Monday, June 29, 2026
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विवेक की मूर्ति गणेश: आत्मनियंत्रण का शास्त्रोक्त मार्ग

विघ्नों के बीच विवेक — गणेश जी की शास्त्रोक्त शिक्षाएँ और आत्मबोध का मार्ग


भक्ति डेस्क -राष्ट्र की परम्परा

संसार में हर मानव एक ऐसी यात्रा पर है, जहाँ राहें कभी सरल तो कभी कांटों से भरी होती हैं। जीवन के इस चक्र में जब व्यक्ति दिशा भटकता है, तब उसे एक ऐसे प्रकाश की आवश्यकता होती है जो केवल मार्ग ही नहीं, बल्कि मार्ग का सार भी समझाए। यही कारण है कि शास्त्रों में गणेश जी को केवल विघ्नहर्ता ही नहीं, अपितु बुद्धि, विवेक और आत्मज्ञान का अधिष्ठाता देव माना गया है।
जहाँ बाहरी विघ्नों के साथ-साथ भीतर के अज्ञान, क्रोध, अहंकार और मोह जैसे विघ्नों से मुक्ति का शास्त्रोक्त संदेश निहित है।

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गणेश जी का मूक उपदेश — मौन में समाया सत्य

एक प्रसिद्ध शास्त्रोक्त प्रसंग के अनुसार, एक बार पार्वती माता ने गणेश जी से पूछा— “पुत्र, धर्म और अधर्म का अंतर कैसे पहचाना जाए?”

गणेश जी ने कोई उत्तर नहीं दिया। वे केवल अपने मौस (मूषक वाहन) की ओर देख मुस्कुरा दिए। माता पार्वती आश्चर्य में पड़ गईं। तभी महादेव ने कहा— “जो अपने मन-रूपी मूषक को वश में कर ले, वही धर्म का वास्तविक स्वरूप जान लेता है।”

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यह प्रसंग दर्शाता है कि मन ही सबसे बड़ा विघ्न है, और मन का नियंत्रण ही सबसे बड़ी पूजा। गणेश जी की साधना केवल पुष्प, दुर्वा या मोदक नहीं, बल्कि आत्म-नियंत्रण, धैर्य और विवेक की साधना है।

विघ्नों का वास्तविक अर्थ — शत्रु नहीं, गुरु

मनुष्य अक्सर हर बाधा को दुर्भाग्य समझ लेता है, परंतु गणेश जी की शास्त्रोक्त व्याख्या में विघ्न परीक्षा होते हैं, दंड नहीं। वे हमें रोकते नहीं, बल्कि हमें मज़बूत बनाते हैं।

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जब किसी कार्य के आरंभ में गणेश वंदना की जाती है, तो उसका उद्देश्य केवल बाधाओं का नाश नहीं होता, बल्कि यह स्मरण होता है कि—

“मैं जो करने जा रहा हूँ, उसमें मेरा विवेक जाग्रत रहे।”
गणेश जी विघ्नों को हराकर नहीं, उन्हें समझाकर मनुष्य को विजय का मार्ग दिखाते हैं।

विघ्नों के बीच विवेक — गणेश जी की शास्त्रोक्त शिक्षाएँ और आत्मबोध का मार्ग

गणेश जी की सबसे महान शिक्षा यह है कि विजय दूसरों पर नहीं, स्वयं पर होती है। जो अपने भीतर के क्रोध, लोभ, ईर्ष्या और घमंड पर नियंत्रण पा लेता है, वही सच्चा विजेता है।

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शास्त्र कहते हैं—

“गजानन की पूजा में प्रथम अर्घ्य मन को अर्पित होता है।”
अर्थात् जब तक मन शुद्ध न हो, तब तक किसी भी पूजा का फल अधूरा है। यह तत्व आज के युग में और अधिक प्रासंगिक हो जाता है जहाँ व्यक्ति के पास सब कुछ है पर शांति नहीं।

इस कथा का संदेश — भीतर का गणेश जागृत करो
यह शास्त्रोक्त कथा यही स्मरण कराता है कि:
वास्तविक विघ्न बाहर नहीं, अंदर हैं
वास्तविक पूजा मंदिर में नहीं, मन में है
वास्तविक आशीर्वाद मंत्रों में नहीं, कर्मों में है
जब कोई व्यक्ति प्रेम, करुणा और धैर्य का मार्ग अपनाता है—तभी उसके जीवन की परिक्रमा पूर्ण होती है।

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गणेश जी की कृपा का अर्थ केवल संकटों से बचाव नहीं, बल्कि कठिनाइयों में भी स्थिर बने रहने की शक्ति है।

आज का मनुष्य जितना बाह्य जगत में भटक रहा है, उतना ही उसे गणेश तत्व की आंतरिक साधना की आवश्यकता है। इस ज्ञान में ही जीवन का वास्तविक सुख और शांति है।
एपिसोड – 4

“एसआईआर : सरकारी लापरवाही की कीमत कर्मचारियों की जान से क्यों चुकाई जाए?

”लेख –

सलेमपुर के धनगड़ा ग्राम निवासी युवा लेखपाल आशीष कुमार (30 वर्ष) की मौत केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि शासन-प्रशासन की अव्यवस्थित और कठोर प्रणाली की भयावह तस्वीर है। यह घटना बताती है कि नीतियों की कुर्सी पर बैठे लोग जब ज़मीनी वास्तविकता से दूर निर्णय लेते हैं, तो उसकी कीमत सबसे पहले व्यवस्था की रीढ़—फील्ड कर्मचारियों—को चुकानी पड़ती है।सरकार द्वारा जारी एसआईआर (Special Summary Revision) एक प्रशासनिक प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना होता है। उद्देश्य भले ही जनहित का हो, लेकिन इसे जिस प्रकार बिना तैयारी, बिना मानव-बल और बिना निर्देशों की स्पष्टता के लागू किया , वह सीधे-सीधे कर्मचारियों को जोखिम में डालने के बराबर है।विडंबना यह है कि शासनादेश में लेखपाल को बीएलओ (BLO) की श्रेणी में रखा ही नहीं गया, इसके बावजूद जमीनी स्तर पर उन्हीं पर पूरा बोझ डाल दिया गया।इससे भी बड़ी चिंता की बात यह रही कि जब लेखपाल आशीष की मौत हुई, तब अधिकारी स्वयं असहाय खड़े दिखे। यह प्रशासनिक संवेदनहीनता का वह रूप है जिसे लोकतांत्रिक शासन में किसी भी रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता।सुबह 6 बजे से शाम 3 बजे तक जनता और संगठन सहायता की मांग लेकर खड़े रहे, लेकिन कोई अधिकारी मृतक की पत्नी और बच्चों को सहायता की न्यूनतम उम्मीद तक नहीं दे सका। यह दृश्य केवल प्रशासन की कमजोरी ही नहीं, बल्कि सरकार की उस नीतिगत ठंडक को उजागर करता है, जिसने कर्मचारियों की जीवन सुरक्षा को “प्रक्रिया” के नीचे कुचल दिया है।क्यों खतरनाक है यह प्रवृत्ति?सरकारी योजनाएँ बिना संसाधन, बिना स्टाफ और बिना तैयारी लागू हो रही हैं।फील्ड कर्मचारी “हमेशा उपलब्ध और हमेशा जिम्मेदार” समझे जाते हैं, पर उनकी सुरक्षा, स्वास्थ्य और मानव मर्यादा की बात कोई नहीं करता।शासनादेश और जमीनी निर्देशों में स्पष्ट विरोधाभास है।मृत्यु जैसी गंभीर घटनाओं पर भी तत्काल राहत की व्यवस्था नहीं—यह सीधे तंत्र की असफलता है।यदि ऐसे ही हालात रहे तो यह प्रवृत्ति और खतरनाक रूप ले सकती है, क्योंकि कर्मचारी व्यवस्था से टूटते जाएँगे और जनता का प्रशासन पर विश्वास भी कमजोर पड़ेगा।मृतक आशीष कुमार की मौत—एक चेतावनीआशीष की मृत्यु सिर्फ एक परिवार को नहीं, पूरे शासन तंत्र को यह याद दिलाती है कि—नीतियाँ तब तक जनहितैषी नहीं हो सकतीं, जब तक वे मानवीय, व्यावहारिक और ज़मीनी स्तर पर लागू करने योग्य न हों।एसआईआर की मौजूदा प्रक्रिया तभी सुरक्षित बन सकती है जबइसकी अवधि कम से कम 3 माह बढ़ाई जाए,कर्मचारियों को कार्य के अनुरूप स्पष्ट आदेश और पर्याप्त संसाधन दिए जाएँ,और सबसे महत्वपूर्ण—मृतक के परिवार को 1 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता तत्काल घोषित की जाए।यह सहायता दया नहीं, बल्कि कर्तव्य है।क्योंकि सरकार की प्रक्रिया में आई खामियों का बोझ किसी परिवार को अपने प्रिय की जान देकर नहीं उठाना चाहिए।सरकारें बदलती रहती हैं, अभियान आते-जाते रहते हैं, लेकिन जीवन एक बार जाता है तो लौटकर नहीं आता।आशीष कुमार की मौत एक सवाल छोड़ जाती है—क्या हमारी प्रशासनिक मशीनरी इतनी निष्ठुर हो चुकी है कि वह कर्मचारियों की जान की कीमत भी नहीं समझती?समय है कि सरकार इस प्रश्न का ईमानदार जवाब दे—और उससे पहले मृतक परिवार के आंसू पोछे।कलम से…….संजयदीप कुशवाहाप्रदेश अध्यक्षराष्ट्रीय समानता दल उत्तर प्रदेश

