Monday, June 29, 2026
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असामाजिक तत्वों ने धान के बोझे मे लगाई आग धान जलकर हुई खाक

रांची/सोनाहातू (राष्ट्र की परम्परा)। रांची के सोनाहातू थाना क्षेत्र के तेंतला गांव में देर रात असामाजिक तत्वों ने खेत में रखे धान का बोझा में आग लगा दी, जिससे लगभग 200 बोझा धान पूरी तरह जलकर राख हो गया, किसानों को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है।

किसान राजकिशोर कोईरी, मधु कोईरी, जीवन मुखियार और परमेश्वर कोईरी आदि पीड़ित किसानों ने बताया कि खेत से धान काटकर बोझा बनाकर उसे घर ले जाने के लिए रखा था, लेकिन देर रात कुछ असामाजिक तत्वों ने धान के बोझा में आग लगा दी। पीड़ित किसानों ने प्रशासन से जल्द-से-जल्द कार्रवाई करते हुए घटना में शामिल दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।

एसईसीएल कोयला खदान विस्तार विरोध: लाठीचार्ज की किसान सभा ने की निंदा, पेसा व वनाधिकार कानून उल्लंघन का आरोप

कोरबा/छत्तीसगढ़ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। सरगुजा जिले के परसोड़ी कला गांव में एसईसीएल की अमेरा कोयला खदान विस्तार परियोजना के विरोध के दौरान आदिवासी ग्रामीणों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर छत्तीसगढ़ किसान सभा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। किसान सभा ने इसे पेसा अधिनियम, वनाधिकार कानून और पाँचवीं अनुसूची के प्रावधानों का उल्लंघन बताया है।

किसान सभा: ग्रामसभा की सहमति के बिना परियोजना अवैध

अखिल भारतीय किसान सभा से संबद्ध छत्तीसगढ़ किसान सभा के पदाधिकारियों ने कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण व खनन से पहले ग्रामसभा की लिखित सहमति आवश्यक है। संगठन का आरोप है कि परियोजना में इन कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया।

प्रदेश संयुक्त सचिव प्रशांत झा ने कहा कि कानूनों को प्राथमिक दर्जा दिए जाने के बावजूद एसईसीएल कोल बेयरिंग एक्ट का हवाला देकर भूमि अधिग्रहण का दावा कर रहा है। उन्होंने पुलिस कार्रवाई को “अनुचित दमन” बताते हुए संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की।

पुलिस कार्रवाई पर सवाल

किसान सभा का आरोप है कि ग्रामीणों के विरोध को दबाने के लिए पुलिस ने झोपड़ियां और धरना स्थल हटाया, जिसके बाद तनाव बढ़ा। संगठन ने कहा कि इस स्थिति के लिए प्रशासनिक निर्णय जिम्मेदार हैं।

पहले भी उठे विरोध के स्वर

जिला सचिव दीपक साहू ने कहा कि यह पहला मामला नहीं है। परसा कोल ब्लॉक, रायगढ़ क्षेत्र और कोरबा जिले के गेवरा प्रोजेक्ट में भी ग्रामीणों ने परियोजनाओं के विरुद्ध आवाज उठाई है। कई जगहों पर बिना अनुमति पेड़ कटाई और खनन का आरोप सामने आ चुका है।

किसान सभा का दावा: आंदोलन होगा और तेज

नेताओं ने कहा कि खनन परियोजनाओं में कानूनी प्रक्रियाओं के पालन को लेकर गंभीर सवाल हैं। उनका कहना है कि नाजायज भूमि अधिग्रहण और विस्थापन के खिलाफ आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा। जल्द ही किसान सभा का एक प्रतिनिधिमंडल अमेरा क्षेत्र का दौरा करेगा और आगे की रणनीति तय करेगा।

