Tuesday, July 7, 2026
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प्राकृतिक ग्लो के लिए दही और चावल का जादू

घर बैठे पाएं कोरियन ग्लास स्किन – दही से चमकती और स्वस्थ त्वचा का राज़


आजकल हर कोई कोरियन ग्लास स्किन पाने की चाहत रखता है। महंगे फेशियल और स्किन ट्रीटमेंट में पैसा खर्च करना आम बात हो गई है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि घर पर ही मौजूद साधारण सामग्री से भी आपकी त्वचा चमकदार, स्वस्थ और ग्लोइंग बन सकती है? दही, चावल, एलोवेरा, ग्लिसरीन और गुलाब जल से तैयार यह घरेलू स्किन टोनिक आपकी त्वचा को नया जीवन देगा। आइए जानते हैं इसे बनाने और इस्तेमाल करने की आसान विधि।
सामग्री: दही का पानी,चावल,एलोवेरा जेल,,ग्लिसरीन,गुलाब जल
बनाने की विधि:
सबसे पहले दही का पानी तैयार करें। इसके लिए ताजे दही को धूप में 2-3 दिन रखें जब तक यह पीला पानी अलग न हो जाए। फिर इसे छान लें। इस पीले पानी में चावल भिगो दें और 2 दिन तक रख दें। इसके बाद चावल निकालकर फेंक दें। अब इसमें 2 बड़े चम्मच एलोवेरा जेल, 2-2 चम्मच ग्लिसरीन और गुलाब जल मिलाएं। तैयार मिश्रण को चेहरे और पूरे शरीर पर लगाया जा सकता है। इसे 7 दिन तक नियमित इस्तेमाल करें। ध्यान रहे कि मिश्रण को कांच की शीशी में भरकर फ्रिज में रखें।
फायदे:
दही का पानी: लैक्टिक एसिड से भरपूर, यह त्वचा को एक्सफोलिएट करता है। डेड स्किन, धूल और टैनिंग हट जाती है।
चावल: इसमें मौजूद स्टार्च और अमीनो एसिड त्वचा को ब्राइट और टाइट बनाने में मदद करते हैं। यह त्वचा से अतिरिक्त तेल और गंदगी निकालता है और झुर्रियों को कम करता है।
एलोवेरा जेल: त्वचा को हाइड्रेट करता है, विटामिन ई और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर, सनबर्न और एक्ने को कम करता है।
ग्लिसरीन: ड्राईनेस को कम करता है, त्वचा की डलनेस हटाता है और फाइन लाइन्स को कम करता है।
गुलाब जल: त्वचा को रिफ्रेश करता है, लालपन और जलन को कम करता है। यह त्वचा की नमी और पीएच बैलेंस करता है।
यह नुस्खा आपके चेहरे को प्राकृतिक चमक और स्वास्थ्य प्रदान करता है। महंगे स्किन ट्रीटमेंट के बिना भी घर पर आप कोरियन ग्लास स्किन का अनुभव पा सकते हैं।
दिशानिर्देश:
राष्ट्र की परम्परा के अनुसार, इस नुस्खा को अमल में लाने से पहले किसी त्वचा विशेषज्ञ या योग्य व्यक्ति की सलाह अवश्य लें।

घर बैठे पाएं कोरियन ग्लास स्किन – दही से चमकती और स्वस्थ त्वचा का राज़
आजकल हर कोई कोरियन ग्लास स्किन पाने की चाहत रखता है। महंगे फेशियल और स्किन ट्रीटमेंट में पैसा खर्च करना आम बात हो गई है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि घर पर ही मौजूद साधारण सामग्री से भी आपकी त्वचा चमकदार, स्वस्थ और ग्लोइंग बन सकती है? दही, चावल, एलोवेरा, ग्लिसरीन और गुलाब जल से तैयार यह घरेलू स्किन टोनिक आपकी त्वचा को नया जीवन देगा। आइए जानते हैं इसे बनाने और इस्तेमाल करने की आसान विधि।
सामग्री: दही का पानी,चावल,एलोवेरा जेल,,ग्लिसरीन,गुलाब जल
बनाने की विधि:

सबसे पहले दही का पानी तैयार करें। इसके लिए ताजे दही को धूप में 2-3 दिन रखें जब तक यह पीला पानी अलग न हो जाए। फिर इसे छान लें। इस पीले पानी में चावल भिगो दें और 2 दिन तक रख दें। इसके बाद चावल निकालकर फेंक दें। अब इसमें 2 बड़े चम्मच एलोवेरा जेल, 2-2 चम्मच ग्लिसरीन और गुलाब जल मिलाएं। तैयार मिश्रण को चेहरे और पूरे शरीर पर लगाया जा सकता है। इसे 7 दिन तक नियमित इस्तेमाल करें। ध्यान रहे कि मिश्रण को कांच की शीशी में भरकर फ्रिज में रखें।
फायदे:
दही का पानी: लैक्टिक एसिड से भरपूर, यह त्वचा को एक्सफोलिएट करता है। डेड स्किन, धूल और टैनिंग हट जाती है।
चावल: इसमें मौजूद स्टार्च और अमीनो एसिड त्वचा को ब्राइट और टाइट बनाने में मदद करते हैं। यह त्वचा से अतिरिक्त तेल और गंदगी निकालता है और झुर्रियों को कम करता है।
एलोवेरा जेल: त्वचा को हाइड्रेट करता है, विटामिन ई और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर, सनबर्न और एक्ने को कम करता है।
ग्लिसरीन: ड्राईनेस को कम करता है, त्वचा की डलनेस हटाता है और फाइन लाइन्स को कम करता है।
गुलाब जल: त्वचा को रिफ्रेश करता है, लालपन और जलन को कम करता है। यह त्वचा की नमी और पीएच बैलेंस करता है।
यह नुस्खा आपके चेहरे को प्राकृतिक चमक और स्वास्थ्य प्रदान करता है। महंगे स्किन ट्रीटमेंट के बिना भी घर पर आप कोरियन ग्लास स्किन का अनुभव पा सकते हैं।
दिशानिर्देश:
राष्ट्र की परम्परा के अनुसार, इस नुस्खा को अमल में लाने से पहले किसी त्वचा विशेषज्ञ या योग्य व्यक्ति की सलाह अवश्य लें।

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राउज एवेन्यू कोर्ट का बड़ा फैसला: लालू, राबड़ी और तेजस्वी यादव के खिलाफ आरोप तय

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने आज भारतीय रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (आईआरसीटीसी) घोटाले में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और बेटे तेजस्वी यादव के खिलाफ आरोप तय करने की अनुमति दे दी है। इस फैसले को बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले लालू परिवार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि सीबीआई द्वारा की जा रही जांच में लालू और उनके परिवार पर भ्रष्टाचार और साजिश रचने के गंभीर आरोप पाए गए हैं। इसके आधार पर कोर्ट ने आरोपियों के खिलाफ अलग-अलग धाराओं में आरोप तय किए हैं।

राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव पर धोखाधड़ी और साजिश के आरोप आईपीसी की धारा 420 और 120बी के तहत लगाए गए हैं। इस मामले में आरोप है कि आईआरसीटीसी के होटलों के रखरखाव के ठेके लालू यादव से जुड़ी एक बेनामी कंपनी को तीन एकड़ कीमती जमीन के बदले में दिए गए थे।

सीबीआई ने 7 जुलाई 2017 को इस मामले में एफआईआर दर्ज की थी और लालू परिवार से जुड़े पटना, नई दिल्ली, रांची और गुरुग्राम के 12 ठिकानों पर छापेमारी की थी। सीबीआई का कहना है कि आरोप तय करने के लिए उनके पास पर्याप्त सबूत मौजूद हैं। वहीं लालू यादव के वकील का तर्क है कि इस मामले में मुकदमा चलाने का कोई वैधानिक आधार नहीं है।

कोर्ट द्वारा आरोप तय किए जाने के बाद लालू प्रसाद यादव ने कहा, “मैं दोषी नहीं हूं।” जबकि राबड़ी देवी ने स्पष्ट किया, “मैं किसी साजिश या धोखाधड़ी में शामिल नहीं हूं।”

यह मामला न सिर्फ बिहार के राजनीतिक परिदृश्य में हलचल पैदा कर रहा है, बल्कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजद के लिए नई चुनौतियां भी खड़ी कर रहा है।

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गीता वाटिका के सामने बैक करते समय नाले में गिरा डंपर, भारी जाम से शहरवासियों को परेशानी

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)।
सोमवार की सुबह गोरखपुर शहर में उस वक्त अफरातफरी का माहौल बन गया जब असुरन थाना क्षेत्र स्थित गीता वाटिका के सामने एक डंपर सड़क पर बैक करते समय अचानक नियंत्रण खो बैठा और सीधे नाले में जा गिरा।
हालांकि, गनीमत रही कि इस हादसे में किसी की जान नहीं गई, लेकिन इस दुर्घटना के चलते शहर के इस व्यस्त मार्ग पर लगभग डेढ़ घंटे तक भारी जाम लगा रहा।

कैसे हुआ हादसा

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सुबह करीब साढ़े नौ बजे के आसपास डंपर चालक सड़क पर वाहन को बैक कर रहा था। इसी दौरान संतुलन बिगड़ गया और भारी वाहन धीरे-धीरे पीछे खिसकते हुए नाले में जा धंसा।
हादसे की तेज आवाज सुनते ही आसपास के लोग मौके पर दौड़े और तत्काल चालक को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

पुलिस ने संभाली स्थिति

घटना की सूचना मिलते ही असुरन थाने की पुलिस और ट्रैफिक पुलिस मौके पर पहुंची। नाले में फंसे डंपर को बाहर निकालने के लिए दो बड़ी क्रेनें बुलाई गईं।
बचाव कार्य और क्रेन संचालन के दौरान सड़क पूरी तरह से जाम हो गई, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
पुलिसकर्मियों ने बारी-बारी से वाहनों को निकालने का प्रयास किया और लगभग डेढ़ घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद डंपर को बाहर निकालकर मार्ग को फिर से सुचारू कर दिया गया।

पुलिस जांच जारी

असुरन पुलिस ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि चालक ने बैक करते समय सही अनुमान नहीं लगाया, जिसके कारण यह हादसा हुआ। चालक से पूछताछ की जा रही है और वाहन को कब्जे में लेकर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

स्थानीयों की नाराज़गी

स्थानीय नागरिकों ने इस हादसे को सड़क किनारे बने खुले नालों की लापरवाही बताया। उन्होंने नगर निगम और प्रशासन से मांग की है कि सड़क के दोनों ओर बने नालों को ढकवाया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी दुर्घटनाएं न हों।

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मिशन शक्ति फेज-5 के तहत कक्षा 10 की छात्रा बनी एक दिन की एसडीएम

महिलाओं के सशक्तिकरण की मिसाल बनी श्री पाण्डेय

सलेमपुर/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)।
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और सशक्तिकरण को लेकर चलाए जा रहे मिशन शक्ति फेज-5 अभियान के अंतर्गत सोमवार को एक अनोखी पहल देखने को मिली। इस अभियान के तहत मझौली राज वार्ड नंबर 7 निवासी श्री पाण्डेय पुत्री रवि प्रकाश पाण्डेय, जो कि कक्षा 10वीं की छात्रा हैं, को एक दिन का उपजिलाधिकारी (एसडीएम) बनने का अवसर प्रदान किया गया।

सुबह निर्धारित समय पर सलेमपुर तहसील पहुंचने के बाद श्री पाण्डेय ने बाकायदा उपजिलाधिकारी की कुर्सी संभाली और वहां उपस्थित कर्मचारियों तथा फरियादियों से रूबरू हुईं। उन्होंने सैकड़ों लोगों की समस्याएं सुनीं, कई मामलों में तत्काल आवश्यक निर्देश भी जारी किए। उनकी इस आत्मविश्वासपूर्ण कार्यशैली और निर्णय क्षमता को देखकर तहसील कर्मियों समेत उपस्थित लोगों ने उनकी सराहना की।

इस दौरान वास्तविक उपजिलाधिकारी दिशा श्रीवास्तव पूरी प्रक्रिया में उनके साथ रहीं और उन्हें प्रशासनिक कार्यों की बारीकियों से अवगत कराती रहीं। नायब तहसीलदार गोपाल जी भी मौके पर मौजूद रहे और कार्यक्रम के सुचारू संचालन में सहयोग दिया।

कार्यक्रम के दौरान श्री पाण्डेय ने कहा कि “यह मेरे लिए बहुत गर्व और प्रेरणा का क्षण है। मिशन शक्ति जैसी पहल से हमें यह विश्वास मिलता है कि यदि अवसर मिले तो बेटियां भी प्रशासनिक स्तर पर उत्कृष्ट कार्य कर सकती हैं।”

उपजिलाधिकारी दिशा श्रीवास्तव ने बताया कि मिशन शक्ति फेज-5 के तहत यह प्रयास इस उद्देश्य से किया जा रहा है कि बेटियों में आत्मविश्वास बढ़े और वे प्रशासनिक सेवा जैसे क्षेत्रों में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर सकें।

इस अवसर पर तहसील परिसर में मौजूद महिला कर्मियों और स्थानीय लोगों ने श्री पाण्डेय को बधाई दी और उनके उज्जवल भविष्य की कामना की।

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दुष्कर्म और अश्लील फोटो वायरल करने की धमकी देने वाला आरोपी गिरफ्तार

