Saturday, July 18, 2026
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कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर साधा निशाना, ‘वोट चोरी’ मामले पर जवाबदेही की उठी मांग

नई दिल्ली,(राष्ट्र की परम्परा डेस्क) कांग्रेस ने मंगलवार को एक बार फिर चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए विधानसभा और लोकसभा चुनावों में कथित “वोट चोरी” के मुद्दे को गंभीरता से उठाया। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने चुनाव आयोग को सीधे-सीधे चुनौती देते हुए कहा कि आयोग को इस मामले पर देश के सामने सफाई देनी चाहिए।

प्रियंका गांधी ने संसद भवन के बाहर पत्रकारों से बातचीत में कहा—
“इस ‘वोट चोरी’ मुद्दे पर चुनाव आयोग को जनता के सामने सच्चाई रखनी चाहिए। राहुल जी किसी भी हमले से डरते नहीं हैं। वे हर परिस्थिति का सामना करते हैं और पीछे हटने वाले नहीं हैं। चूंकि वे राहुल जी द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब नहीं दे पा रहे हैं, इसलिए ध्यान भटकाने के लिए वे नेहरू जी और इंदिरा जी जैसे पुराने मुद्दे उठा रहे हैं।”

उन्होंने राहुल गांधी की बहादुरी की प्रशंसा करते हुए कहा कि विपक्षी नेताओं पर लगातार राजनीतिक और व्यक्तिगत हमले किए जा रहे हैं, लेकिन राहुल गांधी न तो विचलित होते हैं और न ही दबाव में आते हैं।

खड़गे ने कही “संविधान की हत्या” वाली बात

इसी क्रम में कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी चुनाव आयोग और सत्तारूढ़ दल भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि विधानसभा और लोकसभा चुनावों में वोटों की कथित हेराफेरी और चोरी “संविधान की हत्या” है।

खड़गे ने कहा—
“अगर एनडीए और भाजपा इस तरह की चुनावी गड़बड़ी के जरिए गद्दी पर बैठते हैं तो लोकतंत्र को गंभीर नुकसान होगा। हमारी पार्टी का रुख साफ है कि हम देशभर में वोटों की चोरी, हेराफेरी और छेड़छाड़ के खिलाफ माहौल बनाएंगे और लोगों को जागरूक करेंगे कि उनके साथ अन्याय हो रहा है।”

कांग्रेस का कहना है कि वह इस मुद्दे पर व्यापक जन आंदोलन खड़ा करने की दिशा में काम करेगी ताकि चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर जनता का भरोसा बना रहे।

तस्वीरों की दुनिया: दृश्य से इतिहास तक की यात्रा

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19 अगस्त को विश्व फोटोग्राफी दिवस के रूप में मनाया जाता है। तस्वीर खींचने की कला ने इंसानी सभ्यता को एक नई दृष्टि दी है। कैमरे की लेंस से गुज़री हर छवि न केवल एक पल को सहेजती है, बल्कि इतिहास और संस्कृति का दस्तावेज़ भी बन जाती है।
फोटोग्राफी ने दुनिया को करीब लाने का काम किया है। किसी जगह की परंपराएं हों या किसी समाज की जीवनशैली, तस्वीरें हमें उस माहौल से जोड़ देती हैं। यही वजह है कि बिना शब्द कहे भी फोटोग्राफी गहरी बात कह जाती है।
इतिहास इसका साक्षी है कि युद्धक्षेत्रों से लेकर स्वतंत्रता आंदोलनों तक, पुरातत्व से लेकर प्रकृति संरक्षण तक, हर जगह तस्वीरों ने सच्चाई को दर्ज किया और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाया।
आज डिजिटल युग में फोटोग्राफी हर किसी के हाथों में है। मोबाइल कैमरे और सोशल मीडिया ने इसे और ज्यादा लोकतांत्रिक बना दिया है। अब तस्वीरें केवल यादें नहीं रह गईं, बल्कि संवाद का सबसे तेज़ और असरदार माध्यम बन चुकी हैं।
विश्व फोटोग्राफी दिवस हमें यह याद दिलाता है कि तस्वीरें सिर्फ फ्रेम में जड़ी सुंदर छवियां नहीं होतीं, बल्कि समय, संवेदनाओं और समाज की जीवित धरोहर होती हैं।
आलेख और फोटो नवनीत मिश्र