उन्नीस की उम्र, अनंत का बलिदान: अमर शहीद खुदीराम बोस

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असि. प्रो. जितेन्द्र कुमार पाण्डेय

भारत के स्वतंत्रता संग्राम का हर अध्याय अदम्य साहस, त्याग और राष्ट्रभक्ति की गाथाओं से भरा हुआ है। इन अमर गाथाओं के शिखर पर जिस नाम की चमक आज भी वैसी ही उज्ज्वल है, वह है, शहीद खुदीराम बोस। मात्र 19 वर्ष की आयु में हँसते-हँसते फाँसी पर झूल जाने वाला यह युवा क्रांतिकारी केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि उस दौर के भारतीय युवाओं की चेतना, साहस और संकल्प का जीवंत प्रतीक था। उनकी जयंती पर उनका स्मरण करना स्वतंत्रता के मूल्य को समझने का प्रयास भी है और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों को नए सिरे से जानने का अवसर भी। खुदीराम बोस ने बचपन से ही अन्याय और दमन के विरुद्ध खड़े होने का अद्भुत साहस दिखाया। उस समय भारत ब्रिटिश शासन की कठोर नीतियों और क्रूर दमन का सामना कर रहा था। युवाओं में स्वदेशी आंदोलन की लहर उठ रही थी और इसी वातावरण में खुदीराम बोस जैसे वीरों ने क्रांतिकारी मार्ग को अपनाया। वे जानते थे कि यह राह सरल नहीं, लेकिन उनके भीतर स्वतंत्रता का जो ज्योतिर्पुंज जल रहा था, वह हर कठिनाई से बड़ा था। 1908 में अंग्रेज अधिकारियों द्वारा किए जा रहे अत्याचारों के विरोध में उन्होंने जिस निर्भीक कार्रवाई को अंजाम दिया, उसने ब्रिटिश हुकूमत को हिला दिया। गिरफ्तारी के बाद भी उनका चेहरा मुस्कुराता रहा, और अदालत में उनका अडिग मनोबल यह संदेश देता रहा कि स्वतंत्रता की लड़ाई केवल हथियारों से नहीं, बल्कि दृढ़ विश्वास और अटल साहस से जीती जाती है। फाँसी की सज़ा सुनाए जाने पर उनकी आँखों में भय नहीं, बल्कि गर्व और संतोष दिखा, ऐसा संतोष, जो केवल देश के लिए जीवन न्योछावर करने वालों की आँखों में चमकता है। खुदीराम बोस की शहादत केवल एक घटना नहीं थी; वह एक चिंगारी थी, जिसने हजारों युवाओं के हृदय में क्रांतिकारी चेतना की ज्वाला प्रज्वलित की। यह ज्वाला बंगाल से निकलकर पूरे देश में फैल गई और स्वतंत्रता संग्राम की गति को नई दिशा मिल गई। आज भी उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि राष्ट्र के प्रति समर्पण के लिए उम्र नहीं, बल्कि संकल्प की मजबूती मायने रखती है। वर्तमान समय में जब चुनौतियाँ बदल गई हैं, लेकिन राष्ट्र को सशक्त बनाने की जिम्मेदारी अब भी हम सब पर है, ऐसे में खुदीराम बोस का जीवन हमें प्रेरित करता है कि कर्तव्य का मार्ग कठिन हो सकता है, पर उससे विमुख होना भारतीयता के भाव के विरुद्ध है। देशभक्ति आज केवल तलवार उठाने का नाम नहीं, बल्कि समाज को बेहतर बनाने, सत्य और न्याय के पक्ष में खड़े होने, और राष्ट्रहित के लिए समर्पित रहने का संकल्प है। खुदीराम बोस का बलिदान अनंत हैl समय की सीमाओं से परे, पीढ़ियों को प्रेरित करता हुआ। उनकी जयंती पर हम न केवल उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं, बल्कि यह भी संकल्प लेते हैं कि स्वतंत्रता के इस उपहार का सम्मान करते हुए देश के विकास, एकता और प्रगति के लिए निरंतर योगदान देंगे। शहीद खुदीराम बोस अमर रहें। उनका साहस, उनका बलिदान और उनका उज्ज्वल आदर्श सदैव हमारा पथ प्रदर्शक बना रहे।

समान अवसर, समान सम्मान: दिव्यांगता से परे मानवता की पहचान

नवनीत मिश्र

समाज की असली परिभाषा तभी पूर्ण होती है जब उसमें हर व्यक्ति को बराबरी के अधिकार, अवसर और सम्मान प्राप्त हों। अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग दिवस इसी समावेशी सोच को मजबूत करने का वैश्विक प्रयास है। यह दिवस हमें यह समझने का अवसर देता है कि दिव्यांग जन भी हमारी तरह सपने, आकांक्षाएँ, क्षमताएँ और संभावनाएँ रखते हैं और उन्हें भी वही मंच मिलना चाहिए, जिस पर खड़े होकर समाज का हर सदस्य अपना भविष्य संवारता है।
हर वर्ष 3 दिसंबर को दुनिया भर में अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग दिवस मनाया जाता है। इसे संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 1992 में शुरू किया था, ताकि देशों का ध्यान दिव्यांग जनों के अधिकारों, उनकी समान भागीदारी, रोकथाम, पुनर्वास, और संवेदनशील व्यवहार की आवश्यकता की ओर आकर्षित किया जा सके। इसका उद्देश्य केवल दिव्यांगता को समझना नहीं, बल्कि समाज में मौजूद उन बाधाओं को हटाना है जो उनकी प्रतिभा के मार्ग में रुकावट बनती हैं।
आज भी शिक्षा से लेकर रोजगार तक, स्वास्थ्य सेवाओं से लेकर सार्वजनिक सुविधाओं तक, दिव्यांग जन कई स्तरों पर चुनौतियों का सामना करते हैं। भौतिक अवरोध, सामाजिक दृष्टिकोण और अवसरों की कमी उनके सामने बड़ी रुकावटें पैदा करते हैं। लेकिन यह भी उतना ही सत्य है कि जब दिव्यांग व्यक्तियों को उचित वातावरण और समान अवसर मिलते हैं, तो वे अपनी क्षमताओं से दुनिया को चकित कर देते हैं। खेल, विज्ञान, कला, साहित्य, प्रशासन हर क्षेत्र में उनके अद्भुत योगदान इसके प्रमाण हैं।
इस दिवस का सार यही है कि दिव्यांगता किसी व्यक्ति की कमी नहीं है; असल कमी समाज की उस दृष्टि में है जो उन्हें अलग मानती है। यदि हम सब मिलकर सामाजिक व्यवहार में संवेदनशीलता, सार्वजनिक स्थानों में सुगम्यता, शिक्षा और रोजगार में न्यायपूर्ण अवसर तथा सम्मानजनक वातावरण सुनिश्चित करें, तो हम वास्तव में एक समावेशी और मानवीय समाज का निर्माण कर सकते हैं।
अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग दिवस हमें यह सोचने के लिए प्रेरित करता है कि समानता केवल शब्दों में नहीं, बल्कि व्यवहार और व्यवस्था में भी दिखनी चाहिए। यह दिन हमें याद दिलाता है कि मानवता सर्वोपरि है और जब समाज का हर सदस्य आगे बढ़ेगा, तभी विकास पूर्ण और सार्थक होगा।

