Tuesday, June 30, 2026
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समस्याएं भारी, समाधान गायब—प्रशासन की चुप्पी से जनता बेहाल

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। जिले में आम जनता की परेशानियाँ दिनों-दिन बढ़ती जा रही हैं, लेकिन प्रशासन की चुप्पी ने लोगों के आक्रोश को और गहरा कर दिया है। बिजली, पानी, सड़क, स्वास्थ्य, साफ-सफाई और स्थानीय विकास कार्यों में लगातार बिगड़ती स्थिति ने लोगों की दिनचर्या अस्त-व्यस्त कर दी है। शिकायतों की लंबी सूची प्रशासन के पास पहुंच रही है, लेकिन समाधान का कोई ठोस कदम अभी तक नहीं उठाया गया है।शहरी क्षेत्रों में जाम, गंदगी और टूटी सड़कों की समस्या विकराल रूप ले चुकी है। वहीं ग्रामीण इलाकों में हैंडपंपों के खराब होने, बिजली कटौती, नालियों की सफाई न होने और स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव से लोग त्राहिमाम कर रहे हैं। पिछले कई दिनों से इन समस्याओं को लेकर लोग अधिकारियों से बार–बार संपर्क कर रहे हैं, परंतु जवाब में केवल आश्वासन मिलता है, कार्रवाई नहीं।
स्थानीय निवासियों ने बताया कि प्रशासन का मौन रवैया सबसे अधिक परेशान कर रहा है। विभागों के दफ्तरों में शिकायतें तो दर्ज हो जाती हैं, लेकिन समाधान की फाइलें आगे बढ़ती ही नहीं। परिणामस्वरूप एक छोटी समस्या समय के साथ बड़ी परेशानी में बदल जाती है, जिसका प्रभाव सीधे जनता की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि प्रशासनिक उदासीनता अब जनता के धैर्य की परीक्षा ले रही है। यदि समस्याओं पर तुरंत कार्यवाही नहीं की गई तो अगले दिनों में ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में नाराजगी खुलकर सामने आ सकती है। स्थानीय संगठनों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि सभी विभागों को सक्रिय किया जाए और लंबित समस्याओं के समाधान के लिए विशेष अभियान चलाया जाए।जनता एक ही बात पर अडिग है—
चुप्पी नहीं, जवाबदेही चाहिए, समस्या नहीं, समाधान चाहिए।

इतिहास की धड़कनों में दर्ज वह दिन जिसने दुनिया की दिशा बदली

21 नवंबर


21 नवंबर सिर्फ एक तिथि नहीं, बल्कि यह उन घटनाओं का संगम है जिसने मानव सभ्यता, तकनीक, राजनीति, विज्ञान और सामाजिक परिवर्तन के कई अध्यायों को नया मोड़ दिया। इस दिन हुई अनेक महत्वपूर्ण घटनाएँ आज भी इतिहास के पन्नों में स्वर्णाक्षरों में दर्ज हैं। यह लेख 21 नवंबर का व्यापक और SEO-फ्रेंडली विश्लेषण प्रस्तुत करता है, जिसमें प्रत्येक घटना को भावनात्मक और प्रभावशाली शब्दों में पिरोया गया है।
21 नवंबर का ऐतिहासिक महत्व: समय के सफर पर एक गहरी नजर
एडिसन ने दुनिया को सुनने का नया युग दिया (1877)
1877 में प्रसिद्ध आविष्कारक थॉमस अल्वा एडिसन ने दुनिया के सामने पहला फोनोग्राफ पेश किया। यह सिर्फ एक उपकरण नहीं था, बल्कि ध्वनि को कैद करने और पुनः सुनाने वाली मानवता की पहली तकनीकी छलांग थी। सूचना और मनोरंजन जगत को आधुनिक स्वरूप इसी आविष्कार ने दिया।

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चीन का अफीम व्यापार पर ऐतिहासिक प्रतिबंध (1906)
1906 में चीन ने अफीम के व्यापार पर सख्त रोक लगा दी। यह कदम समाज को नशे की काली छाया से निकालने की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह प्रतिबंध उस समय के सामाजिक जागरण का मजबूत प्रतीक था।
प्रिंस ऑफ वेल्स का आगमन और भारत में हड़ताल (1921)
1921 में प्रिंस ऑफ वेल्स के मुंबई आगमन के विरोध में कांग्रेस ने देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया। यह आंदोलन आजादी की ज्वाला को और भड़काने वाला साबित हुआ। भारतीय जनमानस में स्वतंत्रता की आग और तेज हुई और ब्रिटिश शासन के विरुद्ध आवाजें बुलंद हुईं।

