कविता

बचपन का गाँव

हिसार(राष्ट्र की परम्परा)ठण्डी-ठण्डी छांव मेंउस बचपन के गाँव मेंमैं-जाना चाहती हूँ।तोडऩा चाहती हूँबंदिश चारों पहर की।नफरत भरी येजिन्दगी शहर की॥अपनेपन…

2 years ago

रिश्तों के सच

आखिर सच ही गूँजता, खोले सबकी पोल।झूठे मुँह से पीट ले, कोई कितने ढोल॥ जिसने सच को त्यागकर, पाला झूठ…

2 years ago

आदित्य की दो कविताएँ

1- वैदिक धर्म में सात फेरे, सात वचन यह एक विचारणीय प्रश्न है किभारतीय समाज में एक पृथा है,दूल्हा दुलहन…

2 years ago

दीमक लगे गुलाब-प्रियंका

हिसार(राष्ट्र की परम्परा)लोग अपने मेंजीने लग गए है।अपने कहलाने वालेलोग कहाँ रह गए है? पराये दुख को पीना।एक-दूजे हेतु जीना॥पुराने…

2 years ago

वृद्धाश्रम: अभिशाप या विकल्प

जिस सन्तान को पाल पोसकर बड़ाकिया वही उन्हें डांटकर चुप करवाए,स्वाभाविक है उनके मन में भी तबताड़ना, प्रताड़ना के कुभाव…

2 years ago

गिरगिट ज्यों बदल रहा है आदमी

हिसार(राष्ट्र की परम्परा)गहन लगे सूरज की भांति ढल रहा है आदमी।अपनी ही चादर को ख़ुद छल रहा है आदमी॥ आदमी…

2 years ago

काँटों पर नित चलो-प्रियंका सौरभ

हिसार(राष्ट्र की परम्परा)अगर चाहो तुम सूरज बनना,बनकर के दीप जलो।गर खिलना है फूलों-सा,काँटों पर नित चलो॥ जीवन के इस सफ़र…

2 years ago

वाणी तो सम्प्रति मूल्यवान गहना है

कुछ मंज़िलें अकेले ही पार होती हैं,कुछ लड़ाइयाँ अकेले लड़नी पड़ती हैं,दुनिया में आते भी अकेले ही हैं हम,दुनिया से…

2 years ago

विधिना के तीर कब्बो, दुनिया से पीर मिलें छोड़ि के किसानी धइ लेबे हम मजूरियां

काव्यगोष्ठी आयोजित गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)l किसानों की मार्मिक दशा का चित्रण करते हुए युवा कवि डा.सुधीर श्रीवास्तव "नीरज" ने यह…

2 years ago

नीति वचन

दीपक बनकर तम दूर करें,धरती जैसा हो सहिष्णु बने,वृक्षों जैसा परोपकारी होकरतन मन से सबका दुःख दूर करें। समय गँवाना…

2 years ago