वर्ष 2022 से था फरार, ऊंचे रसूख के दम पर पुलिस की पकड़ से था दूर

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)।
मिशन शक्ति 5.0 के तहत चलाए जा रहे अभियान के क्रम में पुलिस ने एक गंभीर मामले में बड़ी कार्रवाई की है। एसएसपी राजकरन नैयर के निर्देशन में तिवारीपुर थाना प्रभारी पंकज कुमार सिंह ने दुष्कर्म और ब्लैकमेलिंग के आरोपी अमित जायसवाल पुत्र महेश प्रसाद जायसवाल, निवासी नकहा नंबर एक (स्पोर्ट्स कॉलेज थाना गोरखनाथ), को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

आरोपी पर आरोप है कि उसने नौकरी का झांसा देकर एक युवती के साथ दुष्कर्म किया, उसका अश्लील फोटो बनाया और वायरल करने की धमकी देकर उसे बार-बार शारीरिक शोषण का शिकार बनाया। इतना ही नहीं, आरोपी ने युवती के शैक्षणिक प्रमाण पत्र अपने पास रख लिए और उसके परिवार को जान से मारने की धमकी भी देता रहा।

पीड़िता की शिकायत पर वर्ष 2022 में मुकदमा दर्ज हुआ था, लेकिन आरोपी अपने ऊंचे रसूख के चलते लंबे समय तक पुलिस की पकड़ से दूर था। आखिरकार तिवारीपुर पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे पहुंचा दिया।

पुलिस ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर महिला उत्पीड़न से जुड़े मामलों में जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई गई है। मिशन शक्ति और ऑपरेशन कनविक्शन के तहत ऐसे अपराधियों को न केवल गिरफ्तार किया जा रहा है, बल्कि उन्हें कड़ी सजा दिलाने की कार्रवाई भी की जा रही है ताकि कोई भी महिला या लड़की के साथ ऐसी हरकत करने का दुस्साहस न कर सके।

घर के बगल स्थित गली में मिला दलित युवती का शव

घटना स्थल पर एसपी, एडिशनल एसपी और सीओ सलेमपुर पहुँचे

लार (देवरिया)।
लार थाना क्षेत्र के हरिकुंडावल गांव के हरिजन टोला में रविवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया जब एक दलित युवती का शव उसके घर के बगल स्थित गली में पड़ा मिला। मृतका की पहचान विरन प्रसाद की 19 वर्षीय पुत्री मनीषा के रूप में हुई है। शव देखकर ग्रामीणों में सनसनी फैल गई और बड़ी संख्या में लोग मौके पर जुट गए।

सूचना मिलते ही प्रभारी निरीक्षक महेंद्र चतुर्वेदी पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस अधीक्षक, एडिशनल एसपी और सीओ सलेमपुर भी मौके पर पहुँचे और घटनास्थल का जायजा लिया।

पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। घटना के कारणों की जांच जारी है। फिलहाल ग्रामीणों में दहशत का माहौल बना हुआ है।

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अहोई अष्टमी : मातृत्व के ममत्व और संकल्प का पर्व

भारतीय संस्कृति में प्रत्येक व्रत और त्यौहार के पीछे कोई न कोई गूढ़ संदेश और जीवन-दर्शन छिपा होता है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाई जाने वाली अहोई अष्टमी का पर्व मातृत्व की करुणा, संतान के प्रति ममत्व और नारी के अटूट संयम का प्रतीक है। इस दिन माताएं अपनी संतान की दीर्घायु, सुख-संपन्नता और निरोग जीवन की कामना के लिए अहोई माता का व्रत रखती हैं।

लोक मान्यता है कि प्राचीन काल में एक स्त्री संतान के लिए मिट्टी खोदने गई थी, जहां अनजाने में उसने एक सिंहनी के शावक को घायल कर दिया। उस पाप के कारण उसके पुत्रों की अकाल मृत्यु होने लगी। व्यथित होकर जब उसने देवी अहोई की आराधना की, तब माता ने वरदान दिया कि यदि वह प्रत्येक वर्ष कार्तिक कृष्ण अष्टमी को अहोई व्रत रखेगी, तो उसकी संतान दीर्घायु होगी। तब से यह व्रत परंपरा के रूप में आज तक चला आ रहा है।
इस दिन महिलाएं दीवार पर अहोई माता का चित्र बनाती हैं, जिसमें सात पुत्रों और एक शावक का चित्रण किया जाता है। यह चित्र सात पीढ़ियों की समृद्धि और वंश की निरंतरता का प्रतीक माना जाता है।
व्रतधारिणी महिलाएं सूर्योदय से पहले स्नान कर व्रत का संकल्प लेती हैं और दिनभर निराहार रहती हैं। शाम को तारों के दर्शन के बाद अहोई माता की कथा सुनकर पूजा-अर्चना करती हैं। पूजा के उपरांत माताएं संतान के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लेती हैं और व्रत का समापन करती हैं।
अहोई अष्टमी का यह व्रत केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि मातृत्व की आत्मीयता और परिवार के प्रति त्याग की भावना का प्रतीक है।
आज जब जीवन की भागदौड़ में पारिवारिक रिश्ते और संवाद कमजोर पड़ रहे हैं, ऐसे में अहोई अष्टमी का पर्व हमें पुनः परिवार के मूल मूल्यों और भावनात्मक जुड़ाव की याद दिलाता है। यह पर्व बताता है कि मातृत्व केवल जन्म देने का नाम नहीं, बल्कि स्नेह, संयम और संस्कारों का वह दीप है जो संतानों के जीवन को आलोकित करता है।
अहोई अष्टमी का व्रत हमें यह संदेश देता है कि सच्चे प्रेम और निष्ठा से किए गए संकल्प कभी व्यर्थ नहीं जाते। यही मातृत्व का सार है, यही भारतीय संस्कृति की आत्मा है।

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बिहार में सियासत का सुपर मंडे: एनडीए, महागठबंधन और जनसुराज के बड़े ऐलान से गरमाएगा चुनावी माहौल

पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)बिहार की राजनीति में आज का दिन बेहद अहम माना जा रहा है। विधानसभा चुनाव से पहले सियासी पारा अपने चरम पर है। सोमवार को एनडीए, महागठबंधन और जनसुराज तीनों ही मोर्चे अपनी-अपनी रणनीति और प्रत्याशियों की घोषणा कर सकते हैं। आज का दिन बिहार की सियासत का “सुपर मंडे” बन गया है, क्योंकि तीनों मोर्चों के फैसले पर प्रदेश की नजरें टिकी हैं।
एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) की ओर से आज पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाए जाने की संभावना है। माना जा रहा है कि इस बैठक में प्रत्याशियों की पहली सूची जारी की जा सकती है। रविवार को एनडीए ने सीट बंटवारे का फॉर्मूला साफ कर दिया था— भाजपा और जदयू 101-101 सीटों पर चुनाव लड़ेंगी, जबकि चिराग पासवान की एलजेपी 29 सीटों पर मैदान में उतरेगी। जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी को 6-6 सीटें मिली हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि आज कौन-कौन से उम्मीदवार मैदान में उतरेंगे।

