Tuesday, July 7, 2026
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🏏 क्रोनिए का क्रिकेट करियर: अनुशासन और नेतृत्व का प्रतीक से आरोप तक

हैंसी क्रोनिए का जन्म 25 सितंबर 1969 को दक्षिण अफ्रीका के ब्लोएमफोंटेन में हुआ था। उन्होंने 1992 में भारत के खिलाफ वनडे क्रिकेट में पदार्पण किया। क्रोनिए अपनी शांत लेकिन आक्रामक कप्तानी के लिए जाने जाते थे।

हैंसी क्रोनिए 68 टेस्ट मैचों में 37.00 की औसत से 3714 रन बनाए।वहीं 188 वनडे मैचों में उन्होंने 38.64 की औसत से 5565 रन जोड़े।

उनके नेतृत्व में दक्षिण अफ्रीका ने कई यादगार जीत हासिल कीं और टीम 1990 के दशक के उत्तरार्ध में विश्व की सबसे मजबूत टीमों में गिनी जाने लगी।क्रोनिए अपनी रणनीतिक समझ, टीम भावना और फिटनेस के लिए युवा खिलाड़ियों के रोल मॉडल बन गए थे।

⚖️ मैच फिक्सिंग का खुलासा: एक आदर्श की छवि टूटी। मार्च 2000 में भारतीय पुलिस ने एक टेप जारी किया, जिसमें हैंसी क्रोनिए और एक बुकी के बीच बातचीत दर्ज थी। यह बातचीत मैच फिक्सिंग से जुड़ी थी। शुरुआत में क्रोनिए ने आरोपों को नकारा, लेकिन बाद में उन्होंने स्वीकार किया कि उन्होंने पैसे लेकर कुछ मैचों में सट्टेबाजों को जानकारी दी।

उनकी स्वीकारोक्ति के बाद दक्षिण अफ्रीकी क्रिकेट बोर्ड (UCBSA) ने उन्हें कप्तानी से तुरंत हटा दिया। इसके बाद किंग कमीशन (King Commission) की जांच में दोषी पाए जाने पर अक्टूबर 2000 में उन पर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया गया।

⚠️ क्रिकेट पर पड़ा गहरा प्रभाव

हैंसी क्रोनिए का मामला उस दौर में सामने आया जब क्रिकेट को “जेंटलमैन गेम” कहा जाता था। उनके फिक्सिंग में शामिल होने से दुनियाभर के क्रिकेट प्रेमियों का विश्वास हिल गया। भारत, पाकिस्तान और अन्य देशों में भी फिक्सिंग की जांच शुरू हुई, और कई खिलाड़ियों पर निगरानी बढ़ी।

क्रोनिए का नाम इस कांड में केंद्रीय भूमिका निभाने के कारण हमेशा विवादों में रहा। यह घटना क्रिकेट इतिहास की सबसे बड़ी ईमानदारी संकट (Integrity Crisis) के रूप में देखी गई।

✈️ दुखद अंत: एक रहस्यमय विमान दुर्घटना

दुर्भाग्यवश, 1 जून 2002 को मात्र 32 वर्ष की आयु में हैंसी क्रोनिए की एक विमान दुर्घटना में मृत्यु हो गई। उनकी मृत्यु आज भी कई सवालों को जन्म देती है — क्या यह हादसा था या कुछ और? हालांकि, आधिकारिक रूप से इसे एक दुर्घटना ही माना गया।

🕊️ विरासत और सबक

क्रोनिए ने दक्षिण अफ्रीका को क्रिकेट मानचित्र पर नई पहचान दिलाई, लेकिन उनके जीवन का अंत एक कड़वे सबक के रूप में हुआ। उनकी कहानी यह दर्शाती है कि प्रतिभा और नेतृत्व की चमक भी नैतिक पतन से ढक सकती है।

आज भी क्रिकेट जगत उन्हें “गिरा हुआ हीरो” (Fallen Hero) के रूप में याद करता है — जिनकी गलतियों ने खेल को सिखाया कि ईमानदारी ही सबसे बड़ी उपलब्धि है।

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🚆 कश्मीर घाटी में पहली रेलगाड़ी – विकास और एकता की नई राह (2008)

11 अक्टूबर 2008 का दिन भारतीय इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। इस दिन तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने जम्मू-कश्मीर की वादियों में पहली रेलगाड़ी को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। श्रीनगर से अनंतनाग तक चलने वाली इस रेल सेवा ने न सिर्फ कश्मीर घाटी में संपर्क का एक नया युग शुरू किया, बल्कि विकास, शांति और एकता का प्रतीक भी बन गई।
यह रेल परियोजना उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (USBRL) योजना का हिस्सा थी, जिसका उद्देश्य जम्मू-कश्मीर को देश के बाकी हिस्सों से रेलमार्ग द्वारा जोड़ना था। लगभग 272 किलोमीटर लंबी इस रेल लाइन को “इंजीनियरिंग का चमत्कार” कहा जाता है, क्योंकि इसे बर्फ़ीली चोटियों, गहरी घाटियों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को पार करते हुए बनाया गया है।
इस रेल सेवा ने घाटी में पर्यटन को भी एक नई दिशा दी। स्थानीय लोगों के लिए रोज़गार के अवसर बढ़े और व्यापारिक गतिविधियों में तेजी आई। इससे पहले जहाँ घाटी के लोग सिर्फ सड़क मार्ग पर निर्भर थे, वहीं रेल सेवा ने उन्हें सस्ता, सुरक्षित और नियमित परिवहन का विकल्प प्रदान किया।
यह पहल सिर्फ परिवहन सुविधा नहीं थी, बल्कि यह “कश्मीरियत और भारतीय एकता” की भावना को मजबूत करने वाला कदम था। डॉ. मनमोहन सिंह ने उद्घाटन समारोह के दौरान कहा था —
“यह रेल न केवल लोहे के पटरियों पर दौड़ने वाली गाड़ी है, बल्कि दिलों को जोड़ने का सेतु है।”
🌪️ कलकत्ता का विनाशकारी चक्रवात – इतिहास की सबसे भयावह प्राकृतिक आपदा (1737) 11 अक्टूबर 1737 को भारत ने एक ऐसा भयावह दृश्य देखा, जिसे आज भी इतिहास की सबसे बड़ी प्राकृतिक त्रासदियों में गिना जाता है। उस दिन कलकत्ता (अब कोलकाता) में एक भीषण चक्रवात और बाढ़ ने तबाही मचा दी थी।
इतिहासकारों और ब्रिटिश रिकार्ड्स के अनुसार, इस तूफान में करीब 3 लाख लोगों की मौत हुई थी — जो अपने आप में एक भयावह आंकड़ा है।
इस चक्रवात की तीव्रता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि हुगली नदी में भयंकर लहरें उठीं, जिसने सैकड़ों जहाजों और नावों को डुबो दिया। शहर के अधिकांश भवन ढह गए, पेड़ उखड़ गए और व्यापारिक केंद्र बर्बाद हो गए। उस समय कलकत्ता ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी का प्रमुख व्यापारिक केंद्र था, और इस आपदा ने उनके पूरे ढांचे को हिला कर रख दिया।
इस घटना ने न केवल भारतीय उपमहाद्वीप की जलवायु अस्थिरता को उजागर किया, बल्कि भविष्य में प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए संरचनात्मक सुरक्षा और चेतावनी प्रणालियों की आवश्यकता को भी रेखांकित किया।
हालांकि उस दौर में मौसम पूर्वानुमान या बचाव के आधुनिक साधन नहीं थे, परंतु इस त्रासदी के बाद स्थानीय प्रशासन ने तटीय क्षेत्रों में बाढ़ नियंत्रण और आपात सहायता व्यवस्था की दिशा में प्रारंभिक प्रयास किए।
यह चक्रवात एक ऐसी याद है जो यह सिखाता है कि प्रकृति के सामने मानव कितना छोटा है, और हमें पर्यावरण के प्रति संवेदनशील और जिम्मेदार रहना चाहिए।
💡 थॉमस एडिसन का पहला पेटेंट – नवाचार की शुरुआत (1869)
11 अक्टूबर 1869 को महान अमेरिकी आविष्कारक थॉमस अल्वा एडिसन ने अपने पहले आविष्कार के लिए पेटेंट आवेदन दाखिल किया। यह दिन आधुनिक तकनीकी युग की शुरुआत के रूप में माना जाता है।
यह आविष्कार “इलेक्ट्रिक वोट रिकॉर्डर” नामक एक यंत्र था, जिसे अमेरिकी संसद में वोटिंग प्रक्रिया को तेज़ और सटीक बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया था।
हालाँकि यह मशीन उस समय व्यावहारिक रूप से सफल नहीं हो पाई, परंतु इसने एडिसन के भीतर की जिज्ञासा और रचनात्मकता को और प्रखर किया। इसके बाद उन्होंने बल्ब, ग्रामोफोन, मोशन पिक्चर कैमरा और इलेक्ट्रिक पावर डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम जैसे आविष्कार कर मानव जीवन को नई दिशा दी।
एडिसन के नाम पर 1,000 से अधिक पेटेंट दर्ज हैं। उन्होंने यह साबित किया कि असफलता किसी आविष्कारक की राह नहीं रोक सकती। उन्होंने कहा था —
“मैं असफल नहीं हुआ, मैंने बस 10,000 तरीके खोजे हैं जो काम नहीं करते।”
एडिसन का पहला पेटेंट विज्ञान के इतिहास में सिर्फ एक दस्तावेज नहीं था, बल्कि यह मानवता की नवाचार यात्रा का पहला ठोस कदम था।
इस दिन को तकनीकी इतिहास का वह क्षण माना जा सकता है जिसने आधुनिक औद्योगिक युग की नींव रखी।
🌏 तीनों घटनाओं का सार – मानवता की यात्रा के तीन पड़ाव
11 अक्टूबर को हुई ये तीन घटनाएँ तीन अलग-अलग युगों और क्षेत्रों से जुड़ी हैं —
एक विकास और एकता का प्रतीक है (कश्मीर रेलगाड़ी),
दूसरी विनाश और चेतावनी की गाथा है (कलकत्ता चक्रवात),
और तीसरी नवाचार और प्रगति का आरंभ है (एडिसन का पेटेंट)।
इन तीनों घटनाओं को जोड़ने वाली सबसे बड़ी कड़ी है — मानवता की सीख।
जहाँ एक ओर प्रकृति हमें विनम्र बनाती है, वहीं विज्ञान हमें आगे बढ़ने की शक्ति देता है।
कश्मीर की रेल हमें जोड़ती है, एडिसन का आविष्कार हमें सोचने पर मजबूर करता है, और कलकत्ता की त्रासदी हमें सिखाती है कि प्रगति के साथ पर्यावरण की सुरक्षा भी ज़रूरी है।
11 अक्टूबर सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि यह मानव सभ्यता की यात्रा का प्रतीक है —
जहाँ विकास, विनाश और नवाचार — तीनों के बीच संतुलन ही मानव प्रगति की असली दिशा तय करता है।