 

देवरिया पुलिस ने तीन आरोपितों पर गुण्डा एक्ट के तहत की कार्रवाई

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)पुलिस अधीक्षक विक्रान्त वीर के निर्देशन में अपराध और अपराधियों पर अंकुश लगाने के अभियान के तहत जनपदीय पुलिस ने मंगलवार को तीन आरोपितों के खिलाफ गुण्डा एक्ट के अंतर्गत कार्रवाई की है।थाना कोतवाली पुलिस ने दो आरोपितों1. अभिषेक राव उर्फ बिक्की राव, पुत्र राजेश राव, निवासी बोडिया अनन्त, थाना कोतवाली देवरिया2. अवनीश राव उर्फ निक्की राव, पुत्र राजेश राव, निवासी बोडिया अनन्त, थाना कोतवाली देवरिया—के खिलाफ धारा ¾ उत्तर प्रदेश गुण्डा नियंत्रण अधिनियम 1970 के तहत कार्रवाई की है।इसी क्रम में थाना भटनी पुलिस ने एक अन्य आरोपित—

  1. इन्द्रबल यादव, पुत्र रामानन्द यादव, निवासी चौरिया, थाना भटनी देवरिया—
    के खिलाफ भी गुण्डा एक्ट के अंतर्गत कार्यवाही की।आपराधिक इतिहास अभिषेक राव पर पहले भी कई मुकदमे दर्ज हैं, जिनमें मारपीट, घर में घुसकर हमला, गाली-गलौज और धमकी जैसी गंभीर धाराएं शामिल हैं।अवनीश राव का भी आपराधिक इतिहास लंबा है। उस पर कई बार हमला करने, गाली-गलौज करने और बलवा करने के मुकदमे दर्ज हो चुके हैं।इन्द्रबल यादव पर 2023 में हत्या, सबूत नष्ट करने और साजिश रचने जैसे गंभीर आरोपों में केस दर्ज किया गया था।देवरिया पुलिस का कहना है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य अपराधियों में भय पैदा करना और जिले में कानून-व्यवस्था को और सुदृढ़ करना है।

विपक्ष ने घोषित किया पूर्व जस्टिस बी. सुदर्शन रेड्डी को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार

नई दिल्ली(राष्ट्र की परम्परा) आगामी उपराष्ट्रपति चुनाव अब बेहद दिलचस्प होने जा रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मंगलवार को घोषणा की कि विपक्ष की ओर से सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी को उम्मीदवार बनाया गया है। उनका सीधा मुकाबला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के प्रत्याशी सी.पी. राधाकृष्णन से होगा।

घोषणा के दौरान खड़गे ने कहा कि यह चुनाव केवल एक संवैधानिक पद के लिए नहीं, बल्कि वैचारिक लड़ाई है। विपक्षी दलों ने सर्वसम्मति से बी. सुदर्शन रेड्डी को अपना संयुक्त उम्मीदवार घोषित किया है। उन्होंने कहा, “रेड्डी साहब भारत के सबसे प्रतिष्ठित और प्रगतिशील न्यायविदों में से एक हैं। उनका जीवन और करियर सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय की प्रतिबद्धता का प्रमाण है।”

न्यायपालिका से राजनीति तक

बी. सुदर्शन रेड्डी ने लंबे समय तक न्यायपालिका में अपनी सेवाएँ दी हैं। वे आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश रहे, इसके बाद गुवाहाटी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश बने और फिर सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में कार्य किया। अपने कार्यकाल में उन्होंने कई महत्वपूर्ण फैसलों में गरीब और वंचित वर्गों के अधिकारों की रक्षा की।

खड़गे ने कहा कि, “वे एक बेहद साधारण और गरीब परिवार से आए। उनके कई फैसले पढ़ने पर पता चलता है कि उन्होंने हमेशा संविधान, मौलिक अधिकारों और आम आदमी के हक की रक्षा की। ऐसे व्यक्ति का उपराष्ट्रपति पद के लिए खड़ा होना लोकतंत्र की मजबूती का प्रतीक है।”

