Category: लेख

खतरनाक मौसम में भी स्कूल खुले क्यों?

“बच्चों की सुरक्षा बनाम औपचारिकता का सवाल: जर्जर स्कूल भवन, प्रशासन की संवेदनहीनता और बाढ़-गंदगी के बीच पढ़ाई नहीं, जीवन की रक्षा पहली प्राथमिकता – आपदा में भी आदेशों की…

नो हेलमेट, नो फ्यूल: परिवार की मुस्कान बचाने का अभियान

नवनीत मिश्र प्रदेश में 1 सितम्बर से शुरू हुआ “नो हेलमेट, नो फ्यूल” अभियान केवल एक प्रशासनिक आदेश नहीं है, बल्कि जीवन रक्षा का संकल्प है। नियम सरल है —…

विश्व नारियल दिवस 2 सितंबर 2025- मानव स्वास्थ्य, संस्कृति और वैश्विक समृद्धि का प्रतीक

गणेश पूजा में नारियल अनिवार्य होता है,क्योंकि यह विघ्नहर्ता के आशीर्वाद का प्रतीक है। गोंदिया – वैश्विक स्तरपर प्रकृति ने मानव को अनेक उपहार दिए हैं, जिनमें पेड़-पौधे, फल-फूल और…

विवाह समारोह-पवित्र संस्कार,आधुनिकता का दंश और समाज की चुनौती

शादी समारोहों में शराब, डीजे, नाइट पार्टी और वेस्टर्न कल्चर की नकल आम हो गई है। विवाह एक पवित्र संस्कार, आध्यात्मिक और सामाजिक आयाम हैँ- बढ़ती आधुनिकता का दंश और…

अपनी कमजोरी किसी को न बताएं : चाणक्य नीति आज भी प्रासंगिक

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)।जीवन में उतार-चढ़ाव का सिलसिला चलता रहता है, लेकिन इन परिस्थितियों में अपनी कमजोरी दूसरों के सामने जाहिर करना घातक हो सकता है। शिक्षिका एवं साहित्यकार सीमा…

शिक्षा का बाज़ार और कोचिंग की बढ़ती निर्भरता

जब विद्यालय शिक्षण का केंद्र नहीं रहते, तो शिक्षा व्यापार बन जाती है हर तीसरा स्कूली छात्र प्राइवेट कोचिंग ले रहा है। शहरी परिवार औसतन 3988 रुपये सालाना कोचिंग पर…

शिक्षकों की ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी सुविधा से जंजाल तक की यात्रा

हरियाणा की ट्रांसफर पॉलिसी : सुधार की ज़रूरत या असंतोष का अड्डा सरकार ने पारदर्शिता और न्याय की मंशा से ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी लागू की थी, लेकिन आज यह नीति…

खेल, संस्कृति और स्वास्थ्य: पारंपरिक खेलों की त्रिवेणी

राष्ट्रीय खेल दिवस मेजर ध्यानचंद जयंती पर विशेष नवनीत मिश्र “खेल जीवन का दर्पण हैं।” यह पंक्ति भारत की खेल परंपरा और सांस्कृतिक आत्मा को सटीक रूप से अभिव्यक्त करती…

बच्चों द्वारा भीख मांगना-(एक सामाजिक बुराई)

बलिया(राष्ट्र की परम्परा) यदि कोई भी व्यक्ति किसी किशोर अथवा बच्चे से भीख मंगवाता है अथवा इस उद्देश्य से रोजगार पर रखता है तो उसे 3 वर्ष तक कैद की…

बच्चों द्वारा भीख मांगना-(एक सामाजिक बुराई)

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। यदि कोई भी व्यक्ति किसी किशोर अथवा बच्चे से भीख मंगवाता है अथवा इस उद्देश्य से रोजगार पर रखता है तो उसे 3 वर्ष तक कैद…

नीली जींस में यूजेनिक्स के अवशेष

कल्पना पाण्डेय प्रवासियों के कारण नौकरियाँ खोने का भय है। 2024 की चुनाव प्रचार में रिपब्लिकन पार्टी ने ऐसा दावा किया कि, डेमोक्रेटिक पार्टी प्रवासियों को चुनाव के लिए आयात…

अस्पताल से जिन्दा कैसे लौटे “बीमारी से बड़ी बन चुकी है इलाज की लूट”

आज अस्पताल जीवनदान से ज़्यादा भय और लूट का केंद्र बन गए हैं। नॉर्मल केस को वेंटिलेटर तक पहुँचाना, अनावश्यक टेस्ट कराना और दवा कंपनियों से कमीशन लेना आम हो…

ट्रंप का आर्थिक हथियार “50 पर्सेंट टैरिफ” बनाम मोदी का “प्लान 40”

केंद्र सरकार ने प्रभावित सेक्टरों की पहचान की है व उनके लिए क्रेडिट सपोर्ट, टैक्स रिबेट और एक्सपोर्ट सब्सिडी जैसी राहत योजनाएँ तैयार की जा रही हैं। गोंदिया-वैश्विक व्यापार जगत…

फ़िराक़ गोरखपुरी : उर्दू शायरी के उज्ज्वल ध्रुवतारा

जयंती पर विशेष ✍️ नवनीत मिश्रसंत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। उर्दू साहित्य जगत में फ़िराक़ गोरखपुरी का नाम अदब और शायरी की बुलंदियों का प्रतीक है। उनका असली नाम…

अर्धनग्न मुजरे के दौर में गुम होती साहित्यिक स्त्रियाँ

“सोशल मीडिया की चमक-दमक के शोर में किताबों का स्वर कहीं खो गया है।” इंस्टाग्राम और डिजिटल मीडिया का दौर है। यहाँ आकर्षण और तमाशा सबसे ज्यादा बिकते हैं। लेकिन…