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“लोकनायक की क्रांति: जयप्रकाश नारायण — देश की आत्मा का रिक्रिएटर”

एक युगद्रष्टा जिसने भारत की आत्मा को पुनर्जीवित किया

भारत का इतिहास केवल राजाओं, राजनीतिज्ञों या योद्धाओं का नहीं, बल्कि उन लोकनायकों का भी है जिन्होंने जनमानस में परिवर्तन की ज्वाला प्रज्वलित की। उन्हीं में से एक थे जयप्रकाश नारायण — जिन्हें प्रेम से “लोकनायक” कहा गया। उन्होंने राजनीति को सत्ता की सीढ़ी नहीं, बल्कि समाज परिवर्तन का साधन माना।
उनकी विचारधारा ने उस दौर में देश को दिशा दी जब लोकतंत्र का स्वर घुटने लगा था। उन्होंने जनता को बताया कि “लोकतंत्र जनता की जागरूकता से जीवित रहता है, सरकारों से नहीं।”
जन्म, मूल निवास और पारिवारिक पृष्ठभूमि
जयप्रकाश नारायण का जन्म 11 अक्टूबर 1902 को सीताब दीयारा (Sitab Diara) नामक गाँव में हुआ था। यह गाँव गंगा और घाघरा नदियों के संगम के पास, बिहार और उत्तर प्रदेश की सीमा पर स्थित है।
उनके पिता हर्सु दयाल ब्रिटिश शासन के अंतर्गत एक मामूली सरकारी कर्मचारी थे, जबकि माता फुलरानी देवी धार्मिक, सरल और कर्मनिष्ठ थीं।
घर की स्थिति साधारण थी। अक्सर बाढ़ के कारण पूरा गाँव उजड़ जाता था। ऐसे अस्थिर वातावरण में भी जयप्रकाश ने अपने भीतर अटल जिजीविषा और संघर्षशीलता विकसित की।

परिवार में चौथे संतान के रूप में जन्मे जयप्रकाश बचपन से ही तेज़ बुद्धि और जिज्ञासु स्वभाव के थे। माँ की ममता और पिता के अनुशासन ने उनमें सामाजिक संवेदना और नैतिक मूल्यों की नींव रखी।
शिक्षा : संघर्षों से निकला ज्ञान का प्रकाश जयप्रकाश की प्रारंभिक शिक्षा गाँव में हुई, लेकिन उच्च शिक्षा के लिए उन्हें पटना भेजा गया।
पटना में रहते हुए वे “सरस्वती भवन छात्रावास” में ठहरे, जहाँ अन्य मेधावी छात्रों से उनका परिचय हुआ।
वहीं से उनके भीतर समाज और राजनीति के प्रति समझ विकसित होने लगी।
1922 में वे उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका गए — यह उस समय एक असाधारण निर्णय था।
अमेरिका में उन्होंने विभिन्न विश्वविद्यालयों से अध्ययन किया :
University of California, Berkeley – रसायनशास्त्र में प्रारंभिक अध्ययन
University of Iowa – विज्ञान में अध्ययन, लेकिन आर्थिक कठिनाईयों के कारण बीच में छोड़ा Ohio State University – Behavioral Science में स्नातक University of Wisconsin – Sociology में परास्नातक (M.A.) अमेरिका में उन्हें अपनी पढ़ाई का ख़र्च खुद उठाना पड़ा। उन्होंने फलों की पैकिंग, सफाई, रसोई, फैक्ट्री जैसे कार्य किए।
इन संघर्षों ने उन्हें आत्मनिर्भरता, श्रम और समानता का अर्थ सिखाया।
वहीं उन्होंने मार्क्सवाद, समाजवाद, और लोकतंत्र के विचार पढ़े — जिसने उनके राजनीतिक दृष्टिकोण को आकार दिया।
भारत वापसी और स्वतंत्रता आंदोलन में भूमिका
1929 में भारत लौटने के बाद जयप्रकाश नारायण ने देश के सामाजिक और राजनीतिक हालात को करीब से देखा।
उन्हें महसूस हुआ कि केवल अंग्रेज़ों से आज़ादी नहीं, बल्कि गरीबी, असमानता और अन्याय से भी मुक्ति आवश्यक है।
उन्होंने महात्मा गांधी के विचारों को अपनाया और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़ गए।
1932 में सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान उन्हें जेल हुई।
1934 में उन्होंने कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी (CSP) की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उनका उद्देश्य था – कांग्रेस के भीतर एक ऐसी विचारधारा को स्थापित करना जो सामाजिक न्याय और समानता पर आधारित हो।
1942 के भारत छोड़ो आंदोलन (Quit India Movement) में जब कांग्रेस के सभी बड़े नेता गिरफ्तार हो गए, तब जयप्रकाश भूमिगत होकर आंदोलन का संचालन करते रहे।
उन्होंने “आज़ाद दस्ते” बनाए और गुप्त रूप से क्रांतिकारियों से संपर्क बनाए रखा।
उनकी जेल से भागने की घटना आज भी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की रोमांचक कहानियों में से एक मानी जाती है।
स्वतंत्रता के बाद : राजनीति से समाज की ओर यात्रा
स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद जब देश में नई व्यवस्था स्थापित हो रही थी, तब जयप्रकाश नारायण ने सत्ता की राजनीति से दूरी बनाने का निर्णय लिया।
उन्होंने कहा —“सत्ता नहीं, समाज परिवर्तन ही मेरी राजनीति है।”
1952 में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर प्रजा सोशलिस्ट पार्टी की स्थापना में योगदान दिया।
लेकिन जल्दी ही उन्होंने महसूस किया कि राजनीति की सीमाएँ समाज को नहीं बदल सकतीं।
उन्होंने गांधी के “सर्वोदय” और विनोबा भावे के भूमिदान आंदोलन से जुड़कर ग्राम सुधार, शिक्षा, श्रम और न्याय के क्षेत्र में काम किया।

