गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के रसायन विभाग के सहायक आचार्य डॉ. सर्वेश कुमार पाण्डेय की शोध परियोजना को उत्तर प्रदेश राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद से 12.26 लाख रुपये की वित्तीय स्वीकृति प्राप्त हुई है।
डॉ. पाण्डेय की परियोजना “ग्रीन सिंथेसिस, ऐंटिट्यूबरकुलर सक्रियता एवं ट्रायाजोल व्युत्पन्नों के मायकोबैक्टीरियल InhA एंजाइम को लक्षित करने वाले आणविक डॉकिंग अध्ययन” पर आधारित है। इस शोध का मुख्य उद्देश्य हरित रसायन के माध्यम से ट्रायाजोल यौगिकों का निर्माण कर क्षयरोग (टीबी) के विरुद्ध उनकी प्रभावशीलता का परीक्षण करना है। साथ ही, इन यौगिकों की मायकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस के InhA एंजाइम से बंधन क्षमता का मॉलिक्यूलर डॉकिंग तकनीक से अध्ययन किया जाएगा। यह प्रयास टीबी की नई दवाओं के विकास में सहायक साबित हो सकता है।
परियोजना में शोध सहायक का पद भी सृजित किया गया है, जिससे अनुसंधान कार्य को और गति मिलेगी। डॉ. पाण्डेय को इससे पहले यूजीसी से स्टार्टअप ग्रांट भी मिल चुका है, जिसे उन्होंने सफलतापूर्वक पूर्ण किया।
इस उपलब्धि पर कुलपति प्रो. पूनम टंडन, विभागाध्यक्ष प्रो. उमेश नाथ त्रिपाठी तथा विश्वविद्यालय परिवार ने डॉ. पाण्डेय और उनकी शोध टीम को शुभकामनाएँ दी है।
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