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आजाद भारत का पहला डाक टिकट (1947)
आजादी के कुछ ही महीनों बाद 21 नवंबर 1947 को भारत ने पहला डाक टिकट जारी किया। यह सिर्फ एक टिकट नहीं था, बल्कि नवजात राष्ट्र की पहचान, स्वाभिमान और अपनी डाक प्रणाली का पहला आधिकारिक प्रतीक था।
शिक्षक दिवस को आधिकारिक मान्यता (1956)
1956 में एक प्रस्ताव लाकर शिक्षक दिवस के उत्सव को औपचारिक स्वीकृति दी गई। यह दिन भारत के शिक्षकों, गुरुओं और समाज के मार्गदर्शकों को समर्पित करते हुए ज्ञान-परंपरा को सम्मान प्रदान करने का प्रतीक बना।
भारत-चीन युद्ध और संघर्षविराम (1962)
1962 में भारत-चीन सीमा विवाद के बीच चीन की ओर से संघर्षविराम की घोषणा की गई। यह घटना एक ओर युद्ध की पीड़ा को दर्शाती है, तो दूसरी ओर कूटनीतिक प्रयासों और शांति की उम्मीद को भी।
भारत का पहला रॉकेट और अंतरिक्ष कार्यक्रम की शुरुआत (1963)
थुंबा (केरल) से 1963 में भारत ने अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम की नींव रखी। ‘नाइक-अपाचे’ नाम का पहला रॉकेट छोड़े जाने के साथ भारत ने अंतरिक्ष विज्ञान में प्रवेश किया। जिस यात्रा का शुभारंभ उस दिन हुआ, वही आज इसरो को विश्व के अग्रणी अंतरिक्ष संगठनों में खड़ा करती है।
मक्का में काबा मस्जिद पर कब्जा (1979)
21 नवंबर 1979 को मुस्लिम उग्रवादियों ने मक्का की काबा मस्जिद पर अधिकार कर लिया। यह घटना इस्लामी दुनिया को हिला देने वाली साबित हुई और सुरक्षा व्यवस्था तथा धार्मिक संवेदनशीलता पर वैश्विक बहस शुरू हुई।
अफ्रीकी राष्ट्रों और वैश्विक राजनीति की घटनाएँ (1986–2007)
1986: मध्य अफ्रीकी गणराज्य ने नया संविधान अपनाया।
1999: चीन ने अपना पहला मानव-रहित अंतरिक्ष यान ‘शेनझू’ लॉन्च किया, जो उसकी अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं का आधार बना।
2001: संयुक्त राष्ट्र ने अफगानिस्तान के लिए अंतरिम प्रशासन का प्रस्ताव रखा, जिसने युद्धग्रस्त देश में शासन व्यवस्था की नई शुरुआत की।
2002:जफ़रउल्ला ख़ान जमाली पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने।
सात यूरोपीय देशों को नाटो में शामिल होने का निमंत्रण मिला।
2005: श्रीलंका में महिंदा राजपक्षे ने रत्नसिरी विक्रमनायके को नया प्रधानमंत्री नियुक्त किया।
2006: भारत-चीन ने नागरिक परमाणु ऊर्जा सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया।
2007: पैप्सिको की चेयरमैन इंदिरा नूई अमेरिकी इंडियन बिज़नेस काउंसिल में शामिल की गईं।
2008: प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आर्थिक मंदी के बीच भी 8% विकास दर की उम्मीद जताई, जबकि राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में दो नए जज नियुक्त किए।
21 नवंबर क्यों विशेष है?
21 नवंबर वह दिन है जब इतिहास विज्ञान, राजनीति, सामाजिक सुधार और अंतरिक्ष अन्वेषण जैसे क्षेत्रों में मानवता की प्रगति की छाप छोड़ता है। यह तिथि हमें याद दिलाती है कि परिवर्तन कभी अचानक नहीं होता, बल्कि घटनाओं की श्रृंखला से इसका निर्माण होता है। इसलिए यह दिन एक प्रेरणा भी है —
कि चाहे समय कितना भी बदल जाए, इतिहास की धड़कनें हमें आगे बढ़ने की शक्ति देती हैं।

पराली का धुआं बना सिरदर्द: अफसर खेतों में दौड़ रहे, किसान कागजी कानूनों के बोझ तले कराह उठा

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। जिले में पराली जलाने पर सख्त रोक और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद प्रशासन खेत-खेत चक्कर काट रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि समस्या का बोझ आज भी किसान ही उठा रहा है। खेतों में खड़ी धान की पराली को हटाने की जद्दोजहद में किसान पहले से ही परेशान थे, उस पर भारी भरकम जुर्माने और मुकदमे की तलवार ने किसान समाज में दहशत पैदा कर दी है।हालात यह हैं कि पराली जलाने की एक सूचना मिलते ही पूरा प्रशासनिक अमला जेसीबी, दमकल और पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंच रहा है। अफसर खेतों में दौड़ते नज़र आ रहे हैं, लेकिन किसानों को अब भी पराली निस्तारण के लिए व्यावहारिक विकल्प नहीं मिल पाए हैं। अधिकांश किसानों का कहना है कि मशीनें या तो उपलब्ध नहीं हैं या किराया इतना महंगा कि छोटे किसानों की पहुंच से बाहर है।
ग्रामीण इलाकों में लोग यह सवाल भी उठाने लगे हैं कि क्या केवल पराली जलाने वाले किसान ही प्रदूषण के लिए जिम्मेदार हैं? भारी उद्योग, शहरों का धुआं और बड़े-बड़े निर्माणों पर इतनी सख्ती क्यों नहीं दिखती? किसानों का दर्द यह है कि खेती से होने वाली आय पहले ही घटती जा रही है, ऊपर से जुर्माना, एफआईआर और नियम-कायदे उनके जख्म पर नमक छिड़कने का काम कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि पराली निस्तारण को लेकर सरकार को दीर्घकालिक समाधान पर काम करना होगा। मशीन उपलब्धता बढ़ाने, सब्सिडी को सरल बनाने और गांव-गांव तकनीकी सहायता देने से ही इसमें सुधार संभव है।जब तक किसान को विकल्प नहीं मिलेगा, खेतों में उठता धुआं रोकना मुश्किल ही नहीं असंभव है।
ग्रामीणों की एक ही मांग है—सजा नहीं, समाधान चाहिए। वरना यह संकट केवल प्रदूषण का नहीं, बल्कि किसान और प्रशासन के बीच बढ़ती दूरी का भी बनता जा रहा है।

आज का राहुकाल, चौघड़िया, चंद्रबल और शुभ-अशुभ योग

🌙 21 नवंबर 2025 का पंचांग | मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष प्रतिपदा | शुक्रवार | आज का शुभ-अशुभ समय

आज का हिंदू पंचांग – 21 नवंबर 2025 (शुक्रवार)
विक्रमी संवत: 2082, कालयुक्त
शक संवत: 1947, विश्वावसु
चंद्र मास: मार्गशीर्ष (अमांत व पूर्णिमांत दोनों)
ऋतु: हेमंत
सूर्य राशि: वृश्चिक
चंद्र राशि: वृश्चिक (पूरा दिन)
🕉 तिथि
शुक्ल पक्ष प्रतिपदा
➡︎ 20 Nov 12:17 PM – 21 Nov 02:47 PM
द्वितीया आरंभ:
➡︎ 21 Nov 02:47 PM – 22 Nov 05:11 PM
⭐ नक्षत्र
अनुराधा
➡︎ 20 Nov 10:58 AM – 21 Nov 01:55 PM
ज्येष्ठा
➡︎ 21 Nov 01:55 PM – 22 Nov 04:46 PM
🧮 करण
बव: 21 Nov 01:33 AM – 02:47 PM
बालव: 21 Nov 02:47 PM – 22 Nov 04:00 AM
कौलव: 22 Nov 04:00 AM – 05:11 PM

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🧘‍♂️ योग
अतिगण्ड: 20 Nov 09:52 AM – 21 Nov 10:43 AM
सुकर्मा: 21 Nov 10:43 AM – 22 Nov 11:29 AM
🌅 सूर्योदय–सूर्यास्त
सूर्योदय: 6:48 AM
सूर्यास्त: 5:36 PM
🌙 चंद्रोदय–चन्द्रास्त
चंद्रोदय: 21 Nov – 7:35 AM
चन्द्रास्त: 21 Nov – 6:16 PM
🚫 अशुभ काल
राहुकाल: 10:51 AM – 12:12 PM
यमगण्ड: 2:54 PM – 4:15 PM
कुलिक: 8:09 AM – 9:30 AM
दुर्मुहूर्त: 08:58 AM – 09:41 AM, 12:34 PM – 01:17 PM
वर्ज्य: 08:11 PM – 09:58 PM