उनकी दृष्टि में सच्चा लोकतंत्र वह है जहाँ हर व्यक्ति अपने जीवन का निर्माता स्वयं बने।
सम्पूर्ण क्रांति का आह्वान : जनता की आवाज़ बनकर उभरे लोकनायक 1970 के दशक में देश में बढ़ता भ्रष्टाचार, बेरोज़गारी, महंगाई और प्रशासनिक दमन से जनता में असंतोष था।
1974 में बिहार के छात्रों द्वारा शुरू किया गया आंदोलन जब व्यापक रूप ले चुका था, तब जयप्रकाश नारायण ने इसे राष्ट्रीय स्तर पर दिशा दी।
उन्होंने “सम्पूर्ण क्रांति (Total Revolution)” का नारा दिया।
यह केवल राजनीतिक आंदोलन नहीं था, बल्कि आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, शैक्षिक और नैतिक क्रांति की पुकार थी।
उन्होंने कहा — “मैं केवल सरकार बदलना नहीं चाहता, मैं मनुष्य बदलना चाहता हूँ।”
सम्पूर्ण क्रांति का यह आह्वान युवाओं के लिए प्रेरणा बना।
उन्होंने राजनीति में शुचिता, प्रशासन में पारदर्शिता और समाज में न्याय का संदेश दिया।
उनकी जनसभाओं में लाखों की भीड़ उमड़ती थी, और हर व्यक्ति को लगता था कि जयप्रकाश उनकी अपनी आवाज़ हैं।
आपातकाल : लोकतंत्र की परीक्षा और लोकनायक की जेल यात्रा
इंदिरा गांधी सरकार के समय जब आंदोलन व्यापक हुआ, तब 1975 में देश में आपातकाल (Emergency) घोषित किया गया।
जयप्रकाश नारायण को गिरफ्तार कर कई महीनों तक बंदी रखा गया।
उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती रही, पर उन्होंने झुकने से इंकार कर दिया।
उन्होंने कहा — “लोकतंत्र को अगर बचाना है, तो जनता को जागना ही होगा।”
उनकी गिरफ्तारी ने पूरे देश में जनतांत्रिक चेतना को जगा दिया।
जब 1977 में आपातकाल समाप्त हुआ, तब जनता पार्टी सत्ता में आई।
यह वही समय था जब लोकनायक का सपना साकार हुआ — सत्ता जनता के दबाव से बदली, तानाशाही झुकी।
विचारधारा : लोकशक्ति में आस्था और नैतिक राजनीति जयप्रकाश नारायण का राजनीतिक दर्शन “लोकशक्ति” पर आधारित था।
उनका मानना था कि असली शक्ति जनता के भीतर है, न कि संसद या शासन में।
उनकी सोच समाजवादी थी, लेकिन अहिंसक और लोकतांत्रिक तरीकों पर आधारित।

वे कहते थे — “सच्चा समाजवाद वही है जिसमें हर व्यक्ति को गरिमा, शिक्षा और अवसर मिले।”
उनकी विचारधारा ने भारत की राजनीति में नैतिक पुनर्जागरण का कार्य किया।
उन्होंने सत्ता की बजाय सेवा को सर्वोच्च माना।
उनके लिए “राजनीति” केवल पद प्राप्ति नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण का माध्यम थी।
मृत्यु : एक लोकनायक का अंत, लेकिन विचारों का आरंभ लंबे समय से अस्वस्थ रहने के बाद 8 अक्टूबर 1979 को जयप्रकाश नारायण का निधन पटना, बिहार में हुआ।
उनकी उम्र उस समय 76 वर्ष थी।
दिलचस्प बात यह है कि कुछ महीने पहले, मार्च 1979 में प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने गलती से उनकी मृत्यु की घोषणा कर दी थी — जो बाद में असत्य निकली।
उनके निधन के बाद पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई।
पटना में उनका अंतिम संस्कार हुआ, जहाँ लाखों लोग उमड़े।
लोग रो रहे थे, पर गर्व भी कर रहे थे कि उन्होंने ऐसा लोकनायक देखा जिसने सच्चे अर्थों में “जनता की आत्मा को जीवित किया।”
विरासत : आज भी जिंदा है लोकनायक की क्रांति
जयप्रकाश नारायण केवल एक नाम नहीं, बल्कि एक विचार हैं —
एक ऐसा विचार जो हर बार उभरता है जब देश में लोकतंत्र खतरे में पड़ता है।
उनकी विरासत हमें सिखाती है कि :सत्ता परिवर्तन से ज़्यादा ज़रूरी है व्यवस्था परिवर्तन।
युवाओं को केवल नौकरी नहीं, नैतिक चेतना और सामाजिक ज़िम्मेदारी की ज़रूरत है।
लोकतंत्र की रक्षा केवल संविधान से नहीं, बल्कि जनता की सतर्कता से होती है।
उनकी सोच आज भी सामाजिक आंदोलनों, जन अभियानों और लोकतांत्रिक बहसों में प्रेरणा बनती है।
जयप्रकाश – एक विचार जो अमर रहेगा जयप्रकाश नारायण ने उस दौर में चेतावनी दी थी जब देश लोकतांत्रिक संकट से गुजर रहा था।
उनकी सम्पूर्ण क्रांति केवल अतीत की कहानी नहीं, बल्कि वर्तमान की आवश्यकता है।
आज जब समाज फिर से विभाजन, भ्रष्टाचार और असमानता से जूझ रहा है —तो लोकनायक की आवाज़ हमें याद दिलाती है कि“हर नागरिक अगर सजग हो जाए, तो कोई भी सत्ता अमर नहीं रह सकती।”

जयप्रकाश नारायण का जीवन इस बात का प्रमाण है कि सच्ची क्रांति बंदूकों से नहीं, विचारों से होती है।

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आइए जानते है 11 अक्टूबर का इतिहास

जयप्रकाश नारायण, अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस और ऐतिहासिक घटनाओं की अनमोल गाथा


