Wednesday, March 11, 2026
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जनविरोधी नीतियों के खिलाफ भाकपा का वैचारिक संघर्ष तेज

भाकपा जिला काउंसिल की समीक्षा बैठक सम्पन्न, संगठन मजबूती और जनसंघर्ष पर हुआ मंथन


बरहज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)।भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) की जिला काउंसिल की महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक रविवार को बरहज स्थित बाईपास रोड पर काशी नाथ अस्पताल के पास पार्टी के कैंप कार्यालय में सम्पन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता भाकपा के पूर्व जिला सचिव कामरेड चक्रपाणि तिवारी ने की, जबकि संचालन जिला सह-सचिव कामरेड कमलेश चौरसिया द्वारा किया गया।
बैठक में संगठन की वर्तमान स्थिति, सदस्यता अभियान, आगामी पंचायती चुनाव एवं विधानसभा चुनाव की रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई। साथ ही भारत एवं अमेरिका की जनविरोधी नीतियों, बढ़ती आर्थिक असमानता और सामाजिक विभाजन जैसे मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श किया गया।

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चर्चा के दौरान खेत मजदूर यूनियन के राज्य सचिव कामरेड विनोद कुमार सिंह ने कहा कि पार्टी के कार्यकर्ताओं को अपने ऐतिहासिक संघर्षों से प्रेरणा लेते हुए जनता के बीच सक्रिय रूप से जाना होगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार की विभाजनकारी नीतियों से जनता त्रस्त है और आज भी लाल झंडे से उन्हें उम्मीद है। जरूरत है कि भाकपा कार्यकर्ता जनता की पीड़ा को समझते हुए उनके संघर्षों में कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हों।

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भाकपा के जिला सचिव कामरेड अरविंद कुशवाहा ने कहा कि अब समय आ गया है कि पार्टी गांवों की ओर लौटे और अपने वास्तविक वर्ग से सीधा संवाद स्थापित करे। उन्होंने आरोप लगाया कि जातीय राजनीति करने वाली पार्टियों ने मजदूर, किसान और गरीब वर्ग को अपने राजनीतिक लाभ का साधन बना लिया है। भाकपा को यह स्पष्ट करना होगा कि पार्टी ने अतीत में भी जनता की लड़ाई लड़ी है, आज भी लड़ रही है और भविष्य में भी संघर्ष जारी रहेगा।

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पूर्व जिला सचिव कामरेड आनंद प्रकाश चौरसिया ने कहा कि जनता भले ही सरकारी नीतियों से परेशान है, लेकिन कूटनीति और भ्रम के जाल में फंसी हुई है। लोग अपने शोषकों को पहचानने में असमर्थ हैं और अपने सच्चे हितैषियों को समझ नहीं पा रहे हैं।
अध्यक्षीय संबोधन में कामरेड चक्रपाणि तिवारी ने कहा कि मानवता से बड़ा कोई धर्म नहीं होता। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी धर्म या सत्ता की राजनीति के पक्षधर नहीं हैं, बल्कि गरीबों, शोषितों और वंचितों के अधिकारों की लड़ाई को ही सच्चा धर्म मानते हैं। उनके अनुसार, बिना भेदभाव के अन्याय के खिलाफ संघर्ष करना ही कम्युनिस्ट आंदोलन की पहचान है।

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बैठक में प्रस्तुत सभी प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए। इस अवसर पर कमला यादव, रविंद्र कुमार, राम ध्यान प्रधान, काशी यादव, संजय दूबे, पराग कुशवाहा, मनोज गौड़, हरिचरण कुशवाहा सहित अनेक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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