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✅ शुभ काल
अभिजीत मुहूर्त: 11:51 AM – 12:34 PM
अमृत काल: None
ब्रह्म मुहूर्त: 05:13 AM – 06:01 AM
🔱 योग — आनंदादि योग
राक्षस – 01:55 PM तक
चर – आगे
🌕 विशेष योग
सर्वार्थसिद्धि योग:
20 Nov 10:58 AM – 21 Nov 01:55 PM
🌑 चन्द्र बल (22 Nov 06:49 AM तक)
वृषभ, मिथुन, कन्या, वृश्चिक, मकर, कुंभ
🧭 आज यात्रा किस दिशा में शुभ है?
➡ शुभ दिशा: पूर्व व दक्षिण
इन दिशाओं में यात्रा सफलता, सम्मान व लाभ देती है।
➡ अशुभ दिशा: उत्तर-पश्चिम (वर्जित)
इस दिशा में यात्रा से बचें। अत्यावश्यक हो तो—जौ या दही खाकर निकलें।

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🍀 आज घर से निकलते समय क्या खाएं?
दही + शहद
या
गुड़ + पानी
यात्रा मंगलमय होती है, बाधाएँ दूर रहती हैं।
🔔 कौन-सा मंत्र जपें?
यात्रा, कार्य सिद्धि व शुभफल हेतु:
🌼 ‘ॐ गं गणपतये नमः’
या
🌼 ‘ॐ नमः शिवाय’
5–11 बार जपने से कार्यों में सफलता मिलती है।
🕓 दिन का चौघड़िया
चर: 06:48 – 08:09
लाभ: 08:09 – 09:30
अमृत: 09:30 – 10:51
काल: 10:51 – 12:12
शुभ: 12:12 – 13:33
रोग: 13:33 – 14:54
उद्वेग: 14:54 – 16:15
चर: 16:15 – 17:36
🌙 रात का चौघड़िया
(आपके चाहने पर पूरी तालिका जोड़ दूँ)
✨ त्यौहार एवं व्रत
हेमंत ऋतु प्रारंभ
चंद्र दर्शन व्रत
🕉 गण्डमूल नक्षत्र
ज्येष्ठा गण्डमूल:
21 Nov 01:55 PM – 22 Nov 04:46 PM

मानवता के आईने में सामाजिक सरोकार की असली तस्वीर

कैलाश सिंह

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)।आज जब दुनिया तेजी से बदल रही है, तकनीक हमारे जीवन का हिस्सा बन चुकी है और सुविधाएँ कदम-दर-कदम बढ़ती जा रही हैं, ऐसे दौर में सबसे बड़ा सवाल उठता है—क्या इन सबके बीच सामाजिक सरोकार भी उतनी ही गति से आगे बढ़ रहा है? या फिर विकास की चमक के पीछे सामाजिक संवेदनाएं धुंधली पड़ती जा रही हैं? मानवता के आईने में यदि समाज को देखें तो कई परतें सामने आती हैं—कहीं उजले चेहरे हैं, तो कहीं गहरे धब्बे भी।
सबसे पहले समझना जरूरी है कि सामाजिक सरोकार किसी एक वर्ग, संस्था या व्यक्ति का कार्य नहीं, बल्कि यह समाज की सामूहिक चेतना है। यह वह जिम्मेदारी है जो हमें दूसरों के दर्द को महसूस करने की शक्ति देती है। यही सरोकार समाज को सिर्फ भीड़ नहीं, बल्कि समुदाय बनाता है। लेकिन दुखद यह कि आज इस चेतना में निरंतर गिरावट महसूस की जा रही है। भीड़ बढ़ रही है, पर सामूहिकता सिकुड़ती जा रही है।आज चारों तरफ बदलाव की तेज आँधी है—रोजगार की दौड़, संसाधनों की स्पर्धा, निजी स्वार्थों की मानसिकता, और सोशल मीडिया की कृत्रिम दुनिया ने संवेदनाओं को कहीं-न-कहीं कमजोर किया है। सड़क हादसे पर लोग वीडियो बनाने में अधिक व्यस्त दिख जाते हैं, बजाय मदद करने के। पड़ोसी की पीड़ा अब खबर बनती है, सरोकार नहीं। पंचायत से लेकर शहर तक, सामाजिक जुड़ाव की कड़ी धीरे-धीरे कमजोर दिखाई देती है।
लेकिन यह पूरी तस्वीर नहीं है। आईने का दूसरा हिस्सा भी है—जहाँ सामूहिकता आज भी जीवित है, चाहे कम ही सही। अनेक स्थानों पर लोग बेघर बच्चों को खाना बांटते हैं, अस्पतालों में मरीजों की मदद के लिए स्वयंसेवी संगठन जुटते हैं, युवाओं की टीमें रक्तदान शिविर लगाती हैं, और आपदा के समय असंख्य हाथ उठते हैं। ये वही रोशनियां हैं जो बताती हैं कि सामाजिक सरोकार अभी समाप्त नहीं हुआ है, बस उसे जगाने की जरूरत है।
मानवता का आईना तभी चमकेगा जब समाज अपनी जिम्मेदारी को समझेगा। परिवार, स्कूल, समाज और शासन—चारों स्तंभों को मिलकर इस संवेदनशीलता को फिर से मजबूत बनाना होगा। बच्चों में करुणा और सहानुभूति के संस्कार डालना, युवाओं में सामाजिक जिम्मेदारी बढ़ाना, और बुजुर्गों के अनुभवों को सम्मानित करना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। समाज तभी जीवंत होता है जब उसकी संवेदना जागृत रहती है।
आज आवश्यकता है कि हम विकास की रफ्तार में सामाजिक सरोकार को पीछे न छोड़ें। एक दूसरे के लिए खड़ा होना, किसी अनजान के आँसू पोंछना, सुरक्षित समाज के लिए आवाज़ उठाना—ये छोटे-छोटे कदम ही समाज की बड़ी पहचान बनाते हैं। मानवता का आईना हमें यही सिखाता है कि सरोकार के बिना समाज अधूरा है और संवेदना के बिना इंसान।
अंत में सवाल सिर्फ इतना है—क्या हम इस आईने में खुद को पहचानने की हिम्मत रखते हैं? अगर हाँ, तो सामाजिक सरोकार की असली तस्वीर बदलने में देर नहीं लगेगी।