मुकाबला रोमांचक होने के आसार

एनडीए उम्मीदवार सी.पी. राधाकृष्णन अनुभवी राजनेता हैं और भाजपा के कद्दावर नेता माने जाते हैं। वहीं विपक्ष ने न्यायपालिका की पृष्ठभूमि से आने वाले उम्मीदवार को सामने रखकर चुनावी जंग को और रोचक बना दिया है। राजनीतिक गलियारों में अब यह चर्चा तेज हो गई है कि समर्थन जुटाने की इस जंग में किसका पलड़ा भारी पड़ेगा।

संभावना जताई जा रही है कि संसद के दोनों सदनों के सदस्य मतदान में हिस्सा लेंगे और परिणाम न केवल राजनीतिक समीकरण बल्कि विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच वैचारिक संघर्ष की दिशा भी तय करेगा।

ज़िला अस्पताल में फर्जी डॉक्टर का खुलासा, इलाजFake doctor exposed in district hospital, woman dies due to lack of treatment के अभाव में महिला की मौत

बस्ती (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)उत्तर प्रदेश के बस्ती ज़िला अस्पताल में लापरवाही का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां तीमारदारों ने एक फर्जी डॉक्टर को इमरजेंसी वार्ड में मरीज़ों का इलाज करते हुए पकड़ लिया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, राज कुमार नाम का व्यक्ति मास्क और स्टेथोस्कोप पहनकर डॉक्टर बन वार्ड में दाखिल हुआ और खुद को वरिष्ठ चिकित्सक बताकर गंभीर मरीजों तक का इलाज करने लगा। शक तब गहराया जब एक मरीज के परिजनों ने उससे दवा लिखने को कहा। जवाब देने के बजाय उसने वार्डन से पूछने की बात कही। इस पर परिजनों ने उसकी हकीकत उजागर कर दी। लोगों ने उसे पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया।

इसी बीच, एक व्यक्ति अपनी पत्नी को गंभीर हालत में अस्पताल लाया था। परिवार का आरोप है कि लगभग दो घंटे तक उपचार न मिलने से उसकी पत्नी की मौत हो गई। इस दौरान, फर्जी डॉक्टर इमरजेंसी वार्ड में मेडिकल स्टाफ बनकर घूमता पाया गया।

विशेष चिकित्सा अधिकारी डॉ. खालिद रिजवान ने घटना की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि अज्ञात व्यक्ति डॉक्टर बनकर वार्ड में मौजूद था, जिसे पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया गया है। मामले में लिखित शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की जा रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे “मुन्ना भाई” पर प्रशासन अंकुश लगाने में विफल साबित हो रहा है। कई जिलों में बिना डिग्री वाले लोग खुलेआम क्लीनिक चला रहे हैं और मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं।

हिंदुत्व की आस्था पर मंत्री द्वारा चोट, मंदिर भूमि कब्जे के आरोप से गरमाया माहौल

मंदिर के महंत ने लगाया मोदीयोगी से मंदिर की भूमि बचाने की लगाई गुहार

देवरिया,(राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। हिंदुओं की आस्था से जुड़े एक बड़े विवाद ने जिले की सियासत और समाज में हलचल मचा दी है। मामला एक प्राचीन हनुमान मंदिर की भूमि से जुड़ा है, जहां मंदिर के उत्तराधिकारी महंत राजेश नारायण दास ने भाजपा के एक मंत्री पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

महंत का कहना है कि मंत्री के दबाव में मंदिर परिसर की ओर मकान का गेट खोला गया है। इससे मंदिर की जमीन पर कब्जे की आशंका गहराती जा रही है और विवाद बढ़ता ही जा रहा है। उन्होंने इसे सीधे-सीधे हिंदुत्व और आस्था पर प्रहार करार दिया।
महंत ने अब सरकार मे शीर्ष पद पर बैठे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उत्तर प्रदेश सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मंदिर की भूमि बचाने की गुहार लगाई है।
महंत राजेश नारायण दास मंदिर गेट पर ही धरने पर बैठ गए। इस दौरान उनकी पुलिस प्रशासन से तीखी नोकझोंक भी हुई। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर मंदिर की भूमि से छेड़छाड़ जारी रही तो बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा।

