
शौचालय का गंदा पानी सीधे पोखरी में बहाया जा रहा
समय के पहले उठी अतिक्रमण खाली कराने की आवाज
महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। जहां एक ओर उत्तर प्रदेश सरकार गांवों को स्वच्छ, सुंदर और धार्मिक आयोजनों के अनुकूल बनाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रहा है, वहीं दूसरी ओर महराजगंज जिले के सदर क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत बागापार स्थित जनता जूनियर हाईस्कूल परिसर में स्थित पोखरे की छठ घाट पूरी तरह उपेक्षा, अतिक्रमण और गंदगी का शिकार हो चुका है। इस छठ घाट का धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व वर्षों पुराना है। लेकिन अब यही तालाब नरक घाट में तब्दील हो गया है।अतिक्रमण ने छीन लिया पवित्रता का अधिकार जिसमें
यह छठ घाट जिस पोखरी से जुड़ा हुआ है, उसमें अवैध तरीके से अतिक्रमण कर पक्का मकान और दर्जनों शौचालयों का निर्माण कर लिया गया है। सबसे भयावह स्थिति यह है कि इन शौचालयों का गंदा पानी सीधे पोखरी में बहाया जा रहा है, वो भी बिना किसी टंकी या नाली व्यवस्था के। इस कारण पोखरी का पानी पूरी तरह से बदबूदार हो चुका है। यही नहीं धार्मिक भावना आहत, महिलाएं छठ पूजा से दूरी बना रहीं जो हिंदू धर्म का एक सबसे पवित्र पर्व है। जहां महिलाएं तालाब या नदी के किनारे खड़े होकर सूर्य देव को अर्घ्य देती है। अब उसी पूजा से महिलाएं कट रही हैं। ग्राम पंचायत की माताएं, बहनों का कहना है कि गंदगी, बदबू और पोखरी के आस-पास की अव्यवस्था के कारण वे अब वहां जाकर पूजा नहीं कर पातीं। बात पूजा और आस्था तक सीमित नहीं है बल्कि
यह छठ घाट जनता जूनियर हाईस्कूल परिसर के बगल में स्थित है। इसी कारण स्कूल में पढ़ने वाले छात्र-छात्राएं रोजाना गंदगी, मच्छरों और बदबू से परेशान रहते हैं। यह समस्या न केवल धार्मिक आस्था बल्कि शैक्षिक वातावरण को भी प्रभावित कर रही है।
बताते चलें कि पूर्व प्रधान ने सिर्फ कागजों में लाखों खर्च किये। ग्रामीणों का आरोप है कि इस पोखरी के सौंदर्यीकरण के लिए पूर्व ग्राम प्रधान द्वारा लाखों रुपये की लागत दर्शाई गई थी, लेकिन जमीन पर कोई कार्य नहीं हुआ। सब कुछ सिर्फ कागजों में सिमट कर रह गया। अधिकारियों की चुप्पी और प्रधानों की वोट-बैंक राजनीति ने इसे उपेक्षा का शिकार बना दिया स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि जब इस मुद्दे को अधिकारियों के सामने उठाया गया, तो सभी मौन हो गए। वहीं किसी भी प्रधान ने अतिक्रमण हटाने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया, क्योंकि अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने में वोट बैंक की राजनीति आड़े आती रही। ग्रामीणों की मांग है तत्काल अतिक्रमण मुक्त हो। घाट के निर्माण को लेकर स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि छठ घाट को तत्काल अतिक्रमण मुक्त किया जाए।पोखरी की सफाई व सौंदर्यीकरण कराया जाय शौचालयों से निकलने वाले गंदे पानी की निकासी के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाय, दोषी अधिकारियों और पूर्व प्रधान की भूमिका की जांच कर कार्यवाही की जाए वही छठ पूजा केवल एक पर्व नहीं आस्था का उत्सव है। यदि छठ घाटों को इस तरह उपेक्षित छोड़ दिया गया तो यह केवल आस्था नहीं, संस्कृति की भी हार होगी। प्रशासन को अब जागना होगा। ग्रामीणों में दीपक, राजकुमार,महेश, अरविंद, सुदामा, सुधीर, उपेन्द्र, लीलावती , विमला देवी, मंजू , सोनी, उर्मिला देवी, ममता, संगीता आदि दर्जनों महिलाओं ने समय से पहले अतिक्रमण हटाकर सौंदर्यीकरण की मांग किया है।
इस संबंध मे हल्का लेखपाल सुनिल कुमार यादव ने कहा कि इस मामले में 13 लोगो के नाम मुकदमा दर्ज किया गया है।गन्दे पानी को लेकर एक नोटिस जारी करके कानूनी कार्यवाही किया जायेगा।