वहीं, महागठबंधन के खेमे में भी हलचल तेज है। आरजेडी, कांग्रेस और वाम दलों के बीच सीट बंटवारे पर लगभग सहमति बन चुकी है। हालांकि, मुकेश सहनी की वीआईपी पार्टी को लेकर कुछ पेच फंसा था, लेकिन अब माना जा रहा है कि इस पर भी आज अंतिम फैसला हो जाएगा।
इसी बीच, ‘लैंड फॉर जॉब’ केस में आज राउज एवेन्यू कोर्ट का अहम फैसला आने वाला है, जिसमें लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव पेश होंगे। ऐसे में राजनीतिक नजरिए से यह दिन आरजेडी खेमे के लिए भी निर्णायक साबित हो सकता है।

इधर, प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी भी आज अपनी दूसरी सूची जारी कर सकती है। 9 अक्टूबर को जारी पहली सूची में 51 उम्मीदवारों के नाम घोषित किए गए थे। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि क्या प्रशांत किशोर खुद राघोपुर से मैदान में उतरेंगे या नहीं। आज इस पर भी स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

कुल मिलाकर, बिहार की राजनीति में आज का सोमवार सिर्फ एक दिन नहीं, बल्कि आगामी विधानसभा चुनाव की दिशा और दशा तय करने वाला दिन साबित हो सकता है।

बिहार की सियासत में आज का दिन एक साथ कई मोर्चों पर ऐतिहासिक फैसला लेकर आएगा। तीनों प्रमुख गठबंधन—एनडीए, महागठबंधन और जनसुराज—के कदमों पर पूरे प्रदेश की निगाहें टिकी हैं। कौन बनेगा बिहार का ‘चुनावी बादशाह’? इसका जवाब आज की घोषणाओं में छिपा है।

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आज तय होगी लालू परिवार की तकदीर!

‘लैंड फॉर जॉब’ केस पर निगाहें, सियासत में मच सकता है भूचाल

नई दिल्ली/पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)।
राजनीतिक गलियारों की नज़रें आज दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट पर टिकी हैं, जहां आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पर ‘लैंड फॉर जॉब’ मामले में फैसला सुनाया जा सकता है। अदालत ने तीनों को सोमवार को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है। इसी को लेकर पूरा लालू परिवार रविवार को ही दिल्ली पहुंच गया था।

यह दिन राजद के लिए कई मायनों में निर्णायक साबित हो सकता है, क्योंकि इसी दिन महागठबंधन की सीट-बंटवारे को लेकर भी बड़ा ऐलान संभव है। ऐसे में बिहार की सियासत में आज हलचल तेज़ है।

तेजस्वी यादव के लिए यह सिर्फ़ कानूनी नहीं, बल्कि एक राजनीतिक परीक्षा भी मानी जा रही है। अगर फैसला लालू परिवार के पक्ष में आता है, तो आगामी बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले यह राजद और महागठबंधन के लिए बड़ी राहत होगी। मगर यदि निर्णय प्रतिकूल रहा, तो विपक्ष, ख़ासकर भाजपा, इसे एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनाने में देर नहीं करेगी।

तेजस्वी यादव ने इससे पहले कई बार कहा है कि, “हमने कोई गलत काम नहीं किया है, यह मामला राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है। सच्चाई हमारे साथ है।”
राजद खेमे में फिलहाल भरोसे और उम्मीद का माहौल है कि न्यायालय से उन्हें राहत मिलेगी।

🔹 क्या है मामला

यह मामला 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे। सीबीआई की चार्जशीट के अनुसार, रेलवे में नौकरी के बदले उम्मीदवारों से जमीन ली गई। जांच एजेंसी ने लालू प्रसाद, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव सहित कई अन्य पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोप लगाए हैं।

सीबीआई का कहना है कि इस दौरान बिहार और झारखंड के कई परिवारों ने अपनी ज़मीन लालू परिवार या उससे जुड़े लोगों के नाम कर दी थी, बदले में उनके रिश्तेदारों को रेलवे में नौकरी मिली।

🔹 राजनीतिक असर

फैसले का असर न सिर्फ लालू परिवार पर, बल्कि बिहार की राजनीति पर भी गहराई से पड़ सकता है। अगर लालू परिवार निर्दोष साबित हुआ, तो महागठबंधन को चुनावी ऊर्जा मिलेगी। वहीं, विपरीत निर्णय की स्थिति में विपक्ष इसे “भ्रष्टाचार का प्रतीक” बताकर चुनावी हवा बदलने की कोशिश करेगा।

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नितिन गडकरी की सौगात: पुडुचेरी को मिलेगी नई सड़क कनेक्टिविटी की राह

आधारशिला, तीन राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का भी लोकार्पण आज

पुडुचेरी (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी आज बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी सोमवार को यहां इंदिरा गांधी स्क्वायर से राजीव गांधी स्क्वायर तक बनने वाले 436 करोड़ रुपये की लागत के चार किलोमीटर लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर की आधारशिला रखेंगे। इस परियोजना से शहर में जाम की समस्या से राहत मिलने के साथ सुचारू यातायात व्यवस्था को भी गति मिलेगी।

अधिकारियों के अनुसार, श्री गडकरी अपने दौरे में 2,000 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली तीन राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं को राष्ट्र को समर्पित करेंगे। इनमें से प्रमुख है एनएच-32 का पुडुचेरी-पूंडियनकुप्पम खंड, जिसकी लंबाई 38 किलोमीटर है और जिसे 1,588 करोड़ रुपये की लागत से चार लेन में विकसित किया गया है।

कार्यक्रम में उपराज्यपाल के. कैलाशनाथन, मुख्यमंत्री एन. रंगासामी, केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन, तमिलनाडु के पीडब्ल्यूडी मंत्री ई.वी. वेलु, तथा विधानसभा अध्यक्ष आर. सेल्वम सहित कई जनप्रतिनिधि शामिल होंगे। समारोह का आयोजन कोक्कू पार्क के समीप कृषि मैदान में किया जाएगा।

इस दौरान, यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने हेतु वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (यातायात) नित्या राधाकृष्णन ने विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, सुबह 8 बजे से दोपहर 3 बजे तक कई प्रमुख मार्गों पर वाहनों की आवाजाही और पार्किंग पर रोक रहेगी।

प्रतिबंधित क्षेत्रों में लॉस्पेट एयरपोर्ट रोड से लता स्टील हाउस जंक्शन, कोक्कू पार्क, और राजीव गांधी स्क्वायर शामिल हैं। इसी तरह, ईस्ट कोस्ट रोड, तिंडीवनम रोड, और कामराजर सलाई के कुछ हिस्सों को भी वाहनों के लिए अस्थायी रूप से बंद रखा जाएगा।