विधानसभा सत्र से पहले सुरक्षा कड़ी, SSP ने जवानों को दिया बड़ा ब्रीफिंग

रांची (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। झारखंड विधानसभा सत्र को देखते हुए राजधानी रांची में सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह सख्त कर दिया गया है। विधानसभा परिसर और आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है, साथ ही सभी प्रवेश बिंदुओं पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।

एसएसपी ने विधानसभा परिसर में की ब्रीफिंग

एसएसपी राकेश रंजन ने शुक्रवार को विधानसभा परिसर में तैनात सुरक्षा कर्मियों को विस्तृत निर्देश दिए। इस दौरान सिटी एसपी, एसडीएम और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
उन्होंने सुरक्षा जवानों को संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष नजर रखने और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए।

विधानसभा परिसर की सुरक्षा मजबूत, परिसर के अंदर और बाहर बैरिकेडिंग, हर गेट पर चेकिंग की व्यवस्था, गश्ती दल की तैनाती, CCTV मॉनिटरिंग बढ़ाई गई

वीआईपी मूवमेंट पर विशेष सतर्कता

अधिकारियों ने कहा कि सत्र के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिकता है, इसलिए किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत रिपोर्ट करने के निर्देश दिए गए हैं।

शहर में भी बढ़ी पुलिस की सक्रियता

विधानसभा के आसपास के इलाकों में भी पुलिस टीमों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए अतिरिक्त जवान तैनात किए गए हैं।

अपनी ही मौत का नाटक रचने वाला हिस्ट्रीशीटर पूर्व फौजी गिरफ्तार, हत्या कर जलाया था शव

आगरा (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। अछनेरा क्षेत्र के हिस्ट्रीशीटर और पूर्व फौजी हुसन सिंह को उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने गुरुवार को कचौरा गांव से गिरफ्तार कर लिया। आरोपी पर मध्य प्रदेश के बुरहानपुर पुलिस ने 30 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी ने खुद पर होने वाली कार्रवाई से बचने के लिए अपनी ही मौत का नाटक रचने की पूरी साजिश तैयार की थी।

खुद की मौत दिखाने के लिए दूसरे की हत्या

जांच के अनुसार वर्ष 2024 में हुसन सिंह ने बुरहानपुर के निलेश नामक व्यक्ति की हत्या कर दी थी और शव को आग लगा दी थी। मृतक के पास उसने अपना आई-डी कार्ड और सामान रख दिया, ताकि पुलिस उसे मृत समझकर खोजबीन रोक दे। योजना के अनुसार पुलिस शुरू में भ्रमित भी हुई, लेकिन विस्तृत जांच में वास्तविकता सामने आ गई।

मुंबई में छिपा था, फिर घर लौट आया

साजिश उजागर होने के बाद आरोपी मुंबई भाग गया था। मामला शांत होने की उम्मीद में वह दोबारा गांव लौटा, जहां गुरुवार को एसटीएफ ने उसे रायभा मंदिर के पास से पकड़ लिया। गिरफ्तारी के दौरान बुरहानपुर पुलिस की टीम भी मौजूद रही।

फौजी से अपराधी बना आरोपी

हुसन सिंह वर्ष 2007 में भारतीय सेना में भर्ती हुआ था और 2013 में सेवा मुक्त हो गया था। इसके बाद वह अपराध जगत में सक्रिय हो गया।
उसके खिलाफ अछनेरा, बुरहानपुर, भरतपुर सहित कई थानों में हत्या, डकैती, आर्म्स एक्ट और गैंगस्टर एक्ट की कुल 8 एफआईआरें दर्ज हैं। वर्ष 2020 में भी उसके खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज किए गए थे।

एसटीएफ ने थाने में किया सुपुर्द

गिरफ्तारी के बाद एसटीएफ टीम ने आरोपी को अछनेरा थाने में दाखिल किया। जल्द ही मध्य प्रदेश पुलिस उसे अपने साथ ले जाकर आगे की कार्रवाई करेगी।