बीएचयू में छात्रों और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़प, 100 से अधिक घायल; कैंपस में तीन घंटे तनाव

वाराणसी (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में मंगलवार देर रात छात्रों और सुरक्षाकर्मियों के बीच हुई झड़प ने कैंपस में तनाव पैदा कर दिया। घटना के दौरान दोनों पक्षों के बीच पत्थरबाजी और हाथापाई हुई, जिसमें छात्रों, सुरक्षाकर्मियों और पुलिसकर्मियों सहित 100 से अधिक लोग घायल हो गए।

घटना में एलडी गेस्ट हाउस चौराहे पर रखे कई गमले, कुर्सियाँ और कुछ वाहन क्षतिग्रस्त हुए। वहीं तमिल संगमम के ‘वणक्कम काशी’ वाले बड़े पोस्टर भी फाड़ दिए गए।

क्या हुआ था बीएचयू में?

घटना बुधवार को होने वाले 216 छात्रों के स्वागत कार्यक्रम से ठीक पहले हुई।
करीब आधा किलोमीटर तक सड़क पर ईंट-पत्थर बिखरे मिले। ब्रोचा हॉस्टल के एक छात्र को सिर पर चोट आई, जबकि कई छात्रों और सुरक्षाकर्मियों को हल्की से मध्यम चोटें आईं। गंभीर रूप से घायल कुछ छात्रों को ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है।

घटना के बाद तीन थानों, 10 पुलिस चौकियों, और चार ट्रक PAC बल को मौके पर भेजा गया। सुरक्षाबलों ने छात्रों को हॉस्टल तक भेजने की कोशिश की, जिससे लगभग तीन घंटे तक तनाव बना रहा।

विवाद की वजह पर दो अलग-अलग दावे

छात्रों का दावा:

राजाराम हॉस्टल के पास एक गाड़ी ने कथित तौर पर एक छात्रा को धक्का मार दिया। जब छात्र इसकी शिकायत लेकर पहुंचे तो बहसबाजी बढ़ गई।

प्रॉक्टोरियल बोर्ड का दावा:

घटना से पहले मुंह ढके कुछ छात्र एक छात्र को घेरकर मार रहे थे। सुरक्षाकर्मियों ने हस्तक्षेप किया और छात्रों को पकड़कर प्रॉक्टोरियल बोर्ड को सौंपा। इसके बाद कई छात्र हॉस्टल से निकलकर सुरक्षाकर्मियों पर भड़क उठे।

तनाव कैसे बढ़ा?

घायल छात्रों को न्याय दिलाने की मांग को लेकर छात्रों ने कुलपति आवास के बाहर धरना शुरू किया। प्रदर्शन के दौरान विवाद बढ़ा और अचानक पत्थरबाजी शुरू हो गई। गुस्साए छात्रों ने एलडी गेस्ट हाउस चौराहे पर जाकर सजावटी सामान तोड़ दिया।

जांच जारी

चीफ प्रॉक्टर प्रो. शिव प्रकाश सिंह ने बताया कि अभी किसी भी पक्ष की औपचारिक शिकायत नहीं मिली है, लेकिन घटना की जांच के लिए सीसीटीवी फुटेज और साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।

भारत रत्न डॉ. राजेन्द्र प्रसाद: न्याय, राष्ट्रभावना और आदर्श नेतृत्व के प्रेरणा स्रोत

पुनीत मिश्र

भारत के स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्र-निर्माण की लंबी यात्रा कुछ ऐसे व्यक्तित्वों के बिना अधूरी है, जिन्होंने न केवल अपने समय का नेतृत्व किया बल्कि आने वाली पीढ़ियों का मार्ग भी प्रशस्त किया। डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ऐसे ही महानायक थेl विनम्रता, वैचारिक दृढ़ता, न्यायप्रियता और कर्मनिष्ठा की जीवित प्रतिमूर्ति। उनकी जयंती और अधिवक्ता दिवस का यह संयुक्त अवसर याद दिलाता है कि एक सच्चे वकील, निष्ठावान स्वतंत्रता सेनानी और आदर्श राष्ट्रनायक में कौन-सी विशेषताएँ होती हैं।
डॉ. राजेन्द्र प्रसाद का व्यक्तित्व भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का एक अनुकरणीय अध्याय है। चम्पारण सत्याग्रह में महात्मा गांधी के सबसे भरोसेमंद साथियों में से एक के रूप में उन्होंने न्याय के लिए कानून की चौखट से आगे बढ़कर जनसेवा को अपना धर्म बना लिया। कलकत्ता हाईकोर्ट के सफल अधिवक्ता के रूप में उनका करियर जितना गौरवपूर्ण था, उतना ही महान था उसे छोड़कर देश की स्वतंत्रता के लिए समर्पित हो जाना। यह त्याग उनके चरित्र की ऊँचाई को दर्शाता है।
भारत की संविधान सभा के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने जिस धैर्य, संयम, सरलता और समावेशिता के साथ विभिन्न विचारधाराओं को एक सूत्र में पिरोया, वह आज भी भारतीय लोकतंत्र की मौलिक शक्ति है। संविधान निर्माण के इतिहास में उनका योगदान केवल प्रक्रियागत भूमिका नहीं बल्कि भारतीय राज्य की आत्मा को आकार देने का कार्य था। उनके नेतृत्व में संविधान सभा संवाद, समन्वय और राष्ट्रदृष्टि का प्रतीक बन गई।
स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति के रूप में डॉ. प्रसाद ने पद की मर्यादा, सादगी और कर्तव्यनिष्ठा का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया, जो आज भी सर्वोच्च संवैधानिक पद की गरिमा का मानदंड है। वे परिस्थितियों से ऊपर उठकर राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने वाले सच्चे राजनेता थे।
अधिवक्ता दिवस, जो भारत में डॉ. राजेन्द्र प्रसाद के सम्मान में मनाया जाता है, हमें यह स्मरण कराता है कि कानून केवल प्रक्रिया नहीं बल्कि नैतिकता, संवेदनशीलता और न्याय के प्रति प्रतिबद्धता का माध्यम है। डॉ. प्रसाद ने वकालत को पेशा नहीं, एक मूल्य के रूप में देखा, जहाँ सत्य, तर्क और नैतिक साहस सर्वोच्च हों। वर्तमान समय में यह दिन अधिवक्ताओं को यह सोचने का अवसर देता है कि वे न्याय को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने में कितने समर्पित हैं।
आज जब समाज वैचारिक विभाजन, संवादहीनता और त्वरित न्याय की अपेक्षाओं से गुजर रहा है, तब डॉ. राजेन्द्र प्रसाद की सीख और भी प्रासंगिक हो जाती है। वे बताते हैं कि राष्ट्रवाद समावेशी होना चाहिए, न्यायपालिका की गरिमा निष्पक्षता पर आधारित होती है और नेतृत्व का सबसे बड़ा गुण विनम्रता है।
डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केवल भारत के प्रथम राष्ट्रपति नहीं थे, वे इस राष्ट्रयात्रा के प्रथम मार्गदर्शक भी थे। उनकी जयंती एवं अधिवक्ता दिवस दोनों ही हमें यह प्रेरणा देते हैं कि सच्चा राष्ट्र-निर्माण कर्तव्य, अनुशासन और न्याय के प्रति आस्था से ही संभव है। ऐसे महामानव को विनम्र श्रद्धांजलि।

दिल्ली MCD उपचुनाव: आज सुबह 8 बजे से शुरू होगी मतगणना, दोपहर तक आएंगे परिणाम; तय होगी सियासत की दिशा

दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। दिल्ली राज्य चुनाव आयोग ने एमसीडी के 12 वार्डों के उपचुनाव की मतगणना को लेकर व्यापक सुरक्षा और तकनीकी व्यवस्थाएँ पूरी कर ली हैं।
30 नवंबर को हुए मतदान के बाद आज सुबह 8 बजे से 10 काउंटिंग सेंटर्स पर मतगणना शुरू होगी। चुनाव आयोग के अनुसार 12 बजे तक तस्वीर साफ होने और 1 बजे तक सभी परिणाम आने की संभावना है। सबसे पहले ग्रेटर कैलाश वार्ड का परिणाम घोषित हो सकता है।

