28 दिसंबर का दिन विश्व इतिहास, भारतीय राजनीति, विज्ञान, साहित्य और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। अलग–अलग युगों में इस तिथि ने सत्ता परिवर्तन, वैज्ञानिक प्रयोग, सांस्कृतिक उपलब्धियाँ और त्रासद घटनाएँ देखी हैं। आइए जानते हैं 28 दिसंबर को घटित उन ऐतिहासिक घटनाओं के बारे में, जिन्होंने समय के प्रवाह पर गहरी छाप छोड़ी।
2013 – दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार
28 दिसंबर 2013 को भारतीय राजनीति में एक नया अध्याय जुड़ा, जब आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस के बाहरी समर्थन से दिल्ली में सरकार बनाई। अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में बनी यह सरकार पारंपरिक राजनीति को चुनौती देने वाली मानी गई और भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से उपजे राजनीतिक बदलाव का प्रतीक बनी।
2008 – साहित्यकार प्रो. सुरेश वात्स्यायन का निधन
अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कवि और साहित्यकार प्रो. सुरेश वात्स्यायन का 28 दिसंबर 2008 को निधन हुआ। हिंदी साहित्य में उनके योगदान को विशेष सम्मान प्राप्त है। उनकी रचनाओं में मानवीय संवेदना, दर्शन और सामाजिक यथार्थ का गहन समावेश देखने को मिलता है।
2007 – ईरान के लिए रूस की परमाणु ईंधन खेप
28 दिसंबर 2007 को रूस ने ईरान के बुशेहर परमाणु विद्युत संयंत्र के लिए परमाणु ईंधन की दूसरी खेप भेजी। यह घटना वैश्विक कूटनीति और परमाणु अप्रसार बहस के संदर्भ में बेहद अहम मानी गई, क्योंकि इस पर अमेरिका और पश्चिमी देशों की कड़ी निगाह थी।
2003 – इस्रायल का दूसरा वाणिज्य उपग्रह प्रक्षेपण
इस्रायल ने 28 दिसंबर 2003 को कज़ाकिस्तान के बैकानूर अंतरिक्ष स्टेशन से अपना दूसरा वाणिज्यिक उपग्रह अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया। इस उपलब्धि ने इस्रायल को अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में उभरती शक्ति के रूप में स्थापित किया और उसकी व्यावसायिक अंतरिक्ष क्षमताओं को बल दिया।
2003 – विमानों में स्काई मार्शल की तैनाती का फैसला
इसी वर्ष अमेरिका ने सुरक्षा कारणों से ब्रिटेन के कुछ विमानों में स्काई मार्शल यानी सशस्त्र सुरक्षा कर्मियों की तैनाती का निर्णय लिया। 9/11 के बाद वैश्विक विमानन सुरक्षा को लेकर उठाए गए यह कदम अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा में नए सुरक्षा मानक स्थापित करने वाला साबित हुआ।
2002 – फ़ैशन फ़ोटोग्राफ़र हर्वे रिट्स का निधन
28 दिसंबर 2002 को विश्वप्रसिद्ध फ़ैशन फ़ोटोग्राफ़र हर्वे रिट्स का लॉस एंजेल्स में निधन हुआ। उन्होंने फैशन और सेलिब्रिटी फोटोग्राफी को एक नई कलात्मक पहचान दी। उनके कैमरे से खिंची तस्वीरें आज भी आधुनिक फोटोग्राफी की प्रेरणा मानी जाती हैं।
2000 – वीरता पुरस्कार विजेताओं पर डाक टिकट
भारतीय डाक विभाग ने 28 दिसंबर 2000 को वीरता पुरस्कार विजेताओं के सम्मान में पाँच डाक टिकटों का विशेष सेट जारी किया। इनमें 3 रुपये का सचित्र डाक टिकट भी शामिल था, जो देश के वीर सपूतों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का प्रतीक बना।
1995 – दोनों ध्रुवों पर ध्वज फहराने वाले पहले व्यक्ति
पोलैंड के अन्वेषक मारके कार्मिस्की 28 दिसंबर 1995 को एक ही वर्ष में उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों पर झंडा फहराने वाले विश्व के पहले व्यक्ति बने। यह साहसिक उपलब्धि मानव जिज्ञासा, धैर्य और चरम परिस्थितियों में विजय का उदाहरण मानी जाती है।
1984 – राजीव गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस की जीत
28 दिसंबर 1984 को राजीव गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी ने लोकसभा चुनावों में ऐतिहासिक जीत दर्ज की। यह जीत इंदिरा गांधी की हत्या के बाद सहानुभूति लहर और युवा नेतृत्व की उम्मीदों का परिणाम मानी गई, जिसने भारतीय राजनीति को नई दिशा दी।
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1976 – अमेरिका का नेवादा में परमाणु परीक्षण