महंत ने कहा—
“भाजपा खुद को हिंदुत्व की रक्षक पार्टी कहती है, लेकिन उसके ही मंत्री मंदिर की जमीन पर कब्जे की साजिश रच रहे हैं। यदि यही कृत्य किसी दूसरी कौम या भूमाफिया ने किया होता तो अब तक कड़ी कार्रवाई हो चुकी होती।”

धरना स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय लोग भी एकत्र हुए और उन्होंने मंदिर भूमि की रक्षा की मांग उठाई। लोगों का कहना था कि मंदिर की संपत्ति पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

फिलहाल पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर डटे रहे और स्थिति को नियंत्रण में करने का प्रयास करते रहे। लेकिन मामले ने न केवल स्थानीय स्तर पर, बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी गर्मी बढ़ा दी है।

इस विवाद से हिंदुत्व और आस्था की राजनीति पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आमजन पूछ रहे हैं कि जब खुद सत्ता पक्ष के लोग ही मंदिर की संपत्ति को सुरक्षित रखने में नाकाम दिख रहे हैं, तो फिर आम हिंदू अपनी आस्था और धार्मिक धरोहर की रक्षा कैसे करेगा?

आईटीआई प्रवेश 2025 : अचयनित सूची जारी, 22 अगस्त तक करें आवेदन पत्र जमा

देवरिया। (राष्ट्र की परम्परा)राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) देवरिया के प्रधानाचार्य के.के. राम ने बताया कि राज्य व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद, उत्तर प्रदेश, लखनऊ द्वारा आईटीआई प्रवेश 2025 की अचयनित सूची जारी कर दी गई है।
उन्होंने बताया कि ऐसे अभ्यर्थी जिनका तृतीय चरण तक व्यवसाय आवंटन नहीं हुआ है तथा वे अभ्यर्थी जिन्होंने हाल ही में नया ऑनलाइन आवेदन किया है, उन्हें प्रवेश का अवसर दिया जा रहा है। इच्छुक अभ्यर्थी अपना ऑनलाइन आवेदन प्रपत्र 22 अगस्त 2025 की सायं 5 बजे तक राजकीय आईटीआई देवरिया में प्रहलाद कुमार के पास जमा कर सकते हैं।
प्रधानाचार्य ने बताया कि जमा किए गए आवेदन पत्रों के आधार पर मेरिट सूची तैयार की जाएगी तथा अभ्यर्थियों का प्रवेश प्रक्रिया 25 अगस्त 2025 तक पूर्ण कर ली जाएगी।

मेरठ टोल प्लाजा पर सेना के जवान से मारपीट, सात टोलकर्मी गिरफ्तार

सांकेतिक फोटो

मेरठ,(राष्ट्र की परम्परा) उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में रविवार को भूनी टोल प्लाजा पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया। यहाँ टोल कर्मचारियों ने भारतीय सेना के एक जवान को न केवल खंभे से बांध दिया बल्कि लाठी-डंडों और लोहे की रॉड से बेरहमी से पीट दिया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही हड़कंप मच गया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सात टोलकर्मियों को गिरफ्तार कर लिया है।

घटना सरूरपुर थाना क्षेत्र के भूनी टोल प्लाजा की है। जानकारी के मुताबिक, गोटका गांव निवासी कपिल कवाड़, जो भारतीय सेना की राजपूत रेजिमेंट में तैनात हैं, छुट्टियां बिताने के बाद अपनी ड्यूटी पर लौट रहे थे। उन्हें श्रीनगर स्थित अपनी पोस्ट पर समय से पहुँचने के लिए दिल्ली हवाई अड्डे जाना था। रविवार को जब वह अपने चचेरे भाई के साथ कार से निकले तो भूनी टोल प्लाजा पर लंबा जाम मिला। उड़ान के छूटने की चिंता में कपिल वाहन से उतरे और टोल कर्मचारियों से बातचीत कर रास्ता साफ करने का अनुरोध किया।