जानिए आज का दिन आपके लिए क्या संदेश लेकर आया है

🗓️ दैनिक राशिफल – 5 दिसंबर 2025 (शुक्रवार)
लेखक – पं. सत्य प्रकाश पाण्डेय
वैदिक ज्योतिष के अनुसार आज पौष कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि है। ग्रहों की स्थिति मन, कर्म, धन, शिक्षा, राजनीति और स्वास्थ्य सभी क्षेत्रों पर प्रभाव डाल रही है। आज कुछ राशियों को जहाँ शानदार अवसर मिलेंगे, वहीं कुछ को धैर्य और सतर्कता की आवश्यकता रहेगी।

🔴 1. मेष राशि (Aries ♈)
नाम के अक्षर – अ, च, ची, चू, चे, ला
कार्य/व्यवसाय – कार्यस्थल पर दबाव रहेगा, पर नेतृत्व क्षमता निखरेगी। सरकारी कार्यों में सफलता के योग।
शिक्षा – छात्रों को फोकस बढ़ाने की जरूरत
राजनीति/प्रशासन – प्रभाव बढ़ेगा, जनसमर्थन मिलेगा
कला-संगीत – नई प्रेरणा मिलेगी
आर्थिक स्थिति – मध्यम, खर्च बढ़ सकता है
शुभ रंग – लाल
शुभ अंक – 9
आराध्य देवता – हनुमान जी

🟡 2. वृषभ राशि (Taurus ♉)
नाम के अक्षर – ब, व, उ, ए, ओ
कार्य/व्यवसाय – धन लाभ के संकेत, रुके पैसे मिल सकते हैं
शिक्षा – नया कोर्स या विषय लाभदायक
राजनीति – स्थिरता बनी रहेगी
कला – सौंदर्य, फैशन से जुड़े लोगों के लिए शुभ
आर्थिक स्थिति – मजबूत
शुभ रंग – गुलाबी
शुभ अंक – 6
आराध्य देवता – माता लक्ष्मी

🟢 3. मिथुन राशि (Gemini ♊)
नाम के अक्षर – क, की, कु, घ, छ
कार्य/व्यवसाय – नई योजनाएं बनेंगी, सफलता के संकेत
शिक्षा – प्रतियोगी छात्र सफल
राजनीति – नई जिम्मेदारी मिल सकती है
कला-मीडिया – तरक्की
आर्थिक – अच्छा समय
शुभ रंग – हरा
शुभ अंक – 5
आराध्य देवता – गणेश जी

4. कर्क राशि (Cancer ♋)
नाम के अक्षर – ड, ही, हू, हो
कार्य क्षेत्र – कार्य में सहयोग मिलेगा
शिक्षा – मन लगेगा
राजनीति – सम्मान बढ़ेगा
आर्थिक – शुभ समाचार
शुभ रंग – सफेद
शुभ अंक – 2
आराध्य देवता – शिव जी

🟠 5. सिंह राशि (Leo ♌)
नाम के अक्षर – म, ट, मी, मु, मा
व्यवसाय – चुनौतियाँ रहेंगी लेकिन जीत संभव
शिक्षा – आत्मविश्वास बढ़ेगा
राजनीति/प्रशासन – प्रभाव बना रहेगा
कला क्षेत्र – मेहनत रंग लाएगी
शुभ रंग – सुनहरा
शुभ अंक – 1
देवता – सूर्य देव

🟤 6. कन्या राशि (Virgo ♍)
नाम के अक्षर – प, पी, ढ, ठ, ण
कार्य/धन – बजट बनाकर चलना होगा
शिक्षा – विदेश से जुड़ा योग
राजनीति – छवि सुधरेगी
शुभ रंग – आसमानी
शुभ अंक – 5
देवता – विष्णु जी

🔵 7. तुला राशि (Libra ♎)
नाम के अक्षर – र, री, त, तू
व्यवसाय – नए अनुबंध
स्वास्थ्य – सजग रहें
राजनीति – विवाद से दूर
शुभ रंग – नीला
शुभ अंक – 7
देवी – दुर्गा माँ

