रिहाई के बाद CJP नेताओं का बड़ा हमला! बोले- पुलिस ने किडनैप किया, मोबाइल डेटा से छेड़छाड़ का डर

फोटो X

CJP के तीन नेता रिहा होते ही बरसे, बोले- पुलिस ने किडनैप किया; फोन से छेड़छाड़ की आशंका ने बढ़ाई हलचल

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने पहुंचे कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के तीन नेताओं को रविवार को रिहा कर दिया गया। रिहाई के बाद तीनों नेताओं ने प्रेस क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल उठाए। नेताओं के बयानों के बाद प्रदर्शन के दौरान हुई कार्रवाई और पुलिस की भूमिका को लेकर विवाद और गहरा गया है। सीजेपी नेताओं अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को रविवार को कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया था। इसके बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। रिहाई के बाद आशुतोष रांका और सौरव दास ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए अपने अनुभव साझा किए। वहीं, अभिजीत दीपके अपनी दादी के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए महाराष्ट्र के हिंगोली रवाना हो गए। आशुतोष रांका का आरोप- हिरासत नहीं, हमारे साथ हुआ अपहरण जैसा व्यवहार प्रेस कॉन्फ्रेंस में आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उन्हें हिरासत में नहीं लिया, बल्कि उनके साथ किडनैप किए जाने जैसा व्यवहार किया। उन्होंने पुलिस पर अमानवीय बर्ताव का आरोप लगाते हुए देश में आपातकाल जैसे हालात बनने की बात कही। रांका ने कहा, “जो लड़ाई चुनाव आयोग के खिलाफ थी, जो लड़ाई ज्ञानेश कुमार के खिलाफ थी, वो लड़ाई नरेंद्र मोदी ने अपने खिलाफ कर ली।” उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा, “राजा की जान तोते में है।” उनके इन बयानों ने राजनीतिक टकराव को लेकर नई बहस छेड़ दी है। हालांकि, पुलिस की कार्रवाई को लेकर लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में पूरे मामले में संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आना भी महत्वपूर्ण होगा। सौरव दास का दावा- फोन ले लिए, जब्ती की रसीद तक नहीं दी सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लिए, लेकिन उन्हें फोन जब्त किए जाने से संबंधित कोई रसीद नहीं दी गई। उन्होंने आशंका जताई कि उनके फोन में मौजूद निजी जानकारी के साथ छेड़छाड़ की गई हो सकती है। दास ने कहा कि उन्हें संदेह है कि फोन हैक किए गए हों या उनमें मौजूद डेटा की नकल तैयार की गई हो। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि मोबाइल में कोई दस्तावेज या अन्य सामग्री डाली जा सकती है, जिसे बाद में सबूत के रूप में इस्तेमाल किया जाए। हालांकि, फोन हैक किए जाने, डेटा की नकल बनाने या उसमें सामग्री डाले जाने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल ये आरोप सीजेपी नेताओं की ओर से लगाए गए हैं। प्रदर्शन से उठे कई सवाल, पारदर्शिता की मांग अहम इस घटनाक्रम ने विरोध-प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई, हिरासत की प्रक्रिया और जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की सुरक्षा जैसे सवालों को चर्चा में ला दिया है। लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी, दोनों महत्वपूर्ण हैं। ऐसे मामलों में कार्रवाई की स्पष्ट जानकारी, जब्त सामान का उचित रिकॉर्ड और आरोपों की निष्पक्ष जांच से ही तथ्यों की स्थिति साफ हो सकती है। अब निगाह इस बात पर है कि सीजेपी नेताओं के आरोपों पर दिल्ली पुलिस या संबंधित अधिकारियों की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।

Editor CP pandey

Recent Posts

गोरखपुर: जेल में बंद परवेज परवाज की मौत, योगी आदित्यनाथ के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने से भी आया था चर्चा में

फोटो फाइल परवेज परवाज दुष्कर्म मामले में उम्रकैद, कई मुकदमों से रहा सुर्खियों में; गोरखपुर…

60 minutes ago

चेन्नई मेट्रो को PM मोदी की बड़ी सौगात! CM विजय के साथ किया सफर, 4,900 करोड़ की परियोजना का उद्घाटन

फोटो X चेन्नई में मेट्रो का नया दौर शुरू, जानिए कब से आम यात्रियों को…

1 hour ago

यूपी में भाजपा का बड़ा चुनावी दांव! 124 विधायकों की रिपोर्ट पर मचा हड़कंप, कट सकते हैं कई दिग्गजों के टिकट

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय…

4 hours ago

आधार की एक गलती से अटके 5.16 करोड़ रुपये! शाहजहांपुर के 43 हजार बच्चों को 1,200 रुपये का इंतजार

यूपी के इस जिले में 43 हजार स्कूली बच्चों का पैसा अटका, सर्दी में स्वेटर…

4 hours ago