भारी वाहनों और बसों को गोरीमेदु, जिपमेर जंक्शन, और सरम जंक्शन से वैकल्पिक मार्गों पर डायवर्ट किया जाएगा। प्रशासन ने नागरिकों से सहयोग की अपील करते हुए अनुरोध किया है कि वे अनावश्यक यात्रा से बचें और यातायात कर्मियों के निर्देशों का पालन करें।

गडकरी का यह दौरा न केवल पुडुचेरी के सड़क नेटवर्क को सुदृढ़ करेगा, बल्कि क्षेत्रीय संपर्क को भी नए आयाम देगा।

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होमगार्ड भर्ती नियमों में बड़ा बदलाव! अब सरकारी नौकरी करने वाले नहीं बन सकेंगे होमगार्ड, जानिए नई योग्यता और शर्तें

लखनऊ ( राष्ट्र की परम्परा)। प्रदेश में होमगार्ड भर्ती प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया है। अब सरकारी, अर्द्धशासकीय और सार्वजनिक क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारी होमगार्ड स्वयंसेवक बनने के लिए आवेदन नहीं कर सकेंगे। पहले ऐसे कर्मी पात्र माने जाते थे, लेकिन अब होमगार्ड विभाग ने नई नियमावली तैयार कर शासन को प्रस्ताव भेजा है। मंजूरी मिलते ही यह नियम लागू हो जाएगा।

नई व्यवस्था के तहत 44 हजार पदों पर होमगार्ड भर्ती की जाएगी, जिसके लिए आवेदन ऑनलाइन और जिलेवार स्वीकार किए जाएंगे। एनरोलमेंट प्रक्रिया वास्तविक रिक्तियों के आधार पर होगी ताकि ज्यादा से ज्यादा युवाओं को मौका मिल सके।

आयु सीमा 18 से 30 वर्ष के बीच तय की गई है, जबकि केवल पात्र उम्मीदवारों को ही आयु में छूट दी जाएगी। अगर किसी जिले में रिक्तियां 11 हजार से अधिक हैं, तो बोर्ड उसी अनुपात में आवेदन लेगा।

महत्वपूर्ण बदलाव:
अब ऐसे व्यक्ति जिन पर किसी आपराधिक मुकदमे की सुनवाई चल रही हो, या जिन्हें केंद्र/राज्य सरकार या किसी स्थानीय निकाय से बर्खास्त किया गया हो, वे भी आवेदन के पात्र नहीं होंगे।

पहले डॉक्टर, प्रोफेसर, वकील, पत्रकार और अन्य पेशेवर भी अल्पकालिक सेवा के रूप में होमगार्ड बनते थे, जिससे यह सेवा प्रतिष्ठित मानी जाती थी। परंतु भ्रष्टाचार की शिकायतों के बाद अब इस व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त करने की तैयारी है।

नई नियमावली लागू होने के बाद होमगार्ड सेवा अब केवल पात्र, बेरोजगार और शारीरिक रूप से योग्य युवाओं के लिए खुली रहेगी।

13 अक्टूबर का संगीत, साहित्य और राजनीति में महत्वपूर्ण योगदान

13 अक्टूबर का ऐतिहासिक महत्व: घटनाएँ, जन्म, मृत्यु और विश्व उत्सव

13 अक्टूबर का दिन इतिहास में कई महत्वपूर्ण घटनाओं, उपलब्धियों और स्मरणीय अवसरों के लिए जाना जाता है। इस दिन विश्व स्तर पर और भारत में कई घटनाएँ घटीं, जिन्होंने राजनीति, विज्ञान, साहित्य, खेल और समाज के क्षेत्र में अमिट छाप छोड़ी।
ऐतिहासिक घटनाएँ
1792: आज ही के दिन राष्ट्रपति निवास, जिसे बाद में व्हाइट हाउस कहा गया, की नींव रखी गई। यह अमेरिकी राजनीति और विश्व इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुआ।
1911: स्वामी विवेकानंद की शिष्या मार्गेरेट एलिज़ाबेथ नोबेल, जिन्हें भगिनी निवेदिता के नाम से जाना जाता है, का निधन हुआ। उन्होंने भारतीय संस्कृति और शिक्षा के क्षेत्र में योगदान दिया।
1943: द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इटली ने जर्मनी के खिलाफ युद्ध की घोषणा की। यह एक निर्णायक क्षण था जिसने यूरोप की युद्ध रणनीतियों को प्रभावित किया।
1976: बोलीविया में एक विमान दुर्घटना में लगभग 100 लोगों की मौत हुई, जो उस समय की सबसे बड़ी हवाई आपदाओं में से एक थी।
1987: मशहूर गायक और अभिनेता किशोर कुमार का निधन हुआ। उनके गीत आज भी भारतीय संगीत प्रेमियों के दिलों में जीवित हैं।
1987: इसी वर्ष कोस्टारिका के राष्ट्रपति ऑस्कर आरियास को शांति का नोबेल पुरस्कार मिला। उनके योगदान से मध्य अमेरिका में स्थायी शांति की दिशा में कदम बढ़ा।
1999: भारत के प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी तीसरी बार पद पर नियुक्त हुए। इस वर्ष ही कोलंबिया विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्री प्रोफेसर रॉबर्ट मुंडेल को अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार देने की घोषणा हुई।
2000: दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति किम दाई जुंग को शांति का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया।
2003: डलास में 26 घंटे तक चले सफल ऑपरेशन के बाद मिस्र के जुड़वां बच्चों के आपस में जुड़े सिर को अलग किया गया।
2010: चिली की एक खान दुर्घटना में 69 खनिकों को 69 दिनों के बाद सुरक्षित बाहर निकाला गया।
2013: मध्य प्रदेश के दतिया जिले में पुल पर भगदड़ में 109 लोगों की मौत हुई, जो सुरक्षा और जनसुरक्षा पर प्रश्न उठाती है।
2016: अमेरिकी गायक और गीतकार बॉब डिलन को साहित्य का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया। इसी वर्ष अंतरराष्ट्रीय प्राकृतिक आपदा न्यूनीकरण दिवस की शुरुआत भी हुई।
13 अक्टूबर को जन्मे प्रमुख व्यक्तित्व
1877: भूलाभाई देसाई, प्रख्यात विधिवेत्ता और महात्मा गांधी के विश्वस्त सहयोगी, का जन्म हुआ।
1895: सी. के. नायडू, भारत की क्रिकेट टीम के पहले टेस्ट कप्तान, का जन्म।
1911: अशोक कुमार, भारतीय फिल्म उद्योग के चमकते सितारे और महान अभिनेता।
1929: शिवेन्दर सिंह सिन्धू, मणिपुर, गोवा और मेघालय के राज्यपाल।
1931: भूमिन्धर बर्मन, असम के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेता।
1948: नुसरत फतेह अली ख़ान, सूफ़ी संगीत और कव्वाली के प्रसिद्ध गायक।
1994: अविनाश साबले, भारतीय एथलीट जो लंबी बाधा दौड़ में उत्कृष्ट हैं।
13 अक्टूबर को हुई प्रमुख मृत्यु
1900: अमीर मीनाई, उर्दू साहित्य के प्रतिष्ठित कवि और लेखक।
1911: भगिनी निवेदिता का निधन, जिन्होंने भारतीय शिक्षा और संस्कृति में योगदान दिया।
1987: किशोर कुमार, बॉलीवुड के प्रसिद्ध गायक और अभिनेता।
2000: जरनैल सिंह, भारतीय फुटबॉल के प्रमुख खिलाड़ियों में से एक।
2004: निरुपा रॉय, हिंदी फिल्मों की प्रसिद्ध अभिनेत्री, जिन्हें मां के रोल के लिए याद किया जाता है।
13 अक्टूबर के अवसर एवं उत्सव
विश्व दृष्टि दिवस: दृष्टिहीनता और दृष्टि सुधार के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए मनाया जाता है।
विश्व डाक दिवस (सप्ताह): वैश्विक डाक सेवाओं और संचार के महत्व को दर्शाने के लिए आयोजित।
राष्ट्रीय विधिक सहायता दिवस (सप्ताह): न्यायिक सहायता और कानूनी जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से।
13 अक्टूबर का विज्ञान, खेल और संस्कृति में योगदान
इस दिन विश्व स्तर पर विज्ञान, खेल और संस्कृति से जुड़े कई महत्वपूर्ण कदम भी उठाए गए। 2003 में डलास में जुड़वां बच्चों के सिर अलग करने के सफल ऑपरेशन ने चिकित्सा क्षेत्र में नई उम्मीद जगाई। 2010 में चिली की खान से खनिकों को सुरक्षित निकालना मानव धैर्य और तकनीकी कौशल का उदाहरण था। खेल की दुनिया में 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी की तीसरी बार प्रधानमंत्री नियुक्ति और 2003 में जर्मनी का विश्व कप जीतना प्रमुख घटनाएँ थीं।
साहित्य और संगीत के क्षेत्र में भी 1987 में किशोर कुमार और 2016 में बॉब डिलन को सम्मानित करना 13 अक्टूबर को यादगार बनाता है।