कला, विज्ञान और साहस के युगपुरुषों की विरासत

“21 नवंबर के अविस्मरणीय विदा हुए सितारे: भारतीय इतिहास, संस्कृति और संघर्ष के अमर प्रेरणास्रोत”

भारत का इतिहास अनेक महान विभूतियों की उज्ज्वल स्मृतियों से भरा हुआ है। 21 नवंबर निधन के दिन देश ने ऐसे अनेक दिग्गजों को खोया, जिन्होंने कला, संस्कृति, विज्ञान, साहित्य, राजनीति और स्वतंत्रता आंदोलन के पथ पर अमिट छाप छोड़ी। यह दिन हमें लगातार याद दिलाता है कि राष्ट्र का निर्माण केवल ईंट-पत्थरों से नहीं, बल्कि उन महापुरुषों की दृष्टि, त्याग और समर्पण की शक्ति से होता है, जिन्होंने अपने जीवन को देश और समाज के लिए समर्पित किया।
गुरमीत बावा: पंजाबी लोक की सुरमयी आत्मा (2021)
पंजाबी लोकसंगीत की प्रतीक और “लंबी ही एक्क” जैसी कठिन गायन शैली की महारथी गुरमीत बावा ने अपनी गायकी के जरिए पंजाब की माटी की खुशबू विश्वभर में पहुंचाई। उनकी आवाज सिर्फ संगीत नहीं थी, बल्कि लोक परंपराओं का जीवंत इतिहास भी थी। 21 नवंबर निधन के दिन उनका जाना लोक धरोहर के एक उजले अध्याय का अंत था।

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कल्याण मल लोढ़ा: साहित्य, शिक्षा और सामाजिक परिवर्तन के प्रहरी (2009)
प्रख्यात शिक्षाविद्, साहित्यकार और आलोचक कल्याण मल लोढ़ा हिंदी भाषा के सशक्त स्तंभ थे। उन्होंने शिक्षा को जीवन सुधार का साधन माना और सामाजिक चेतना जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका निधन भारतीय शिक्षा जगत तथा साहित्य में एक बड़ी रिक्तता छोड़ गया।
सी.वी. रमन: नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक का प्रेरणादायी अंत (1970)
विश्वप्रसिद्ध भौतिक विज्ञानी सर चंद्रशेखर वेंकट रमन भारतीय विज्ञान के सबसे उज्ज्वल सितारों में से एक थे। ‘रमन प्रभाव’ ने भारत को वैश्विक विज्ञान पटल पर स्थापित किया। उनका 21 नवंबर निधन विज्ञान प्रेमियों के लिए आज भी एक भावनात्मक क्षण है, जो आने वाली पीढ़ियों को शोध, नवाचार और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने की प्रेरणा देता है।
अविनाशलिंगम चेट्टियार: गांधीवादी मूल्यों के सच्चे संवाहक (1921)
स्वतंत्रता सेनानी, अधिवक्ता और राजनीतिज्ञ अविनाशलिंगम चेट्टियार भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के निष्ठावान योद्धा थे। उन्होंने अपने जीवन में सामाजिक उत्थान, शिक्षा और ग्रामीण विकास पर केंद्रित कार्य किया। 21 नवंबर निधन हमें उनके त्याग और सेवा को श्रद्धापूर्वक स्मरण करने का अवसर देता है।
सत्येंद्रनाथ बोस: क्रांतिकारी चेतना का अदम्य प्रतीक (1908)
सत्येंद्रनाथ बोस, केवल वैज्ञानिकों में प्रसिद्ध नाम नहीं, बल्कि क्रांतिकारी बोस—एक साहसी स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्होंने देश की आज़ादी के लिए अपने प्राणों की बाज़ी लगा दी। उनका बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए अमर प्रेरणा है। 21 नवंबर निधन का यह स्मरण देशभक्ति की ज्वाला को प्रज्वलित करता है।
सिकंदर शाह लोदी: दिल्ली सल्तनत का प्रभावशाली शासक (1517)
दिल्ली के सुल्तान सिकंदर शाह लोदी प्रशासनिक सुधारों, कृषि नीतियों और शहरी विकास के लिए प्रसिद्ध थे। उन्होंने “आगरा” को बसाकर उसे एक प्रमुख नगर का स्वरूप दिया। उनका निधन भारतीय मध्यकालीन इतिहास की एक महत्वपूर्ण धारा का अंत माना जाता है।
21 नवंबर निधन केवल तिथियों का संग्रह नहीं, बल्कि विरासतों का आईना है। इस दिन विदा हुए सभी महान व्यक्तित्व भारत के सांस्कृतिक, वैज्ञानिक, राजनीतिक और स्वतंत्रता संघर्ष के इतिहास में विशिष्ट स्थान रखते हैं। उनका योगदान कालातीत है, और उनकी स्मृतियाँ राष्ट्र की आत्मा में हमेशा जीवित रहेंगी।

महादेव की महिमा: शिव पुराण के अनुसार अमर कथा जो आत्मा को स्पर्श कर जाए

भगवान शिव: अद्भुत त्याग, अपार करुणा और अनंत शक्ति की धुरी शिव पुराण के अनुसार शिव–तत्त्व का रहस्य


हिन्दू धर्म में भगवान शिव केवल एक देवता नहीं, बल्कि संपूर्ण सृष्टि की वह ऊर्जा हैं जो विनाश में सृजन और मृत्यु में अमरत्व का संदेश देती है। शिव पुराण में वर्णित महाशिव की कथाएँ मानव जीवन के हर आयाम को स्पर्श करती हैं—वैराग्य, करुणा, न्याय, प्रेम और त्याग। “एपिसोड–2” के इस लेख में हम शिव पुराण के उन गूढ़ अध्यायों का विस्तार से उल्लेख कर रहे हैं, जो भगवान शिव के तत्त्व को और भी स्पष्ट रूप से उजागर करते हैं।

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शिव का त्याग—जहाँ ईश्वर स्वयं सरलता का रूप बन जाता है
शिव पुराण बताता है कि देवाधिदेव महेश्वर ने स्वयं को भौतिक सुखों से अलग कर हिमालय की बर्फीली गुफाओं को अपना निवास बनाया।
ब्रह्मा-विष्णु की तरह न तो उनमें राजसी वैभव था और न किसी प्रकार का आडंबर। वे बस बाघम्बर धारण किए, हाथ में त्रिशूल, जटाओं में गंगा और नीली कंठ में हलाहल का विष लिए सबके कल्याण में लीन थे।
कथा मिलती है कि जब समुद्र मंथन में विश्व को संकट में डाल देने वाला कालकूट विष निकला, तो कोई भी देवता उसे स्पर्श करने का साहस नहीं कर पाया। तभी भगवान शिव ने बिना किसी विलंब के विष को अपने कंठ में रोक लिया।