बताया जा रहा है कि इसी दौरान टोलकर्मियों से कहासुनी हो गई और विवाद ने देखते-देखते हिंसक रूप ले लिया। आरोप है कि टोल कर्मचारियों ने जवान को खंभे से बांधकर पीटना शुरू कर दिया। वीडियो में कपिल को बंधा हुआ और घायल अवस्था में दिखाया गया, जिसके बाद यह मामला सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया।

पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) राकेश कुमार मिश्रा ने बताया कि जवान के पिता कृष्णपाल की शिकायत पर थाना सरूरपुर में मामला दर्ज कर लिया गया है। शिकायत में कहा गया है कि टोलकर्मियों ने मिलकर जवान पर हमला किया और उसे गंभीर चोटें आईं। पुलिस ने सोमवार दिन में छह आरोपियों को गिरफ्तार किया जबकि देर रात सातवें आरोपी को भी पकड़ लिया गया।

अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच होगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं, सेना के जवान पर हमला होने से स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया है।

प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर केंद्र-तमिलनाडु सरकार में तकरार

नई दिल्ली, (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) लोकसभा में मंगलवार को प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) को लेकर केंद्र और तमिलनाडु सरकार के बीच बड़ा विवाद सामने आया। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आरोप लगाया कि केंद्र से 608 करोड़ रुपये मिलने के बावजूद तमिलनाडु सरकार ने गरीबों को 5 लाख से अधिक घर उपलब्ध नहीं कराए।

टीडीपी सांसद लवू श्रीकृष्ण देवरायलु के सवाल का जवाब देते हुए मंत्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने तमिलनाडु के गरीबों के लिए पर्याप्त बजट दिया है। इसके बावजूद, राज्य सरकार ने अब तक 2 लाख 15 हजार घरों का आवंटन नहीं किया और करीब 3 लाख 15 हजार घरों का निर्माण भी नहीं कराया गया।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 2024 में घरों की वास्तविक जरूरत वाले लोगों की पहचान के लिए आवश्यक सर्वेक्षण तक नहीं कराया गया।

चौहान ने सदन में कहा –
“यह अन्याय की पराकाष्ठा है कि एक साल से अधिक समय से 2 लाख 15 हजार से ज्यादा गरीब लोग घर से वंचित हैं। 3 लाख 10 हजार घर अभी तक पूरे नहीं हुए हैं। पैसा दिया जा चुका है, 608 करोड़ रुपये तमिलनाडु सरकार के खाते में पड़े हैं, लेकिन वे घरों का निर्माण नहीं कर रहे।”

इस दौरान विपक्षी दलों ने जोरदार हंगामा किया और कई सांसद वेल में आकर नारेबाजी करने लगे।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) केंद्र की महत्वाकांक्षी योजना है, जिसके तहत ग्रामीण गरीब परिवारों को पक्के मकान उपलब्ध कराए जाते हैं। योजना में केंद्र और राज्य सरकारें संयुक्त रूप से खर्च वहन करती हैं।

अब तमिलनाडु सरकार की चुप्पी और केंद्र के गंभीर आरोपों के बीच यह मुद्दा आने वाले दिनों में और गरमा सकता है।

भारतीय रेलवे सख्त करेगी सामान नीति, अब स्टेशन पर होगी वजन की जांच

भारी समान के साथ यात्रा पड़ेगा महंगा

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) हवाई अड्डों की तरह अब रेलवे स्टेशन पर भी यात्रियों को अपने सामान की सीमा का ध्यान रखना होगा। भारतीय रेलवे अपनी सामान नीति (Baggage Policy) को सख्ती से लागू करने जा रही है। अब यात्रियों को तय सीमा से अधिक सामान ले जाने पर न केवल अतिरिक्त शुल्क देना होगा, बल्कि नियम तोड़ने पर जुर्माना भी लगाया जाएगा।

रेलवे बोर्ड ने देशभर के प्रमुख स्टेशनों की पहचान की है, जहाँ इस नियम का सख्ती से पालन कराया जाएगा। उत्तर मध्य रेलवे (NCR) प्रयागराज मंडल में यह व्यवस्था सबसे पहले लागू होगी।

कितने किलो मुफ्त?
फर्स्ट एसी यात्री – 70 किलो तक
एसी टू-टियर यात्री – 50 किलो तक
एसी थ्री-टियर व स्लीपर यात्री – 40 किलो तक
सामान्य श्रेणी यात्री – 35 किलो तक

यदि कोई यात्री इससे अधिक सामान लेकर चलता है तो उसे रेलवे पार्सल बुकिंग कार्यालय में सामान जमा कराना होगा और शुल्क अदा करना होगा। इसके अलावा बड़े आकार के बैग या ट्रंक, जो ट्रेन के बोर्डिंग स्पेस या गलियारे को बाधित करेंगे, उन पर भी अतिरिक्त जुर्माना लगाया जाएगा।

कहाँ होगी शुरुआत?