EVM की सुरक्षा के कड़े इंतजाम

सभी काउंटिंग सेंटर्स को हाई-टेक सुविधाओं से लैस किया गया है।

• सभी स्ट्रॉन्ग रूम सीसीटीवी निगरानी में

• 1800 दिल्ली पुलिस कर्मी और 10 कंपनियों की CAPF तैनात

• राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के लिए लाइव CCTV व्यू की सुविधा

• लगभग 700 कर्मचारी मतगणना में नियुक्त

राजनीतिक दलों के अधिकृत एजेंटों को पहचान सत्यापन के बाद ही प्रवेश मिलेगा।
दिचाऊं कला और नारायणा वार्ड में अधिक बूथ होने के कारण, वहां से सबसे देर से नतीजे आने का अनुमान है।

काउंटिंग हॉलों में पूरी व्यवस्था

• काउंटिंग हॉलों में

• पर्याप्त टेबल

• काउंटिंग सुपरवाइज़र व सहायक

• बैकअप बिजली व्यवस्था

• मीडिया और अधिकृत दलों के एजेंटों के लिए अलग से व्यवस्था
उपलब्ध कराई गई है, ताकि प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और व्यवस्थित रहे।

उपचुनाव नतीजे खोलेंगे दिल्ली की सियासत का भविष्य

आज दोपहर तक आने वाले नतीजे यह तय करेंगे कि

• मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली भाजपा की लोकप्रियता बरकरार है या नहीं

• क्या आम आदमी पार्टी (AAP) अपनी पकड़ दोबारा मजबूत कर रही है

• क्या कांग्रेस की वापसी की शुरुआत हो रही है

भले ही भाजपा एमसीडी पर पहले से पूर्ण बहुमत के साथ काबिज है, लेकिन यह उपचुनाव राजनीतिक संकेतक की भूमिका निभाएगा।

तीनों दलों ने झोंकी पूरी ताकत

भाजपा – विकास कार्यों और “डबल इंजन सरकार” पर जोर

AAP – प्रदूषण और अधूरे वादों जैसे मुद्दों पर चुनाव प्रचार

कांग्रेस – पारंपरिक वोट बैंक को सक्रिय करने के लिए जनसभाएं व जनसंपर्क

विश्लेषकों के अनुसार,

• भाजपा की बड़ी जीत जनता के भरोसे का संकेत होगी

• AAP के लिए जीत उसकी पुन: सक्रियता दर्शाएगी

• कांग्रेस के लिए एक-दो सीटें भी मनोबल बढ़ाने वाली होंगी

भाजपा इसे 2027 MCD चुनावों का सेमीफाइनल मान रही है, जबकि AAP इसे दोबारा जमीन मजबूत करने का मौका बताती है। कांग्रेस के लिए यह नतीजे बताएंगे कि वापसी का रास्ता खुला है या अभी इंतजार बाकी है।

पश्चिमी विक्षोभ से उत्तर भारत में बढ़ेगी ठंड, दक्षिण में चक्रवात ‘दित्वाह’ के असर से भारी बारिश

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Weather: भारत के उत्तर और दक्षिण हिस्सों में इस समय मौसम के दो विपरीत स्वरूप देखने को मिल रहे हैं। उत्तर भारत में पश्चिमी विक्षोभ और हरियाणा के ऊपर बने चक्रवाती प्रसार के कारण कड़ाके की ठंड और शीतलहर तेज हो रही है, जबकि दक्षिण भारत में चक्रवात दित्वाह के अवशेष भारी बारिश और तेज हवाओं का कारण बने हुए हैं।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ उत्तर पाकिस्तान के पास सक्रिय है, जिसके चलते उत्तरी राज्यों में ठंड और अधिक बढ़ गई है।

उत्तर भारत में पारे में बड़ी गिरावट

हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, राजस्थान और उत्तराखंड समेत कई राज्यों में न्यूनतम तापमान सामान्य से 1.6°C से 3.0°C तक नीचे दर्ज हुआ है।

• हिसार 3.5°C के साथ मैदानी इलाकों में सबसे ठंडा स्थान रहा।

• दिल्ली, राजस्थान और पंजाब में कई जगह तापमान 6°C से नीचे पहुंच गया।

उत्तराखंड में सर्दी चरम पर

देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश और हल्द्वानी में सुबह का तापमान 8–11°C रहा।
मसूरी, नैनीताल, टिहरी और चमोली में पारा 2–6°C के बीच दर्ज हुआ।
दिन में धूप से थोड़ी राहत है, लेकिन रातें और सुबहें बेहद ठंडी रहेंगी।

हिमाचल में बर्फबारी अलर्ट, ताबो -8°C

हिमाचल प्रदेश में नई बर्फबारी और ठंडी हवाओं ने तापमान को तेजी से गिराया है।

• ताबो -8.0°C (सीजन का सबसे कम)

• शिमला 5°C
IMD ने 4–5 दिसंबर को ऊपरी क्षेत्रों में हल्की बारिश और बर्फबारी की चेतावनी जारी की है। एक कमजोर पश्चिमी विक्षोभ मौसम बदल सकता है।

आने वाले दिनों में और गिरेगा तापमान

उत्तर-पश्चिम भारत – अगले 4 दिन में न्यूनतम तापमान 2–3°C तक और गिर सकता है।

मध्य भारत – 48 घंटे स्थिर मौसम, इसके बाद पारा 2–3°C घटेगा।

पूर्वी भारत – अगले 24 घंटे सामान्य, फिर चार दिन ठंड बढ़ने की संभावना।

घने कोहरे की चेतावनी

IMD के अनुसार:

• 3 दिसंबर – मणिपुर, मेघालय

• 3–4 दिसंबर – हिमाचल, ओडिशा
इन जगहों पर घने कोहरे से सड़क और हवाई यातायात प्रभावित हो सकता है।

कश्मीर में माइनस तापमान, शीतलहर जारी

कश्मीर घाटी में सभी स्टेशनों पर न्यूनतम तापमान शून्य से नीचे रहा।

• श्रीनगर -4.4°C

• पुलवामा (कोनिबल घाटी) -5.5°C
कड़ाके की सर्दी से जनजीवन प्रभावित है।

दक्षिण भारत में ‘दित्वाह’ से भारी बारिश

बंगाल की खाड़ी में बना चक्रवात दित्वाह अब गहरे दबाव में बदल चुका है।
1 दिसंबर की रात यह चेन्नई के पूर्व में 50 किमी दूर था। अगले 24–28 घंटे में इसके कमजोर होने का अनुमान है।

प्रभावित राज्य: आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल

इन राज्यों में भारी बारिश और तटीय क्षेत्रों में 50–70 किमी/घंटा की हवाओं की चेतावनी है।
मछुआरों और तटीय निवासियों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है।

‘अमेरिका में सोमाली नहीं चाहिए, अपने देश लौटें’ — ट्रंप का विवादित बयान, उमर ने दिया कड़ा जवाब

वॉशिंगटन (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर प्रवासियों, खासकर सोमाली समुदाय को लेकर तीखा बयान दिया है। मिनेसोटा में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि वह “अमेरिका में सोमाली नहीं चाहते” और उन्हें “अपने देश लौटकर उसे ठीक करना चाहिए।” ट्रंप का यह बयान अमेरिकी राजनीति में नई बहस और तनाव को जन्म दे रहा है।

सोमाली प्रवासियों पर सख्त टिप्पणी

ट्रंप ने आरोप लगाया कि सोमाली प्रवासी “अमेरिकी सामाजिक सुरक्षा प्रणाली पर निर्भर” रहते हैं और “देश में योगदान नहीं देते।” उन्होंने कहा कि सोमालिया की बुरी स्थिति के लिए उसके लोग जिम्मेदार हैं और ऐसे प्रवासियों को अमेरिका में जगह नहीं देनी चाहिए।