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यह केवल बल का नहीं, बल्कि परम त्याग और करुणा का सर्वोच्च उदाहरण है। तभी तो वे “नीलकंठ” कहलाए—दुनिया को बचाने का दर्द स्वयं में समेट लेने वाले देव।
सती का प्रेम और शिव का विरह—एक अमर कथा
शिव पुराण की एक अत्यंत मार्मिक कथा है भगवान शिव और माता सती का दिव्य मिलन। सती शिव के प्रति अनन्य निष्ठा रखती थीं, परंतु पिता दक्ष की अवमानना ने प्रेम को अग्नि बना दिया।
जब दक्ष ने यज्ञ में भगवान शिव को आमंत्रित नहीं किया और सती का अपमान किया, तो उन्होंने अपने प्राण अग्नि को समर्पित कर दिए। इस घटना ने शिव के हृदय को शोक, क्रोध और विराग के महासागर में डुबो दिया।

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सती की देह उठाकर शिव का तांडव आज भी एक ऐसी घटना माना जाता है जिसने सृष्टि की गति को हिला दिया था। देवताओं को भय हुआ कि यदि शिव का तांडव जारी रहा तो ब्रह्मांड समाप्त हो जाएगा।
तब भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन से सती के अंगों को पृथ्वी पर गिराकर तांडव को शांत किया। यही अंग शक्तिपीठों के रूप में आज भी श्रद्धा के केंद्र हैं।

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शिव–तत्त्व: विनाश नहीं, नवसृजन का मार्ग शिव पुराण स्पष्ट करता है कि भगवान शिव का “विनाश” हमेशा “कल्याणकारी” होता है।
वे अहंकार का नाश करते हैं, न कि आत्मा का।
वे अधर्म का अंत करते हैं, न कि संसार का।
उनका तृतीय नेत्र केवल तब खुलता है जब सृष्टि में संतुलन बिगड़ जाता है। इससे स्पष्ट है कि शिव हर युग में “संतुलनकारी शक्ति” हैं—जो मानव को भीतर से बदलने, परिष्कृत करने और सत्य की राह पर अग्रसर करने का मार्ग दिखाते हैं।
नटराज—सृष्टि, स्थित और संहार का अद्भुत नृत्य
नटराज का रूप शिव पुराण में गहन अर्थ छुपाता है।
उनका नृत्य केवल कलात्मक अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि ब्रह्मांड की अनवरत गतिशीलता का संकेत है—
जहाँ हर समाप्ति में एक नई शुरुआत छिपी होती है।
धूलकणों से लेकर आकाशगंगाओं तक, सब उनकी ताल पर ही तो नृत्यरत हैं। यही नृत्य सृष्टि को जीवंत और संतुलित बनाए रखता है।
क्यों शिव विश्व–गुरु हैं?
क्योंकि वे तप के माध्यम से शक्ति का ज्ञान देते हैं।
त्याग के माध्यम से प्रेम का अर्थ समझाते हैं।
करुणा के माध्यम से धर्म का मार्ग दिखाते हैं।
भय रहित जीवन जीने की प्रेरणा देते हैं।
और सबसे महत्वपूर्ण—अपने भक्तों को बिना किसी भेदभाव के स्वीकार करते हैं।
यही कारण है कि शिव आज भी “जन-जन के देव” हैं।
न कोई बड़ा-छोटा, न ऊँच-नीच, न जाति-धर्म—हर कोई महादेव का है, और महादेव सबके।
एपिसोड-3 में अगले शुक्रवार को… हम पढ़ेंगे—पार्वती का तप, शिव का पुनर्मिलन और महासृष्टि के रहस्य।

COP30 में अफरा-तफरी: ब्राज़ील में यूएन जलवायु सम्मेलन स्थल पर लगी आग, 13 घायल—हजारों लोगों की निकासी

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बेलेम (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। ब्राज़ील के बेलेम शहर में आयोजित संयुक्त राष्ट्र COP30 जलवायु सम्मेलन में शुक्रवार को बड़ा हादसा हो गया। सम्मेलन स्थल के मुख्य हिस्से ‘ब्लू जोन’ में अचानक आग लगने से भारी अफरा-तफरी मच गई। धुएं के कारण 13 लोग घायल हुए, जबकि हजारों प्रतिनिधियों, अधिकारियों और पत्रकारों को तुरंत बाहर निकाला गया।

दोपहर 2 बजे ब्लू जोन में लगी आग

अधिकारियों के अनुसार, आग दोपहर 2 बजे उस क्षेत्र में लगी जहां—

• द्विपक्षीय व बहुपक्षीय बैठकें

• देशों के पवेलियन

• मीडिया सेंटर

• शीर्ष वैश्विक प्रतिनिधियों के दफ्तर स्थित हैं।

यही हिस्सा मुख्य प्लेनरी हॉल से भी जुड़ा था, जहां जलवायु परिवर्तन पर महत्वपूर्ण वार्ताएं चल रही थीं।

अलर्ट मिलते ही परिसर खाली, लोगों में भगदड़ नहीं

आग लगते ही सुरक्षा टीम ने सभी निकास द्वार खोलकर लोगों को बाहर निकालना शुरू किया।
सूचना प्रणाली (इंफॉर्मेशन सिस्टम) से अलर्ट जारी हुआ, जिसके बाद पूरा परिसर तेजी से खाली कराया गया।

हजारों लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के बावजूद किसी प्रकार की भगदड़ की स्थिति नहीं बनी।

दमकल की कई गाड़ियां मौके पर, आग पर काबू

स्थानीय प्रशासन के मुताबिक:

• अतिरिक्त दमकल वाहन ब्लू जोन में भेजे गए

• सभी सुरक्षा प्रोटोकॉल सक्रिय किए गए

• आग पर काबू पा लिया गया है

UNFCCC सचिवालय ने तुरंत संदेश जारी कर कहा:
“ध्यान दें: जोन B में आग की घटना हुई है। कृपया तुरंत स्थल खाली करें। आगे की जानकारी जल्द दी जाएगी।”

13 घायल, किसी की हालत गंभीर नहीं

यूएन सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि आग पर काबू पा लिया गया है, लेकिन जांच पूरी होने तक किसी को अंदर नहीं जाने दिया जा रहा।

सभी 13 घायलों का मौके पर ही इलाज किया गया। वे धुएं के संपर्क में आए थे और फिलहाल उनकी स्थिति स्थिर है।

