Monday, July 6, 2026
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दानापुर रैली में बोले सीएम योगी: बिहार में फिर जीतेगी NDA, मिलेगा माता जानकी का आशीर्वाद

बिहार (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर बीजेपी ने चुनावी बिगुल फूंक दिया है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को दानापुर विधानसभा क्षेत्र में जनसभा को संबोधित किया। सीएम योगी ने कहा कि बिहार में फिर से एनडीए की सरकार बनेगी और माता जानकी का आशीर्वाद राज्य को मिलेगा। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि बिहार में एक समय जंगलराज और परिवारवाद हावी था, लेकिन डबल इंजन की सरकार ने प्रदेश को विकास के रास्ते पर लाया।

सीएम योगी के भाषण की 5 बड़ी बातें

  1. कांग्रेस की झोली में गई RJD:
    योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जो पार्टी कभी भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़ी होती थी, वही आज कांग्रेस की गोद में जा बैठी है। एनडीए की सरकार बिहार में भ्रष्टाचार और अपराध को जड़ से खत्म करेगी।
  2. माफिया जहन्नुम की यात्रा पर:
    सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में बीजेपी सरकार ने माफियाओं को खत्म कर दिया। अब बिहार में भी गुंडाराज खत्म होगा और अपराधियों पर बुलडोजर चलेगा।
  3. श्रीराम के बाद जानकी मंदिर:
    योगी बोले—“जिस तरह हमने अयोध्या में श्रीराम मंदिर बनवाया, वैसे ही बिहार में एनडीए सरकार आने पर माता जानकी मंदिर का भव्य निर्माण होगा।”
  4. बिहार का विकास एनडीए और नीतीश कुमार ने किया:
    उन्होंने कहा कि पिछले 20 वर्षों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार के विकास की मजबूत नींव रखी है। 1990 से 2005 तक भ्रष्टाचार और घोटालों का दौर रहा, लेकिन एनडीए ने विकास को प्राथमिकता दी।
  5. अयोध्या से सीतामढ़ी की कनेक्टिविटी:
    योगी ने कहा कि अयोध्या और सीतामढ़ी के बीच पहली बार ‘राम-जानकी मार्ग’ की शुरुआत की गई है, जिससे दोनों राज्यों के धार्मिक और सांस्कृतिक संबंध और प्रगाढ़ हुए हैं।

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तेज रफ्तार ट्रेलर की चपेट में आने से अधेड़ की मौत

गगहा/गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। गोरखपुर–वाराणसी हाईवे पर करवल मझगांवा स्थित करवल माता मंदिर के पास गुरुवार की सुबह हुए सड़क हादसे में एक अधेड़ व्यक्ति की दर्दनाक मौत हो गई। बताया जा रहा है कि तेज रफ्तार ट्रेलर ने सड़क किनारे जा रहे ज्ञानप्रकाश (52 वर्ष) को कुचल दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

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घटना सुबह करीब सात बजे की बताई जा रही है। हादसे के बाद चालक ट्रेलर छोड़कर फरार हो गया। स्थानीय लोगों ने तत्काल पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची गगहा थाना पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
हादसे के बाद हाईवे पर कुछ समय के लिए आवागमन प्रभावित रहा। ग्रामीणों ने बताया कि इस मार्ग पर तेज रफ्तार वाहनों की वजह से अक्सर दुर्घटनाएं होती रहती हैं। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि यहां स्पीड ब्रेकर लगाए जाएं और यातायात व्यवस्था को सुधारा जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

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देश के सपूत सूबेदार हरी बहादुर सिंह जम्मू-कश्मीर में हुए शहीद

गोरखपुर एयरपोर्ट पर 3:15 बजे पहुंचेगा पार्थिव शरीर

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। देश की रक्षा में एक और वीर सपूत ने अपने प्राणों की आहुति दे दी। गोरखा रेजीमेंट की 3/8 जी.आर. यूनिट के सूबेदार हरी बहादुर सिंह, निवासी नेपाल प्रदेश नंबर-5, बुटवल, जम्मू-कश्मीर में आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान वीरगति को प्राप्त हुए।
सूबेदार हरी बहादुर सिंह की शहादत की खबर मिलते ही उनके पैतृक गांव और गोरखा समुदाय में शोक की लहर दौड़ गई। साथियों ने बताया कि वे हमेशा देशभक्ति और कर्तव्यनिष्ठा के लिए जाने जाते थे।
शहीद का पार्थिव शरीर गुरुवार दोपहर 3:15 बजे गोरखपुर एयरपोर्ट पहुंचेगा, जहां सेना और प्रशासनिक अधिकारी श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। इसके बाद पार्थिव शरीर को पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनके गृहक्षेत्र भेजा जाएगा।
भारत माँ के इस सपूत ने देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए अपने प्राणों का बलिदान देकर एक बार फिर साबित कर दिया कि गोरखा रेजीमेंट की रगों में बहती है वीरता की अमर गाथा।

“नए चेहरे, नई जिम्मेदारियाँ: देवरिया पुलिस में तबादलों से बदलेंगे सुरक्षा समीकरण”

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। पुलिस विभाग में फेरबदल का दौर जारी है। जिले के कई उपनिरीक्षकों और कांस्टेबलों को नई तैनाती दी गई है। इस तबादला सूची के साथ ही जिले में सुरक्षा व्यवस्था को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

जिला मुख्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, उपनिरीक्षक (उ०नि०) श्री विनय सिंह को थाना एकौना से एसओजी स्वाट टीम में भेजा गया है, जबकि पवन कुमार शर्मा को पुलिस लाइन से थाना बघौचघाट का कार्यभार सौंपा गया है। वहीं संजय कुमार, मो० इस्माइल, और अमित कुमार सिंह को पुलिस लाइन से थाना एकौना में नियुक्त किया गया है।

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इसी प्रकार जगदीश राय को थाना सुरौली, रिजवान अली और नैपाल सिंह को थाना बरियारपुर, दीपमंजरी पांडेय को एसएसआई बरियारपुर, तथा रविन्द्र नाथ यादव को थाना बनकटा भेजा गया है। इसके अलावा, संकल्प सिंह राठौड़ को बघौचघाट, विकास विश्वकर्मा, जय सिंह यादव, सुशांत कुमार सिंह, विकास सिंह, मनीष सिंह, को कोतवाली क्षेत्र में नई जिम्मेदारी मिली है। और जयप्रकाश सिंह को थाना खुखुन्दू की जिम्मेदारी मिली

महिला पुलिस कर्मियों में भी व्यापक बदलाव हुए हैं। सगीता सिंह, सुरेखा मौर्या, वर्षा सिंह को थाना भलुअनी में तैनात किया गया है, जबकि कमल कुंज त्रिपाठी और कुश कुमार गौड़ को मॉनिटरिंग सेल में नियुक्त किया गया है।

इस तबादला सूची में एसओजी और मॉनिटरिंग टीम के कई जवानों को भी शामिल किया गया है, जिनमें हेड कांस्टेबल अखिलेश कुमार दूबे, राशिद अहमद खान, राहुल यादव, और अरविन्द कुशवाहा शामिल हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार, यह परिवर्तन जिले की कानून-व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाएगा तथा अपराध नियंत्रण में मददगार सिद्ध होगा।