एनसीआर प्रयागराज मंडल के वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक (डीसीएम) हिमांशु शुक्ला ने बताया कि शुरुआत में यह व्यवस्था प्रमुख स्टेशनों पर लागू होगी। इनमें प्रयागराज जंक्शन, प्रयागराज छिवकी, सूबेदारगंज, कानपुर सेंट्रल, मिर्जापुर, टूंडला, अलीगढ़ जंक्शन, गोविंदपुरी और इटावा शामिल हैं।

यात्रियों को प्लेटफॉर्म पर प्रवेश से पहले सामान का वजन और जांच करानी होगी। सीमा से अधिक पाए जाने पर उन्हें अतिरिक्त शुल्क देना होगा।
शुक्ला ने बताया कि इस कदम का मकसद विशेषकर लंबी दूरी की ट्रेनों में यात्रियों को अधिक कुशल, सुरक्षित और आरामदायक यात्रा अनुभव उपलब्ध कराना है। अक्सर भारी-भरकम और अव्यवस्थित सामान के कारण न केवल अन्य यात्रियों को परेशानी होती है, बल्कि ट्रेन की सुरक्षा व समयबद्धता पर भी असर पड़ता है।

रेलवे ने संकेत दिया है कि इस नीति को धीरे-धीरे देशभर के अन्य जोन और प्रमुख स्टेशनों पर भी लागू किया जाएगा।

महिला डॉक्टर के साथ मारपीट, वीडियो बनाने वाले दो आरोपियों पर FIR दर्ज

गौतमबुद्ध नगर(राष्ट्र की परम्परा डेस्क) अस्पतालों में डॉक्टरों के साथ मारपीट की वारदातें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। ताजा मामला गौतमबुद्ध नगर जिले के दनकौर क्षेत्र से सामने आया है, जहां एक महिला चिकित्सक से मारपीट और उसका वीडियो बनाने के आरोप में पुलिस ने दो युवकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, घटना थाना क्षेत्र के एक ढाबे के पास हुई। महिला चिकित्सक किसी परिचित से बातचीत कर रही थीं, तभी आरोपी मोहित भाटी वहां पहुंचा और अभद्रता करने लगा। जब डॉक्टर ने इसका विरोध किया तो आरोपी नितिन ने उन्हें पीटना शुरू कर दिया, जबकि मोहित पूरी घटना का वीडियो बनाने लगा।

महिला डॉक्टर ने दोनों आरोपियों पर जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया है। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने दोनों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

बिहार चुनाव 2025 से पहले पवन सिंह की आरके सिंह से मुलाकात ने बढ़ाई सियासी हलचल

दिल्ली/पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले भोजपुरी स्टार और आरा से निर्दलीय सांसद पवन सिंह एक बार फिर राजनीतिक सुर्खियों में आ गए हैं। सोमवार को दिल्ली में उनकी भाजपा नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री आरके सिंह से मुलाकात ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। सवाल उठ रहा है कि यह सिर्फ शिष्टाचार भेंट थी या फिर इसके पीछे कोई गहरी रणनीति छिपी है।

भोजपुरी स्टार से सांसद तक का सफर पवन सिंह को लोग उनके लोकप्रिय भोजपुरी गानों और एक्शन फिल्मों के कारण लंबे समय से जानते हैं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने राजनीति में भी अपनी मजबूत पहचान बनाई है। 2024 लोकसभा चुनाव में जब भाजपा ने उन्हें टिकट नहीं दिया, तब उन्होंने आरा से निर्दलीय चुनाव लड़ने का साहसिक फैसला लिया। नतीजा यह हुआ कि उन्होंने भारी मतों से जीत दर्ज कर सबको चौंका दिया।
विशेषज्ञ मानते हैं कि उनकी जीत सिर्फ व्यक्तिगत करिश्मे से नहीं, बल्कि युवाओं में उनकी लोकप्रियता और आरा क्षेत्र में मौजूद उनके मजबूत जनाधार की वजह से संभव हुई। यही कारण है कि अब उन्हें नज़रअंदाज करना किसी भी पार्टी के लिए आसान नहीं रह गया है।

भाजपा के लिए क्या संकेत?