🖤 8. वृश्चिक राशि (Scorpio ♏)
नाम के अक्षर – न, नी, नो, या
कार्य – साहस से काम करें
राजनीति – कूटनीतिक लाभ
शिक्षा – रिसर्च में लाभ
शुभ रंग – मैरून
शुभ अंक – 8
देवता – भैरव जी

🟣 9. धनु राशि (Sagittarius ♐)
नाम के अक्षर – भ, ध, फ, ढ
कार्य – नए अवसर
शिक्षा – सफलता
कला/यात्रा – शुभ
शुभ रंग – पीला
शुभ अंक – 3
देवता – विष्णु भगवान

🔷 10. मकर राशि (Capricorn ♑)
नाम के अक्षर – ख, ज, ग
कार्य – प्रमोशन योग
राजनीति – लाभ
धन – निवेश उचित
शुभ रंग – स्लेटी
शुभ अंक – 4
आराध्य देव – शनिदेव

🟢 11. कुंभ राशि (Aquarius ♒)
नाम के अक्षर – गू, गे, स
व्यवसाय – नए प्रोजेक्ट
स्वास्थ्य – ध्यान दें
राजनीति – जनहित का समर्थन
शुभ रंग – बैंगनी
शुभ अंक – 11
देवता – शिव जी

🔵 12. मीन राशि (Pisces ♓)
नाम के अक्षर – द, दी, झ, थ
धन – पुराने निवेश से लाभ
शिक्षा – एकाग्रता बढ़ेगी
कला/संगीत – विशेष लाभ
शुभ रंग – हल्का नीला
शुभ अंक – 12
देवता – कृष्ण भगवान

⚠️ डिस्क्लेमर
यह राशिफल ज्योतिषाचार्य पं. सत्य प्रकाश पाण्डेय द्वारा सामान्य जनकल्याण हेतु तैयार किया गया है।
“राष्ट्र की परम्परा” इस ज्योतिष की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता। कृपया अपनी जन्मकुंडली किसी विशेषज्ञ को अवश्य दिखाएं।

जानें मूलांक 1 से 9 तक जन्मे लोगों का करियर, शिक्षा, कला, राजनीति, प्रशासन और धन के क्षेत्र में कैसा रहेगा आने वाला दिन

अंक ज्योतिष में जन्म की तारीख के आधार पर मूलांक (1 से 9) निकाला जाता है, जिससे व्यक्ति की प्रवृत्ति, निर्णय क्षमता, अवसरों और चुनौतियों की जानकारी मिलती है। ग्रहों की चाल के साथ-साथ अंक ऊर्जा का भी जीवन पर प्रभाव पड़ता है। आइए, सरल और सहज शब्दों में जानें कि कल का दिन आपके लिए क्या संकेत दे रहा है।

मूलांक 1 (Sun Number)
कल का प्रभाव: आपमें नेतृत्व की ऊर्जा तेज रहेगी। तेज निर्णय लेने की इच्छा होगी।
कार्य क्षेत्र / व्यवसाय: ऑफिस में नई जिम्मेदारी या महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट मिल सकता है। बिजनेस में कोई नया आइडिया लाभ देगा।
शिक्षा: प्रतियोगी छात्रों के लिए समय अनुकूल है। आत्मविश्वास बढ़ेगा।
कला / संगीत: रचनात्मकता उभरेगी, पर अहं से बचें।
राजनीति / प्रशासन: प्रभाव बढ़ाने का अवसर मिलेगा, पर نرمयन जरूरी है।
आर्थिक स्थिति: धन लाभ का संकेत, पर जल्दबाज़ी से निवेश न करें।
शुभ रंग: सुनहरा (गोल्डन)
शुभ अंक: 1
पूजा: भगवान सूर्य या आदित्य ह्रदय स्तोत्र का पाठ करें।

