बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। पौष्टिक आहारों में शामिल पारंपरिक सब्जी बाकला (फाबा बीन) अब दिमागी रोगों के इलाज में नई उम्मीद बनकर सामने आई है। वाराणसी के शाहंशाहपुर स्थित भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (IIVR) के वैज्ञानिकों के शोध में यह सामने आया है कि बाकला की सब्जी पार्किंसन जैसी गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी में सहायक साबित हो सकती है।
संस्थान के निदेशक डॉ. राजेश कुमार के अनुसार वैज्ञानिकों ने बाकला की 100 से अधिक प्रजातियों पर अध्ययन किया, जिसके बाद एक उन्नत किस्म ‘काशी संपदा’ विकसित की गई। इस किस्म में एल-डोपा (L-DOPA) नामक प्राकृतिक अमीनो एसिड प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, जो शरीर में जाकर डोपामिन में बदल जाता है।
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डोपामिन मस्तिष्क की कोशिकाओं को सक्रिय रखने में अहम भूमिका निभाता है। पार्किंसन रोग में डोपामिन बनाने वाली कोशिकाएं नष्ट होने लगती हैं, जिससे हाथ-पैर कांपना, संतुलन बिगड़ना और चलने-फिरने में कठिनाई जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं।
IIVR के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. इंदीवर प्रसाद के अनुसार बाकला के दानों में उच्च मात्रा में प्रोटीन, लाइसिन और लेवोडोपा पाया जाता है। अंकुरित बाकला का सेवन, भुने हुए दाने या आटे के रूप में इसका उपयोग पोषण को और अधिक बढ़ा देता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि काशी संपदा किस्म का व्यापक प्रसार न केवल स्वास्थ्य लाभ देगा, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने में भी सहायक होगा।
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