इल्हान उमर को लेकर व्यक्तिगत हमला

मिनेसोटा से डेमोक्रेट सांसद इल्हान उमर, जो बचपन में सोमालिया से अमेरिका आई थीं, ट्रंप के निशाने पर रहीं। ट्रंप ने उन्हें अपमानजनक शब्दों में संबोधित किया।
जवाब में उमर ने सोशल मीडिया पर लिखा, “उनकी मेरे प्रति दीवानगी अजीब है। आशा है कि उन्हें वह मदद मिले जिसकी उन्हें जरूरत है।”

अफगान मूल के संदिग्ध की घटना के बाद बयानबाज़ी तेज

हाल ही में वाशिंगटन में दो नेशनल गार्ड सैनिकों पर हुई गोलीबारी में अफगान मूल के संदिग्ध का नाम सामने आने के बाद ट्रंप ने कई देशों के प्रवासियों के खिलाफ बयान और सख्त कर दिए हैं। उन्होंने मिनेसोटा को “धोखाधड़ी वाले धन-शोधन का केंद्र” तक बताया।

TPS हटाने की चेतावनी से बढ़ी चिंता

ट्रंप ने मिनेसोटा में सोमालियों को मिलने वाली Temporary Protected Status (TPS) हटाने का संकेत भी दिया।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि कानूनी दृष्टि से यह संभव नहीं लगता। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका में केवल 705 सोमाली नागरिक ही TPS के दायरे में आते हैं।

मिनियापोलिस के मेयर का कड़ा जवाब

मिनियापोलिस के मेयर जैकब फ्रे ने ट्रंप के बयान को “गलत और अपमानजनक” बताया। उन्होंने कहा कि सोमाली समुदाय ने शहर की अर्थव्यवस्था, कारोबार और सांस्कृतिक पहचान में बड़ा योगदान दिया है।
फ्रे ने कहा—“पूरे समुदाय को खलनायक बनाना न केवल गलत है, बल्कि अमेरिका के संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ भी है।”

विशेषज्ञों ने बताया राजनीतिक ध्रुवीकरण का प्रयास

कानूनी विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों का मानना है कि ट्रंप के ये बयान चुनावी राजनीति में ध्रुवीकरण बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा हैं।
अमेरिका में 1990 के दशक से बसे सोमाली समुदाय मिनेसोटा, ओहायो और अन्य राज्यों में महत्वपूर्ण आर्थिक और सामाजिक भूमिका निभाता है।

आज किसका चमकेगा भाग्य, किसे मिलेगी असफलता क्या करे उपाय?

मेष राशि | Aries | (चु, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ) | 🐏

आज का दिन आपके लिए लाभदायक रहेगा।
कार्य/व्यवसाय: नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन और मान-सम्मान मिल सकता है। व्यापार में नई डील फाइनल हो सकती है।
शिक्षा: विद्यार्थियों का मन पढ़ाई में लगेगा, प्रतियोगी परीक्षा में सफलता के योग हैं।
कला-संगीत: रचनात्मकता में वृद्धि होगी, मंच से सराहना मिल सकती है।
राजनीतिक/प्रशासनिक: नेतृत्व क्षमता मजबूत होगी, अधिकारी वर्ग से लाभ मिलेगा।
आर्थिक: धन लाभ के योग प्रबल हैं, रुका पैसा मिल सकता है।
शुभ रंग: लाल
शुभ अंक: 5, 7
पूजा करें: हनुमान जी की

♉ वृष राशि | Taurus | (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो) | 🐂

आज परिवार और समाज दोनों जगह सुख मिलेगा।
कार्य/व्यवसाय: नया प्रोजेक्ट हाथ में आ सकता है, धन आगमन के योग हैं।
शिक्षा: विद्यार्थियों के लिए दिन शुभ, एकाग्रता में वृद्धि।
कला-संगीत: कला से जुड़े लोगों को मौका मिलेगा।
राजनीति/प्रशासन: उच्च अधिकारियों से संपर्क लाभ देगा।
आर्थिक: स्टॉक व निवेश में लाभ।
शुभ रंग: सफेद
शुभ अंक: 1, 3
पूजा करें: माता लक्ष्मी

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♊ मिथुन राशि | Gemini | (का, की, कु, घ, ङ, छ, के, को, ह) | ♊

आज संयम और सूझबूझ से काम लें।
कार्य/व्यवसाय: भागदौड़ अधिक रहेगी, पर लाभ धीरे-धीरे मिलेगा।
शिक्षा: ध्यान भटक सकता है, मेडिटेशन करें।
कला-संगीत: मन स्थिर रखें।
राजनीति/प्रशासन: वाणी पर संयम जरूरी।
आर्थिक: लाभ संभव है लेकिन खर्च भी बढ़ेगा।
शुभ रंग: हरा
शुभ अंक: 3, 6
पूजा करें: भगवान गणेश

♋ कर्क राशि | Cancer | (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो) | ♋

आज सुख-समृद्धि का दिन है।
कार्य/व्यवसाय: प्रमोशन, नई जिम्मेदारी मिलेगी।
शिक्षा: सफलता के प्रबल योग।
कला-संगीत: सराहना मिलेगी।
राजनीति/प्रशासन: उच्च पदस्थ लोगों का साथ मिलेगा।
आर्थिक: आय बढ़ेगी, बचत में इजाफा।
शुभ रंग: क्रीम
शुभ अंक: 2, 7
पूजा करें: शिव जी

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♌ सिंह राशि | Leo | (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे) | 🦁

आज आत्मविश्वास चरम पर रहेगा।
कार्य/व्यवसाय: बॉस से प्रशंसा मिलेगी।
शिक्षा: श्रेष्ठ प्रदर्शन रहेगा।
कला-संगीत: मंचीय कार्यक्रम सफल होगा।
राजनीति/प्रशासन: मान-सम्मान बढ़ेगा।
आर्थिक: बड़ा लाभ संभव।
शुभ रंग: सुनहरा
शुभ अंक: 1, 8
पूजा करें: सूर्य देव

♍ कन्या राशि | Virgo | (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो) | ♍

आज भाग्य साथ देगा।
कार्य/व्यवसाय: जमी हुई योजनाएं सफल होंगी।
शिक्षा: अच्छे परिणाम मिलेंगे।
कला-संगीत: प्रशंसा मिलेगी।
राजनीति/प्रशासन: प्रभाव बढ़ेगा।
आर्थिक: पुराने निवेश से लाभ।
शुभ रंग: हरा
शुभ अंक: 3, 5
पूजा करें: माँ सरस्वती

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♎ तुला राशि | Libra | (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते) | ⚖️

आज अवसरों से भरा दिन है।
कार्य/व्यवसाय: नई डील फाइनल हो सकती है।
शिक्षा: पढ़ाई में मन लगेगा।
कला-संगीत: रचनात्मक कार्य सफल होगा।
राजनीति/प्रशासन: जनसमर्थन मिलेगा।
आर्थिक: आय में वृद्धि।
शुभ रंग: गुलाबी
शुभ अंक: 6, 8
पूजा करें: माँ दुर्गा

♏ वृश्चिक राशि | Scorpio | (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू) | 🦂

आज ऊर्जा से भरपूर दिन है।
कार्य/व्यवसाय: व्यापार में उछाल।
शिक्षा: नई जानकारी मिलेगी।
कला-संगीत: सम्मान प्राप्ति के योग।
राजनीति/प्रशासन: प्रभाव बढ़ेगा।
आर्थिक: शुभ समाचार मिलेगा।
शुभ रंग: लाल
शुभ अंक: 3, 9
पूजा करें: हनुमान जी

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♐ धनु राशि | Sagittarius | (ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे) | 🏹

आज सुखद समाचार मिल सकता है।
कार्य/व्यवसाय: नई योजना बनेगी।
शिक्षा: छात्र सफलता प्राप्त करेंगे।
कला-संगीत: रचना की सराहना।
राजनीति/प्रशासन: प्रतिष्ठा में वृद्धि।
आर्थिक: लाभ बढ़ेगा।
शुभ रंग: पीला
शुभ अंक: 4, 7
पूजा करें: विष्णु जी

♑ मकर राशि | Capricorn | (भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी) | 🐐

आज सावधानी जरूरी है।
कार्य/व्यवसाय: यात्रा टालें।
शिक्षा: मेहनत अधिक करनी होगी।
कला-संगीत: धैर्य रखें।
राजनीति/प्रशासन: विरोधी सक्रिय रहेंगे।
आर्थिक: आय-व्यय समान।
शुभ रंग: नीला
शुभ अंक: 4, 6
पूजा करें: शनि देव

