों पर विस्तार से प्रकाश डालते हैं—

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सुधीश पचौरी (जन्म: 29 दिसंबर 1948)
जन्म स्थान: उत्तर प्रदेश, भारत
सुधीश पचौरी हिन्दी साहित्य के प्रख्यात आलोचक, वरिष्ठ मीडिया समीक्षक, स्तंभकार और सांस्कृतिक विश्लेषक रहे। उन्होंने उत्तर आधुनिक विमर्श, मीडिया अध्ययन और समकालीन साहित्यिक आलोचना को नई दृष्टि दी। पत्रकारिता और अकादमिक जगत में उनकी पहचान निर्भीक विश्लेषण और तार्किक लेखन के लिए रही।
पचौरी जी ने साहित्य को केवल भावनाओं तक सीमित न रखकर सामाजिक, राजनीतिक और मीडिया संरचनाओं से जोड़ा। उनके लेख विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रमों का हिस्सा बने। भारत में मीडिया आलोचना को गंभीर वैचारिक आधार देने में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

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वीरेन्द्र वीर विक्रम शाह (जन्म: 29 दिसंबर 1944)
जन्म स्थान: काठमांडू, नेपाल
वीरेन्द्र वीर विक्रम शाह नेपाल के राजा और दक्षिण एशिया के प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। उनके शासनकाल में नेपाल ने संवैधानिक राजतंत्र की दिशा में कदम बढ़ाया। उन्होंने लोकतांत्रिक सुधारों, सामाजिक संतुलन और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को मजबूत करने का प्रयास किया।
राजा वीरेन्द्र को एक सौम्य, दूरदर्शी और शांति प्रिय शासक के रूप में याद किया जाता है। भारत-नेपाल संबंधों को मजबूत बनाने में भी उनकी भूमिका रही। दक्षिण एशियाई राजनीति में उनका योगदान आज भी ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

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राजेश खन्ना (जन्म: 29 दिसंबर 1942)
जन्म स्थान: अमृतसर, पंजाब, भारत
राजेश खन्ना हिन्दी सिनेमा के पहले “सुपरस्टार” कहलाए। उन्होंने फिल्म उद्योग में लोकप्रियता की परिभाषा ही बदल दी। आराधना, आनंद, कटी पतंग, अमर प्रेम जैसी फिल्मों ने उन्हें जनमानस का चहेता बना दिया।
उनकी अभिनय शैली, संवाद अदायगी और भावनात्मक अभिव्यक्ति ने करोड़ों दर्शकों के दिलों पर अमिट छाप छोड़ी। सामाजिक विषयों को फिल्मों के माध्यम से आम जनता तक पहुँचाने में उनका बड़ा योगदान रहा। भारतीय सिनेमा के इतिहास में उनका नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है।

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रामानन्द सागर (जन्म: 29 दिसंबर 1917)
जन्म स्थान: लाहौर (तत्कालीन भारत, अब पाकिस्तान)
रामानन्द सागर भारतीय सिनेमा और टेलीविजन के महान निर्माता-निर्देशक थे। उन्हें विशेष रूप से ऐतिहासिक धारावाहिक रामायण के लिए जाना जाता है, जिसने भारतीय टेलीविजन की दिशा बदल दी।
उनके कार्य ने धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों को जन-जन तक पहुँचाया। रामायण केवल एक धारावाहिक नहीं, बल्कि भारतीय समाज की भावनात्मक आस्था बन गया। साहित्य, इतिहास और मनोरंजन को जोड़ने में उनका योगदान अद्वितीय रहा।

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कुप्पाली वेंकटप्पा पुटप्पा (कुवेम्पु) (जन्म: 29 दिसंबर 1904)
जन्म स्थान: शिवमोग्गा जिला, कर्नाटक, भारत
कुवेम्पु कन्नड़ साहित्य के महान कवि, लेखक और दार्शनिक थे। उन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्होंने कन्नड़ भाषा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई।
उनकी रचनाओं में मानवतावाद, प्रकृति प्रेम और सामाजिक चेतना स्पष्ट दिखाई देती है। कर्नाटक की सांस्कृतिक आत्मा को शब्द देने वाले कुवेम्पु का योगदान भारतीय साहित्य में अमर है।

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दीनानाथ मंगेशकर (जन्म: 29 दिसंबर 1900)
जन्म स्थान: गोवा, भारत
दीनानाथ मंगेशकर मराठी रंगमंच के प्रसिद्ध अभिनेता, शास्त्रीय गायक और नाट्य संगीतकार थे। वे स्वर कोकिला लता मंगेशकर के पिता थे।
उन्होंने भारतीय संगीत और रंगमंच को समृद्ध किया। नाट्य संगीत को लोकप्रिय बनाने में उनका विशेष योगदान रहा। संगीत परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुँचाने में उनकी भूमिका ऐतिहासिक है।

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डब्ल्यू. सी. बनर्जी (जन्म: 29 दिसंबर 1844)
जन्म स्थान: कोलकाता, पश्चिम बंगाल, भारत
डब्ल्यू. सी. बनर्जी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रथम अध्यक्ष थे। वे एक प्रतिष्ठित वकील और स्वतंत्रता आंदोलन के शुरुआती विचारकों में शामिल थे।
उन्होंने संवैधानिक तरीकों से भारतीयों के अधिकारों की आवाज़ उठाई। भारतीय राजनीति में संगठित राष्ट्रीय चेतना विकसित करने में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है।

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गिरिधर शर्मा चतुर्वेदी (जन्म: 29 दिसंबर 1881)
जन्म स्थान: उत्तर प्रदेश, भारत
गिरिधर शर्मा चतुर्वेदी हिन्दी साहित्य के प्रतिष्ठित लेखक और चिंतक थे। उन्होंने सामाजिक यथार्थ, नैतिक मूल्यों और सांस्कृतिक विषयों पर लेखन किया।
उनकी रचनाएँ साहित्य को समाज से जोड़ने का कार्य करती हैं। हिन्दी गद्य और आलोचना के क्षेत्र में उनका योगदान उल्लेखनीय है।

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