🟣 अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस (International Day of the Girl Child)
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2011 में 11 अक्टूबर को अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस घोषित किया था। इस दिवस का उद्देश्य विश्वभर में लड़कियों के अधिकारों को बढ़ावा देना और शिक्षा, स्वास्थ्य व समानता के अवसरों में सुधार लाना है। इसकी शुरुआत 1997 के उस अभियान से हुई थी, जिसने पहली बार “गर्ल चाइल्ड एम्पावरमेंट” की अवधारणा को वैश्विक मंच पर रखा।
🟢 जयप्रकाश नारायण का जन्म (1902)
11 अक्टूबर 1902 को बिहार के सिताबदियारा में स्वतंत्रता सेनानी और समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण का जन्म हुआ। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और 1974 में संपूर्ण क्रांति आंदोलन के माध्यम से भारतीय राजनीति को नई दिशा दी। “लोकनायक” के रूप में विख्यात, उन्होंने लोकतंत्र की रक्षा और जनता के अधिकारों की लड़ाई में अपना जीवन समर्पित किया।
🔵 कश्मीर घाटी में पहली रेलगाड़ी (2008)
11 अक्टूबर 2008 को प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने कश्मीर घाटी में पहली बार रेल सेवा का उद्घाटन किया। यह रेलगाड़ी अंनतनाग से मझोम के बीच चली, जिसने क्षेत्र को देश के मुख्य रेल नेटवर्क से जोड़ा। यह कदम न केवल विकास का प्रतीक बना, बल्कि कश्मीर में शांति और प्रगति की नई राह भी खोली।
🟠 कलकत्ता का विनाशकारी चक्रवात (1737)
11 अक्टूबर 1737 को कलकत्ता (कोलकाता) में एक भीषण चक्रवात ने तबाही मचाई। इस आपदा में करीब 3 लाख लोगों की मृत्यु हुई और शहर का बड़ा हिस्सा जलमग्न हो गया। इसे भारतीय उपमहाद्वीप की सबसे भयानक प्राकृतिक आपदाओं में से एक माना जाता है। इस त्रासदी ने पूर्वी भारत में मौसम और आपदा प्रबंधन की आवश्यकता पर ध्यान केंद्रित किया।
🟡 थॉमस एडिसन का पहला पेटेंट (1869)
11 अक्टूबर 1869 को महान वैज्ञानिक थॉमस अल्वा एडिसन ने अपने पहले आविष्कार के लिए पेटेंट आवेदन किया था। यह कदम आधुनिक तकनीकी क्रांति की शुरुआत साबित हुआ। आगे चलकर एडिसन ने बिजली के बल्ब, फोनोग्राफ और मोशन पिक्चर कैमरा जैसे आविष्कारों से दुनिया को बदल दिया।
🔴 वुचांग विद्रोह की शुरुआत (1911)
11 अक्टूबर 1911 को चीन में वुचांग विद्रोह शुरू हुआ, जिसने मांचू (Qing) वंश के पतन और चीन गणराज्य (Republic of China) की स्थापना की नींव रखी। यह विद्रोह एशिया में लोकतांत्रिक आंदोलनों के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुआ।
🟤 अन्य उल्लेखनीय घटनाएँ
🖋️ 2001: प्रसिद्ध लेखक वी.एस. नायपॉल को साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला।
📚 2007: ब्रिटिश लेखिका डोरिस लेसिंग को साहित्य के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
💻 1999: एनवीडिया ने GeForce 256 GPU लॉन्च किया, जिसने डिजिटल ग्राफिक्स की दुनिया बदल दी।
🏏 2000: दक्षिण अफ्रीकी कप्तान हैंसी क्रोनिए पर मैच फिक्सिंग के चलते आजीवन प्रतिबंध लगा।
11 अक्टूबर का दिन इतिहास, विज्ञान, समाज और संस्कृति के महत्वपूर्ण मील के पत्थरों का प्रतीक है। यह तिथि हमें स्वतंत्रता, नवाचार और समानता के आदर्शों को याद दिलाती है, जो मानव सभ्यता की प्रगति की आधारशिला हैं।

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भोपाल में पुलिस की बर्बरता! DSP के साले की पिटाई से मौत, CCTV फुटेज में कैद हुई पूरी वारदात

भोपाल/मध्य प्रदेश (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से पुलिस बर्बरता का एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है।
यहां गश्त पर निकली पुलिस ने एक युवक को बीच सड़क पर बेरहमी से पीटा, जिसके बाद उसकी मौत हो गई।
मृतक की पहचान उदित गायके के रूप में हुई है, जो बालाघाट में पदस्थ एक DSP का साला बताया जा रहा है।
पूरी घटना CCTV कैमरे में कैद हो गई है, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है।

बीच सड़क पर हुई बेरहमी से पिटाई

जानकारी के मुताबिक, पुलिस गश्त के दौरान कुछ युवकों को रोका गया।
इसी दौरान उदित गायके को खड़ा कर पुलिसकर्मी दोनों हाथों पर लगातार डंडे बरसाते नजर आए।
मौके पर मौजूद उसके दोस्तों ने पुलिस से उसे छोड़ने की गुहार लगाई, लेकिन किसी ने बात नहीं सुनी।

अस्पताल में तोड़ा दम

पिटाई के बाद उदित की हालत बिगड़ गई।
उसे तुरंत एम्स भोपाल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
परिवार का आरोप है कि उदित पूरी तरह स्वस्थ था और उसकी मौत पुलिस की क्रूर मारपीट के कारण हुई।

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पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से खुलेगा मौत का सच

डीसीपी जोन-2 विवेक सिंह ने बताया कि मौत के कारणों की सच्चाई पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगी।
उन्होंने कहा –

“अगर रिपोर्ट में चोटों के कारण मौत की पुष्टि होती है, तो संबंधित पुलिसकर्मियों पर हत्या का मामला दर्ज किया जाएगा।”

उन्होंने बताया कि जांच की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए डॉक्टरों का पैनल गठित किया गया है और पोस्टमॉर्टम की वीडियोग्राफी भी करवाई जा रही है।

परिजनों ने की इंसाफ की मांग

मृतक उदित गायके के मामा योगेश गावंडे ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
उन्होंने कहा –

“उदित हमारा इकलौता भांजा था, बहुत लाड़-प्यार से पाला था। उसकी ऐसी मौत किसी को न देखनी पड़े। दोषी पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा मिलनी चाहिए।”

परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने घटना को छिपाने की कोशिश की, लेकिन CCTV फुटेज के सामने आने के बाद सारा सच उजागर हो गया।

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भोपाल पुलिस पर उठे सवाल, सोशल मीडिया पर न्याय की मांग

मामले ने भोपाल पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
CCTV वीडियो सामने आने के बाद लोग सोशल मीडिया पर पुलिस कार्रवाई की निंदा कर रहे हैं और #JusticeForUdit ट्रेंड कर रहा है।
फिलहाल पुलिस ने कहा है कि मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है, जिसमें “कथित डिमांड” वाले पहलू की भी पड़ताल होगी।

🌟 आज इन मूलांक वालों पर बरसेगी लक्ष्मी कृपा, खुलेंगे भाग्य के द्वार

पंडित प्रमोद मिश्र का अंक राशिफल

Aaj Ka Ank Jyotish 11 October 2025: जानिए अंक 1 से 9 तक के जातकों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन

आज का अंक ज्योतिष 11 अक्टूबर 2025 | Pandit Pramod Mishra Numerology Prediction Today


अंक ज्योतिष व्यक्ति के जीवन का दर्पण है। जैसे ग्रह-नक्षत्र किसी की कुंडली को दिशा देते हैं, वैसे ही जन्मतिथि के अंक भाग्य का नक्शा बनाते हैं। अगर आप जानना चाहते हैं कि आज भाग्य आपके साथ कैसा रहेगा, तो पंडित प्रमोद मिश्र आपको बताते हैं — 11 अक्टूबर का दैनिक अंक राशिफल।
मूलांक 1 (जन्म तारीख 1, 10, 19, 28)
आज का दिन आपके आत्मविश्वास को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। आप किसी रचनात्मक कार्य से नाम कमाएंगे। व्यवसाय में धन की स्थिति सुदृढ़ होगी। स्वास्थ्य को लेकर थोड़ी सतर्कता जरूरी है। साहित्य, लेखन या कला के क्षेत्र में आपकी पहचान बढ़ेगी।
💠 भाग्यशाली रंग: सुनहरा
💠 धन योग: उच्च लाभ की संभावना
मूलांक 2 (जन्म तारीख 2, 11, 20, 29)
आज का दिन भावनात्मक रूप से गहरा रहेगा। पारिवारिक जिम्मेदारियाँ निभाने में सुकून महसूस करेंगे। माता से सहयोग मिलेगा। किसी नए रिश्ते या अवसर की शुरुआत संभव है। कार्यस्थल पर संयम और धैर्य आवश्यक है।
💠 भाग्यशाली रंग: सफेद
💠 धन योग: मध्यम लेकिन स्थिर
मूलांक 3 (जन्म तारीख 3, 12, 21, 30)
आपकी मेहनत रंग लाएगी। रुके हुए कार्य पूरे होंगे। अपनी बात सोच-समझकर कहें, वरना गलतफहमी हो सकती है। निवेश में लाभ संभव है। प्रेम जीवन में उत्साह रहेगा।
💠 भाग्यशाली रंग: नीला
💠 धन योग: शेयर मार्केट में लाभ की संभावना
मूलांक 4 (जन्म तारीख 4, 13, 22, 31)
आज आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें, लेकिन बहस से बचें। कुछ लोग आपके प्रयासों का गलत अर्थ निकाल सकते हैं। आर्थिक स्थिति सामान्य रहेगी। रिश्तों में स्पष्टता बनाए रखें।
💠 भाग्यशाली रंग: ग्रे
💠 धन योग: खर्च बढ़ सकते हैं, संयम रखें
मूलांक 5 (जन्म तारीख 5, 14, 23)
आज आपकी वाणी में जादू रहेगा। पब्लिक प्लेटफॉर्म या सामाजिक कार्यों में आपकी प्रशंसा होगी। बैंक बैलेंस में वृद्धि संभव है। पारिवारिक माहौल में हल्की असहमति रह सकती है।
💠 भाग्यशाली रंग: हरा
💠 धन योग: अत्यधिक शुभ, आर्थिक वृद्धि के संकेत
मूलांक 6 (जन्म तारीख 6, 15, 24)
आपका आकर्षण लोगों को अपनी ओर खींचेगा। समाज सेवा या सामूहिक कार्यों में भागीदारी बढ़ेगी। स्वास्थ्य में सुधार होगा। जीवनसाथी से संबंध मधुर बनेंगे।
💠 भाग्यशाली रंग: गुलाबी
💠 धन योग: लाभ का प्रबल योग
मूलांक 7 (जन्म तारीख 7, 16, 25)
आज आपको अपनी सूझ-बूझ पर भरोसा रखना चाहिए। व्यावसायिक क्षेत्र में विस्तार की संभावना है। अनावश्यक विवादों से दूरी बनाएं। प्रियजनों से संवाद बढ़ाएं, रिश्तों में मिठास आएगी।
💠 भाग्यशाली रंग: बैंगनी
💠 धन योग: स्थिर लाभ
मूलांक 8 (जन्म तारीख 8, 17, 26)
धैर्य और मेहनत आज आपकी पहचान बनेंगे। विरोधी सक्रिय रहेंगे, पर आप बुद्धिमानी से हर स्थिति को संभाल लेंगे। आय में थोड़ी कमी संभव है, पर सप्ताहांत तक सुधार होगा।
💠 भाग्यशाली रंग: काला
💠 धन योग: मेहनत के अनुपात में लाभ
मूलांक 9 (जन्म तारीख 9, 18, 27)
आपका आत्मबल आज सबका ध्यान खींचेगा। बच्चों की ओर से कोई शुभ समाचार मिलेगा। प्रेम जीवन मधुर रहेगा। सेहत और आत्मविश्वास दोनों मजबूत रहेंगे। यह समय आपके नाम और प्रतिष्ठा को बढ़ाने वाला है।
💠 भाग्यशाली रंग: लाल
💠 धन योग: उच्च स्तर पर सफलता
🪔 पंडित प्रमोद मिश्र की सलाह:
“संख्याएँ सिर्फ गिनती नहीं, यह आपके कर्मों का प्रतिबिंब हैं। आज जो सोचोगे, वही कल फल के रूप में सामने आएगा। सकारात्मक रहें और विश्वास बनाए रखें।”