♒ कुंभ राशि | Aquarius | (गु, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा) | 🏺

आज सफलता के योग बन रहे हैं।
कार्य/व्यवसाय: नया अनुबंध मिलेगा।
शिक्षा: पढ़ाई में मन लगेगा।
कला-संगीत: मंचीय सफलता।
राजनीति/प्रशासन: नई जिम्मेदारी।
आर्थिक: निवेश लाभ देगा।
शुभ रंग: बैंगनी
शुभ अंक: 2, 5
पूजा करें: महादेव

♓ मीन राशि | Pisces | (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची) | 🐟

आज थोड़ा सतर्क रहने की आवश्यकता है।
कार्य/व्यवसाय: लाभ सीमित रहेगा।
शिक्षा: ध्यान भटकेगा।
कला-संगीत: मन अस्थिर रहेगा।
राजनीति/प्रशासन: सतर्क निर्णय लें।
आर्थिक: खर्च ज्यादा होगा।
शुभ रंग: सफेद
शुभ अंक: 1, 5
पूजा करें: भगवान श्रीकृष्ण

नोट: यह राशिफल केवल सामान्य ज्योतिषीय गणना पर आधारित है। यह किसी भी राष्ट्र की परम्परा या संस्था की प्रमाणिक प्रणाली नहीं है। अतः अपने जीवन के महत्त्वपूर्ण निर्णयों से पहले किसी योग्य ज्योतिष विशेषज्ञ से अपनी जन्मकुंडली अवश्य दिखाएँ।

त्रयोदशी का प्रभाव, सर्वार्थसिद्धि योग और राहुकाल से जुड़े महत्वपूर्ण संकेत

📜 हिन्दू पंचांग 03 दिसंबर 2025 (बुधवार)

दिन, तिथि और नक्षत्र का यह दिव्य संयोग जीवन में निर्णय और दिशा प्रदान करता है। मार्गशीर्ष माह की त्रयोदशी तिथि गहरी आध्यात्मिक ऊर्जा बिखेरती है।

🔸 तिथि – शुक्ल पक्ष त्रयोदशी
समाप्ति: 12:26 PM के बाद चतुर्दशी
🔸 नक्षत्र – भरणी (06:00 PM तक) उपरांत कृत्तिका
🔸 योग – परिघ (04:57 PM तक) उपरांत शिव योग
🔸 करण – तैतिल → गर → वणिज
🔸 वार – बुधवार
🔸 विक्रम संवत – 2082 (कालयुक्त)
🔸 शक संवत – 1947 (विश्वावसु)
🔸 ऋतु – हेमंत
🔸 अयन – दक्षिणायन
🔸 चन्द्र मास – मार्गशीर्ष

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🌞 सूर्य और 🌙 चंद्रमा का समय

सूर्योदय – 06:57 AM
सूर्यास्त – 05:36 PM
चन्द्र उदय – 04:00 PM
चन्द्र अस्त – 05:59 AM
सूर्य – वृश्चिक राशि में
चन्द्रमा – 11:14 PM तक मेष, फिर वृषभ में

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अशुभ काल (इन समयों से बचें)

राहुकाल – 12:16 PM से 01:36 PM
यमगण्ड – 08:16 AM से 09:36 AM
कुलिक – 10:56 AM से 12:16 PM
दुर्मुहूर्त – 11:55 AM से 12:37 PM
वर्ज्यम् – 04:27 AM से 05:51 AM

👉 इस समय कोई नया कार्य, यात्रा या शुभारम्भ न करें।

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शुभ काल (लाभ के मुहूर्त)

ब्रह्म मुहूर्त – 05:21 AM से 06:09 AM
अमृत काल – 01:45 PM से 03:10 PM
सर्वार्थसिद्धि योग – 06:00 PM से 06:57 AM (अगले दिन तक)

इस समय कार्य प्रारंभ करना, निवेश, पूजा, खरीद या नई शुरुआत लाभकारी होगी।

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🧭 दिशा शूल – किस दिशा की यात्रा वर्जित है?

बुधवार को उत्तर दिशा की यात्रा वर्जित मानी जाती है।

यदि जरूरी हो तो गुड़ या धनिया खाकर यात्रा करें, कष्ट कम होता है।

लाभकारी दिशा –
पूर्व और पश्चिम दिशा की यात्रा से लाभ एवं सफलता के योग बनते हैं।

🌌 चंद्र बल (राशियों पर प्रभाव)

11:14 PM तक – मेष, मिथुन, कर्क, तुला, वृश्चिक, कुंभ
उसके बाद – वृषभ, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु, मीन

इन राशियों के लिए दिन अत्यंत शुभ है – धन, मन, स्वास्थ्य और निर्णय में सकारात्मकता रहेगी।

⚠️ विशेष सूचना (नोट)

इस पंचांग में किसी भी प्रकार की त्रुटि के लिए राष्ट्र की परम्परा पोर्टल की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी। यह सामान्य जानकारी हेतु प्रस्तुत किया गया है। किसी भी कार्य या निर्णय से पहले कृपया योग्य ज्योतिषाचार्य से परामर्श अवश्य लें।

जब इतिहास की रोशनी बुझी, पर प्रेरणा अमर हो गई

3 दिसंबर को बिछड़ीं भारत की महान आत्माएँ

3 दिसंबर केवल एक तारीख नहीं, बल्कि भारतीय इतिहास के उन अमर पन्नों की याद दिलाती है, जहां राष्ट्र-सेवा, संस्कृति, सिनेमा, साहित्य और खेल-जगत के महान स्तम्भों ने इस संसार को अलविदा कहा। इन विभूतियों का जाना केवल एक व्यक्ति का जाना नहीं था, बल्कि युगों, विचारों और प्रेरणाओं का मौन हो जाना था। आइए, इन्हीं महान व्यक्तित्वों के जीवन और योगदान पर प्रकाश डालते हैं।

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धर्मपाल गुलाटी (निधन: 2020)

धर्मपाल गुलाटी का जन्म वर्ष 1923, स्थान सियालकोट (अब पाकिस्तान) में हुआ था। भारत-पाक विभाजन के बाद वे दिल्ली आकर बस गए और मेहनत व ईमानदारी की नींव पर खड़ी कर दी भारत की सबसे प्रसिद्ध मसाला कंपनी ‘एमडीएच (महाशय दी हट्टी)’।
वे उद्योगपति होने के साथ-साथ एक महान समाजसेवी भी थे। उन्होंने शिक्षा, महिलाओं के उत्थान और गरीबों की सहायता में करोड़ों रुपये दान किए। उनका सादा जीवन और महान सोच उन्हें जन-जन का प्रिय बनाती रही। वे दिल्ली प्रांत में रहते हुए भी पूरे भारत में गुणवत्तापूर्ण मसालों के लिए जाने जाते थे। उनका जीवन उद्यमिता और सामाजिक जिम्मेदारी का आदर्श उदाहरण है।

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देव आनंद (निधन: 2011)

देव आनंद का जन्म 26 सितंबर 1923, गुरदासपुर (ज़िला), पंजाब में हुआ था। वे भारतीय सिनेमा के ऐसे सितारे रहे, जिनकी चमक दशकों तक कायम रही। ‘गाइड’, ‘हरे रामा हरे कृष्णा’, ‘ज्वेल थीफ’ जैसी फिल्में आज भी दर्शकों के दिलों में जीवित हैं।
एक अभिनेता होने के साथ-साथ वे निर्माता, निर्देशक और लेखक भी थे। उन्होंने भारतीय फिल्मों को एक नई दिशा दी और युवाओं के लिए फैशन-आइकन बनकर उभरे। पंजाब की मिट्टी से जन्मे देव आनंद ने पूरे भारत को अपनी प्रतिभा से गौरवान्वित किया।

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विष्णु डे (निधन: 1982)

बांग्ला साहित्य जगत के महान स्तंभ विष्णु डे का जन्म 1909, कोलकाता, पश्चिम बंगाल में हुआ था। वे एक प्रख्यात कवि, निबंधकार और आलोचक थे। उन्हें 1971 में ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
उनकी रचनाओं में सामाजिक यथार्थ, मानवीय संवेदना और गहन दार्शनिकता के दर्शन होते हैं। उन्होंने बंगाली साहित्य को वैश्विक पहचान दिलाई। पश्चिम बंगाल की साहित्यिक परंपरा को समृद्ध करने में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है।