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“दीपों से उजाला नहीं, विश्वास से जगमगाती है दिवाली: मां लक्ष्मी का व्रत लाता है सुख, समृद्धि और शांति”

🌺 दिवाली व्रत: घर-आंगन में प्रकाश, मन में विश्वास
दिवाली, रोशनी और उल्लास का पर्व, केवल दीप जलाने का नहीं, बल्कि आत्मा को आलोकित करने का दिन है। इस दिन पूरे भारतवर्ष में लोग अपने घरों को दीपों से सजाते हैं, नई उमंग और उम्मीद से भरा हर घर एक नई शुरुआत का प्रतीक बन जाता है। लेकिन, दिवाली केवल बाहरी रोशनी का पर्व नहीं—यह भीतर की अंधकार मिटाने की साधना भी है।
इस दिन भगवान गणेश और मां लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि लक्ष्मी-गणेश पूजा और दिवाली व्रत करने से घर में धन, सुख, समृद्धि और सकारात्मकता का वास होता है।
🌸 दिवाली पूजा का महत्व: सुख, समृद्धि और शांति की साधना
दिवाली के दिन लोग घरों में विशेष पूजा करते हैं, जिसमें भगवान गणेश और मां लक्ष्मी की आराधना प्रमुख होती है। पूजा में दीपक जलाना, फूल अर्पित करना, मिठाई और फल अर्पित करना शामिल होता है। ऐसा विश्वास है कि इस दिन लक्ष्मी-गणेश की आराधना करने से जीवन के हर क्षेत्र में उन्नति होती है।
इस दिन दीप जलाना केवल सजावट नहीं, बल्कि यह अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है। हर दीपक यह संदेश देता है कि जब तक विश्वास की लौ जलती रहेगी, जीवन का हर कोना आलोकित रहेगा।
🌼 दिवाली व्रत का आध्यात्मिक अर्थ
दिवाली व्रत का मुख्य उद्देश्य केवल उपवास नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि और मन की स्थिरता है।
यह व्रत व्यक्ति को आत्म-अनुशासन सिखाता है, मन में संयम लाता है और नकारात्मक विचारों को दूर करता है।
धार्मिक मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से कुलदेवी और कुलदेवता की कृपा प्राप्त होती है, जिससे घर-परिवार में स्थायी सुख-शांति बनी रहती है।
व्रत रखने वाला व्यक्ति जब लक्ष्मी और गणेश की आराधना करता है, तो उसके भीतर आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है—यही ऊर्जा उसे जीवन में संतुलन, समृद्धि और स्थायित्व प्रदान करती है।
💫 दिवाली व्रत से मिलने वाले प्रमुख लाभ
🪔 1. संपत्ति और समृद्धि की प्राप्ति
दिवाली व्रत रखने से मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। यह व्रत घर में धन, संपत्ति और खुशहाली लाता है।
🌿 2. परिवार में सुख-शांति
यह व्रत परिवार के सदस्यों में आपसी प्रेम, सामंजस्य और सौहार्द बढ़ाता है। परिवार में सकारात्मक ऊर्जा का वातावरण निर्मित होता है।
🕉️ 3. स्वास्थ्य लाभ
उपवास से शरीर की शुद्धि होती है। संतुलित आहार और साधना से शरीर में ऊर्जा और ताजगी का संचार होता है।
🌺 4. आध्यात्मिक उन्नति
यह व्रत मन को शुद्ध करता है और आत्मिक बल को बढ़ाता है। लक्ष्मी-गणेश की कृपा से व्यक्ति का मन स्थिर और शांत होता है।
🔱 5. नकारात्मकता और दुर्भाग्य का नाश
धार्मिक मान्यता है कि दिवाली व्रत करने से नकारात्मक ऊर्जा, रोग और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। घर में शुभता और सकारात्मकता का प्रवाह बना रहता है।
🌠 दिवाली पूजा में क्या-क्या शामिल होता है?
दीप जलाना: अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक।
फूल अर्पित करना: भक्ति और श्रद्धा का प्रतीक।
मिठाई और फल चढ़ाना: कृतज्ञता और प्रसन्नता का प्रतीक।
मंत्रोच्चार: मन को स्थिर और पवित्र करने का माध्यम।
इन सभी क्रियाओं का सार यही है कि जब मन में शुद्धता और भाव में भक्ति होती है, तभी दिवाली का प्रकाश स्थायी बनता है।
🕯️ दिवाली पर पूजा क्यों की जाती है?
दिवाली पर भगवान गणेश और मां लक्ष्मी की पूजा इसलिए की जाती है ताकि घर में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास हो सके।
भगवान गणेश बुद्धि और विवेक के प्रतीक हैं, जबकि मां लक्ष्मी धन, सौभाग्य और शांति की अधिष्ठात्री देवी हैं।
जब दोनों की संयुक्त आराधना की जाती है, तब जीवन में भौतिक और आध्यात्मिक दोनों प्रकार की प्रगति होती है।
2025 में दिवाली कब है और शुभ मुहूर्त क्या है?
इस वर्ष दीपावली 20 अक्टूबर 2025, सोमवार को मनाई जाएगी।
लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 7:08 PM से 8:18 PM तक रहेगा।
यह समय पूजा और साधना के लिए अत्यंत शुभ माना गया है।
🌼 व्रत का धार्मिक संदेश
धार्मिक दृष्टि से दिवाली व्रत केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि आत्म-विकास का मार्ग भी है।
यह व्रत हमें सिखाता है कि जब मन और शरीर दोनों अनुशासित होते हैं, तब व्यक्ति हर चुनौती का सामना धैर्यपूर्वक कर सकता है।
इसी अनुशासन से सुख, शांति और सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है।
🌟 आध्यात्मिक संदेश
“दीपक जलाने से पहले मन का अंधकार मिटाएं,
लक्ष्मी तभी ठहरेंगी जब गणेश को मन में बसाएं।”
यह संदेश हमें याद दिलाता है कि दिवाली केवल धन की देवी की आराधना नहीं, बल्कि बुद्धि, विवेक और सत्य के मार्ग पर चलने का संकल्प भी है।
🪷 दिवाली—अंधकार से प्रकाश की यात्रा
दिवाली का पर्व केवल परंपरा नहीं, बल्कि जीवन की दिशा है।
यह दिन हमें सिखाता है कि असली रोशनी भीतर से आती है—जब मन में श्रद्धा, कर्म में निष्ठा और जीवन में सत्य होता है, तब दिवाली हर दिन होती है।
व्रत और पूजा केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में संतुलन और सामंजस्य का प्रतीक हैं।
दिवाली का अर्थ है – भीतर के दीप जलाना, बुराई पर अच्छाई की जीत का उत्सव मनाना और हर दिल को उजाला देना।