आरके सिंह, जो आरा से भाजपा सांसद रह चुके हैं और केंद्र में मंत्री पद भी संभाल चुके हैं, अब पवन सिंह के साथ एक मंच पर दिखाई दिए। आरा सीट भाजपा का पारंपरिक गढ़ मानी जाती रही है। लेकिन 2024 में जब भाजपा ने पवन सिंह को टिकट नहीं दिया, तो उन्होंने निर्दलीय चुनाव जीतकर भाजपा की पकड़ कमजोर कर दी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दिल्ली में हुई यह मुलाकात संकेत देती है कि भाजपा भविष्य की रणनीति में पवन सिंह को अपने साथ लाने की कोशिश कर सकती है। भाजपा के लिए आरा सीट पर फिर से पकड़ मजबूत करना अहम है और पवन सिंह जैसे लोकप्रिय चेहरे को नज़रअंदाज करना जोखिम भरा भी हो सकता है।

चुनावी समीकरणों में नई हलचल

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तैयारियां जोरों पर हैं। एनडीए और महागठबंधन दोनों ही खेमों में सीट बंटवारे और नेतृत्व को लेकर मंथन चल रहा है। ऐसे में पवन सिंह और आरके सिंह की मुलाकात ने समीकरणों में नई हलचल मचा दी है।
भले ही इस मुलाकात को औपचारिक बताया जा रहा हो, लेकिन इसके राजनीतिक मायनों को नकारा नहीं जा सकता। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या आने वाले दिनों में पवन सिंह भाजपा खेमे में वापसी करेंगे या फिर निर्दलीय रहते हुए किसी अन्य गठबंधन को चौंकाने वाली रणनीति बनाएंगे।

लालू के बड़े बेटे तेज प्रताप ने राहुल गांधी की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ को बताया असरहीन, नवादा में पोस्टरबाजी से बढ़ा बवाल

पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने इस यात्रा को असरहीन करार देते हुए कहा कि असली मुद्दे शिक्षा, स्वास्थ्य और बेरोजगारी हैं, जबकि इस तरह की यात्राएँ केवल लोगों को भटकाने का काम करती हैं।

तेज प्रताप ने कहा कि राहुल गांधी और तेजस्वी यादव द्वारा उठाए जा रहे मुद्दों से कोई ठोस नतीजा सामने आने वाला नहीं है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे इस तरह की गतिविधियों से दूर रहें क्योंकि इनसे केवल विपक्षी दलों को राजनीतिक लाभ मिलता है।

नवादा में पोस्टरबाजी से बवाल इधर, नवादा जिले के हिसुआ में राहुल गांधी की यात्रा को लेकर पोस्टरबाजी विवाद का कारण बन गई। कांग्रेस और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच पोस्टर लगाने और हटाने को लेकर कहासुनी हुई, जो धीरे-धीरे टकराव में बदल गई।

स्थिति बिगड़ते ही पुलिस बल की तैनाती करनी पड़ी और मौके पर अफरा-तफरी मच गई। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह विवाद भाजपा के पूर्व विधायक अनिल सिंह और कांग्रेस की मौजूदा विधायक नीतू कुमारी के बीच विश्व शांति चौक पर हुआ। हंगामा उस समय और बढ़ गया जब राहुल गांधी की यात्रा शुरू होने वाली थी।

सासाराम से शुरू हुई यात्र बता दें कि राहुल गांधी ने सासाराम से 1,300 किलोमीटर लंबी ‘वोटर अधिकार यात्रा’ की शुरुआत की है। यह यात्रा 16 दिनों तक चलेगी और बिहार के 25 जिलों से होकर गुजरेगी।