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प्रेमिका को जहर पिलाने का आरोप, मां ने प्रेमी और परिजनों पर लगाया गंभीर आरोप, जांच के आदेश

बरेली/नवाबगंज (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश के नवाबगंज थाना क्षेत्र से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक छात्रा की मां ने उसकी बेटी के प्रेमी और उसके परिजनों पर मारपीट कर जहरीला पदार्थ पिलाने का गंभीर आरोप लगाया है।

शुक्रवार को पीड़िता की मां ने एसएसपी को शिकायती पत्र देकर कार्रवाई की मांग की। शिकायत पर एसपी दक्षिणी ने हाफिजगंज पुलिस को जांच कर रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश दिए हैं।

शादी का झांसा देकर बुलाया, फिर दी यातना – मां का आरोप

पीड़िता की मां के अनुसार, 8 अक्टूबर को उसकी बेटी जनपद पीलीभीत के बीसलपुर थाना क्षेत्र के एक युवक के साथ बरेली गई थी। दोनों के बीच पहले से जान-पहचान थी।
आरोप है कि युवक ने शादी का झांसा देकर अपनी मौसी के घर बुलाया और वहां अपने परिजनों के साथ मिलकर युवती की पिटाई की और उसे जहर पिला दिया।

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अस्पताल में इलाज के दौरान दर्ज हुए बयान

घटना के बाद छात्रा की हालत बिगड़ने पर उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया।
इलाज के दौरान पुलिस और मजिस्ट्रेट ने उसके बयान दर्ज किए।
पीड़िता की मां का आरोप है कि रात में आरोपी युवक उसे अस्पताल से जबरन छुट्टी कराकर ले गया।

पुलिस को दी सूचना, हुई कार्रवाई

बताया गया कि जब युवक छात्रा को लेकर कस्बे के पटेल चौक पहुंचा, तो छात्रा ने मौका पाकर डायल 112 पुलिस को सूचना दी।
सूचना पर पहुंची पुलिस ने छात्रा और आरोपी युवक दोनों को कोतवाली नवाबगंज ले जाकर पूछताछ की।

जांच के आदेश, पुलिस सक्रिय

एसएसपी को दिए गए शिकायती पत्र पर एसपी दक्षिणी ने जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।
थाना हाफिजगंज पुलिस मामले की जांच में जुट गई है और जल्द ही इस पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई करने की बात कही है।

नोबेल प्राइज 2025: किसी ने कॉल काटा, किसी के दरवाजे पर सुबह हुई दस्तक – ऐसे मिली विजेताओं को जीत की खबर

वर्ल्ड (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)।हर साल की तरह इस बार भी अक्टूबर की शुरुआत नोबेल पुरस्कारों (Nobel Prize 2025) की घोषणाओं से हुई। विज्ञान, साहित्य, शांति और अर्थशास्त्र जैसे क्षेत्रों में असाधारण योगदान देने वाले प्रतिभाओं के नाम घोषित किए गए।
लेकिन इस साल सिर्फ विजेताओं के नाम ही नहीं, बल्कि उन तक यह खबर पहुंचने के दिलचस्प तरीके भी सुर्खियों में हैं। किसी के दरवाजे पर सुबह 4 बजे दस्तक हुई, किसी ने स्वीडन से आया कॉल स्पैम समझकर काट दिया, तो किसी को जंगलों के बीच घंटों बाद अपनी जीत की जानकारी मिली।

सुबह-सुबह दरवाजे पर हुई दस्तक से मिली नोबेल की खबर

सीएटल की वैज्ञानिक मैरी ई. ब्रंकॉव के घर सुबह 4 बजे किसी ने दस्तक दी। पहले उनका कुत्ता ज़ेल्डा भौंका, फिर दरवाजे पर मौजूद एसोसिएटेड प्रेस की फोटोग्राफर ने उनके पति रॉस कॉलक्व्हौन को बताया –
“आपकी पत्नी ने नोबेल प्राइज जीता है।”
पहले तो मैरी को यह मजाक लगा, लेकिन जल्द ही पुष्टि हुई कि वे 2025 के चिकित्सा (Medicine) क्षेत्र की विजेताओं में शामिल हैं।

ब्रंकॉव और उनकी टीम ने पेरिफेरल इम्यून टॉलरेंस नामक उस जैविक प्रक्रिया की खोज की थी जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (immune system) को संतुलित रखती है। यह खोज डायबिटीज, लूपस और रूमेटाइड आर्थराइटिस जैसी बीमारियों को समझने में अहम रही है।

जंगल में छुट्टियों के बीच मिली नोबेल की खबर

इसी टीम के सदस्य फ्रेड राम्सडेल उस वक्त येलोस्टोन नेशनल पार्क में छुट्टियां मना रहे थे। उनका फोन एयरप्लेन मोड में था, इसलिए घंटों तक उन्हें खबर नहीं मिली कि वे भी नोबेल विजेता बन चुके हैं।
जब उनकी पत्नी के फोन पर बधाई संदेशों की बाढ़ आई, तभी उन्हें पता चला कि उन्होंने दुनिया का सबसे बड़ा वैज्ञानिक सम्मान जीत लिया है।

कंप्यूटर खोलकर खुद देखा नाम

भौतिकी (Physics) के नोबेल विजेता जॉन मार्टिनिस उस वक्त सो रहे थे जब उनकी पत्नी ने सुबह-सुबह दरवाजा खोला।
उन्होंने सोचा शायद कोई इंटरव्यू लेने आया है, लेकिन जब कंप्यूटर खोला तो नोबेल प्राइज वेबसाइट पर अपना नाम देखा और हैरान रह गए।
मार्टिनिस ने बताया –
“मैंने देखा मेरा नाम मिशेल डेवोरेट और जॉन क्लार्क के साथ लिखा था। यह मेरे लिए एक सपने जैसा पल था।”
इन तीनों को क्वांटम टनलिंग (Quantum Tunneling) पर शोध के लिए यह पुरस्कार मिला, जिसने डिजिटल टेक्नोलॉजी और क्वांटम कंप्यूटिंग की दिशा बदल दी।