190 देशों के प्रतिनिधि मौजूद—सम्मेलन 10 से 21 नवंबर तक

COP30 में 190 से अधिक देशों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं।
यह जलवायु सम्मेलन 10 नवंबर से 21 नवंबर तक अमेजन क्षेत्र के बेलेम शहर में आयोजित किया जा रहा है।

PM मोदी आज से तीन दिवसीय दक्षिण अफ्रीका दौरे पर, G-20 में भारत मज़बूती से उठाएगा ग्लोबल साउथ की आवाज़

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज से दक्षिण अफ्रीका के तीन दिवसीय दौरे पर रवाना होंगे, जहां वे G-20 शिखर सम्मेलन में भारत का नेतृत्व करेंगे। यात्रा से पहले विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी सुधाकर दलेला ने कहा कि भारत ग्लोबल साउथ से जुड़े सभी अहम मुद्दों को मंच पर मजबूती से उठाएगा।

उन्होंने बताया कि लीडर्स डिक्लेरेशन में क्या शामिल होगा, यह अभी कहना जल्दबाज़ी होगी, लेकिन भारत की प्राथमिकताओं को पूरा महत्व मिलेगा।

लगातार चौथा वर्ष—ग्लोबल साउथ में हो रहा है G-20 सम्मेलन

दलेला ने बताया कि यह लगातार चौथा वर्ष है जब G-20 शिखर सम्मेलन किसी ग्लोबल साउथ देश में आयोजित हो रहा है।
इस बार यह पहली बार अफ्रीकी महाद्वीप में आयोजित हो रहा है, जिससे अफ्रीका और विकासशील देशों की चिंताओं पर वैश्विक फोकस और बढ़ेगा।

2023 में नई दिल्ली G-20 के दौरान अफ्रीकन यूनियन को स्थायी सदस्यता मिली थी।
दक्षिण अफ्रीका इस वर्ष समूह की अध्यक्षता कर रहा है और 20वां G-20 शिखर सम्मेलन जोहानसबर्ग में होगा।

मोदी की चौथी आधिकारिक यात्रा

PM मोदी 21 से 23 नवंबर तक दक्षिण अफ्रीका में रहेंगे।
कई द्विपक्षीय बैठकें भी प्रस्तावित हैं, जिनके विवरण अंतिम चरण में हैं।

यह मोदी की दक्षिण अफ्रीका की चौथी आधिकारिक यात्रा है—

2016: द्विपक्षीय यात्रा

2018 और 2023: ब्रिक्स सम्मेलन

2025: G-20 शिखर सम्मेलन

समिट की थीम—सॉलिडेरिटी, इक्वलिटी, सस्टेनेबिलिटी

दलेला ने बताया कि इस वर्ष की थीम “Solidarity, Equality, Sustainability” पर आधारित है।
इस दौरान चार प्रमुख प्राथमिक क्षेत्रों को केंद्र में रखा गया है, जिनका उद्देश्य विकासशील देशों की जरूरतों को वैश्विक एजेंडा में शामिल करना है।

भारत ने अपनी अध्यक्षता (2023) के दौरान जिन मुद्दों पर जोर दिया था—

डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, खाद्य सुरक्षा, ऋण स्थिरता

इन विषयों को इस बार भी महत्वपूर्ण तवज्जो दी गई है और उम्मीद है कि लीडर्स डिक्लेरेशन में उनका उल्लेख होगा।

जी-20 क्या है?

G-20 दुनिया की 20 प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं का समूह है, जो—

वैश्विक GDP का बड़ा हिस्सा, विश्व व्यापार का बड़ा भाग, वैश्विक जनसंख्या का महत्वपूर्ण हिस्सा का प्रतिनिधित्व करता है।

दलेला ने कहा कि आतंकवाद भारत के लिए अहम मुद्दा है, लेकिन G-20 का फोकस मुख्यतः आर्थिक और विकास संबंधी चर्चाओं पर रहता है।
उन्होंने यह भी कहा कि कौन से नेता सम्मेलन में भाग लेंगे, इस पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।

पाकिस्तान की साजिश? शेख हसीना को मिली फांसी की सजा पर बेटे सजीब वाजेद के बड़े आरोप

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Sheikh Hasina News: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को मानवता के खिलाफ अपराध मामलों में इंटरनेशनल क्राइम ट्रिब्यूनल (ICT) ने दोषी ठहराते हुए एक मामले में उम्रकैद और दूसरे में फांसी की सजा सुनाई है। यह फैसला पिछले वर्ष हुए छात्र प्रदर्शनों में हिंसक कार्रवाई से जुड़े मामलों पर आया है।

उनके बेटे सजीब वाजेद ने इस फैसले को “पूरी तरह गैरकानूनी, पक्षपाती और राजनीतिक साजिश” करार दिया है। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा सरकार ने न्यायपालिका में हस्तक्षेप कर ट्रिब्यूनल के 17 जज हटा दिए और एक ऐसे जज को नियुक्त किया, जिसने “खुलेआम हसीना के खिलाफ टिप्पणी की है।”

चुनावों से पहले साजिश? अवामी लीग को भी बैन किया गया

सजीब वाजेद का आरोप है कि मोहम्मद यूनुस सरकार ने कानून में बदलाव कर किसी भी आरोपी व्यक्ति को चुनाव लड़ने से रोकने का प्रावधान जोड़ा, जिसके चलते उनकी मां को जल्दबाजी में दोषी ठहराया गया।

उनका कहना है कि अवामी लीग को भी चुनावों से बैन कर दिया गया है और “बांग्लादेश में लोकतंत्र नाम की कोई चीज नहीं बची।”

भारत से प्रत्यर्पण की मांग निराधार: साजीब वाजेद

हसीना वर्तमान में भारत में हैं और बांग्लादेश सरकार उन्हें वापस भेजने की मांग कर रही है। लेकिन सजीब वाजेद कह रहे हैं कि यह कदम “कानूनी रूप से असंभव” है।

उन्होंने कहा:
“भारत का मेरी मां को प्रत्यर्पित करने का कोई दायित्व नहीं है। न सरकार वैध है, न प्रक्रिया कानूनी।”

प्रधानमंत्री मोदी का आभार – ‘उन्होंने मां की जान बचाई’

सजीब वाजेद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार की सुरक्षा व्यवस्था की सराहना की।
उन्होंने कहा कि मोदी ने उनकी मां की जान बचाई है और भारत उन्हें “कड़ी सुरक्षा” दे रहा है।

क्या बांग्लादेश पर पाकिस्तान का असर बढ़ रहा है?