मूलांक 2 (Moon Number)
कल का प्रभाव: भावनाएं प्रबल रहेंगी, मन थोड़ा संवेदनशील रहेगा।
कार्य क्षेत्र / व्यवसाय: टीमवर्क से सफलता मिलेगी। महिला सहकर्मी या सलाहकार से लाभ।
शिक्षा: कला, साहित्य, मनोविज्ञान के छात्रों के लिए अच्छा समय।
कला / संगीत: कल्पनाशक्ति बढ़ेगी, कविता या लेखन में रुचि।
राजनीति / प्रशासन: छवि बनाने का समय, लेकिन निर्णय सोच-समझकर लें।
आर्थिक स्थिति: धीरे-धीरे सुधार, अनावश्यक खर्च से बचें।
शुभ रंग: सफेद
शुभ अंक: 2
पूजा: माता दुर्गा या चंद्र देव की पूजा करें।

मूलांक 3 (Jupiter Number)
कल का प्रभाव: ज्ञान और बुद्धि से सफलता मिलेगी।
कार्य क्षेत्र / व्यवसाय: टीचिंग, काउंसलिंग, कंसल्टेंसी से जुड़े लोगों को लाभ।
शिक्षा: स्टूडेंट्स के लिए फोकस बेहतर रहेगा, परीक्षा की तैयारी मजबूत होगी।
कला / संगीत: मंचीय कला या धार्मिक संगीत में रुचि बढ़ेगी।
राजनीति / प्रशासन: वरिष्ठों से सहयोग मिलेगा, मान-सम्मान बढ़ेगा।
आर्थिक स्थिति: आय के नए साधन बन सकते हैं।
शुभ रंग: पीला
शुभ अंक: 3
पूजा: बृहस्पति देव और भगवान विष्णु का स्मरण करें।

मूलांक 4 (Rahu Number)
कल का प्रभाव: अचानक बदलाव या अप्रत्याशित मुलाकात संभव।
कार्य क्षेत्र / व्यवसाय: टेक्नोलॉजी, रिसर्च, रियल एस्टेट व मशीनरी से जुड़े कामों में प्रगति।
शिक्षा: साइंस और इंजीनियरिंग के छात्रों के लिए लाभदायक।
कला / संगीत: नया प्रयोग करने की प्रेरणा मिलेगी।
राजनीति / प्रशासन: थोड़ा संभलकर चलें, विरोधी सक्रिय हो सकते हैं।
आर्थिक स्थिति: स्थिर रहेगी, लेकिन जोखिम से बचें।
शुभ रंग: नीला
शुभ अंक: 4
पूजा: गणेश जी की आराधना करें।

मूलांक 5 (Mercury Number)
कल का प्रभाव: कम्युनिकेशन और नेटवर्किंग का दिन।
कार्य क्षेत्र / व्यवसाय: सेल्स, मार्केटिंग, मीडिया और ट्रेडिंग में भारी सफलता के योग।
शिक्षा: भाषाओं, कंप्यूटर और कॉमर्स के छात्रों को लाभ।
कला / संगीत: मंच संचालन, एंकरिंग, गीत-संगीत में प्रगति।
राजनीति / प्रशासन: जनता से जुड़ने का बेहतर अवसर।
आर्थिक स्थिति: धन लाभ के योग हैं।
शुभ रंग: हरा
शुभ अंक: 5
पूजा: भगवान गणेश और बुध देव का स्मरण करें।

मूलांक 6 (Venus Number)
कल का प्रभाव: प्रेम, सुंदरता और आराम से जुड़ा दिन।
कार्य क्षेत्र / व्यवसाय: फैशन, डिजाइन, होटल, सौंदर्य उद्योग में लाभ।
शिक्षा: आर्ट और डिजाइन के छात्रों के लिए विशेष मौका।
कला / संगीत: रचनात्मकता चरम पर रहेगी।
राजनीति / प्रशासन: पब्लिक इमेज मजबूत होगी।
आर्थिक स्थिति: खर्च ज्यादा होगा, पर सुखद होगा।
शुभ रंग: गुलाबी
शुभ अंक: 6
पूजा: देवी लक्ष्मी की पूजा करें।