अमेरिका ने 28 दिसंबर 1976 को नेवादा में परमाणु परीक्षण किया। शीत युद्ध के दौर में हुए ये परीक्षण सैन्य शक्ति प्रदर्शन का माध्यम थे, लेकिन साथ ही पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर उनके दुष्प्रभावों को लेकर व्यापक आलोचना भी हुई।
1974 – पाकिस्तान में भीषण भूकंप
28 दिसंबर 1974 को पाकिस्तान में 6.3 तीव्रता का भूकंप आया, जिसमें लगभग 5200 लोगों की मृत्यु हुई। यह प्राकृतिक आपदा आपातकालीन प्रबंधन और भूकंपरोधी ढांचे की आवश्यकता को रेखांकित करने वाली घटनाओं में गिनी जाती है।
1966 – चीन का लोप नोर में परमाणु परीक्षण
चीन ने 28 दिसंबर 1966 को लोप नोर क्षेत्र में परमाणु परीक्षण किया। इस परीक्षण ने चीन को विश्व की प्रमुख परमाणु शक्तियों की पंक्ति में स्थापित किया और एशियाई भू-राजनीति में शक्ति संतुलन को प्रभावित किया।
1957 – सोवियत संघ का परमाणु परीक्षण
28 दिसंबर 1957 को सोवियत संघ ने परमाणु परीक्षण कर अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन किया। यह घटना अमेरिका-सोवियत प्रतिद्वंद्विता के चरम शीत युद्ध काल की याद दिलाती है, जब परमाणु हथियार वैश्विक राजनीति का केंद्र बने हुए थे।
1950 – ब्रिटेन का पहला राष्ट्रीय उद्यान
द पीक डिस्ट्रिक्ट को 28 दिसंबर 1950 को ब्रिटेन का पहला राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया। यह निर्णय पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक धरोहरों को संरक्षित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल माना जाता है।
1942 – अटलांटिक पर 100 उड़ानें
रॉबर्ट सुलिवन 28 दिसंबर 1942 को अटलांटिक महासागर के ऊपर सौ बार उड़ान भरने वाले पहले पायलट बने। द्वितीय विश्व युद्ध के दौर में यह उपलब्धि विमानन इतिहास में साहस और तकनीकी दक्षता का प्रतीक बनी।
1928 – भारत की पहली बोलती फ़िल्म
28 दिसंबर 1928 को कोलकाता में पहली बार बोलती फ़िल्म मेलोडी ऑफ लव प्रदर्शित हुई। इसने भारतीय सिनेमा में मूक फिल्मों के युग से सवाक फिल्मों की ओर परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त किया।
1926 – भारत–इंग्लैंड हवाई सेवा की शुरुआत
इंपिरियल एयरवेज ने 28 दिसंबर 1926 को भारत और इंग्लैंड के बीच यात्री और डाक सेवा शुरू की। यह कदम भारत में आधुनिक नागरिक उड्डयन के विकास की आधारशिला माना जाता है।
1908 – इटली के मेसिना में भूकंप
28 दिसंबर 1908 को इटली के मेसिना शहर में आए भीषण भूकंप में हजारों लोग मारे गए। यह यूरोप के इतिहास की सबसे विनाशकारी प्राकृतिक आपदाओं में से एक मानी जाती है।
1906 – इक्वाडोर का उदारवादी संविधान
दक्षिण अमेरिकी देश इक्वाडोर ने 28 दिसंबर 1906 को अपना दूसरा उदारवादी संविधान अंगीकार किया। इसने चर्च और राज्य को अलग करने तथा नागरिक स्वतंत्रताओं को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई।
1896 – ‘वंदे मातरम्’ का प्रथम गायन
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कोलकाता अधिवेशन में 28 दिसंबर 1896 को पहली बार ‘वंदे मातरम्’ गाया गया। यह गीत आगे चलकर स्वतंत्रता आंदोलन का प्रेरक राष्ट्रगीत बन गया।
1885 – कांग्रेस का पहला अधिवेशन
28 दिसंबर 1885 को बंबई में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का पहला अधिवेशन आयोजित हुआ, जिसमें 72 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। यहीं से संगठित भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की औपचारिक शुरुआत मानी जाती है।
1836 – मेक्सिको की स्वतंत्रता को मान्यता
स्पेन ने 28 दिसंबर 1836 को मेक्सिको की स्वतंत्रता को औपचारिक मान्यता दी। यह घटना औपनिवेशिक युग के अंत और नए राष्ट्रों के उदय का प्रतीक थी।
1767 – थाईलैंड में राजा ताकसिन का राज्याभिषेक
किंग ताकसिन 28 दिसंबर 1767 को थाईलैंड के राजा बने और थोनबुरी को राजधानी बनाया। उन्होंने देश को राजनीतिक स्थिरता दी और विदेशी आक्रमणों के बाद राष्ट्र को पुनर्गठित किया।
1668 – संभाजी महाराज की मृत्यु
मराठा शासक शिवाजी महाराज के पुत्र संभाजी की 28 दिसंबर 1668 को मुग़ल शासक औरंगज़ेब की कैद में यातनाओं के कारण मृत्यु हुई। यह घटना मराठा–मुग़ल संघर्ष के इतिहास में एक अत्यंत पीड़ादायक अध्याय है।