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स्थानीय नागरिकों ने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि “नए अधिकारियों से नई उम्मीदें हैं — पुलिस का चेहरा अब और सशक्त नज़र आएगा।”

सिकंदरपुर में पुलिस और बदमाश के बीच मुठभेड़, गैस सिलिंडर चोरी का आरोपी समीम कुरैशी गोली लगने से घायल

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह के निर्देशन में अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत सिकंदरपुर पुलिस को गुरुवार तड़के बड़ी सफलता मिली। चेकिंग के दौरान पुलिस टीम और एक बदमाश के बीच मुठभेड़ हो गई, जिसमें कुख्यात गैस सिलिंडर चोर समीम कुरैशी उर्फ सोनू पुलिस की गोली से घायल हो गया।

घटना गुरुवार सुबह खरीद से नदी की ओर जाने वाले मार्ग की है, जहां थाना प्रभारी सिकंदरपुर अपनी टीम के साथ वाहनों की चेकिंग कर रहे थे। उसी दौरान एक काली बिना नंबर की स्प्लेंडर मोटरसाइकिल पर सवार युवक पुलिस को देखकर घबरा गया और भागने लगा। जब पुलिस ने उसे रोकने का इशारा किया, तो उसने पुलिस पर फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस की गोली उसके पैर में लगी, जिससे वह घायल होकर गिर पड़ा।

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मौके पर ही पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर सदर अस्पताल भिजवाया। पूछताछ में उसकी पहचान समीम कुरैशी उर्फ सोनू (23 वर्ष), निवासी ग्राम भरतपुर, थाना सुखपुरा, जनपद बलिया के रूप में हुई। आरोपी ने कबूल किया कि उसने अपने साथियों के साथ 22/23 अगस्त और 6/7 अक्टूबर 2025 की रात को करमौता HP गैस एजेंसी से 24 गैस सिलिंडर चोरी किए थे।

पुलिस ने मौके से एक 315 बोर का तमंचा, एक जिंदा कारतूस, एक खोखा कारतूस और काली स्प्लेंडर मोटरसाइकिल बरामद की है। थाना प्रभारी ने बताया कि आरोपी के खिलाफ पहले से भी कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं और उसके साथियों की तलाश में दबिश दी जा रही है।

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इस मुठभेड़ की खबर फैलते ही क्षेत्र में सनसनी फैल गई। ग्रामीणों ने बताया कि गोली चलने की आवाज सुनकर लोग घरों से बाहर निकल आए। मौके पर पहुंची पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित किया।
एसपी ओमवीर सिंह ने कहा कि अपराधियों के खिलाफ अभियान जारी रहेगा और बलिया में अब अपराधियों को बख्शा नहीं जाएगा। इस सफलता से सिकंदरपुर पुलिस का मनोबल बढ़ा है और क्षेत्रवासियों में पुलिस के प्रति विश्वास और मजबूत हुआ है।

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“धन, धर्म और प्रेम का संगम: दीपावली महापर्व की आध्यात्मिक महिमा”

