Category: लेख

जब कलम चुप हो जाय लोकतंत्र का शोकगीत

आपातकाल के दौरान अख़बारों ने विरोध में अपना संपादकीय कॉलम ख़ाली छोड़ा था। आज औपचारिक सेंसरशिप नहीं है, लेकिन आत्म-सेन्सरशिप, भय और ‘राष्ट्रभक्ति’ के नाम पर विचारों का गला घोंटा…

दुर्घटना पीड़ितों के लिए “कैशलेस” उपचार नीयत नेक व्यवस्था बेकार

इस देश में जब कोई सड़क पर दुर्घटनाग्रस्त होता है, तो सबसे पहले यह नहीं पूछा जाता कि ज़ख्म कितना गहरा है — पहले यह पूछा जाता है कि “पहचान…

लघुकथा- राधिका

राधिका एक छोटे से गाँव की लड़की थी। शांत स्वभाव, गहरी आँखें, और बहुत ही समझदार। वो ज़्यादा बोलती नहीं थी, उसकी आँखों में कुछ अलग ही चमक थी ,…

पिता का पस्त मन और पुत्रों की पश्चिमी व्यस्तता

एक पिता की विदाई और समाज की परीक्षा लखनऊ के एक रिटायर्ड कर्नल ने अपने बेटों को एक मार्मिक पत्र लिखकर आत्महत्या कर ली। दोनों बेटे अमेरिका में बसे थे…

योग मन की शुद्धि से मोक्ष तक का मार्ग

(राष्ट्र की परम्परा डेस्क) मन ही सब कुछ है – यही योग का मूल मंत्र है। मन की शुद्धि, आत्म-चिंतन और संतुलन से ही जीवन में स्थिरता और शांति आती…

स्वस्थ जीवन का आधार है: “योग”

राष्ट्र की परम्परा 21 जून को संपूर्ण विश्व ग्यारहवें अंतराष्ट्रीय योग दिवस मनाने जा रहा है योग पौराणिक काल से ही भारत राष्ट्र में निरोगी काया का सुखद पर्याय बना…

“हर कॉल पर चेतावनी क्यों? कब तक सुनते रहेंगे अमिताभ बच्चन की आवाज़!”

— प्रियंका सौरभ, स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार, हिसार सरकार चेतावनी दे रही है, लेकिन क्या यह चेतना जगा रही है या मानसिक थकान बढ़ा रही है?हर मोबाइल कॉल पर जब…

विश्वविद्यालय शिक्षा का मंदिर या जाति की प्रयोगशाला?

“हमारी जाति एचएयू: हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में छात्र आंदोलन और जातिगत अन्याय के खिलाफ उठती आवाज” हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (एचएयू), हिसार – देश के प्रतिष्ठित कृषि संस्थानों में गिना जाता…

कोचिंग का क्रेडिट स्कूल की गुमनामी शिक्षकों के साथ यह अन्याय कब तक?

आज कोचिंग संस्थानों को छात्रों की सफलता का सारा श्रेय मिलता है, जबकि वे शिक्षक गुमनाम रह जाते हैं जिन्होंने वर्षों तक नींव रखी। यह संपादकीय उसी विस्मृति की पीड़ा…

इजरायल ईरान सैन्य टकराव खतरनाक मोड़ पर पहुंचा-दुनियाँ दो गुटों में बटनें की ओर बढ़ी- तीसरे विश्व युद्ध की आहट? 

इजरायल-ईरान युद्ध में परमाणु हथियारों की चर्चा पर दुनियाँ सहमीँ इजरायल-ईरान दोनों के पीछे खड़ी ताकतों द्वारा अंधा समर्थन बंद कर,समझौते से युद्ध विराम करना जरूरी, वरना यह आग़ मिडल…

सेना की ताकत और मजबूत कर दो अग्निपथ” योजना को तुरंत दूर कर दो

लेखक-प्रतीक संघवी राजकोट गुजरात यह विचार क्यों आया?आज तक मैने कभी भी सेना और उसके बारे में गहराई से नहीं सोचा था जब भी मैने अपने तहसील की साइट बनाई…

न खर्ची न पर्ची,पूरी पारदर्शिता के साथ बिना रिश्वत व सिफारिश से हुई भर्ती मॉडल को सभी राज्यों ने अपनाना समय की मांग 

48 लाख आवेदनों में से 60244 उम्मीदवारों का योग्यता व कौशलता के बल पर चयन का जबरदस्त आगाज़ मेरे सामने 60244 अभ्यर्थी बैठे हैं,उनके सामने हिम्मत से कह रहा हूं…

मर्जी के बिना भी शादी क्यों कर लेते हैं लोग क्या इसलिए कि सामने वाले की जिंदगी बर्बाद हो जाए?

आलेख बिहार में चारों ओर लालू प्रसाद के बड़े बेटे तेज प्रताप का एक महिला के साथ सम्बन्ध होने की चर्चा चारों ओर फैली है । खुद तेज प्रताप ने…

फेक खबरें और तूटता विश्वासदेश के मीडिया से ऐसी नहीं थी आस

भारत में मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है। विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बाद मीडिया को यह दर्जा इसलिए दिया गया, क्योंकि यह समाज और सत्ता के…