सजीब वाजेद के मुताबिक, वर्तमान बांग्लादेश सरकार पर पाकिस्तान का गहरा प्रभाव है।
उन्होंने आरोप लगाया:

पाकिस्तान ने यूनुस सरकार को शुरू से सपोर्ट किया

पाकिस्तान ने हसीना विरोधी प्रदर्शनों में भूमिका निभाई

लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर खुलेआम बांग्लादेश में घूम रहे हैं

हाल ही में दिल्ली में हुए धमाके का क्रेडिट भी बांग्लादेश से जुड़े तत्वों ने लिया

उनका कहना है कि बांग्लादेश “पाकिस्तान का एक्सटेंशन और आतंकवादियों की पनाहगाह” बनता जा रहा है।

अवामी लीग पर कार्रवाई — हजारों नेता जेल में

उन्होंने बताया कि अवामी लीग के हजारों कार्यकर्ता और 100 से अधिक सांसद बिना ट्रायल के जेलों में हैं।
यह “पूरी तरह राजनीतिक बदले की कार्रवाई” है जिसमें जमात-ए-इस्लामी की भूमिका बताई जा रही है।

क्या शेख हसीना वापस लौटेंगी?

सजीब वाजेद को भरोसा है कि उनकी मां एक दिन बांग्लादेश लौटेंगी।
उन्होंने कहा,
“वह बांग्लादेश की बेटी हैं। हमारा जनसमर्थन विशाल है। हमें खत्म नहीं किया जा सकता।”

देवरिया में पहली बार तीन दिवसीय खगोल विज्ञान कार्यक्रम, विद्यार्थी जानेंगे अंतरिक्ष के रहस्य

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)l जिले में पहली बार खगोल विज्ञान पर केंद्रित तीन दिवसीय विशेष कार्यक्रम का आयोजन 24 से 26 नवंबर 2025 तक राजकीय इंटर कॉलेज (जीआईसी) देवरिया में किया जा रहा है। यह कार्यक्रम विद्यार्थियों, युवाओं और आम जनता को ब्रह्मांड तथा अंतरिक्ष विज्ञान की रोमांचक जानकारियों से परिचित कराने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है।

कार्यक्रम में मुंबई के नेहरू तारामंडल के प्रसिद्ध खगोलशास्त्री एवं मानव व्याख्याता एस. ओ. नटराजन मुख्य वक्ता के रूप में शामिल होंगे। अब तक देशभर में 3500 से अधिक व्याख्यान दे चुके नटराजन वर्तमान में सूर्य और कोरोना पर वैज्ञानिक अध्ययन कर रहे हैं। वे प्रतिभागियों को ब्रह्मांड की संरचना, ग्रहों, तारों, आकाशगंगाओं और अंतरिक्ष के अन्य रहस्यों के बारे में रोचक और वैज्ञानिक तथ्यों के साथ अवगत कराएंगे।

रंगीन स्लाइड्स के माध्यम से अंतरिक्ष विज्ञान की विस्तृत व्याख्या की जाएगी। साथ ही प्रतिभागी विशेष टेलिस्कोप से चंद्रमा के गड्ढों, शनि के छल्लों और अन्य खगोलीय पिंडों का प्रत्यक्ष अवलोकन भी कर सकेंगे।

राजकीय इंटर कॉलेज देवरिया, कस्तूरबा गांधी बालिका इंटर कॉलेज, नवोदय विद्यालय तथा केंद्रीय विद्यालय देवरिया के छात्र-छात्राएं इस कार्यक्रम में शामिल होंगी। प्रत्येक दिन कार्यक्रम का समय शाम 6:00 बजे से 8:30 बजे तक निर्धारित किया गया है।

शैक्षिक विशेषज्ञों के अनुसार यह आयोजन विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास करने और खगोल विज्ञान के प्रति उनकी जिज्ञासा बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा।

सांसारिक और आध्यात्मिक ज्ञान की कथा है देवी भागवत पुराण कथा – आचार्य अजय शुक्ल

सलेमपुर, देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)। मां भगवती की महिमा अपरंपार है, उनके इच्छा से ही सृष्टि की उत्पत्ति ,पालन और संहार होता है। उक्त बातें क्षेत्र के अहिरौली में आयोजित पंच दिवसीय भागवत पुराण कथा का श्रद्धालुओं को रसपान कराते हुए आचार्य अजय शुक्ल ने कहा। उन्होंने कहा कि देवी महाशक्ति ही एकमात्र परम् सत्ता हैं। इस कथा के श्रवण करने से सांसारिक और आध्यात्मिक ज्ञान की प्राप्ति होता है। यह पुराण ज्ञान,धर्म ,अर्थ,काम और मोक्ष को प्राप्त कराने वाला है।राजा परीक्षित की आत्मा की मुक्ति के लिए उनके पुत्र जन्मेजय ने वेदव्यास जी से श्रीमद देवी भागवत कथा पुराण कथा श्रवण किया था,क्योंकि राजा परीक्षित को तक्षक नाग ने डस लिया था।उनकी अकाल मृत्यु हुई थी।कथा श्रवण के पश्चात उनकी आत्मा को मुक्ति प्रदान हुआ था। मानव का सद्कर्म ही उसे सदगति का मार्ग प्रशस्त करता है। धर्म वही है जिसके आचरण से किसी भी जीव को कष्ट नहीं हो। कलयुग में गलत मार्ग पर चलकर व्यक्ति जल्दी सुख व वैभव प्राप्त कर सकता है लेकिन यह क्षणिक ही होता है उसके बाद जीवन का अंत बड़ा कष्टमय व्यतीत होता है। कथा के दौरान गोरख गुप्ता, पिंकी देवी,प्रतीक मिश्र, गुड्डू बाबा,चंद्रभूषण तिवारी, चंदन तिवारी, विमला देवी, प्रतिभा देवी आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

कृषि यंत्रीकरण योजनाओं के तहत किसानों की ई-लॉटरी, चयनित लाभार्थियों को मिलेगा अनुदान