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर अगर हम गहराई से देखें तो भारत में करीब करीब हर दिन किसी न किसी पर्व को मनाने का होता है। कभीसामाजिक,जातीय,धार्मिक, राष्ट्रीय तो कभी चुनावी महापर्व जैसे 6 व 11 नवंबर 2025 को बिहार विधानसभा का चुनावी महापर्व तथा 14 नवंबर 2025 को परिणाम आने का महापर्व मनाने का दिन है,दूसरी ओर 15 अक्टूबर 2025 को 4 वर्षो के बाद दीवाली से पहले सुप्रीम कोर्ट ने पटाखा प्रेमियों के लिए राहत भरा फैसला दिया है।कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में ग्रीन पटाखों की बिक्री और उपयोग की अनुमति दे दी है।मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यह निर्णय संतुलित दृष्टिकोण के साथ लिया गया है, जिससे उत्सव की भावना और पर्यावरण दोनों की रक्षा हो सके।इन त्योहारों का एक महत्वपूर्ण भाव अनेकता में एकता है,इसके कारण ही भारत एक विशालकाय जनसंख्या वाला देश विभिन्न धर्मो जातियों उपजातियों के बीच सर्वधर्म सद्भाव के प्रेमसे संजोया हुआ एक खूबसूरत गुलदस्ता है, इसीलिए ही हर धर्म समाज का पर्व हर दिन आना स्वाभाविक है। परंतु उन कुछ पर्वों में से धनतेरस से दीपावली और फिर छठ महापर्व एक ऐसा खूबसूरत त्यौहार पर्व है जिसे भारत में ही नहीं पूरी दुनियाँ में बसे भारतवंशियों द्वारा बड़े धूमधाम से मनाया जाता है, जिसकी शुरुआत 18 अक्टूबर 2025 से हो रही है जो 5 दिन तक बड़ी सौहार्दपूर्ण के साथ और खुशियों के साथ मनाया जायेगा, फिर अब दीपावली के छठवें दिन से छठ पर्व मनाया जाएगा, जो धार्मिक आस्था का खूबसूरत प्रतीक है। चूंकि दीप जले दीपावली आई, धनतेरस से दीपावली का आगाज़ होग़ा और पांच दिवसीय दीपावली पर्व का धनतेरस के भावपूर्ण स्वागत से शुरू हो जायेगा,इसलिए आज हम मीडिया में उपलब्ध जानकारी के सहयोग से इस आर्टिकल के माध्यम से चर्चा करेंगे दुनियां के हर देश में बसे भारतवंशी धनतेरस से भाई दूज तक फिर छठ के महात्योहार में खुशियों से सराबोर होंगे।
साथियों बात अगर हम दीपावली महापर्व की शुरुआत धनतेरस शनिवार 18 अक्टूबर 2025 से शुरू होने की करें तो, दीपावली का शुभारंभ धनतेरस के दिन से ही हो जाता है और भाई दूज तक यह 5 दिवसीय उत्‍सव मनाया जाता है। सबसे पहले धनतेरस, फिर नरक चतुर्दशी, उसके बाद बड़ी दिवाली, फिर गोवर्द्धन पूजा और सबसे आखिर में भाई दूज पर इस पर्व की समाप्ति होती है।धनतेरस इस बार 18 अक्टूबर 2025 को मनाई जा रही है, वैसे बता दे कुछ लोग 19 तारीख को भी मना रहे हैं कार्तिक मास के कृष्‍ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस मनाई जाती हैपौराणिक मान्‍यताओं में यह बताया गया है कि कार्तिक मास के कृष्‍ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को समुद्र मंथन से भगवान धनवंतरी प्रकट हुए थे और उनके हाथ में अमृत से भरा कलश था। उन्‍हें विष्‍णु भगवान का अवतार माना जाता है। धनतेरस को उनके प्राकट्योत्‍सव के रूप में भी मनाया जाता है। इस दिन धन के देवता कुबेरजी और धन की देवी मां लक्ष्‍मी की पूजा की जाती है और सोने-चांदी के अलावा बर्तनों की खरीद करते हैं। धनतेरस को लेकर ऐसी मान्‍यता है कि इस दिन खरीदी गई वस्‍तुओं में 13 गुना वृ‍द्धि होती है और हमको धन की कमी नहीं होती।मृत जीवित हो आता था। विधाता के कार्य में यह बहुत बड़ा व्यवधान पड़ गया। सृष्टि में भयंकर अव्यवस्था उत्पन्न होने की आशंका के भय से देवताओं ने इन्हें छल से लोप कर दिया। वैद्यगण इस दिन धन्वंतरी जी का पूजन करते हैं और वर मांगते हैं कि उनकी औषधि व उपचार में ऐसी शक्ति आ जाए जिससे रोगी को स्वास्थ्य लाभ हो। सद‌्गृहस्थ इस दिन अमृत पात्र को स्मरण कर नए बर्तन घर में लाकर धनतेरस मनाते हैं। आज के दिन ही बहुत समय से चले आ रहे मनो मालिन्य को त्याग कर यमराज ने अपनी बहिन यमुना से मिलने हेतु स्वर्ग से पृथ्वी की ओर प्रस्थान किया था। गृहणियां इस दिन से अपनी देहरी पर दीपक दान करती हैं, जिससे यमराज मार्ग में प्रकाश देखकर प्रसन्न हों और उनके गृह जनों के प्रति विशेष करुणा रखें। इस वर्ष यह पर्व 18 अक्टूबर 2025 ई॰ शनिवार को मनाया जा रहा है, इसी दिन प्रातः सूर्यादय से ही त्रयोदशी तिथि का आगाज़ हुआ।अतः उदय व्यापिनी त्रयोदशी होने के कारण प्रदोष व्रत के साथ-साथ प्रदोष काल में दीपदान का विशेष महत्व रहेगा।
साथियों बात अगर हम पांच दिवसीय दीपावली महापर्व की करें तो (1) पहला दिन – पहले दिन को धनतेरस कहते हैं। दीपावली महोत्सव की शुरुआत धनतेरस से होती है। इसे धन त्रयोदशी भी कहते हैं। धनतेरस के दिन मृत्यु के देवता यमराज, धन के देवता कुबेर और आयुर्वेदाचार्य धन्वंतरि की पूजा का महत्व है। इसी दिन समुद्र मंथन में भगवान धन्वंतरि अमृत कलश के साथ प्रकट हुए थे और उनके साथ आभूषण व बहुमूल्य रत्न भी समुद्र मंथन से प्राप्त हुए थे। तभी से इस दिन का नाम ‘धनतेरस’ पड़ा और इस दिन बर्तन, धातु व आभूषण खरीदने की परंपरा शुरू हुई। इसे रूप चतुर्दशी भी कहते हैं।(2) दूसरा दिन – दूसरे दिन को नरक चतुर्दशी रूप चौदस और काली चौदस कहते हैं। इसी दिन नरकासुर का वध कर भगवान श्रीकृष्ण ने 16,100 कन्याओं को नरकासुर के बंदीगृह से मुक्त कर उन्हें सम्मान प्रदान किया था। इस उपलक्ष्य में दीयों की बारात सजाई जाती है। इस दिन को लेकर मान्यता है कि इस दिन सूर्योदय से पूर्व उबटन एवं स्नान करने से समस्त पाप समाप्त हो जाते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है। वहीं इस दिन से एक ओर मान्यता जुड़ी हुई है जिसके अनुसार इस दिन उबटन करने से रूप व सौंदर्य में वृद्ध‍ि होती है। इस दिन पांच या सात दीये जलाने की परंपरा है। इस बार यह पर्व 19 अक्टूबर 2025 रविवार को मनाया जाएगा।(3) तीसरा दिन-अब आता है इस लड़ी के मध्य दैदीप्यमान मंजूषा का उल्लास और उत्साह से भरा महान पर्व दीपावली और महालक्ष्मी पूजन तीसरे दिन को दीपावली कहते हैं। यही मुख्य पर्व होता है। दीपावली का पर्व विशेष रूप से मां लक्ष्मी के पूजन का पर्व होता है। कार्तिक माह की अमावस्या को ही समुद्र मंथन से मां लक्ष्मी प्रकट हुई थीं जिन्हें धन, वैभव, ऐश्वर्य और सुख- समृद्धि की देवी माना जाता है। अत: इस दिन मां लक्ष्मी के स्वागत के लिए दीप जलाए जाते हैं ताकि अमावस्या की रात के अंधकार में दीपों से वातावरण रोशन हो जाए।दूसरी मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान रामचन्द्रजी माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ 14 वर्षों का वनवास समाप्त कर घर लौटे थे। श्रीराम के स्वागत हेतु अयोध्या वासियों ने घर-घर दीप जलाए थे और नगरभर को आभायुक्त कर दिया था। तभी से दीपावली के दिन दीप जलाने की परंपरा है। 5 दिवसीय इस पर्व का प्रमुख दिन लक्ष्मी पूजन अथवा दीपावली होता है।इस दिन रात्रि को धन की देवी लक्ष्मी माता का पूजन विधिपूर्वक करना चाहिए एवं घर के प्रत्येक स्थान को स्वच्छ करके वहां दीपक लगाना चाहिए जिससे घर में लक्ष्मी का वास एवं दरिद्रता का नाश होता है। इस दिन देवी लक्ष्मी, भगवान गणेश तथा द्रव्य, आभूषण आदि का पूजन करके 13 अथवा 26 दीपकों के मध्य 1 तेल का दीपक रखकर उसकी चारों बातियों को प्रज्वलित करना चाहिए एवं दीपमालिका का पूजन करके उन दीपों को घर में प्रत्येक स्थान पर रखें एवं 4 बातियों वाला दीपक रातभर जलता रहे, ऐसा प्रयास करें।(4)चौथा दिन – इस लड़ी का चौथा माणिक है कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा। यह पर्व भारत की कृषि-प्रधानता,पशुधन उद्योग व व्यवसाय का प्रतीक है। इसी दिन श्री कृष्ण ने अंगुली पर गोवर्धन पर्वत को छत्र की तरह धारण करके वनस्पति तथा लोगों की इंद्र के प्रकोप से रक्षा की थी। यह गोवर्धन पर्व अन्नकूट के नाम से विख्यात है। इस दिन नाना प्रकार के खाद्यान्न बनाए जाते हैंघी, दूध, दही से युक्त इनका भोग भगवान को लगाया जाता है। शिल्पकार व श्रमिक वर्ग आज के दिन विश्वकर्मा का पूजन भी श्रद्धा भक्तिपूर्वक करते हैं। आज चहुंमुखी विकास और वृद्धि की कामना से दीप जलाए जाते हैं। इस वर्ष यह पर्व 21 आक्टोबर 2025, मंगलवार को मनाया जाएगा।कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को गोवर्धन पूजा एवं अन्नकूट उत्सव मनाना जाता है। इसे पड़वा या प्रतिपदा भी कहते हैं। खासकर इस दिन घर के पालतू बैल, गाय, बकरी आदि को अच्छे से स्नान कराकर उन्हें सजाया जाता है। फिर इस दिन घर के आंगन में गोबर से गोवर्धन बनाए जाते हैं और उनका पूजन कर पकवानों का भोग अर्पित किया जाता है। इस दिन को लेकर मान्यता है कि त्रेतायुग में जब इन्द्रदेव ने गोकुलवासियों से नाराज होकर मूसलधार बारिश शुरू कर दी थी, तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी अंगुली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर गांववासियों को गोवर्धन की छांव में सुरक्षित किया। तभी से इस दिन गोवर्धन पूजन की परंपरा भी चली आ रही है। (5) पांचवां दिन – माला का पांचवा चमकता पर्व आता है- स्नेह, सौहार्द व प्रीति का प्रतीक यम द्वितीया अथवा भैया-दूज। इस दिन कार्तिक शुक्ल को यमराज अपने दिव्य स्वरूप में अपनी भगिनि यमुना से भेंट करने पहुंचते हैं।इस दिन को भाई दूज और यम द्वितीया कहते हैं। भाई दूज, पांच दिवसीय दीपावली महापर्व का अंतिम दिन होता है। भाई दूज का पर्व भाई-बहन के रिश्ते को प्रगाढ़ बनाने और भाई की लंबी उम्र के लिए मनाया जाता है। रक्षाबंधन के दिन भाई अपनी बहन को अपने घर बुलाता है जबकि भाई दूज पर बहन अपने भाई को अपने घर बुलाकर उसे तिलक कर भोजन कराती है और उसकी लंबी उम्र की कामना करती है।इस दिन को लेकर मान्यता है कि यमराज अपनी बहन यमुनाजी से मिलने के लिए उनके घर आए थे और यमुनाजी ने उन्हें प्रेमपूर्वक भोजन कराया एवं यह वचन लिया कि इस दिन हर साल वे अपनी बहन के घर भोजन के लिए पधारेंगे। साथ ही जो बहन इस दिन अपने भाई को आमंत्रित कर तिलक करके भोजन कराएगी, उसके भाई की उम्र लंबी होगी। तभी से भाई दूज पर यह परंपरा बन गई।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि धनतेरस से भाई दूज तक पंचदिवसीय महापर्व-समृद्धि पवित्रता भक्ति और प्रेम की सांस्कृतिक सरगम,दीप जले दीपावली आई- धनतेरस से दीपावली पर्व का आगाज़-5 दिवसीय महापर्व ।दुनियां के हर देश में बसे भारतवंशी धनतेरस से भाईदूज तक फिर छठ महात्योहार में खुशियों से सरोबार होंगे।

-संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतर्राष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि सीए(एटीसी) संगीत माध्यमा एडवोकेट किशन सनमुखदास भावानानी गोंदिया महाराष्ट्र

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जातिवादी राजनीति अभिशाप — बिहार के विकास की सबसे बड़ी बाधा

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बिहार, जो कभी ज्ञान और संस्कृति का केंद्र माना जाता था, आज भी जातिवादी राजनीति के जाल में उलझा हुआ है। यहाँ की राजनीति लंबे समय से जातिगत समीकरणों पर आधारित रही है। चुनाव आते ही विकास, शिक्षा, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं जैसे मुद्दे गौण हो जाते हैं, जबकि जाति और समुदाय की पहचान चुनावी जीत का प्रमुख आधार बन जाती है। राजनीतिक दलों ने इस प्रवृत्ति को न केवल बनाए रखा, बल्कि इसे अपनी शक्ति का साधन बना लिया है। उम्मीदवारों के चयन से लेकर चुनाव प्रचार तक, हर कदम पर जातीय समीकरणों का गणित लगाया जाता है। परिणामस्वरूप, जनता जातीय भावनाओं में विभाजित हो जाती है, और सामूहिक विकास की सोच कमजोर पड़ जाती है। यह जातिवादी राजनीति बिहार की प्रगति में सबसे बड़ी बाधा बन गई है। जब वोट जाति के आधार पर पड़ते हैं, तो नेता जवाबदेही से मुक्त हो जाते हैं। विकास योजनाएँ कागजों तक सीमित रह जाती हैं, रोजगार सृजन की नीतियाँ ठंडे बस्ते में चली जाती हैं, और भ्रष्टाचार तथा अपराध को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त हो जाता है। उदाहरण: बिहार के गया जिले में हाल के वर्षों में देखा गया कि एक प्रमुख सड़क निर्माण परियोजना, जो ग्रामीण क्षेत्रों को शहर से जोड़ने वाली थी, जातीय समीकरणों के कारण रुकी रही। ठेकेदारों और स्थानीय नेताओं के बीच जाति-आधारित पक्षपात के कारण परियोजना में देरी हुई, जिससे स्थानीय लोगों को बेहतर कनेक्टिविटी और आर्थिक अवसरों का लाभ नहीं मिल सका। यह एक जीता-जागता उदाहरण है कि कैसे जातिवादी मानसिकता विकास कार्यों को प्रभावित करती है। बिहार को प्रगति के पथ पर अग्रसर होने के लिए इस मानसिकता से बाहर निकलना होगा। जनता को यह समझना होगा कि जातीय पहचान से ऊपर उठकर केवल योग्य, ईमानदार और विकासोन्मुख नेतृत्व को चुनना ही राज्य की वास्तविक प्रगति का मार्ग है। जब तक राजनीति “जाति” के बजाय “योग्यता और नीति” पर आधारित नहीं होगी, तब तक बिहार अपनी पूर्ण क्षमता को प्राप्त नहीं कर सकेगा। बिहार की राजनीति को जातिवाद की बेड़ियों से मुक्त कर विकास और समानता की दिशा में मोड़ना समय की माँग है। यदि जनता जागरूक होकर मुद्दों पर आधारित राजनीति को अपनाए, तो बिहार पुनः उस गौरवशाली युग की ओर लौट सकता है, जब वह पूरे देश के लिए एक उदाहरण हुआ करता था। जातिवाद की जड़ें
बिहार में राजनीति की दिशा और दशा पर जातीय समीकरणों का गहरा प्रभाव रहा है। चुनाव आते ही नेता विकास, शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों से ध्यान हटाकर जाति-आधारित वोट बैंक की राजनीति करने लगते हैं। गाँव-गाँव और मोहल्ले-मोहल्ले में जातीय पहचान के नाम पर समाज को बाँटा जाता है। परिणामस्वरूप, जनता अपने अधिकारों और विकास की बात करने के बजाय “हमारी जाति का नेता कौन है” की सोच में उलझी रहती है। विकास पर प्रभाव
जब राजनीति का आधार योग्यता या नीतियों के बजाय जाति बन जाती है, तो प्रशासनिक पदों से लेकर सरकारी योजनाओं तक में पारदर्शिता और निष्पक्षता समाप्त हो जाती है। जातिवाद के कारण योग्य व्यक्तियों को अवसर नहीं मिलते, और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है। विकास की योजनाएँ कागजों तक सीमित रह जाती हैं। शिक्षा और सामाजिक एकता पर प्रभाव
जातिवादी मानसिकता न केवल राजनीति, बल्कि समाज और शिक्षा प्रणाली को भी प्रभावित करती है। बच्चे भी जाति के चश्मे से समाज को देखने लगते हैं, जिससे सामाजिक एकता कमजोर होती है। यह स्थिति एक नए और प्रगतिशील बिहार के निर्माण में सबसे बड़ी बाधा बन गई है। समाधान की दिशा में कदम
बिहार को प्रगति के पथ पर ले जाने के लिए जातिवाद की जंजीरों को तोड़ना आवश्यक है। इसके लिए: शिक्षा और जागरूकता को प्राथमिकता दी जाए, ताकि लोग मुद्दों पर आधारित मतदान करें।
राजनीतिक दलों को विकास, रोजगार और प्रशासनिक सुधार को अपने चुनावी एजेंडे का आधार बनाना चाहिए।
युवाओं को जातीय सोच से ऊपर उठकर योग्यता और राष्ट्रहित को प्राथमिकता देनी होगी।
मीडिया और बुद्धिजीवी वर्ग को समाज में सकारात्मक विचारों का प्रसार करना होगा।
क्योंकि जातिवाद की विचारधारा ने बिहार को वर्षों पीछे धकेल दिया हे जब तक राजनीति का आधार जातिवाद रहेगा तब तक वह विकास सिर्फ भाषणों में ही रहेगा। अब समय आ गया हे की हम ऐसे नेताओं को चुने जो बिहार के विकास की सोच रखते हो न की सिर्फ जातिवाद की।बाकी सब आप लोगों के हाथमे हे आपका एक निर्णय वो आनेवाले 5 सालों तक की सोच हे यह याद रखके आगे बढ़ना चाहिए और बिहार के विकास को लक्ष्य में रखकर जनता को आगे बढ़ना चाहिए।

