गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग को भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण से ₹22 लाख रुपये का अनुसंधान अनुदान प्राप्त हुआ है। यह अनुदान पूर्वी उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र की दुर्लभ, स्थानिक और संकटग्रस्त वनस्पतियों के संरक्षण और उनके संभावित औषधीय एवं जैविक उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रदान किया गया है। इस परियोजना की अवधि तीन वर्ष होगी, जिसके दौरान गोरखपुर विश्वविद्यालय के शैक्षिक एवं शोध वनस्पति उद्यान को और अधिक विकसित किया जाएगा। इस परियोजना के तहत वनस्पतियों के बाह्य संरक्षण को मजबूती दी जाएगी, जिससे क्षेत्रीय जैव विविधता को सुरक्षित रखने में सहायता मिलेगी। इस महत्वपूर्ण शोध परियोजना के प्रधान अन्वेषक डॉ. वीरेंद्र कुमार मधुकर और सह-प्रधान अन्वेषक डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि यह अनुदान गोरखपुर एवं आसपास के क्षेत्रों में संकटग्रस्त पौधों के संरक्षण में मील का पत्थर साबित होगा। कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने इस उपलब्धि पर वनस्पति विज्ञान विभाग के वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि यह परियोजना पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता के संरक्षण की दिशा में विश्वविद्यालय के योगदान को और मजबूत करेगी।
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