Wednesday, February 4, 2026
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स्वच्छता कार्यों में करोड़ों की अनियमितता? चनकौली पंचायत पर उठे गंभीर सवाल

चनकौली ग्राम पंचायत में घोटाले का खुलासा: प्रधान पर परिजनों को मजदूर दिखाकर लाखों रुपये की भुगतान बंदरबांट का आरोप

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। ChanKauli Gram Panchayat Ghotala—सिसवा ब्लॉक की ग्राम पंचायत चनकौली में स्वच्छता मद और अन्य निर्माण कार्यों में हुए भुगतानों को लेकर बड़ा भ्रष्टाचार सामने आया है। ई-ग्रामस्वराज पोर्टल पर उपलब्ध भुगतान रिपोर्ट ने पंचायत में हुई अनियमितताओं की परतें खोल दी हैं।

ग्रामीणों द्वारा उठाई गई शिकायतों में आरोप है कि ग्राम प्रधान ने अपने ही परिवार के सदस्यों को मजदूर दिखाकर लाखों रुपये का भुगतान कराया, जबकि जमीनी स्तर पर न तो कोई बड़ा सफाई कार्य दिखा और न ही निर्माण गतिविधियों के प्रमाण मिलते हैं।

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संदिग्ध भुगतान की पोल खोली रिपोर्ट

ई-ग्रामस्वराज पोर्टल की रिपोर्ट के अनुसार, 30 मार्च 2023 को वाउचर संख्या XVFC/2022-23/P/34 के तहत कई छोटे-छोटे भुगतान एक ही दिन में किए गए। इनमें कई भुगतान एक जैसी राशि—जैसे ₹2,982—बार-बार दोहराए गए, जो प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।

इन्हीं भुगतानों में प्रधान की पुत्रवधुएं चंद्रशिला यादव, रंजन यादव, पुत्र राजेश कुमार यादव, तथा सर्वेश यादव के नाम शामिल हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इन्हें महीनों तक सफाई कार्य और निर्माण मजदूरी के नाम पर भुगतान दिखाया गया, जबकि पंचायत में ऐसा कोई कार्य नजर नहीं आया।

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विवाह भवन बाउंड्री वॉल का भी फर्जी भुगतान

रिपोर्ट में 9 दिसंबर 2022 को विवाह भवन बाउंड्री वॉल निर्माण के लिए मजदूरी भुगतान दर्ज है, जिसमें भी प्रधान के परिवार का नाम प्रमुख रूप से शामिल है। ग्रामीण दावा करते हैं कि इस अवधि में न तो कोई कार्यस्थल दिखा और न ही मजदूरी करने वाले श्रमिकों की उपस्थिति का रिकॉर्ड उपलब्ध है।

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अगस्त 2023 के भुगतान भी संदेह के घेरे में

अगस्त 2023 में सफाई कार्य के नाम पर—सर्वेश यादव को ₹10,920,राजेश कुमार यादव को ₹25,760
का भुगतान दर्ज है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में इतनी बड़ी सफाई गतिविधि कभी हुई ही नहीं।

ग्रामीणों ने मांगी उच्चस्तरीय जांच – ग्रामीणों का कहना है कि भुगतान सूची में एक ही परिवार के सदस्यों और समान उपनाम वाले कई लोगों के नाम दर्ज हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि यह पूरा मामला “कागजों पर सफाई” और “जमीन पर अनियमितता” का उदाहरण है।

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उन्होंने जिला प्रशासन से उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा कि यदि निष्पक्ष जांच कराई जाए, तो लाखों रुपये के घोटाले का पर्दाफाश संभव है। ग्रामीणों के अनुसार, यह मामला केवल एक पंचायत तक सीमित नहीं, बल्कि मनरेगा और सफाई मद में व्यापक भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।

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