लेखक: चंद्रकांत सी. पूजारी (गुजरात)

सिंदुरिया में सर्विस लेन निर्माण की मांग तेज, व्यापार मंडल ने डीएम को सौंपा ज्ञापन

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। सिंदुरिया चौराहे पर लगातार बढ़ रहे जाम की समस्या को लेकर स्थानीय व्यापार मंडल ने बुधवार को जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। व्यापार मंडल ने सिंदुरिया बाजार क्षेत्र में सर्विस लेन निर्माण की मांग की है, ताकि जाम की समस्या से स्थायी राहत मिल सके और यातायात व्यवस्था सुचारू हो।

व्यापार मंडल अध्यक्ष सचिन्द्र गुप्ता ने बताया कि सिंदुरिया चौराहे की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए दोनों ओर सर्विस लेन बनाए जाने से यातायात सुगम होगा और स्थानीय दुकानदारों व राहगीरों को बड़ी राहत मिलेगी। वर्तमान में बाजार के बीचों-बीच बनी ऊँची नाली के कारण सड़क संकरी हो गई है, जिससे व्यस्त समय में जाम की स्थिति बन जाती है।

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जानकारी के अनुसार, महराजगंज से ठूठीबारी तक का मुख्य मार्ग निर्माणाधीन है, और सिंदुरिया से लगभग दो किलोमीटर पहले तक बाईपास का काम भी तेजी से चल रहा है। व्यापारियों का कहना है कि यदि सर्विस लेन का निर्माण हो जाए तो न केवल जाम की समस्या दूर होगी बल्कि क्षेत्र की सुंदरता और व्यावसायिक गतिविधियों में भी वृद्धि होगी।

व्यापार मंडल ने जिलाधिकारी से शीघ्र सर्वे कराकर सर्विस लेन निर्माण की स्वीकृति देने की मांग की है। इस अवसर पर संरक्षक दीपलाल श्रीवास्तव, महामंत्री प्रेमनारायण गुप्ता, वरिष्ठ व्यापारी संतोष गुप्ता, राजेश सोनी, रमेश जायसवाल, राजू अग्रवाल सहित दर्जनों व्यापारी उपस्थित रहे।

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16 अक्टूबर: चार विभूतियाँ जिनकी विरासत आज भी प्रेरित करती है

(विशेष लेख – राष्ट्र की परम्परा)

भारत और उपमहाद्वीप के इतिहास में 16 अक्टूबर का दिन अनेक विभूतियों की स्मृति से जुड़ा है, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में अविस्मरणीय योगदान दिया। इन चार महापुरुषों — प्रभाशंकर पाटनी, लियाक़त अली ख़ाँ, हरीश चंद्र (Harish-Chandra), और गणेश घोष — की जीवनगाथा आज भी प्रेरणा देती है।

  1. प्रभाशंकर पाटनी (1876–1938)
    गुजरात के भावनगर (तत्कालीन रियासत) में जन्मे प्रभाशंकर दालपतराम पाटनी ने दीवान (प्रधान मंत्री) के रूप में सामाजिक सुधार, शिक्षा और न्याय व्यवस्था में पारदर्शिता को बढ़ावा दिया। उन्होंने स्त्री शिक्षा और प्रशासनिक दक्षता को प्राथमिकता दी। यद्यपि उनका निधन 16 फरवरी 1938 को हुआ, फिर भी उनका कार्य 20वीं सदी के गुजरात की प्रगति में एक मील का पत्थर रहा।
  2. लियाक़त अली ख़ाँ (1895–1951)
    करनाल (हरियाणा) में जन्मे लियाक़त अली ख़ाँ ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से शिक्षित थे। वे पाकिस्तान के प्रथम प्रधानमंत्री बने और उसकी विदेश नीति, प्रशासनिक संरचना तथा आर्थिक नीति की नींव रखी। 16 अक्टूबर 1951 को रावलपिंडी में उनकी हत्या कर दी गई। वे दक्षिण एशिया में धर्मनिरपेक्ष संवाद और सामाजिक न्याय की आवाज़ थे।
  3. हरीश चंद्र (1923–1983)
    कानपुर (उत्तर प्रदेश) में जन्मे हरीश चंद्र भारतीय गणितज्ञ और भौतिक विज्ञानी थे। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की और बाद में प्रिंसटन इंस्टीट्यूट फॉर एडवांस्ड स्टडी (अमेरिका) में कार्य किया। प्रतिनिधित्व सिद्धांत और हार्मोनिक विश्लेषण के क्षेत्र में उनके शोध ने आधुनिक गणित को नई दिशा दी। 16 अक्टूबर 1983 को प्रिंसटन में उनका निधन हुआ।
  4. गणेश घोष (1900–1994)
    चटगाँव (अब बांग्लादेश) में जन्मे गणेश घोष प्रसिद्ध क्रांतिकारी और बाद में कम्युनिस्ट पार्टी के नेता बने। वे 1930 के चटगाँव शस्त्रागार कांड के वीर सेनानियों में से एक थे। स्वतंत्रता के बाद वे लोकसभा और पश्चिम बंगाल विधानसभा के सदस्य रहे। 16 अक्टूबर 1994 को कोलकाता में उनका निधन हुआ।
    इन चारों विभूतियों ने राजनीति, विज्ञान और समाज सेवा में जो दीप जलाए, वे आज भी आने वाली पीढ़ियों के लिए पथप्रदर्शक बने हुए हैं।
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“16 अक्टूबर: राजनीति, कला, खेल — नौ प्रतिभाओं की अनकही कहानी”