1 सितंबर को यह यात्रा पटना में एक बड़ी रैली के साथ समाप्त होगी। इसके उद्घाटन कार्यक्रम में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव, बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव समेत इंडिया गठबंधन के कई बड़े नेता मौजूद रहे।

वन चाइना पॉलिसी पर चीन का दावा, भारत ने नहीं दी आधिकारिक पुष्टि

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) चीन की विदेश नीति का सबसे बड़ा आधारभूत सिद्धांत “वन चाइना पॉलिसी” है। इस नीति के अंतर्गत बीजिंग ताइवान को अपना अभिन्न हिस्सा मानता है और विश्व के अन्य देशों से अपेक्षा करता है कि वे इस स्थिति को स्वीकार करें। चीन अपने सभी द्विपक्षीय संबंधों को इसी दृष्टिकोण से जोड़कर देखता है। यही कारण है कि जब भी कोई शीर्ष चीनी नेता भारत की यात्रा करता है या किसी वार्ता में शामिल होता है, वह इस विषय को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अवश्य उठाता है।

भारत यात्रा पर आए चीनी विदेश मंत्री वांग यी की विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात के बाद चीनी सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने दावा किया है कि इस मुलाकात के दौरान भारत ने कहा कि ताइवान चीन का हिस्सा है। हालांकि, भारत सरकार ने अब तक ऐसा कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। यही कारण है कि इस खबर को संदिग्ध माना जा रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार भारत की विदेश नीति हमेशा से ताइवान के मुद्दे पर रणनीतिक संतुलन बनाए रखती आई है। भारत ने कभी ताइवान को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता नहीं दी, लेकिन साथ ही वह उसे चीन का हिस्सा बताने से भी बचता है। यही भारत की “संतुलनकारी कूटनीति” है।

भारत और ताइवान के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं, लेकिन आर्थिक, तकनीकी और शैक्षिक क्षेत्रों में सहयोग बेहद सक्रिय है। दोनों देशों के बीच India-Taipei Association और Taipei Economic and Cultural Center in India जैसी संस्थाएँ कार्यरत हैं। ताइवान की कई कंपनियाँ भारत में निवेश कर रही हैं, खासकर इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में। वहीं बड़ी संख्या में भारतीय छात्र ताइवान में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।

विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि भारत ताइवान के मामले में प्रत्यक्ष रूप से “वन चाइना पॉलिसी” का समर्थन करने से परहेज़ करता है। भारत की यह रणनीति उसे बीजिंग और ताइपे दोनों के साथ कामकाजी संबंध बनाए रखने में मदद करती है।

मानसून का प्रकोप: मुंबई और आसपास के इलाकों में मूसलाधार बारिश, जनजीवन अस्त-व्यस्त

मुंबई (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। मानसून के प्रकोप ने पूरे देश को अपनी चपेट में ले लिया है, जिसमें महाराष्ट्र सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। राजधानी मुंबई में बीते 24 घंटों के दौरान कई इलाकों में 200 मिमी से अधिक बारिश दर्ज की गई। पूर्वी उपनगर विक्रोली में सर्वाधिक 255.5 मिमी बारिश हुई, जिससे सड़कें पूरी तरह जलमग्न हो गईं और निचले इलाके तालाब में तब्दील हो गए।

बोरीवली, अंधेरी, सायन, दादर और चेंबूर समेत कई इलाकों में रातभर तेज बारिश होती रही और सुबह भी बारिश जारी रही। इसके चलते गांधी मार्केट सहित निचले क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति पैदा हो गई।

लगातार हो रही भारी बारिश और भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) की ओर से जारी ‘रेड अलर्ट’ को देखते हुए मुंबई में स्कूल और कॉलेजों को बंद करने का निर्णय लिया गया है। मौसम विभाग ने मंगलवार को भी मुंबई और आसपास के जिलों में कई जगहों पर अत्यधिक भारी बारिश की संभावना जताई है।

तेज बारिश से यातायात पर गहरा असर पड़ा है। निचले इलाकों में पानी भरने से कई जगहों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और उपनगरीय रेल सेवाएं भी विलंब से चल रही हैं। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने नागरिकों से सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है।