संत कबीर नगर(राष्ट्र की परम्परा)। मुख्य विकास अधिकारी जयकेश त्रिपाठी की अध्यक्षता में कृषि विभाग की सबमिशन ऑन एग्रीकल्चर मैकेनाइजेशन तथा प्रमोशन ऑफ एग्रीकल्चर मैकेनाइजेशन फॉर क्रॉप रेसिड्यू मैनेजमेंट योजनाओं के तहत किसानों द्वारा ऑनलाइन बुक किए गए यंत्रों की ई-लॉटरी निकाली गई। इसमें सभी विकास खंडों में कस्टम हायरिंग सेंटर, चाफ कटर, पावर टिलर, स्ट्रॉ रीपर एवं हाईटेक हब फॉर कस्टम हायरिंग सेंटर के लिए किसानों का चयन किया गया।
उप कृषि निदेशक डॉ. राकेश कुमार सिंह ने बताया कि चयनित किसान यू.पी. यंत्र ट्रैकिंग पोर्टल पर दर्ज किसी भी पंजीकृत विक्रेता से यंत्र खरीद सकेंगे। खरीदे गए यंत्र का विवरण एक माह के भीतर विभागीय पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा। स्थलीय सत्यापन के बाद पात्र किसानों को योजना अनुसार 40% अनुदान की राशि डीबीटी के माध्यम से प्रदान की जाएगी।
मुख्य विकास अधिकारी ने चयनित लाभार्थियों से अपेक्षा की कि अनुदानित यंत्र न केवल उनके खुद के खेतों में, बल्कि आसपास के किसानों के खेतों में भी उपयोग किए जाने चाहिए। इसके लिए कस्टम हायरिंग सेंटर पर बैनर लगाना तथा यंत्रों पर योजना के तहत प्राप्त अनुदान का विवरण अंकित करना अनिवार्य रहेगा।

गोरखपुर विश्वविद्यालय ने उत्तर प्रदेश 2047 कॉनक्लेव में भारतीय ज्ञान परंपरा को दी नई दिशा

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। विकसित उत्तर प्रदेश@2047 शिक्षा एवं कौशल विकास महाचर्चा में दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय ने भारतीय ज्ञान प्रणाली (भारतीय ज्ञान परंपरा) को नई दिशा देते हुए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने भारतीय ज्ञान प्रणाली केंद्रित सत्र की अध्यक्षता की, जिसमें प्रदेश को 2047 तक ज्ञान-आधारित, नवाचार-संचालित और वैश्विक प्रतिस्पर्धी बनाने की रणनीति पर व्यापक विमर्श हुआ। यह आयोजन उत्तर प्रदेश सरकार के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित किया गया।
सत्र की अध्यक्षता करते हुए प्रो. टंडन ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा केवल सांस्कृतिक धरोहर भर नहीं, बल्कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी, दर्शन, कला, कृषि, योग और समाज व्यवस्था की वह प्राचीन-समृद्ध विरासत है, जो उच्च शिक्षा को वैश्विक पटल पर एक नई पहचान दे सकती है। उन्होंने भारतीय ज्ञान प्रणाली को शिक्षण, शोध, नवाचार, उद्यमिता और रोजगारपरक कौशल विकास से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया
प्रो. टंडन ने सुझाव दिया कि धरोहर सूचीकरण, पारंपरिक ज्ञान के संकलन और विश्वविद्यालयों व स्थानीय परंपरा-विशेषज्ञों के सहयोग से तैयार दस्तावेज राज्य के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगे। उन्होंने कहा कि अयोध्या, वाराणसी, मथुरा, शिल्प और लोककला परंपराएँ, कृषि विरासत और सांस्कृतिक विविधता के कारण उत्तर प्रदेश भारतीय ज्ञान परंपरा का केंद्र बनने की पूरी क्षमता रखता है।
सत्र में प्रो. बिहारी लाल शर्मा, प्रो. ए. के. त्यागी, बिजेन्द्र सिंह और प्रो. विनय कुमार पाठक ने अपने विचार व्यक्त किए। विभिन्न वक्ताओं ने भारतीय ज्ञान प्रणाली को शोध, उद्योग-संयोजन, कौशल विकास, वैश्विक शिक्षण कार्यक्रमों और रोजगार सृजन से जोड़ने के उपाय सुझाए। उच्च शिक्षा विभाग ने प्रो. टंडन की दृष्टि और नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उनके विचार राज्य की उच्च शिक्षा नीतियों को विकसित भारत 2047 के अनुरूप नया मार्ग प्रदान करते हैं।


कार्यक्रम में कई महत्वपूर्ण वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे। मुख्यमंत्री के सलाहकार डॉ. जी. एन. सिंह, आर्थिक सलाहकार डॉ. के. वी. राजू और शिक्षा सलाहकार प्रो. डी. पी. सिंह ने विकसित उत्तर प्रदेश @ 2047 की रूपरेखा पर अपने दृष्टिकोण प्रस्तुत किए। वहीं मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी, उच्च शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव एम. पी. अग्रवाल, उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी और उच्च शिक्षा कैबिनेट मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने उच्च शिक्षा, नवाचार, कौशल विकास और युवा सशक्तिकरण पर अपने विचार साझा किए।
यह महाचर्चा उच्च शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित की गई।

टूटी सड़क पर चलने को मजबूर ग्रामीण हो रहे है घायल

बरहज/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)l बढ़ौना हर्दो से लेकर देऊबारी और सतराव को जोड़ने वाली सड़क 7 वर्षों से जर्जर अवस्था में पड़ी है जिस पर चलते हुए राहगीर प्रतिदिन चोटिल होते रहते हैं, लेकिन किसी भी जनप्रतिनिधि ने इस दयनीय अवस्था मे पड़ी सड़क पर आज तक ध्यान नहीं दिया और वही ग्रामीण अपने भाग्य को कोसते रहते हैं। आज से लगभग 3 वर्ष पहले जिला पंचायत अध्यक्ष ने गांव में जाकर ग्रामीणों से सड़क बनवाने का वादा किया लेकिन आज टूटी सड़क नहीं बनाइ गयी और ग्रामवासी सड़क का दंश झेल रहे हैं।
बढ़ौना हर्दो से सतराव, मौना गढ़वा, डुमरिया कोल होते हुए सतराव को जोड़ने वाली सड़क कई वर्षों से देऊवारी व बढ़ौना हर्दो के बीच डेढ़ किलोमीटर सड़क टूट गई है जिस पर चलने वाले राहगीर हर समय चोटिल होते रहते हैं। सड़क की दुर्दशा को देखते हुऐ ग्रामीणों ने जिला पंचायत अध्यक्ष से 11 दिसंबर 2021 को सड़क बनवाने की मांग की, जिस पर जिला पंचायत अध्यक्ष ने बनवाने के लिए हामी भर दी, लेकिन ग्रामीणों को आज भी टूटी सड़क की दुर्दशा का दंश झेलना पड़ रहा है । ग्रामीण रामाशंकर यादव, राहुल यादव, विकास, सत्येंद्र, डब्ल्यू, प्रेम शंकर उपाध्याय आदि लोगों का कहना है आश्वासन के बाद भी नहीं बनी सड़क और हम सभी ग्रामीण परेशान झेल रहे है।