मूलांक 7 (Ketu Number)
कल का प्रभाव: आत्ममंथन और आध्यात्मिक झुकाव बढ़ेगा।
कार्य क्षेत्र / व्यवसाय: रिसर्च, ज्योतिष, मेडिकल और मानसिक कार्यों में उन्नति।
शिक्षा: पीएचडी व गहरे अध्ययन में सफलता।
कला / संगीत: साधना से जुड़ा संगीत, भजन या ध्यान लाभकारी।
राजनीति / प्रशासन: निर्णय सोच-समझकर लें।
आर्थिक स्थिति: स्थिर, लेकिन धैर्य जरूरी।
शुभ रंग: बैंगनी
शुभ अंक: 7
पूजा: भगवान शिव की उपासना करें।

मूलांक 8 (Saturn Number)
कल का प्रभाव: मेहनत और जिम्मेदारी का दिन।
कार्य क्षेत्र / व्यवसाय: सरकारी, इंजीनियरिंग और फैक्ट्री सेक्टर में सुधार।
शिक्षा: कठिन परिश्रम का फल मिलेगा।
कला / संगीत: धैर्य से अभ्यास करने पर सफलता।
राजनीति / प्रशासन: संघर्ष के बाद सफलता, विरोधी पर विजय।
आर्थिक स्थिति: फंसा पैसा निकल सकता है।
शुभ रंग: काला या नेवी ब्लू
शुभ अंक: 8
पूजा: शनि देव और हनुमान जी की पूजा करें।

मूलांक 9 (Mars Number)
कल का प्रभाव: ऊर्जा और साहस से भरा दिन।
कार्य क्षेत्र / व्यवसाय: पुलिस, सेना, खेल और मैनेजमेंट में उन्नति।
शिक्षा: फिजिकल एजुकेशन या स्पोर्ट्स स्टूडेंट्स को सफलता।
कला / संगीत: ड्रम, डांस या जोशीले संगीत में रुचि।
राजनीति / प्रशासन: नेतृत्व क्षमता उभरेगी।
आर्थिक स्थिति: अच्छा लाभ, पर गुस्से से नुकसान संभव।
शुभ रंग: लाल
शुभ अंक: 9
पूजा: हनुमान जी और दुर्गा माता की आराधना करें।
नोट: यह अंक ज्योतिष सामान्य जानकारी के लिए है। “राष्ट्र की परम्परा” इस ज्योतिषीय गणना को प्रमाणित नहीं करता। सटीक जानकारी के लिए अपनी जन्मकुंडली किसी विशेषज्ञ से अवश्य दिखाएँ।

महादेव और शक्ति का रहस्य

जब तप, प्रेम और चेतना ने रचा शिव-शक्ति का शाश्वत संतुलन

ब्रह्मांड में जो कुछ भी है – आकाश, पृथ्वी, अग्नि, जल और वायु – सब एक दिव्य संतुलन में बंधे हैं। यह संतुलन केवल प्रकृति का नियम नहीं, बल्कि चेतना का शाश्वत सूत्र है। शिवपुराण के अनुसार, जब भी इस संतुलन में असंतुलन उत्पन्न होता है, तब-तब महादेव अपनी दिव्य लीला के माध्यम से सृष्टि को फिर से स्थिर करते हैं।

शक्ति के बिना शिव निर्जीव हैं और शिव के बिना शक्ति दिशाहीन।

यह सत्य केवल देवताओं तक सीमित नहीं, बल्कि हर मानव जीवन का भी आधार है।पार्वती का तप: एक नारी नहीं, बल्कि शक्ति का पुनर्जागरणपिछले एपिसोड में हमने जाना कि किस प्रकार महादेव ध्यान में लीन होकर संसार से विरक्त हो जाते हैं और सती के वियोग ने उन्हें समाधि में धकेल दिया। किंतु सती का पुनर्जन्म पार्वती के रूप में केवल संयोग नहीं था, वह एक दिव्य योजना थी ताकि सृष्टि का संतुलन पुनः स्थापित हो सके।

