Category: लेख

भारत की शक्ति और हर वैश्विक साझेदारी का भविष्य-लोकतंत्र, जनसांख्यिकी और स्किल्ड वर्कफोर्स का संगम

भारत की शक्ति और वैश्विक परिदृश्य-लोकतंत्र, जनसांख्यिकी और स्किल्ड वर्कफोर्स की ताक़त हैँ गोंदिया-वैश्विक स्तरपर भारत आज केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं है,बल्कि यह विश्व के लिए आशा,स्थिरता और अवसरों…

सड़कें तेज़ी से बन रही हैं, लेकिन सुरक्षा पीछे छूट गई – हर साल लाखों ज़िंदगियाँ दांव पर

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)भारत आज गर्व से दुनिया को बता रहा है कि वह सबसे तेज़ी से सड़कें बनाने वाला देश है। हर महीने हज़ारों किलोमीटर नई सड़कें…

दुनियाँ में आर्थिक स्वार्थ वाली राजनीति का प्रचलन तेजी से बढ़ा- वैश्विक सहयोग की जगह प्रतिस्पर्धा व एकजुट की जगह गुटबाज़ी का माहौल बढ़ा

(राष्ट्र की परम्परा के लिए रिपोर्ट) दुनियाँ में राजनीति व अर्थव्यवस्था का रिश्ता स्वार्थ प्रधान के चरम पर पहुंचा-हर देश अपनी सुरक्षा ऊर्जा व्यापार और तकनीक संप्रभुता को सर्वोपरि रखकर…

छात्र किस दिशा में जा रहे हैं?

“शिक्षा, संस्कार और समाज की जिम्मेदारी : बदलते छात्र-शिक्षक संबंध और सही दिशा की तलाश” आज शिक्षा केवल अंक और नौकरी तक सीमित हो गई है। नैतिक मूल्य और संस्कार…

लघुकथा

अधूरी चिट्ठी गाँव के पुराने बरगद के पेड़ के नीचे एक टूटी-फूटी लकड़ी की चारपाई पड़ी रहती थी। उसी पर रामनाथ बैठा रहता था।उसकी उम्र लगभग लगभग सत्तर बरस थी।…

आज का युवा तकनीकी रूप से आधुनिक है, लेकिन मानसिक स्तरपर अक्सर पश्चिमी संस्कृति से प्रभावित है

(राष्ट्र की परम्परा के लिए एडवोकेट किशन सनमुख दास भावनानी गोंदिया ) जब तक हम युवाओं को अपनी हज़ारों साल पुरानी परंपरा,ज्ञान और संस्कृति को नहीं बताएँगे, हम वैसे ही…

गोंदिया में साईं झूलेलाल व बाबा खाटू श्याम का अद्भुत मिलन, सामाजिक समरसता की मिसाल

गोंदिया।(राष्ट्र की परम्परा)झूलेलाल मंदिर, गोंदिया में साईं झूलेलाल चालीसा महोत्सव (16 जुलाई–25 अगस्त) के अंतर्गत बाबा श्याम खाटूजी भजन समिति द्वारा भव्य भजन-कीर्तन संध्या आयोजित की गई। इस अवसर पर…

प्लास्टिक – अमर ज़हर

मनुष्य ने जब आग और पहिए की खोज की, वह सभ्यता की शुरुआत थी। जब उसने विज्ञान से दोस्ती की, उसने चमत्कार रचे। लेकिन इस चमत्कारों की अंधी दौड़ में…

न्याय की देरी व्यवस्था पर सवाल

“सीबीआई जांच भी इंसाफ़ की गारंटी नहीं, सालों से पेंडिंग हैं मामले” भिवानी की शिक्षिका मनीषा हत्याकांड को सीबीआई जांच के लिए भेजा गया है। लेकिन प्रदेश में पहले से…

संसद या हंगामे का अखाड़ा? लोकतंत्र के भविष्य पर गंभीर सवाल

(राष्ट्र की परम्परा के लिए गणेश दत्त द्विवेदी की रिपोर्ट) लोकतंत्र की सबसे बड़ी पहचान उसकी संसद होती है। संसद केवल कानून बनाने का मंच नहीं बल्कि वह पवित्र स्थान…

पीएम विकसित भारत रोजगार योजना : पहली नौकरी पर युवाओं को 15 हजार, कंपनियों को 3 हजार का लाभ

(दिलीप कुमार पाण्डेय) नई दिल्ली(राष्ट्र की परम्परा डेस्क) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त 2025) को लालकिले के प्राचीर से देश के युवाओं और उद्योग जगत को बड़ी…

झूठे मुकदमों का कारोबार और वकीलों की जवाबदेही

“जब न्याय के प्रहरी ही अपराधी बन जाएँ, तो कानून की आस्था कैसे बचे?” झूठे मुकदमे केवल निर्दोषों को पीड़ा नहीं देते, बल्कि न्याय तंत्र की नींव को भी हिला…

भारत की नीली अर्थव्यवस्था- मानसून सत्र में बने पांच नए समुद्री कानून समुद्री क्रांति है,जो विज़न 2047 आत्मनिर्भर भारत में ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होंगे

पांच नए समुद्री कानून भारत के विज़न आत्मनिर्भर भारत 2047 में विकसित राष्ट्र और वैश्विक समुद्री महाशक्ति बनाने में अहम रोल अदा करेंगे गोंदिया – भारत को प्राचीन काल से…

अभय मुद्रा और बिहार का रण: राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा से सियासत की नई पटकथा

(राजकुमार मणि) “मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंज़िल मगर, लोग साथ आते गए और कारवाँ बनता गया” – मजरूह सुल्तानपुरी की ये पंक्तियाँ मौजूदा भारतीय राजनीति की सियासी यात्रा संस्कृति…

चुटकी भर सिंदूर का महत्व

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। विवाहित महिलाओं द्वारा मांग में सिंदूर लगाने से नकारात्मक शक्तियां नजदीक नहीं आने पाती तथा सौंदर्य में वृद्धि होती है। पौराणिक कथाओं में लाल रंग के…