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मेजर ध्यानचंद (निधन: 1979)

29 अगस्त 1905, प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) में जन्मे मेजर ध्यानचंद हॉकी के ऐसे चमकते सितारे थे, जिन्हें “हॉकी का जादूगर” कहा जाता है। भारत को उन्होंने 1928, 1932 और 1936 के ओलंपिक खेलों में स्वर्ण पदक दिलाया।
उनकी तकनीक और खेल कौशल देखकर दुनिया के बड़े-बड़े खिलाड़ी भी हैरत में पड़ जाते थे। देश के सम्मान के लिए उन्होंने सेना के साथ खेल को भी सर्वोच्च शिखर तक पहुँचाया। उत्तर प्रदेश की भूमि ने देश को एक ऐसा गौरव दिया, जिसे लोग आज भी श्रद्धा से स्मरण करते हैं।

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लांस नायक अल्बर्ट एक्का (निधन: 1971)

अल्बर्ट एक्का का जन्म 27 दिसंबर 1942, गुमला (झारखंड) में हुआ था। वे भारतीय सेना के एक महान वीर थे जिन्होंने 1971 के भारत-पाक युद्ध में असाधारण bravery दिखाई।
उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना दुश्मन की चौकियों को नष्ट किया और अंततः वीरगति को प्राप्त हुए। उनके अद्भुत साहस और बलिदान के लिए उन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया। उनका जीवन भारतीय युवाओं के लिए शौर्य और देशभक्ति का प्रतीक है।

वह दिन जिसने भारत को राष्ट्रपति, क्रांतिकारी और महान कलाकार दिए

“3 दिसंबर: वह दिन जिसने इतिहास, कला, साहित्य और राष्ट्रनिर्माण को दिशा दी”

3 दिसंबर केवल एक तारीख नहीं है, बल्कि यह भारतीय इतिहास, कला, साहित्य, राष्ट्रनिर्माण और खेल जगत को अप्रतिम प्रतिभाएँ देने वाला एक गौरवशाली दिवस रहा है। इस दिन जन्मे कुछ महान व्यक्तित्वों ने न केवल अपने-अपने क्षेत्र में क्रांति की, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरणा का मार्ग दिखाया। आइए जानते हैं ऐसे ही अमर नामों के जीवन और योगदान के बारे में—

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  1. राजेन्द्र प्रसाद (जन्म: 3 दिसंबर 1884 – जीरादेई, सिवान, बिहार)

डॉ. राजेन्द्र प्रसाद भारत के प्रथम राष्ट्रपति थे। उनका जन्म बिहार के सिवान जनपद के जीरादेई गाँव में हुआ। वे एक साधारण किसान परिवार से आए थे, किंतु अपनी अद्भुत बुद्धिमत्ता और राष्ट्रभक्ति के बल पर उन्होंने इतिहास रच दिया। वे स्वतंत्रता आंदोलन में महात्मा गांधी के निकट सहयोगी रहे और भारत के संविधान निर्माण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनके नेतृत्व ने देश को लोकतांत्रिक मूल्यों की दिशा दी।

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  1. खुदीराम बोस (जन्म: 3 दिसंबर 1889 – मिदनापुर, पश्चिम बंगाल)

खुदीराम बोस भारत के सबसे कम उम्र के क्रांतिकारी शहीदों में से एक थे। उनका जन्म पश्चिम बंगाल के मिदनापुर जिले में हुआ। मात्र 18 वर्ष की आयु में ब्रिटिश हुकूमत के विरुद्ध आवाज उठाते हुए उन्हें फाँसी दे दी गई। उनकी शहादत ने युवाओं में क्रांति की ज्वाला प्रज्वलित कर दी थी और वे आज भी देशभक्ति का प्रतीक हैं।

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  1. नंदलाल बोस (जन्म: 3 दिसंबर 1882 – मुंगेर, बिहार)

नंदलाल बोस भारत के महानतम चित्रकारों में से एक थे। उनका जन्म मुंगेर जनपद, बिहार में हुआ। उन्होंने भारतीय कला को नई पहचान दी और शांति निकेतन में कला शिक्षा को एक नई दिशा दी। उनके बनाए चित्र आज भी भारत की सांस्कृतिक धरोहर हैं। उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के साथ दांडी मार्च के दौरान पोस्टर बनाए थे, जो आज ऐतिहासिक धरोहर हैं।

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  1. यशपाल (जन्म: 3 दिसंबर 1903 – फिरोजपुर, पंजाब)

यशपाल हिन्दी साहित्य के एक यशस्वी कथाकार और निबंध लेखक थे। उनका जन्म पंजाब के फिरोजपुर जिले में हुआ। वे एक क्रांतिकारी भी रहे और चन्द्रशेखर आज़ाद के साथ स्वतंत्रता संग्राम में शामिल थे। उनकी रचनाओं में सामाजिक यथार्थ और राष्ट्रभक्ति की झलक मिलती है। “दिव्या”, “झूठा सच” और “देशद्रोही” जैसे उपन्यास आज भी लोकप्रिय हैं।

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  1. शिवनारायण श्रीवास्तव (जन्म: 3 दिसंबर 1913 – उत्तर प्रदेश)

हिन्दी साहित्य के गंभीर, चिंतनशील और प्रखर विद्वान शिवनारायण श्रीवास्तव का जन्म उत्तर प्रदेश के एक साहित्यिक परिवेश में हुआ था। उन्होंने भाषा, साहित्य और संस्कृति पर गहन अध्ययन किया और कई महत्वपूर्ण निबंध और लेख लिखे। उनका योगदान विशेष रूप से साहित्यिक आलोचना में माना जाता है।

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  1. विनोद बिहारी वर्मा (जन्म: 3 दिसंबर 1937 – मध्य प्रदेश)

प्रसिद्ध भारतीय भाषाविद् विनोद बिहारी वर्मा का जन्म मध्य प्रदेश में हुआ। उन्होंने हिंदी और अन्य भाषाओं के संरचनात्मक अध्ययन पर कार्य किया तथा कई शोध-पत्र और पुस्तकें प्रकाशित कीं। भाषा विज्ञान के क्षेत्र में उनका योगदान आज भी अकादमिक जगत में मूल्यवान है।

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  1. रमाशंकर यादव ‘विद्रोही’ (जन्म: 3 दिसंबर 1957 – सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश)

जनकवि रमाशंकर यादव ‘विद्रोही’ का जन्म उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में हुआ। वे जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में छात्रों के बीच बेहद लोकप्रिय रहे। उनकी कविताएं अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाने की ताकत देती हैं। उनका लेखन व्यवस्था के प्रति एक क्रांतिकारी स्वर था।

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  1. अरूप बसक (जन्म: 3 दिसंबर 1973 – पश्चिम बंगाल)

अरूप बसक भारत की राष्ट्रीय टेबल टेनिस टीम के प्रमुख कोच रहे हैं। उनका जन्म पश्चिम बंगाल में हुआ। उन्होंने युवा खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके प्रशिक्षण से भारत के कई टेबल टेनिस सितारे उभरे हैं।

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  1. मिताली राज (जन्म: 3 दिसंबर 1982 – जोधपुर, राजस्थान)

मिताली राज भारतीय महिला क्रिकेट की महानतम खिलाड़ियों में एक हैं। उनका जन्म राजस्थान के जोधपुर मॉडल स्कूल, जोधपुर में हुआ, किंतु उनका पालन-पोषण हैदराबाद (तेलंगाना) में हुआ। वे टेस्ट क्रिकेट में दोहरा शतक लगाने वाली पहली भारतीय महिला हैं। उन्होंने भारतीय महिला क्रिकेट को नई पहचान और सम्मान दिलाया है।

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3 दिसंबर – प्रेरणा का दिन

इन महान व्यक्तित्वों ने यह साबित कर दिया कि जन्म की तिथि नहीं, बल्कि कर्म, साहस और संकल्प इतिहास रचते हैं। 3 दिसंबर को जन्मे ये सभी व्यक्ति अपने-अपने क्षेत्र के स्तंभ बने और भारत को वैश्विक पहचान दिलाने में सहायक हुए।