पार्वती ने जाना कि महादेव को प्राप्त करना सरल नहीं। उन्होंने विलासिता, राजसी सुख और ऐश्वर्य को त्यागकर कठोर तपस्या का मार्ग चुना। वर्षों तक बर्फीले पर्वतों पर, ठंडी हवाओं के बीच, केवल एक पत्ता खाकर, केवल तप और ध्यान के सहारे उन्होंने स्वयं को शिव के योग्य बनाया।

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उनकी तपस्या केवल प्रेम के लिए नहीं थी, बल्कि ब्रह्मांडीय संतुलन के लिए थी।
शिवपुराण कहता है —
“या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता…”
अर्थात शक्ति हर प्राणी में विद्यमान है। पार्वती उसी शक्ति का प्रत्यक्ष रूप थीं।
शिव का परीक्षण: साधना की कसौटी
महादेव ने पार्वती की श्रद्धा और तप की परीक्षा लेने हेतु स्वयं वृद्ध साधु का वेश धारण किया। उन्होंने पार्वती से कहा —
“जिस कैलाशपति की तुम आराधना कर रही हो, वह भस्मधारी, अलौकिक और संसार से विरक्त है। क्या तुम वास्तव में उस योगी को पति के रूप में स्वीकार कर सकती हो?”
पार्वती का उत्तर आज भी लाखों हृदयों को झकझोर देता है —
“मुझे किसी राजा, देव या स्वर्ग की आवश्यकता नहीं, मुझे केवल वह चाहिए जो सत्य, चेतना और तप का प्रतीक हो – महादेव।”

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उस पल महादेव ने समझ लिया कि यह मात्र नारी नहीं, स्वयं आदि शक्ति है — जो शिव के साथ मिलकर संसार को संतुलित करेगी।
शिव-विवाह: एक विवाह नहीं, बल्कि सृष्टि का पुनर्जन्म
जब शिव और पार्वती का विवाह हुआ, वह केवल एक धार्मिक संस्कार नहीं था — वह चेतना और ऊर्जा के मिलन का उत्सव था। देवता, ऋषि, गंधर्व, किन्नर और स्वयं ब्रह्मांड साक्षी बना। शिवपुराण के अनुसार उसी क्षण सृष्टि की हर दिशा में नई ऊर्जा का संचार हुआ।
जहाँ शिव ज्ञान हैं, वहीं पार्वती शक्ति हैं।
जहाँ शिव मौन हैं, वहाँ पार्वती सृजन हैं।
जहाँ शिव संहार हैं, वहाँ पार्वती जीवन हैं।
यह मिलन हमें सिखाता है कि जीवन में केवल ज्ञान या केवल भावना पर्याप्त नहीं — दोनों का संतुलन आवश्यक है।
मानव जीवन के लिए संदेश

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आज का मनुष्य भी उसी असंतुलन से जूझ रहा है जिससे कभी ब्रह्मांड गुज़रा था —
✔️ भागदौड़
✔️ अधीरता
✔️ भटकाव
✔️ इच्छा और कर्तव्य का द्वंद्व
पर समाधान भी शिव-शक्ति के संतुलन में छिपा है।
जब मन भटके — शिव का स्मरण करें
जब धैर्य डगमगाए — पार्वती का तप याद करें
जब जीवन में अंधकार छाए — ध्यान और साधना अपनाएं
जब अहंकार बढ़े — कैलाशपति के वैराग्य को समझें
यही इस एपिसोड का सार और संदेश है।