संकट महादेव सारगर
संकट महादेव सारगर 16 अक्टूबर 2000 को महाराष्ट्र के सांगली जिले में जन्मे । उनके पिता महादेव सारगर चाय–पान की दुकान चलाते थे। उनके परिश्रम और संघर्ष की कहानी प्रेरणास्पद है। संकट ने प्रारंभ में स्थानीय खेल गतिविधियों में हिस्सा लिया और बाद में उन्होंने भारोत्तोलन प्रशिक्षण शुरू किया। उन्होंने कोल्हापुर की शिवाजी यूनिवर्सिटी में इतिहास विषय में अध्ययन किया।
उनका करियर विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तब चमका, जब उन्होंने 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स (बर्मिंघम) में भारत के लिए पहला पदक (रजत) जीता। उन्होंने पुरुष 55 किलोग्राम वर्ग में कुल 248 किलोग्राम भार उठाया — 113 किलोग्राम स्नैच और 135 किलोग्राम क्लीन एंड जर्क।
इसके अलावा, उन्होंने 2021 के कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक जीता एवं राष्ट्रीय रिकॉर्ड 256 किलोग्राम का प्रदर्शन किया।
उनकी सफलता न केवल व्यक्तिगत है, बल्कि भारतीय भारोत्तोलन की एक नई दिशा खोलती है। संकट ने अनेक चुनौतियों का सामना किया — आर्थिक बाधाएं, स्वास्थ्य समस्याएं, प्रशिक्षण की कठिनाइयाँ — पर उन्होंने समर्पण और दृढ़ता से आगे बढ़ते गए। उनके उदाहरण से युवा खिलाड़ी प्रेरणा ले सकते हैं कि मेहनत और आत्मविश्वास से सपने सच हो सकते हैं।
अमित पंघाल
अमित पंघाल का जन्म 16 अक्टूबर 1995 को हुआ। वे भारतीय मुक्केबाज़ी के क्षेत्र में उभरते सितारे हैं। 2022 के कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने स्वर्ण पदक जीता, जो उनके जीवन की एक बड़ी उपलब्धि है। उनका प्रारंभिक प्रशिक्षण स्थानीय मुक्केबाज़ी अकादमियों में हुआ। वे क्षेत्रीय टूर्नामेंटों में हिस्सा लेते हुए राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचे।
उनकी खेल शैली, तकनीकी कौशल और प्रतिस्पर्धा की ललक उन्हें शीर्ष मुक्केबाज़ों की श्रेणी में ले आई। उन्होंने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया। उनकी कहानी यह दर्शाती है कि अगर समर्पण और कड़ी मेहनत हो, तो सीमित संसाधन होने पर भी सफलता प्राप्त हो सकती है।
निदुमोलु सुमति
निदुमोलु सुमति 16 अक्टूबर 1950 को जन्मी। वे मृदंग वादन की कवायद में प्रख्यात नाम हैं। उनका जन्म स्थान दक्षिण भारत हो सकता है (आंध्र प्रदेश या तेलंगाना क्षेत्र), जिसे सार्वजनिक स्रोतों में विशेष रूप से पुष्टि नहीं मिली है। संगीत की ओर उनका झुकाव बचपन से रहा। उन्होंने पारंपरिक संगीत शिक्षकों से ताल, लय, परंपरा और वादन प्रशिक्षण लिया।
उनका योगदान विशेष रूप से शास्त्रीय वादन प्रस्तुतियों और संगीत समारोहों में रहा। उन्होंने अनेक कलाकारों के साथ सहयोग किया तथा संगीत शिक्षा को आगे बढ़ाया। उन्होंने वादन की तकनीक, ताल संरचना और नवाचारों के साथ प्रयोग किया और ने संगीत प्रेमियों को अत्यंत आकर्षित किया।
सेठ गोविंद दास
सेठ गोविंद दास का जन्म 16 अक्टूबर 1896 को हुआ। वे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, सांसद और हिन्दी साहित्यकार थे। उनका शिक्षा पटल संभवतः संस्कृत, हिंदी, सामाजिक और राजनीतिक विषयों में रहा। वे सामाजिक, राजनीतिक और साहित्यिक क्षेत्रों में सक्रिय रहे।
वे समय-समय पर सामाजिक सुधार आंदोलनों में हिस्सा लेते और जनता के बीच शिक्षा, सामाजिक न्याय और साहित्य प्रचार में लगे रहे। उनका साहित्यिक योगदान हिंदी भाषा एवं साहित्य प्रेमियों के लिए आज भी प्रेरणा का स्रोत हैं।
नरेंद्र चंचल
नरेंद्र चंचल 16 अक्टूबर 1940 को अमृतसर, पंजाब में जन्मे थे। उनका परिवार धार्मिक पृष्ठभूमि में था, और वे बचपन से हिंदू भक्ति संगीत के वातावरण में रहे। उन्होंने स्थानीय विद्यालयों से शिक्षा ली और संगीत-शिक्षा ली। बाद में उन्होंने भजन और कीर्तन गायन में विशेष पहचान पाई।
उनका करियर मुख्य रूप से भक्ति गीतों और धार्मिक संगीत में केंद्रित रहा। उन्होंने अनेक प्रसिद्ध भजन गाए हैं जैसे “चलो बुलावा आया है,” “संकट मोचन,” “राम से बड़ा राम का नाम,” आदि।
उन्होंने हिंदी फिल्म गीतों में भी योगदान दिया — जैसे 1973 की फिल्म Bobby का गीत “बेशक मंदिर मस्जिद।”
नरेंद्र चंचल का योगदान भारतीय भक्ति संगीत को जनमानस तक पहुँचाने में अमूल्य रहा। उनका निधन 22 जनवरी 2021 को हुआ।
लच्छू महाराज
लच्छू महाराज 16 अक्टूबर 1944 को जन्मे थे। वे तबला वादन में नामी कलाकारों में शुमार हैं। उनके जन्मस्थान व शिक्षा के विवरण सार्वजनिक स्रोतों में सीमित हैं। उन्होंने संगीत गुरुकुलों, गुरु-शिष्य परंपराओं से ताल व लय की गहरी समझ प्राप्त की।
वे भारतीय शास्त्रीय संगीत प्रस्तुतियों में वादन सहयोगी तथा एकल वादन कलाकार रहे। उनकी लयबद्धता, ताल नियंत्रण एवं संवादात्मक वादन उन्हें विशिष्ट बनाते थे। संगीत महफिलों में उनकी उपस्थिति, संयोजन व ताल की शुद्धता उन्हें संगीत प्रेमियों में प्रिय बनाती थी।
हेमा मालिनी
हेमा मालिनी का जन्म 16 अक्टूबर 1948 को Ammankudi, मद्रास प्रांत (अब तमिलनाडु) में हुआ। उन्होंने चेन्नई में आंध्र महिला सभा विद्यालय में शिक्षा ली। उन्हें ड TEA Mandir Marg में कक्षा 11 तक पढ़ाई मिली।
उन्होंने भरतनाट्यम्, मोहिनीअट्टम, कुचिपुड़ी आदि नृत्य शैलियों में प्रशिक्षण लिया। वे नृत्य के साथ-साथ अभिनय क्षेत्र में प्रवेश कर गईं और हिन्दी फिल्मों में उन्हें “ड्रीम गर्ल” की उपाधि मिली।
वे सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में भी सक्रिय रहीं। उन्होंने राजनीति में कदम रखा और भारतीय जनता पार्टी से संसद में प्रतिनिधित्व किया। उन्हें पद्मश्री सम्मान से भी सम्मानित किया गया।
हेमा मालिनी ने भारतीय सिनेमा एवं संस्कृति को समृद्ध किया — नृत्य, अभिनय और सामाजिक प्रभाव के माध्यम से।
नवीन पटनायक
नवीन पटनायक का जन्म 16 अक्टूबर 1948 को हुआ। वे ओड़िशा के 14वें मुख्यमंत्री रहे व है। उन्होंने राज्य सरकारों, शिक्षा, अवसंरचना, सामाजिक कल्याण योजनाओं, ग्रामीण विकास, शिक्षा सुधार आदि क्षेत्रों में योगदान दिया।
उनकी प्रारंभिक शिक्षा और राजनीतिक पृष्ठभूमि ओड़िशा राज्य से संबंधित रही। मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने विधानसभा विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं भ्रष्टाचार नियंत्रण पर ध्यान केंद्रित किया। उनकी कार्यवाहियाँ राज्य और देश स्तर पर महत्वपूर्ण थीं।
दिगम्बर हांसदा
दिगम्बर हांसदा का जन्म 16 अक्टूबर 1939 को हुआ। वे संथाली भाषा और साहित्य के विद्वान थे। उन्होंने संथाली साहित्य की भाषा, लिपि, लोककथा और सांस्कृतिक अध्ययन में योगदान दिया। उन्हें पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया।
वे शिक्षा संस्थानों और भाषा संगठनों से जुड़े रहे। उन्होंने संथाली साहित्य के पाठ्यक्रम, अध्ययन सामग्री और शोध कार्यों को आगे बढ़ाया। उनका योगदान भाषा संरक्षण और सांस्कृतिक पहचान के संदर्भ में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
विनय मोहन शर्मा (पं. शुकदेव प्रसाद तिवारी)
विनय मोहन शर्मा, जिन्हें पं. शुकदेव प्रसाद तिवारी भी कहा जाता है, का जन्म 16 अक्टूबर 1905 को हुआ। वे हिंदी भाषा के लेखक और आलोचक थे। उन्होंने साहित्य, संस्कृति, आलोचना और विचारधारा पर लेख लिखे।
उनकी शिक्षा संभवतः पारंपरिक और साहित्य अध्ययन केंद्रों से हुई होगी। उन्होंने समय-समय पर संवाद, समीक्षा और समीक्षा लेखन करते हुए हिंदी साहित्य की दिशाओं पर विचार किया।
वेद कृष्णमूर्ति
वेद कृष्णमूर्ति का जन्म 16 अक्टूबर 1995 में हुआ। वे भारतीय महिला क्रिकेटर हैं। उन्होंने घरेलू क्रिकेट प्रतियोगिताओं में भाग लिया और राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर टीमों का प्रतिनिधित्व किया। उनकी शुरुआती शिक्षा एवं प्रशिक्षण स्टेडियमों या क्रिकेट एकेडमी में हुआ होगा।
उनका योगदान खेल क्षेत्र में महिला क्रिकेट को सशक्त करने और उदाहरण प्रस्तुत करने की दिशा में है।
16 अक्टूबर को जन्म लेने वाले ये व्यक्तित्व विभिन्न क्षेत्रों — खेल, संगीत, साहित्य, राजनीति, भाषा — में अपनी विशिष्ट छाप छोड़ चुके हैं। इनकी कहानियाँ संघर्ष, समर्पण और उत्कृष्टता का संदेश देती हैं। जब एक तरफ संकट सारगर ने एक मध्यम परिवार से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम रोशन किया, वहीं हेमा मालिनी ने कला, संस्कृति और राजनीति में एक बहुआयामी व्यक्तित्व का उदाहरण प्रस्तुत किया। इसी तरह नरेंद्र चंचल, लच्छू महाराज और निदुमोलु सुमति ने संगीत की आत्मा को जन-जन तक पहुँचाया। सेठ गोविंद दास, दिगम्बर हांसदा और विनय मोहन शर्मा ने सामाजिक, भाषायी और साहित्यिक धरातल को मजबूत किया। नवीन पटनायक ने राज्य-शासन के क्षेत्र में नेतृत्व किया। और युवा प्रतिभा वेद कृष्णमूर्ति क्रिकेट की दुनिया में बढ़ रही है।

