
गोरखपुर/लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त निर्देशों के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों के बाहर लंबे समय से सक्रिय मरीज माफिया और उनके नेटवर्क पर अब प्रशासन शिकंजा कसने जा रहा है।
दरअसल, जिला अस्पताल और बीआरडी मेडिकल कॉलेज के आसपास लगातार अव्यवस्था और मरीजों से लूट-खसोट की शिकायतें सामने आ रही थीं। गंभीर बीमारी या सड़क हादसे जैसी स्थिति में पीड़ितों को गुमराह कर निजी अस्पतालों और फर्जी मेडिकल स्टोर्स तक खींचने वाले माफिया अब नकेल कसने की जद में हैं। ये माफिया न केवल एंबुलेंस ऑपरेटरों से जुड़े हैं, बल्कि कई छोटे-बड़े फर्जी अस्पतालों और मेडिकल स्टोर्स तक इनका नेटवर्क फैला हुआ है।
मुख्यमंत्री ने इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट चेतावनी दी है कि किसी भी कीमत पर मरीजों के शोषण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि माफिया ही नहीं, बल्कि उन्हें संरक्षण देने वाले तत्वों की भी पहचान कर कठोर कार्रवाई की जाए।
प्रशासन ने भी मरीजों की सुरक्षा और पारदर्शी चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए विशेष टीम गठित करने की तैयारी शुरू कर दी है। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त कार्रवाई में अस्पतालों के आसपास सक्रिय दलालों, फर्जी मेडिकल स्टोर्स और संदिग्ध एंबुलेंस संचालकों की लिस्ट बनाई जा रही है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में बड़े स्तर पर छापेमारी और लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई देखने को मिलेगी। इसके साथ ही अस्पतालों के आसपास सीसीटीवी मॉनिटरिंग और सतर्कता बढ़ाई जाएगी, ताकि मरीजों के साथ किसी भी तरह की धोखाधड़ी न हो सके।
सरकार की इस सख्ती से जहां मरीज और उनके परिजन राहत महसूस कर रहे हैं, वहीं लंबे समय से सक्रिय मरीज माफिया और उनके संरक्षक अब दहशत में हैं।