‘नोबेल प्राइज’ वाली कॉल समझी स्पैम

हर साल नोबेल कमेटी औपचारिक घोषणा से पहले विजेताओं को कॉल करके सूचना देती है। लेकिन इस बार कई लोगों ने इसे स्पैम कॉल समझकर अनदेखा कर दिया।
रसायन विज्ञान (Chemistry) के विजेता सुसुमु कितागावा ने बताया –
“मैंने फोन कुछ रुखे अंदाज़ में उठाया, यह सोचकर कि शायद फिर कोई टेलीमार्केटिंग कॉल होगी। बाद में जब दोबारा कॉल आई, तब समझ आया कि यह तो नोबेल कमेटी थी।”

दिलचस्प कहानियों से भरा नोबेल 2025

इस बार के नोबेल पुरस्कार सिर्फ शोध और उपलब्धियों की वजह से नहीं, बल्कि विजेताओं तक पहुंचने वाली अनोखी खबरों के लिए भी याद रखे जाएंगे।
कभी दरवाजे की दस्तक, कभी जंगल में संदेश, और कभी एक अनदेखी कॉल –
नोबेल प्राइज 2025 ने दुनिया को फिर दिखाया कि महानता अक्सर सबसे अनपेक्षित क्षणों में दस्तक देती है।

भारत के पास 34,600 टन सोना, 3,785 अरब डॉलर मूल्य; जीडीपी के 89% के बराबर

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा, बिज़नेस डेस्क)। मॉर्गन स्टेनली की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, भारत के पास जून 2025 तक 34,600 टन सोना है, जिसका अनुमानित मूल्य 3,785 अरब डॉलर (लगभग ₹316 लाख करोड़) है। यह आंकड़ा देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का करीब 88.8 प्रतिशत है।

वर्तमान बाजार मूल्य पर यह सोना भारतीय परिवारों के पास मौजूद इक्विटी स्टॉक होल्डिंग (1,185 अरब डॉलर) से लगभग 3.1 गुना अधिक है।

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना बाजार

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) के अनुसार, जून 2025 तक भारत की वैश्विक सोने की मांग में 26% हिस्सेदारी रही है। पांच साल का औसत 23% रहा, जिससे भारत चीन (28%) के बाद दूसरे स्थान पर है।

भारत में सोने की मांग में दो-तिहाई हिस्सा आभूषणों का है, जबकि छड़ों और सिक्कों का हिस्सा पिछले पांच वर्षों में 23.9% से बढ़कर 32% तक पहुंच गया है।

वार्षिक खपत 840 टन तक सीमित, लेकिन मूल्य में रिकॉर्ड वृद्धि

वॉल्यूम के लिहाज से भारत की वार्षिक सोने की खपत 2021 से 750 से 840 टन के बीच रही है। हालांकि, घरेलू सोने की कीमतों में उछाल के कारण मूल्य के आधार पर खपत जून 2025 में रिकॉर्ड 68 अरब डॉलर तक पहुंच गई, जबकि जून 2023 में यह 44 अरब डॉलर थी।

घरेलू बचत में घटा जमा का हिस्सा, इक्विटी में बढ़त

रिपोर्ट के अनुसार, 2024-25 में घरेलू वित्तीय बचत में जमा की हिस्सेदारी 35% रह गई, जो 2023-24 में 40% और महामारी से पहले 46% थी।
वहीं, इक्विटी निवेश का हिस्सा रिकॉर्ड 15.1% तक बढ़ गया है, जो 2023-24 में 8.7% और महामारी से पहले लगभग 4% था।

घरेलू परिवारों की संपत्ति संरचना (2024-25)

संपत्ति वर्गबचत (%)मूल्य (अरब डॉलर)हिस्सा (%)
भौतिक संपत्ति51.311,18367.4
सोना6.23,68222.2
प्रॉपर्टी45.17,50145.2
वित्तीय संपत्ति48.75,40832.6
मुद्रा4.44062.4
जमा20.41,88711.4
कांट्रैक्चुअल निवेश17.41,6099.7
इक्विटी3.21,1857.1

(कांट्रैक्चुअल निवेश में बीमा, मॉर्गेज और पेंशन फंड शामिल हैं।)

क्यों बढ़ रही है भारत में सोने की मांग

विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में सोना केवल एक निवेश नहीं बल्कि सांस्कृतिक विरासत और सुरक्षा का प्रतीक है। महंगाई से बचाव, मूल्य के भंडार और सुरक्षित संपत्ति के रूप में सोने की भूमिका ने इसे भारतीय परिवारों के लिए अमूल्य संपत्ति बना दिया है।
भारत के पास मौजूद 34,600 टन सोना न केवल एक आर्थिक संपत्ति है, बल्कि यह देश की सांस्कृतिक और पारिवारिक स्थिरता का भी प्रतीक है।

मेडिकल कॉलेज में मिला अशोक गावंडे का शव: पत्नी ले गई पार्थिव देह, टंकी तक पहुंचने का रहस्य बरकरार

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। देवरिया के महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज की पांचवीं मंजिल की पानी की टंकी में सोमवार को महाराष्ट्र निवासी अशोक गावंडे का शव मिलने से सनसनी फैल गई थी।
तीन दिन बाद पत्नी अनीता गावंडे और साले प्रफुल्ल नागरकर ने शुक्रवार को शव की पहचान की और पोस्टमार्टम के बाद उसे अपने साथ ले गईं।

अब भी सबसे बड़ा सवाल यही है — अशोक वार्ड से पानी की टंकी तक कैसे पहुंचा?
पुलिस की जांच के बावजूद इस रहस्य से पर्दा नहीं उठ पाया है।

वार्ड से टंकी तक का रास्ता बना पहेली

मेडिकल कॉलेज परिसर में सोमवार को पानी टंकी में शव मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की।
CCTV फुटेज और मेडिकल रिकॉर्ड की जांच से मृतक की पहचान अशोक गावंडे (उम्र लगभग 60 वर्ष, निवासी ठाणे, महाराष्ट्र) के रूप में हुई।
पुलिस की दो टीमें — एक मुंबई और दूसरी गोरखपुर — पता सत्यापन के लिए भेजी गईं।

साला प्रफुल्ल नागरकर और पत्नी अनीता गावंडे शुक्रवार को देवरिया पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे और शव की पहचान की।
पोस्टमार्टम के बाद शव को पत्नी के सुपुर्द कर दिया गया।

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हत्या या हादसा? पुलिस उलझन में

अशोक की पत्नी ने अभी तक कोई तहरीर नहीं दी है, लेकिन पुलिस ने हत्या की आशंका से इंकार नहीं किया है।
साले प्रफुल्ल ने बताया कि

“अशोक मानसिक रूप से अस्वस्थ थे और उनके पैर में घाव था, वे ऊंचाई पर अकेले नहीं चढ़ सकते थे। पानी की टंकी की तस्वीरें देखकर साफ है कि वहां तक पहुंचना उनके लिए लगभग असंभव था।”

उन्होंने आशंका जताई कि यह मामला हत्या का हो सकता है, मगर पुलिस इसे पारिवारिक विवाद से जोड़कर देख रही है।

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पुलिस जांच जारी

सीओ सिटी संजय रेड्डी ने बताया कि

“पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी कराई गई है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन से रिकॉर्ड मांगा गया है। अभी तक तहरीर नहीं मिली है। तहरीर मिलने पर केस दर्ज किया जाएगा।”

पुलिस ने अशोक के भाई से भी संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन परिवार का कोई सदस्य देवरिया नहीं पहुंचा।
अब पुलिस अशोक के मेडिकल और व्यक्तिगत इतिहास की भी जांच कर रही है।

सपा मुखिया अखिलेश यादव का फेसबुक पेज अचानक बंद, कारण अब तक स्पष्ट नहीं…..

