Category: लेख

बदलते युग का नया तमाशा संस्कारों की सिसकियाँ

समाज में बदलती नैतिकता, रिश्तों की उलझन और तकनीक के नए असर पर समाज में अब बेटी की निगरानी नहीं, दादी और सास की होती है। तकनीक और आज़ादी के…

भर्ती में समानता की वापसी

सामाजिक-आर्थिक बोनस अंकों पर हाईकोर्ट की सख्ती भारतीय लोकतंत्र का मूल मंत्र है – समान अवसर। लेकिन जब अवसरों की तुलना में विशेष सुविधाएं या बोनस अंक बांटे जाएं, तो…

बड़वा गांव की हवेलियों में इतिहास की गूंज ठाकुरों की गढ़ी से केसर तालाब तक

दक्षिण-पश्चिम हरियाणा की रेतीली धरती पर, जहां धूप की तल्खी रेत के कणों को भी तपाने में सक्षम होती है, वहीं बसा है बड़वा — एक गांव जो आज भी…

हरियाणा के सरकारी स्कूलों में शिक्षा का अंतिम संस्कार

जब पूरी क्लास फेल होती है तो सिस्टम अपराधी होता है हरियाणा के 18 सरकारी स्कूलों में 12वीं का रिजल्ट शून्य प्रतिशत रहा, जो राज्य प्रायोजित शैक्षिक विफलता का संकेत…

घर के भेदी देश की जड़ें खोदते भीतरघाती

देश को बाहर से नहीं, भीतर से खतरा है। जब कोई सुरक्षा गार्ड, छात्र या यूट्यूबर चंद रुपयों या झूठे डिजिटल रिश्तों के लिए दुश्मन का एजेंट बन जाए, तो…

लाभार्थी कौन

आरक्षण पीढ़ीगत विशेषाधिकार या वास्तविक न्याय आरक्षण भारतीय समाज में सदियों से व्याप्त असमानताओं को समाप्त करने और वंचित समुदायों को मुख्यधारा में लाने का एक महत्वपूर्ण साधन है। लेकिन…

गद्दारी का जाल: देश की सुरक्षा पर मंडराता खतरा

भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर के बाद NIA ने देशभर में 25 ISI एजेंटों को गिरफ्तार किया है, जो देश की सुरक्षा पर मंडराते खतरे की गंभीरता को उजागर…

सिन्दूर अब श्रृंगार ही नही शौर्य का प्रतीक

सिन्दूर, जो कभी सिर्फ वैवाहिक प्रेम का प्रतीक था, आज ऑपरेशन सिंदूर की नायिकाओं वियोमिका और सोफिया की साहसिक कहानियों का प्रतीक बन गया है। ये महिलाएं सिर्फ सजी-धजी मूरतें…

दहेज का विरोध पर मालदार की चाहत क्यों?

मालदार दूल्हा ढूंढने वालों, खुद से भी सवाल करो। दहेज़ लेने वालो के मुंह पे थूकने से फुर्सत मिल गई हो तोथोड़ा एकलौता मालदार लड़का ढूंढने वालो के मुंह पे…

लावारिस मिलती नवजात बच्चियाँ: झाड़ियों से जीवन तक

हरियाणा के हिसार जिले के अग्रोहा में सतीश डूडी ने एक नवजात बच्ची को गोद लेकर ममता और इंसानियत की मिसाल पेश की। यह बच्ची जन्म के कुछ घंटों बाद…

ऑपरेशन सिंदूर एक पूर्व-सुनिश्चित नाकामी का रोजनामचा

जैसा कि आसानी से अनुमान लगाया जा सकता था, ऑपरेशन सिंदूर के अचानक पटाक्षेप के बाद, उसे ‘कामयाब’ साबित करने की विभिन्न स्तरों पर कोशिशें शुरू हो गयी हैं। बेशक,…

प्रधानमंत्री बोले तो बोले क्या?-संजय पराते

पहलगाम में आतंकी हमले के बाद पीड़ितों के आंसू पोंछने कश्मीर जाने के बजाए सीधे बिहार के मधुबनी में चुनावी सभा में जाकर आतंकवादियों को अंग्रेजी में ललकारने और उन्हें…

फिर आएगा गौरी इतिहास के पन्नों से वर्तमान तक का सबक

क्या पाकिस्तान के साथ भी हम वही भूल दोहरा रहे हैं? आज़ादी के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ कई बार समझौते और संघर्षविराम की कोशिशें की हैं, लेकिन पाकिस्तान…

माचो राष्ट्रवाद-अरुण माहेश्वरी

सीमा पर जब गोलियाँ चलती हैं, बंकर ध्वस्त होते हैं या कुछ सैनिक शहीद होते हैं, कुछ नागरिकों की भी जानें जाती है तो यह सब सीमा पर होने वाली…

“माँ का आँचल – प्रेम की छाँव, बलिदान का गीत”

माँ केवल जन्म देने वाली नहीं, बल्कि जीवन की पहली गुरु, मार्गदर्शिका और सबसे करीबी मित्र है। उसकी ममता जीवनभर हमें सुरक्षा, सुकून और संस्कार देती है। माँ का आशीर्वाद…