इनकी जीवनी हमें यह सिखाती है कि चाहे जन्म स्थान, संसाधन या प्रारंभिक परिस्थिति — कुछ भी हो — अगर दृढ़ निश्चय, लगन और समय की मूल्य समझ हो, तो असाधारण उपलब्धियाँ प्राप्त हो सकती हैं। यह लेख पाठकों को प्रेरणा देने के लिए तैयार किया गया है, ताकि हर व्यक्ति अपनी राह खुद तय कर सके और अपनी कहानी लिख सके।

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व्हाट्सएप वीडियो के आधार पर पति को मिला तलाक, अदालत ने परित्याग के कारण मंजूरी दी

कुल्लू/शिमला (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। कुल्लू जिले के एक व्यक्ति को अपनी पत्नी के व्हाट्सएप पर आपत्तिजनक वीडियो मिलने के बाद तलाक मिलने की मंजूरी मिली है। अदालत ने परित्याग (Desertion) के आधार पर एक पक्षीय कार्यवाही में तलाक को स्वीकृत किया।

शादी वर्ष 2019 में हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार हुई थी। पति अन्य राज्य में नौकरी करता है और पत्नी उसके साथ क्वार्टर में रह रही थी। 2022 में पति के टूर पर जाने के दौरान पत्नी ने प्रेमी को कमरे में बुलाया। बाद में पति ने व्हाट्सएप की जांच में पत्नी की आपत्तिजनक वीडियो और फोटो पाए। जब पत्नी से पूछताछ की गई, तो उसने अपनी गलती स्वीकार की और ससुराल छोड़कर चली गई।

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पति ने याचिका में बताया कि दोनों पक्ष दो साल से अधिक समय से अलग रह रहे हैं और सुलह या पुनर्मिलन की कोई संभावना नहीं है। अदालत ने पत्नी को याचिका के बारे में सूचित किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद एक पक्षीय कार्यवाही की गई, जिसमें याचिकाकर्ता ने स्वयं और दो गवाहों को पेश किया। प्रमाणपत्र, फोटोग्राफ और पेन ड्राइव भी अदालत में प्रस्तुत किए गए।

अदालत ने पाया कि प्रतिवादी ने याचिकाकर्ता को दो साल से अधिक समय तक छोड़ रखा है। इसलिए विवाह को परित्याग के आधार पर तलाक से भंग कर दिया गया।

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25 हजार का इनामी लूट का आरोपी मुठभेड़ में गिरफ्तार

इंदिरापुरम (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। वसुंधरा टी-प्वाइंट पर 14 अक्तूबर की रात पुलिस ने एक बाइक सवार से चेकिंग के दौरान मुठभेड़ कर 25 हजार रुपये का इनामी लूट का आरोपी अफजल को गिरफ्तार किया। पुलिस की जवाबी फायरिंग में युवक के पैर में गोली लगी और उसे नियंत्रण में लिया गया।

एसीपी इंदिरापुरम अभिषेक श्रीवास्तव ने बताया कि चेकिंग के दौरान अफजल बाइक मोड़कर भागने लगा। पीछा करने पर वह अनियंत्रित होकर गिर पड़ा और पुलिस पर फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में गोली लगने के बाद आरोपी को पकड़ा गया।

पूछताछ में अफजल ने स्वीकार किया कि वह 17 सितंबर को लोनी में हुई लूट की वारदात का मुख्य आरोपी है। उसने बताया कि उसने अर्थला निवासी अंकित कुमार से पार्सल से भरा बैग लूटने की घटना अंजाम दी थी। इस मामले में उसका साथी पहले ही गिरफ्तार हो चुका है।

पुलिस ने अफजल को 15 अक्तूबर को कोर्ट के आदेश पर जेल भेज दिया। आरोपी पर पहले 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था।

दिल्ली में 7 साल बाद पटाखों की गूंज! सुप्रीम कोर्ट ने दी ग्रीन पटाखों की सशर्त अनुमति, खुश हुए दिल्लीवासी

दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। राजधानी दिल्ली के लोगों के लिए इस दीपावली पर बड़ी खुशखबरी आई है। सात साल बाद सुप्रीम कोर्ट ने दिल्लीवासियों को ग्रीन पटाखे जलाने की अनुमति दे दी है। कोर्ट के आदेश के बाद दिल्ली सरकार ने कहा कि यह फैसला परंपरा और पर्यावरण संरक्षण के बीच एक सुंदर संतुलन स्थापित करता है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने सुप्रीम कोर्ट का धन्यवाद करते हुए कहा कि अबकी बार दीपावली का उत्सव पर्यावरण संग मनाया जाएगा।

साल 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने पहली बार दिल्ली-एनसीआर में पारंपरिक पटाखों की बिक्री और उपयोग पर प्रतिबंध लगाया था। इसके बाद हर साल वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति के कारण यह रोक जारी रही। इस बार कोर्ट ने 19 और 20 अक्तूबर को सुबह 6 से 7 बजे और रात 8 से 10 बजे तक ग्रीन पटाखे जलाने की अनुमति दी है।

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दिल्ली सरकार ने साफ किया है कि केवल नीरी (CSIR-NEERI) से प्रमाणित क्यूआर कोड वाले ग्रीन पटाखे ही मान्य होंगे। इनकी बिक्री 18 से 20 अक्तूबर तक अधिकृत दुकानों पर ही की जाएगी। सरकार जल्द ही लाइसेंस प्राप्त विक्रेताओं की सूची जारी करेगी ताकि अवैध बिक्री और कालाबाजारी पर रोक लगाई जा सके।

पर्यावरण मंत्री सिरसा ने कहा कि “अगर दिल्ली की हवा दीपावली के बाद बेहतर रही तो यह छूट आगे भी जारी रह सकती है।” इसके लिए दिल्ली पुलिस, एमसीडी, डीपीसीसी और सीपीसीबी समेत कई एजेंसियां निगरानी करेंगी। 14 से 25 अक्तूबर तक हर दिन एक्यूआई की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को भेजी जाएगी।

2018 में वैज्ञानिक संस्थान सीएसआईआर-नीरी ने ग्रीन पटाखे विकसित किए थे, जो सामान्य पटाखों की तुलना में कम धुआं और ध्वनि प्रदूषण फैलाते हैं। अब दिल्लीवासी इन्हीं ग्रीन पटाखों से अपनी दीपावली रोशन कर सकेंगे — पर्यावरण की सुरक्षा के साथ।

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बही भक्ति, प्रेम और मातृत्व की त्रिवेणी, बाल योगी पचौरी जी महाराज ने किया श्रीकृष्ण बाल लीलाओं का अद्भुत वर्णन

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिला मुख्यालय के औद्योगिक अस्थान में चल रहे नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के पंचम दिवस की कथा बुधवार को अत्यंत भक्ति भाव और उत्साह के वातावरण में संपन्न हुई। कथा का आयोजन भारत-तिब्बत समन्वय संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, पूर्व प्रधानाचार्य रामकुमार सिंह के सौजन्य से किया जा रहा है।
इस अवसर पर वृंदावन धाम से पधारे राष्ट्रीय संत पचौरी जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की पावन बाल लीलाओं, पुतना उद्धार, उखल बंधन लीला और गोवर्धन लीला का अत्यंत भावपूर्ण और मार्मिक वर्णन किया।
कथव्यास पचौरी जी महाराज ने पुतना उद्धार कथा का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान अपने भक्तों की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। जब पापिणी पुतना ने बालकृष्ण को विषपान कराने का प्रयास किया, तब भगवान ने उसे मोक्ष प्रदान किया। यह घटना दर्शाती है कि ईश्वर की शरण में आने वाला कोई भी प्राणी अंततः कल्याण को प्राप्त करता है।
इसके बाद उखल बंधन लीला का वर्णन करते हुए पचौरी जी महाराज ने कहा कि यह कथा मातृत्व और स्नेह का प्रतीक है। जब माता यशोदा ने बालकृष्ण को उखल से बांधा, तो यह कोई दंड नहीं बल्कि प्रेम का बंधन था। उन्होंने कहा कि ईश्वर भी अपने भक्तों के प्रेम में बंध जाते हैं, और यही भक्ति की सर्वोच्च अवस्था है।
इसके उपरांत महाराज ने गोवर्धन लीला का वर्णन करते हुए बताया कि जब इंद्र के अहंकार से ब्रजवासी संकट में पड़े, तब बालकृष्ण ने अपने नन्हे हाथ से गोवर्धन पर्वत उठाकर सबकी रक्षा की। यह लीला सिखाती है कि भक्ति में समर्पण और अहंकार का त्याग आवश्यक है।
कथा के दौरान पूरा पंडाल “जय श्रीकृष्ण” और “गोवर्धनधारी लाल की जय” के उद्घोषों से गूंज उठा। भक्त भक्ति रस में डूबे भावविभोर हो उठे। वातावरण में भजन, कीर्तन और जयघोषों की मधुर ध्वनियाँ गूंजती रहीं।
इस अवसर पर कथा परीक्षित उर्मिला सिंह, रामकुमार सिंह, डॉ. के. के. सिंह, रमाशंकर सिंह, मुन्नी देवी, डॉ. श्याम कुमार सिंह, विधान परिषद सदस्य संतोष कुमार सिंह, एमएलसी प्रतिनिधि इंजीनियर सुधांशु सिंह, अयांश, रेयांश सहित अनेक श्रद्धालु एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे।

जय और उजैर बच्चों में जगा रहे हैं संविधान और पर्यावरण की चेतना

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। शहर के दो युवा समाजसेवी, जय और उजैर, शिक्षा, समाज और पर्यावरण को जोड़ने की दिशा में नई पहल कर रहे हैं। दोनों युवाओं ने बच्चों में संविधान, मौलिक अधिकारों और कर्तव्यों की समझ विकसित करने के लिए एक विशेष अभियान शुरू किया है।
अभियान के पहले चरण में उन्होंने कई संवाद सत्र आयोजित किए, जिनमें बच्चों को संविधान, अधिकारों और जिम्मेदारियों के बारे में सरल और रोचक ढंग से जानकारी दी गई। इसके साथ ही बच्चों को अपने जीवन में इन मूल्यों को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
अब दोनों युवा अपने अभियान के दूसरे चरण में हैं, जिसके तहत वे कन्हैया जूनियर हाई स्कूल, गोरखपुर में पुस्तकालय, संविधान दीवार और संकल्प हस्ताक्षर दीवार स्थापित कर रहे हैं। यह स्थान बच्चों के लिए सीखने, पढ़ने और अपने विचार साझा करने का माध्यम बनेगा।
विद्यालय में वे निबंध लेखन, भाषण प्रतियोगिता, चित्रकला, नारा लेखन और प्रश्नोत्तरी जैसी गतिविधियाँ भी करा रहे हैं, जिनसे छात्रों में नेतृत्व, संवाद कौशल और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित हो रही है।
युवा जय और उजैर का कहना है कि उनका उद्देश्य बच्चों को केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित न रखकर उन्हें संविधान, समाज और प्रकृति से जोड़ना है, ताकि वे भविष्य में जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बन सकें। दोनों युवाओं की योजना आगे और भी ऐसी सामाजिक गतिविधियाँ शुरू करने की है, जिनसे गोरखपुर में जागरूकता और सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सके।