Category: लेख

बच्चों द्वारा भीख मांगना-(एक सामाजिक बुराई)

बलिया(राष्ट्र की परम्परा) यदि कोई भी व्यक्ति किसी किशोर अथवा बच्चे से भीख मंगवाता है अथवा इस उद्देश्य से रोजगार पर रखता है तो उसे 3 वर्ष तक कैद की…

बच्चों द्वारा भीख मांगना-(एक सामाजिक बुराई)

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। यदि कोई भी व्यक्ति किसी किशोर अथवा बच्चे से भीख मंगवाता है अथवा इस उद्देश्य से रोजगार पर रखता है तो उसे 3 वर्ष तक कैद…

नीली जींस में यूजेनिक्स के अवशेष

कल्पना पाण्डेय प्रवासियों के कारण नौकरियाँ खोने का भय है। 2024 की चुनाव प्रचार में रिपब्लिकन पार्टी ने ऐसा दावा किया कि, डेमोक्रेटिक पार्टी प्रवासियों को चुनाव के लिए आयात…

अस्पताल से जिन्दा कैसे लौटे “बीमारी से बड़ी बन चुकी है इलाज की लूट”

आज अस्पताल जीवनदान से ज़्यादा भय और लूट का केंद्र बन गए हैं। नॉर्मल केस को वेंटिलेटर तक पहुँचाना, अनावश्यक टेस्ट कराना और दवा कंपनियों से कमीशन लेना आम हो…

ट्रंप का आर्थिक हथियार “50 पर्सेंट टैरिफ” बनाम मोदी का “प्लान 40”

केंद्र सरकार ने प्रभावित सेक्टरों की पहचान की है व उनके लिए क्रेडिट सपोर्ट, टैक्स रिबेट और एक्सपोर्ट सब्सिडी जैसी राहत योजनाएँ तैयार की जा रही हैं। गोंदिया-वैश्विक व्यापार जगत…

फ़िराक़ गोरखपुरी : उर्दू शायरी के उज्ज्वल ध्रुवतारा

जयंती पर विशेष ✍️ नवनीत मिश्रसंत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। उर्दू साहित्य जगत में फ़िराक़ गोरखपुरी का नाम अदब और शायरी की बुलंदियों का प्रतीक है। उनका असली नाम…

अर्धनग्न मुजरे के दौर में गुम होती साहित्यिक स्त्रियाँ

“सोशल मीडिया की चमक-दमक के शोर में किताबों का स्वर कहीं खो गया है।” इंस्टाग्राम और डिजिटल मीडिया का दौर है। यहाँ आकर्षण और तमाशा सबसे ज्यादा बिकते हैं। लेकिन…

भारत की शक्ति और हर वैश्विक साझेदारी का भविष्य-लोकतंत्र, जनसांख्यिकी और स्किल्ड वर्कफोर्स का संगम

भारत की शक्ति और वैश्विक परिदृश्य-लोकतंत्र, जनसांख्यिकी और स्किल्ड वर्कफोर्स की ताक़त हैँ गोंदिया-वैश्विक स्तरपर भारत आज केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं है,बल्कि यह विश्व के लिए आशा,स्थिरता और अवसरों…

सड़कें तेज़ी से बन रही हैं, लेकिन सुरक्षा पीछे छूट गई – हर साल लाखों ज़िंदगियाँ दांव पर

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)भारत आज गर्व से दुनिया को बता रहा है कि वह सबसे तेज़ी से सड़कें बनाने वाला देश है। हर महीने हज़ारों किलोमीटर नई सड़कें…

दुनियाँ में आर्थिक स्वार्थ वाली राजनीति का प्रचलन तेजी से बढ़ा- वैश्विक सहयोग की जगह प्रतिस्पर्धा व एकजुट की जगह गुटबाज़ी का माहौल बढ़ा

(राष्ट्र की परम्परा के लिए रिपोर्ट) दुनियाँ में राजनीति व अर्थव्यवस्था का रिश्ता स्वार्थ प्रधान के चरम पर पहुंचा-हर देश अपनी सुरक्षा ऊर्जा व्यापार और तकनीक संप्रभुता को सर्वोपरि रखकर…

छात्र किस दिशा में जा रहे हैं?

“शिक्षा, संस्कार और समाज की जिम्मेदारी : बदलते छात्र-शिक्षक संबंध और सही दिशा की तलाश” आज शिक्षा केवल अंक और नौकरी तक सीमित हो गई है। नैतिक मूल्य और संस्कार…

लघुकथा

अधूरी चिट्ठी गाँव के पुराने बरगद के पेड़ के नीचे एक टूटी-फूटी लकड़ी की चारपाई पड़ी रहती थी। उसी पर रामनाथ बैठा रहता था।उसकी उम्र लगभग लगभग सत्तर बरस थी।…

आज का युवा तकनीकी रूप से आधुनिक है, लेकिन मानसिक स्तरपर अक्सर पश्चिमी संस्कृति से प्रभावित है

(राष्ट्र की परम्परा के लिए एडवोकेट किशन सनमुख दास भावनानी गोंदिया ) जब तक हम युवाओं को अपनी हज़ारों साल पुरानी परंपरा,ज्ञान और संस्कृति को नहीं बताएँगे, हम वैसे ही…

गोंदिया में साईं झूलेलाल व बाबा खाटू श्याम का अद्भुत मिलन, सामाजिक समरसता की मिसाल

गोंदिया।(राष्ट्र की परम्परा)झूलेलाल मंदिर, गोंदिया में साईं झूलेलाल चालीसा महोत्सव (16 जुलाई–25 अगस्त) के अंतर्गत बाबा श्याम खाटूजी भजन समिति द्वारा भव्य भजन-कीर्तन संध्या आयोजित की गई। इस अवसर पर…

प्लास्टिक – अमर ज़हर

मनुष्य ने जब आग और पहिए की खोज की, वह सभ्यता की शुरुआत थी। जब उसने विज्ञान से दोस्ती की, उसने चमत्कार रचे। लेकिन इस चमत्कारों की अंधी दौड़ में…