“3 दिसंबर: वे तारीखें जिन्हें इतिहास कभी भूल नहीं पाया” – संघर्ष, त्रासदी, परिवर्तन और संकल्प की साक्षी एक अमर तिथि

🌍 2012 – फिलीपींस में ‘भूफा’ तूफान: प्रकृति का कहर

3 दिसंबर 2012 को फिलीपींस पर आए ‘भूफा’ सुपर तूफान ने भीषण तबाही मचाई। इसकी रफ्तार और प्रचंडता ने पूरे तटीय इलाकों को उजाड़ दिया। लगभग 475 लोगों की मृत्यु हुई और हजारों लोग बेघर हो गए। यह घटना जलवायु परिवर्तन के गंभीर परिणामों की चेतावनी बनकर दुनिया के सामने आई। खेत, घर, स्कूल, अस्पताल सब नष्ट हो गए और महीनों तक देश इस त्रासदी से उबर नहीं पाया।

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🇮🇳 2008 – मुंबई आतंकी हमला और एक ऐतिहासिक इस्तीफा

26/11 के दिल दहला देने वाले आतंकी हमले के बाद देशभर में आक्रोश फैल गया। इसके राजनीतिक प्रभाव भी देखने को मिले। 3 दिसंबर 2008 को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। यह घटना राजनीतिक जवाबदेही का उदाहरण बनी और देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे, जिससे बाद में कई नीतिगत बदलाव हुए।

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🌐 2004 – अंतरराष्ट्रीय तनाव और बड़ा फैसला

इस दिन पुर्तगाल की एक अदालत ने मोनिका की याचिका खारिज कर दी, वहीं ईराक में पुलिस थानों पर हुए हमलों में 30 लोगों की मौत हुई। इसी दौरान भारत और पाकिस्तान ने 40 वर्षों बाद मुनाबाव-खोखरापार रेल संपर्क बहाल करने पर सहमति जताई। यह फैसला सीमा पार एक नई उम्मीद और संवाद की शुरुआत था।

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🌱 2002 – जैव विविधता संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) ने 3 दिसंबर 2002 को भारत सहित सात उष्णकटिबंधीय देशों को 2 करोड़ 60 लाख डॉलर की आर्थिक सहायता प्रदान की। इसका उद्देश्य था जैव विविधता पर गहन शोध और संरक्षण। यह निर्णय पर्यावरण संतुलन के लिए ऐतिहासिक माना गया, क्योंकि इससे कई दुर्लभ प्रजातियों और पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने की पहल शुरू हुई।

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🔥 2001 – गाजा पर हमला और बढ़ता संघर्ष

इस्रायल द्वारा गाजा पट्टी पर किए गए हमले में यासर अराफात का हेलीकॉप्टर नष्ट कर दिया गया, जिससे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया। यह घटना इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष के इतिहास में एक गंभीर मोड़ साबित हुई और पूरी दुनिया ने शांति की अपील की।

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🎵 1999 – संगीत की दुनिया में शोक

विश्व प्रसिद्ध गिटार वादक चार्ली “ली” बर्ड का निधन इसी दिन हुआ। जैज़ संगीत में उनके योगदान को आज भी याद किया जाता है। इसी साल चेचेन्याई विद्रोहियों और रूसी सेना के बीच हुए संघर्ष में 250 से अधिक रूसी सैनिक मारे गए। कला और युद्ध – दो विपरीत चेहरे 3 दिसंबर को दुनिया के सामने आए।

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🕊️ 1989 – शीत युद्ध का अंत

सोवियत संघ के राष्ट्रपति मिखाइल गोर्वाचेव और अमेरिका के जॉर्ज बुश सीनियर ने 3 दिसंबर 1989 को शीत युद्ध समाप्त होने की घोषणा की। यह फैसला सिर्फ दो देशों के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए शांति का नया अध्याय था। परमाणु युद्ध के बादल छंटे और वैश्विक राजनीति में स्थिरता आई।

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☣️ 1984 – भोपाल गैस त्रासदी: मानव इतिहास की सबसे बड़ी औद्योगिक दुर्घटना

यह दिन भारत ही नहीं, पूरी दुनिया के लिए एक काला अध्याय है। भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री से जहरीली मिथाइल आइसोसाइनेट गैस रिसने से लगभग 3000 लोगों की तुरंत मौत हो गई, और हजारों लोग आजीवन बीमारियों के शिकार हो गए। यह घटना आज भी औद्योगिक सुरक्षा की सबसे बड़ी चेतावनी है।

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🚀 1967 – भारत का पहला रॉकेट लॉन्च

3 दिसंबर 1967 को भारत का पहला रॉकेट “रोहिणी आर.एच. 75” केरल के थुम्बा स्टेशन से छोड़ा गया। यह भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान का पहला व्यावहारिक कदम था, जिसने आगे चलकर ISRO को वैश्विक मंच पर एक पहचान दिलाई।

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🔥 1829 – सती प्रथा पर रोक: सामाजिक क्रांति

गवर्नर जनरल लॉर्ड विलियम बैंटिक ने 3 दिसंबर 1829 को भारत में सती प्रथा पर प्रतिबंध लगाया। यह फैसला भारतीय समाज के लिए एक ऐतिहासिक और साहसिक परिवर्तन था, जिसने महिलाओं के अधिकार और मानवता की रक्षा की दिशा में एक नया रास्ता खोला।

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✅ 3 दिसंबर केवल एक तारीख नहीं, बल्कि इतिहास के पन्नों पर छपी पीड़ा, संघर्ष, सुधार और आशा की कहानी है। इस दिन ने प्रकृति की ताकत, मानव की त्रुटि और सामाजिक-राजनीतिक परिवर्तन — तीनों को उजागर किया है।

घर–घर गणना की अवधि 11 दिसम्बर तक बढ़ी, बूथ लेवल अधिकारियों व एजेंटों की बैठक के निर्देश

संत कबीर नगर( राष्ट्र की परम्परा)। जिला निर्वाचन अधिकारी/जिलाधिकारी आलोक कुमार ने बताया कि मुख्य निर्वाचन अधिकारी उत्तर प्रदेश के निर्देशों के क्रम में अर्हता तिथि 01 जनवरी 2026 के आधार पर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की निर्वाचक नामावलियों के विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण (एसआईआर) कार्यक्रम–2026 के तहत घर–घर गणना की अवधि को 11 दिसम्बर 2025 तक बढ़ा दिया गया है।
इसी क्रम में जिला निर्वाचन अधिकारी ने सभी उप जिलाधिकारी/निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों को निर्देशित किया है कि बढ़ी हुई अवधि में बीएलओ के साथ बीएलए की बैठक सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि जिन बूथ लेवल अधिकारियों ने गणना प्रपत्रों का शत-प्रतिशत डिजिटाइजेशन पूरा कर लिया है, वे तत्काल संबंधित बूथों पर नियुक्त राजनैतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों के साथ बैठक करें। वहीं जैसे-जैसे डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया पूर्ण होती जाए, संबंधित बूथों की बैठकें भी समय पर आयोजित की जाएं।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बीएलओ व बीएलए के साथ आयोजित होने वाली इन बैठकों का कार्यवृत्त, उपस्थिति, पावती, फोटोग्राफ्स (लैटिट्यूड एवं लॉन्गिट्यूड सहित) तथा बूथ लेवल एजेंट के टेस्टिमोनियल (अधिकतम 30 सेकंड) निर्धारित प्रारूप में तैयार किए जाने आवश्यक हैं।
इसके साथ ही बूथ लेवल अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि ईसीआई नेट ऐप से अनुपस्थित, शिफ्टेड, मृतक एवं डुप्लीकेट निर्वाचकों की सूची डाउनलोड कर बैठक के दौरान बूथ लेवल एजेंटों को उपलब्ध कराएं तथा उनकी प्राप्ति भी सुनिश्चित करें।
अंत में जिलाधिकारी ने सभी उप जिलाधिकारी/निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि तैयार कार्यवृत्त, उपस्थिति, फोटोग्राफ्स, पावती एवं टेस्टिमोनियल निर्धारित प्रारूप में गूगल फार्म पर अपलोड कराए जाएं तथा सभी अभिलेखों की एक प्रति जिला निर्वाचन कार्यालय को उपलब्ध कराई जाए।