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव का फेसबुक पेज शुक्रवार शाम अचानक बंद कर दिया गया। शाम करीब 6 बजे के बाद से पेज एक्सेस नहीं हो पा रहा है। इस घटना ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है।

फेसबुक पेज बंद होने का कारण अभी तक अज्ञात

अब तक इस बारे में फेसबुक की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है।
सपा सूत्रों ने बताया कि इस मामले में फेसबुक को ई-मेल भेजा गया है, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला।

कुछ राजनीतिक जानकारों का अनुमान है कि किसी विरोधी दल की शिकायत या कंटेंट से जुड़ी तकनीकी वजह से पेज अस्थायी रूप से ब्लॉक या डिसेबल किया गया हो सकता है।

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सपा ने बयान जारी नहीं किया

समाजवादी पार्टी की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान या प्रेस रिलीज़ नहीं आई है।
हालांकि, पार्टी कार्यकर्ताओं में इस घटना को लेकर नाराज़गी और चिंता दोनों देखी जा रही है।
सोशल मीडिया पर सपा समर्थक लगातार #BringBackAkhileshPage और #FBAction जैसे हैशटैग चला रहे हैं।

राजनीतिक हलचल और सोशल मीडिया पर चर्चा

अखिलेश यादव के फेसबुक पेज पर लाखों फॉलोअर्स हैं और यह पार्टी की डिजिटल रणनीति का अहम हिस्सा माना जाता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि चुनावी माहौल में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इस तरह की कार्रवाई के राजनीतिक मायने भी निकाले जा सकते हैं।

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चार आईपीएस अफसरों के तबादले, विक्रांत वीर को मिली नई तैनाती

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लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। उत्तर प्रदेश सरकार ने शुक्रवार देर रात चार आईपीएस अधिकारियों के तबादले किए हैं। इन तबादलों की अधिसूचना गृह विभाग की ओर से जारी की गई है।

आईपीएस विक्रांत वीर को राजधानी में बड़ी जिम्मेदारी

लंबे समय से प्रतीक्षारत चल रहे आईपीएस विक्रांत वीर को आखिरकार नई जिम्मेदारी मिल गई है। शासन ने उन्हें राजधानी लखनऊ में पुलिस उपायुक्त (DCP) के पद पर तैनात किया है। विक्रांत वीर पहले कई जिलों में उत्कृष्ट पुलिसिंग के लिए जाने जाते रहे हैं।

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अन्य अधिकारियों का विवरण

आशीष श्रीवास्तव, जो वर्तमान में राजधानी लखनऊ में तैनात थे, उन्हें सुरक्षा मुख्यालय (Security HQ) भेजा गया है।

अनिल कुमार सिंह, जो इटावा में पीएसी की 28वीं वाहिनी के सेनानायक थे, अब उन्हें भी सुरक्षा मुख्यालय में स्थानांतरित किया गया है।

अनिरुद्ध सिंह, जो अब तक सीआईडी (CID) में कार्यरत थे, उन्हें 28वीं वाहिनी, पीएसी इटावा का सेनानायक बनाया गया है।

सरकार का उद्देश्य: प्रशासनिक कुशलता और कानून-व्यवस्था में सुधार

सूत्रों के अनुसार, इन तबादलों का उद्देश्य राज्य की कानून-व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाना और प्रशासनिक व्यवस्था को सशक्त करना है।
प्रदेश सरकार समय-समय पर इस तरह के रूटीन ट्रांसफर करती रहती है ताकि सुरक्षा तंत्र सक्रिय और संतुलित बना रहे।

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मौसम का मिजाज बदला: ठंडी हवाओं की एंट्री, कई राज्यों में बारिश का अलर्ट!

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नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। त्योहारी सीजन से पहले भारत के मौसम ने करवट ले ली है। एक तरफ उत्तर भारत में ठंडी हवाएं दस्तक दे रही हैं, वहीं दूसरी ओर दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत में बारिश का दौर जारी है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, अगले 72 घंटों में देश के कई राज्यों में भारी बारिश, गर्जना और तेज हवाओं की संभावना है।

उत्तर भारत में ठंड की दस्तक

दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब और हरियाणा में सुबह-शाम की ठंडक अब महसूस होने लगी है।
IMD की रिपोर्ट के मुताबिक, इन राज्यों में तापमान में 2-3°C की गिरावट दर्ज की गई है।
दिल्ली-NCR में न्यूनतम तापमान 19°C के आसपास, जबकि अयोध्या, पटना और लखनऊ में हल्की धुंध के साथ मौसम सुहावना रहेगा।

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दक्षिण भारत में फिर सक्रिय हुआ मॉनसून

तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के कई इलाकों में भारी बारिश का अलर्ट जारी हुआ है।
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि मछुआरे अगले 48 घंटे तक समुद्र में न जाएं, क्योंकि बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव का क्षेत्र बन रहा है।
चेन्नई और कोच्चि में बिजली चमकने और तेज हवाओं के साथ बारिश की संभावना।

पूर्वोत्तर भारत में बारिश और भूस्खलन का खतरा

असम, मेघालय, नागालैंड और मणिपुर में लगातार बारिश से जनजीवन प्रभावित है।
कई पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन की चेतावनी जारी की गई है।
गुवाहाटी और शिलांग में आज भी भारी बारिश के आसार हैं।

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पश्चिमी और मध्य भारत में मौसम रहेगा शुष्क

राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में धूप और हल्की ठंडी हवा का मेल देखने को मिलेगा।
जयपुर और अहमदाबाद में दिन का तापमान 32°C के करीब रहेगा, जबकि रातें होंगी सुहानी।

IMD का देशव्यापी पूर्वानुमान

अगले 3 दिनों में उत्तर भारत में ठंड की शुरुआत तेज़ होगी

दक्षिण भारत में भारी बारिश, बाढ़ जैसी स्थिति की संभावना

पूर्वोत्तर राज्यों में अलर्ट, पहाड़ी इलाकों में फिसलन भरे रास्ते

दिल्ली, लखनऊ, भोपाल और पटना में हवा की गुणवत्ता मध्यम स्तर पर

आज का औसत तापमान (देशभर)

क्षेत्रअधिकतम तापमानन्यूनतम तापमानस्थिति
उत्तर भारत28–31°C17–20°Cठंडी हवाएं, हल्की धुंध
दक्षिण भारत26–30°C22–24°Cबारिश और बिजली
पूर्वोत्तर24–28°C20–22°Cभारी बारिश
पश्चिम भारत30–34°C18–21°Cसाफ आसमान
मध्य भारत29–32°C19–22°Cसुहाना मौसम

🌟 “11 अक्टूबर राशिफल 2025: किस्मत की दस्तक! आज मेष को सफलता, वृष को भाग्य का वरदान, सिंह की झोली में धनवर्षा”