⚠️ डायरेक्शन (महत्वपूर्ण सुझाव):
“राष्ट्र की परंपरा ने सुझाव दिया है कि किसी भी धार्मिक व्रत, पूजा या विधि को अमल में लाने से पहले किसी जानकार या विद्वान पंडित से परामर्श अवश्य करें।”

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चमकदार घर और स्वच्छ आंगन से आए स्थायी लक्ष्मी!

राष्ट्र की परम्परा डेस्क दिवाली का पर्व केवल रोशनी और सजावट का नहीं, बल्कि पवित्रता, स्वच्छता और समृद्धि का प्रतीक है। यह वह समय होता है जब हर व्यक्ति अपने घर को न केवल बाहरी रूप से सुंदर बनाना चाहता है, बल्कि उसे अंदर और बाहर दोनों ओर से शुद्धता से भरना चाहता है। दिवाली की तैयारी का सबसे अहम हिस्सा है – सफाई, जो मां लक्ष्मी के स्वागत का प्रथम चरण माना जाता है। कहा जाता है कि देवी लक्ष्मी वहीं स्थायी रूप से निवास करती हैं, जहां स्वच्छता, सादगी और सकारात्मकता का वातावरण होता है।
🪔 घर की सफाई — सुख-समृद्धि का पहला कदम
हर साल दिवाली से पहले घर की सफाई एक परंपरा के रूप में निभाई जाती है। यह केवल दिखावे के लिए नहीं, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक रूप से भी घर को शुद्ध करने का प्रतीक है। धूल और गंदगी केवल जगह को नहीं, बल्कि व्यक्ति की ऊर्जा को भी प्रभावित करती हैं। जब हम अपने घर के हर कोने को चमकाते हैं, तो हम वहां नई ऊर्जा और नई शुरुआत का स्वागत करते हैं।
🌿 सीढ़ियों से शुरुआत क्यों जरूरी है?
हम अक्सर अपने घर की सीढ़ियों को नज़रअंदाज़ कर देते हैं, जबकि यहीं से घर की पहली झलक शुरू होती है। दिनभर इन पर चढ़ने-उतरने से धूल, मिट्टी और जूते के निशान जमा हो जाते हैं।
1️⃣ सबसे पहले झाड़ू और गीले कपड़े से सीढ़ियों को अच्छी तरह साफ करें।
2️⃣ किनारों और कोनों में जमी गंदगी को पुराने टूथब्रश या पतले ब्रश से हटाएं।
3️⃣ अगर सीढ़ियां मार्बल या टाइल की हैं, तो हल्के डिटर्जेंट या सिरके के घोल से पोंछें ताकि चमक वापस आए।
4️⃣ सीढ़ियों पर एक सुंदर रंगोली या दीयों की कतार सजाकर उन्हें रोशनी से भर दें।
याद रखें — जहां पहला कदम स्वच्छता का हो, वहां समृद्धि का मार्ग स्वतः बनता है।
रेलिंग और दीवारों की चमक लौटाएं
रेलिंग और दीवारें घर के प्रवेश क्षेत्र की शोभा बढ़ाती हैं।
रेलिंग पर जमा धूल, दाग और हाथों के निशान हटाने के लिए माइक्रोफाइबर कपड़े या क्लीनिंग स्प्रे का उपयोग करें।
यदि रेलिंग लकड़ी की है, तो गीले कपड़े से हल्के हाथों से साफ करें और तुरंत सूखा कपड़ा फेरें ताकि नमी न रहे।
दीवारों पर लगी मकड़ी के जाले और धूल को हटाकर उन्हें ताजगी दें।
चाहें तो हल्की लाइट्स या फूलों की माला से रेलिंग को सजा दें — इससे न केवल सौंदर्य बढ़ेगा, बल्कि सकारात्मकता भी फैलेगी।
🌼 आंगन और बरामदा — लक्ष्मी आगमन का पथ
दिवाली में आंगन की सफाई का महत्व सबसे अधिक होता है। भारतीय परंपरा में माना जाता है कि मां लक्ष्मी धरती पर आंगन के मार्ग से प्रवेश करती हैं।
1️⃣ आंगन को झाड़ू लगाकर धो लें और सूखने के बाद उसमें हल्दी-पानी का छिड़काव करें।
2️⃣ दरवाजे के बाहर रंगोली बनाएं और उसके बीच दीपक जलाएं।
3️⃣ बरामदे के कोनों में अगरबत्ती या धूप जलाएं ताकि वातावरण सुगंधित बने।
4️⃣ यदि आंगन में पौधे हैं, तो सूखे पत्ते हटा दें और पौधों को पानी दें।
साफ आंगन और सजे बरामदे से न केवल सौंदर्य बढ़ता है, बल्कि यह मां लक्ष्मी के स्वागत की भावना को भी दर्शाता है।
🌸 प्रवेश द्वार को बनाएं ‘लक्ष्मी द्वार’
घर का मुख्य द्वार ‘लक्ष्मी द्वार’ कहलाता है — यानी वही स्थान जहां से देवी लक्ष्मी प्रवेश करती हैं।
दरवाजे के दोनों ओर आम या अशोक के पत्तों का तोरण लगाएं।
दरवाजे के ऊपर स्वस्तिक और शुभ-लाभ के चिन्ह बनाएं।
द्वार के दोनों ओर मिट्टी या पीतल के दीपक जलाएं।
दरवाजे के पास की दीवारों को साफ और सूखा रखें।
जब प्रवेश द्वार पवित्र और सजा-संवरा होता है, तो माना जाता है कि लक्ष्मी स्वयं उस घर की ओर आकर्षित होती हैं।
💫 घर के भीतर भी चमक लाएं
दिवाली की सफाई केवल बाहरी नहीं, भीतरी पवित्रता का भी प्रतीक है।
रसोईघर की सफाई से शुरुआत करें, क्योंकि यह घर की समृद्धि का केंद्र है। गैस स्टोव, शेल्फ और कंटेनर को अच्छी तरह पोंछें।
बेडरूम में बिस्तर और पर्दे धोएं, नई चादरें बिछाएं ताकि ताजगी का एहसास हो।
लिविंग रूम में शोपीस और फर्नीचर की धूल हटाएं, और अगर संभव हो तो कमरे में सुगंधित मोमबत्तियां जलाएं।
बिजली के बल्ब और पंखों की सफाई से कमरे की रोशनी दोगुनी हो जाती है।
घर के हर कोने की सफाई न केवल भौतिक स्वच्छता लाती है, बल्कि यह मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा भी बढ़ाती है।
🌺 स्वच्छता में ही बसती है समृद्धि
भारत की संस्कृति में स्वच्छता को देवत्व से जोड़ा गया है। ‘स्वच्छ घर, सुखी परिवार’ — यह केवल कहावत नहीं, बल्कि जीवन का सिद्धांत है।
जब आप अपने घर को सीढ़ियों से लेकर छत और आंगन तक साफ करते हैं, तो नकारात्मकता स्वतः दूर होती है। और जहां स्वच्छता होती है, वहां समृद्धि स्थायी रूप से निवास करती है।
दिवाली की रात केवल दीप जलाने की नहीं, बल्कि मन और स्थान दोनों को उजाले से भरने की होती है। जब हर कोना स्वच्छ होता है, तो हर दीपक की रोशनी में आशा, विश्वास और खुशहाली की झिलमिलाहट बढ़ जाती है।