मेष (Aries) — आत्मविश्वास से पाएं नई ऊंचाई
आज का दिन आपके प्रयासों को मुकाम तक पहुंचाने वाला रहेगा। लक्ष्य की ओर बढ़ते कदम सफलता से चिह्नित होंगे। सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी और परिजनों का सहयोग भाग्य को मजबूत करेगा। किसी पुरानी दुविधा का हल मिलने से राहत मिलेगी।
🔸 सावधानी: व्यर्थ के विवाद और दिखावे से दूर रहें।
💼 करियर: नए अनुबंध और अवसर प्राप्त होंगे, आर्थिक स्थिरता बनेगी।
❤️ प्रेम: दांपत्य जीवन में सामंजस्य और प्रेम बढ़ेगा।
💊 स्वास्थ्य: एसिडिटी से राहत हेतु हल्का भोजन करें।
🎨 भाग्यशाली रंग: आसमानी | 🔢 अंक: 2
वृषभ (Taurus) — भाग्य का साथ और उन्नति का संकेत
वरिष्ठों का आशीर्वाद आज आपका सबसे बड़ा बल रहेगा। आध्यात्मिक प्रवृत्ति और मानसिक संतुलन दिन को सुखद बनाएंगे। योजनाएं पूरी होंगी और किसी यात्रा से लाभ संभव है।
🔸 सावधानी: निर्णय जल्दबाजी में न लें, निवेश सोच-समझकर करें।
💼 करियर: साझेदारी में लाभ के संकेत, स्थायी सफलता मिलेगी।
❤️ प्रेम: रिश्तों में पारदर्शिता रखें, आपसी समझ बेहतर बनेगी।
💊 स्वास्थ्य: तनाव और थकान से बचें।
🎨 भाग्यशाली रंग: गुलाबी | 🔢 अंक: 4
मिथुन (Gemini) — नए अवसर और सफलता की लहर
ग्रहों की स्थिति आज आपके पक्ष में है। प्रभावशाली व्यक्तियों से संपर्क बढ़ेगा और नए अनुबंध मिलेंगे। पारिवारिक मोर्चे पर खुशी के समाचार मिलेंगे।
🔸 सावधानी: आर्थिक मामलों में सतर्क रहें, दस्तावेजों की जांच करें।
💼 करियर: व्यापार में विस्तार और नए ऑर्डर की प्राप्ति होगी।
❤️ प्रेम: संबंधों में विश्वास बढ़ेगा और रोमांस का नया दौर शुरू होगा।
💊 स्वास्थ्य: वाहन चलाते समय सावधानी रखें।
🎨 भाग्यशाली रंग: नारंगी | 🔢 अंक: 7
कर्क (Cancer) — संवेदनशीलता से मिलेगी सफलता
आज आपकी भावनात्मक समझ रिश्तों में मिठास घोलेगी। रुके हुए कार्य पूरे होंगे और पुराने मतभेद सुलझेंगे। धन लाभ के संकेत हैं।
🔸 सावधानी: उधारी के लेन-देन से दूर रहें।
💼 करियर: व्यवसाय में अस्थिरता रहेगी, धैर्य रखें।
❤️ प्रेम: पति-पत्नी के संबंध मजबूत होंगे।
💊 स्वास्थ्य: तनाव से बचें और दिनचर्या नियमित रखें।
🎨 भाग्यशाली रंग: सफेद | 🔢 अंक: 2
♌ सिंह (Leo) — इनकम में वृद्धि और सफलता के नए द्वार
आज साहस और नेतृत्व क्षमता से कार्यक्षेत्र में पहचान बढ़ेगी। अधिकारियों से सहयोग मिलेगा और आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
🔸 सावधानी: अति-आत्मविश्वास से बचें।
💼 करियर: टारगेट आसानी से पूरा होगा, लाभदायक सौदे होंगे।
❤️ प्रेम: संबंधों में गहराई और स्थिरता आएगी।
💊 स्वास्थ्य: मानसिक स्फूर्ति और ऊर्जा बनी रहेगी।
🎨 भाग्यशाली रंग: सुनहरा | 🔢 अंक: 8
कन्या (Virgo) — योजनाएं होंगी सफल, समय अनुकूल
आपकी सूझबूझ और कार्यकुशलता कठिन परिस्थितियों को सरल बनाएगी। दीर्घकालिक योजनाएं आज साकार होंगी।
🔸 सावधानी: आलोचना और बहस से बचें।
💼 करियर: व्यवसाय में नए अवसर मिलेंगे, सावधानी से आगे बढ़ें।
❤️ प्रेम: संबंधों में सौहार्द बना रहेगा।
💊 स्वास्थ्य: थकान और आंखों की जलन से राहत हेतु आराम करें।
🎨 भाग्यशाली रंग: केसरिया | 🔢 अंक: 2
तुला (Libra) — सामाजिक सम्मान और सफलता का दिन
आज भाग्य आपके साथ है। नए संपर्क लाभ देंगे और आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। समाज में प्रतिष्ठा बढ़ेगी।
🔸 सावधानी: भावनाओं में बहकर निर्णय न लें।
💼 करियर: व्यापारिक संपर्क और मार्केटिंग से फायदा होगा।
❤️ प्रेम: जीवनसाथी के स्वास्थ्य पर ध्यान दें।
💊 स्वास्थ्य: तनावमुक्त रहें, योग करें।
🎨 भाग्यशाली रंग: बादामी | 🔢 अंक: 5
वृश्चिक (Scorpio) — सफलता और धनलाभ के संकेत
आज का दिन उपलब्धियों से भरा रहेगा। महत्वपूर्ण सौदे और लाभदायक संपर्क बनेंगे। साहसिक निर्णय फायदेमंद रहेंगे।
🔸 सावधानी: अति-आत्मविश्वास नुकसान दे सकता है।
💼 करियर: बड़े ऑर्डर और नए प्रोजेक्ट मिलने की संभावना।
❤️ प्रेम: संबंधों में गहराई आएगी।
💊 स्वास्थ्य: अत्यधिक थकान से बचें।
🎨 भाग्यशाली रंग: नीला | 🔢 अंक: 9
धनु (Sagittarius) — भाग्य का साथ और शुभ समाचार
किसी विशेष व्यक्ति से मुलाकात लाभकारी रहेगी। विवाह योग्य जातकों को शुभ प्रस्ताव मिल सकता है।
🔸 सावधानी: व्यर्थ के खर्चों से बचें।
💼 करियर: निवेश सोच-समझकर करें, काम में निरंतरता रखें।
❤️ प्रेम: परिवार में प्रेम और तालमेल बढ़ेगा।
💊 स्वास्थ्य: गैस, एसिडिटी से राहत के लिए योग करें।
🎨 भाग्यशाली रंग: गुलाबी | 🔢 अंक: 1
♑ मकर (Capricorn) — अनुभव से मिलेगी दिशा, आय में वृद्धि
वरिष्ठों की सलाह आज आपके लिए वरदान साबित होगी। आपकी योजनाएं गति पकड़ेंगी और आय के नए साधन बनेंगे।
🔸 सावधानी: वाद-विवाद से दूरी बनाए रखें।
💼 करियर: मेहनत के अनुरूप परिणाम मिलेंगे।
❤️ प्रेम: परिवार में खुशहाली और सौहार्द का वातावरण रहेगा।
💊 स्वास्थ्य: पैरों की सूजन से राहत हेतु आराम करें।
🎨 भाग्यशाली रंग: हरा | 🔢 अंक: 5
कुंभ (Aquarius) — मेहनत के मीठे फल का दिन
आज आपके कार्यों का बेहतरीन परिणाम मिलेगा। निवेश में लाभ और नए अवसर मिलेंगे।
🔸 सावधानी: वाहन संबंधी परेशानियों से बचें।
💼 करियर: लाभकारी योजनाएं कार्यान्वित होंगी।
❤️ प्रेम: दांपत्य जीवन में मधुरता रहेगी।
💊 स्वास्थ्य: नियमित व्यायाम जरूरी है।
🎨 भाग्यशाली रंग: फिरोजी | 🔢 अंक:

मीन (Pisces) — विवादों में जीत, मन को मिलेगी शांति
आज कानूनी अथवा सरकारी मामलों में सफलता मिलेगी। आध्यात्मिक रुझान बढ़ेगा और आत्मबल मजबूत रहेगा।
🔸 सावधानी: दूसरों पर अत्यधिक भरोसा न करें।
💼 करियर: कार्यक्षेत्र में लाभ और स्थिरता।
❤️ प्रेम: पारिवारिक जीवन संतुलित रहेगा।
💊 स्वास्थ्य: ध्यान और योग से मानसिक शांति प्राप्त होगी।
🎨 भाग्यशाली रंग: पीला | 🔢 अंक: 3

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नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का शुभारंभ 11 से

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। समाज में भक्ति, ज्ञान और संस्कृति के संगम से आध्यात्मिक वातावरण के सृजन करने के लिए जिला मुख्यालय खलीलाबाद के औद्योगिक अस्थान स्थित भारत तिब्बत समन्वय संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री रामकुमार सिंह के आवास डी-5 पर 11 अक्टूबर से 19 अक्टूबर 2025 तक श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का भव्य आयोजन होगा।
कथा व्यास राष्ट्रीय संत बालयोगी श्री पचौरी जी महाराज (वृंदावन धाम) प्रतिदिन सायं 5 बजे 8 बजे तक भक्तों को योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का रसपान कराएंगे। कथा से पूर्व 11 अक्टूबर शनिवार को प्रातः 9 बजे दिव्य कलश यात्रा निकाली जाएगी। जबकि प्रतिदिन रात्रि 09:30 बजे आरती होगी।
कथा परीक्षित श्रीमती उर्मिला सिंह एवं श्री रामकुमार सिंह ने श्रद्धालुओं से अधिकाधिक संख्या में उपस्थित होकर कथा श्रवण कर धार्मिक आस्था, मानवीय मूल्य और सदाचार के संदेश के प्रसार का संकल्प लेने का आह्वान किया है।