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सोने के बदले कर्ज पर RBI के नए नियम: अब छोटे ग्राहकों को मिलेगा ज्यादा फायदा, जानें क्या बदलेगा?

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नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। भारत में गोल्ड लोन मार्केट लगातार तेजी से बढ़ रहा है। सोने की कीमतों में उछाल और आसान कर्ज सुविधा की वजह से यह सेक्टर सालाना औसतन 30% की दर से विस्तार कर रहा है। इक्रा और आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2025 तक बैंकों और एनबीएफसी के गोल्ड लोन 2.94 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गए हैं। वहीं, सीआरआईएफ की रिपोर्ट बताती है कि जून 2025 तक गोल्ड लोन पोर्टफोलियो 13.4 लाख करोड़ रुपए का हो चुका है।

इसी बीच, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी नई मौद्रिक नीति में गोल्ड लोन से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। ये नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे। बदलाव का मकसद है—छोटे ग्राहकों को राहत देना, पारदर्शिता बढ़ाना और डिफॉल्ट के जोखिम को कम करना।

RBI ने क्यों बदले गोल्ड लोन के नियम?

छोटे ग्राहकों (2.5 लाख तक) की हिस्सेदारी 60% है, औसत ऋण आकार ₹70,000।

सोना गिरवी रखने में गड़बड़ी, अनुचित मूल्यांकन और पारदर्शिता की कमी के मामले बढ़ रहे थे।

बैंक अतिरिक्त शुल्क वसूल रहे थे और गिरवी सोने की नीलामी प्रक्रिया अस्पष्ट थी।

रोलओवर लोन यानी ब्याज चुकाकर कर्ज नवीनीकरण की प्रवृत्ति बढ़ रही थी, जिससे जोखिम बढ़ रहा था।

नए नियमों से क्या होगा फायदा?

  1. Loan-to-Value (LTV) Ratio बदला गया:

₹2.5 लाख तक के लोन पर LTV 85%

₹2.5 से ₹5 लाख तक के लोन पर 80%

₹5 लाख से अधिक के लोन पर 75%
यानी अब छोटे ग्राहकों को अधिक राशि के कर्ज की सुविधा मिलेगी।

  1. सोने का मूल्यांकन:

कीमत IBJA या SEBI दरों के अनुसार तय होगी।

30 दिन की औसत या पिछले दिन की न्यूनतम कीमत को आधार माना जाएगा।

  1. कर्ज की अदायगी:

पूरा लोन 12 महीने में ब्याज सहित चुकाना अनिवार्य होगा।

अब केवल ब्याज देकर लोन को आगे बढ़ाने की सुविधा (रोलओवर) नहीं मिलेगी।

  1. सोने की वापसी:

कर्ज चुकाने के बाद बैंक या NBFC को 7 कार्य दिवस में सोना लौटाना होगा।

देरी होने पर बैंक को ₹5,000 प्रति दिन का जुर्माना देना पड़ेगा।

  1. नीलामी में पारदर्शिता:

डिफॉल्ट के बाद ग्राहक को पहले से सूचना देना अनिवार्य होगा।

नीलामी का रिजर्व मूल्य बाजार दर के 90% पर तय किया जाएगा।

ग्राहकों के लिए जरूरी सावधानियां

लोन लेने से पहले सोने की शुद्धता और मूल्यांकन प्रमाणपत्र संभालकर रखें।

पहले से गिरवी रखे सोने को दोबारा गिरवी न रखें।

विभिन्न बैंकों और NBFC की ब्याज दरों की तुलना जरूर करें।


आरबीआई के नए नियम छोटे ग्राहकों के लिए राहत भरे हैं। अब उन्हें अधिक राशि का कर्ज, पारदर्शी मूल्यांकन और तेज सोना वापसी का फायदा मिलेगा। वहीं, बैंकों और एनबीएफसी को पारदर्शिता और अनुशासन का पालन करना होगा।