शिवपुराण की यह कथा हमें सिखाती है कि ब्रह्मांड कोई बाहरी संसार नहीं, बल्कि वह हमारे भीतर है। और जब तक हमारे भीतर की शक्ति और चेतना संतुलित नहीं होती, तब तक जीवन में भी शांति नहीं आती।
महादेव कोई दूर बैठे देव नहीं, वह हमारे भीतर की चेतना हैं। पार्वती कोई केवल देवी नहीं, वह हमारी इच्छाशक्ति हैं।
जब दोनों मिलते हैं,
तब जीवन शिवमय हो जाता है।

बढ़ती उपेक्षा का कारण बदलता परिवार: आधुनिक समाज की सबसे बड़ी चुनौती

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सोमनाथ मिश्र की रिपोर्ट

आज के तेजी से बदलते सामाजिक परिवेश में एक सच्चाई सामने आ रही है कि “बढ़ती उपेक्षा का कारण बदलता परिवार” केवल एक विचार नहीं बल्कि एक गंभीर सामाजिक संकट बन चुका है। जहाँ कभी संयुक्त परिवार भारतीय संस्कृति की रीढ़ माने जाते थे, वहीं अब एकल परिवारों का बढ़ता चलन, व्यस्त जीवनशैली और बढ़ता व्यक्तिवाद उम्रदराज लोगों, बच्चों और सामाजिक संबंधों के बीच दूरियाँ पैदा कर रहा है।

बदलती पारिवारिक संरचना और उसका प्रभाव

बढ़ती उपेक्षा का कारण बदलता परिवार इसलिए भी माना जा रहा है क्योंकि पहले की तरह अब घरों में दादा-दादी, नाना-नानी और अन्य बुज़ुर्गों की उपस्थिति कम होती जा रही है। युवा पीढ़ी नौकरी, शिक्षा और बेहतर जीवन की तलाश में बड़े शहरों की ओर जा रही है। इस दौरान माता-पिता पीछे छूट जाते हैं और परिवार का वो भावनात्मक ताना-बाना कमजोर हो जाता है, जो भारतीय समाज की पहचान रहा है।

एक समय था जब परिवार केवल खून का रिश्ता नहीं बल्कि एक सामाजिक संस्था हुआ करता था। लेकिन अब बदलती जीवनशैली के कारण परिवार सिमटकर केवल माता-पिता और बच्चों तक सीमित हो गया है। इसी कारण बढ़ती उपेक्षा का कारण बदलता परिवार एक स्पष्ट सच्चाई बनकर उभर रहा है।

व्यस्त जीवनशैली और तकनीकी निर्भरता

आज का युवा सुबह से रात तक काम की दौड़ में लगा रहता है। मोबाइल, लैपटॉप और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रयोग ने संबंधों की गर्माहट को धीरे-धीरे खत्म कर दिया है। बच्चे मोबाइल और इंटरनेट की दुनिया में इतने खो गए हैं कि घर के बुज़ुर्गों की बातें उन्हें अब बोझ सी लगने लगी हैं।

इस प्रकार, बढ़ती उपेक्षा का कारण बदलता परिवार केवल पारिवारिक ढाँचे में बदलाव नहीं बल्कि तकनीक के अत्यधिक प्रयोग से भी जुड़ा हुआ है। अब लोग एक ही घर में रहकर भी आपस में बात नहीं करते, जिससे भावनात्मक दूरी पैदा हो रही है।

पीढ़ियों के बीच बढ़ता अंतर और बदलती संवेदनाएँ

पहले बुज़ुर्गों का अनुभव परिवार के लिए मार्गदर्शक हुआ करता था, परंतु अब युवा यह मानने लगे हैं कि पुरानी सोच उनके आधुनिक जीवन में बाधा बनती है। इस मानसिकता के कारण पीढ़ियों के बीच संवाद कमजोर हुआ है।

यहीं से बढ़ती उपेक्षा का कारण बदलता परिवार और अधिक स्पष्ट हो जाता है। संवेदनाएँ धीमी हो रही हैं, रिश्ते औपचारिक बनते जा रहे हैं और साथ रहने का अर्थ केवल एक छत के नीचे रहना भर रह गया है।

सामुदायिक स्तर पर भी दिख रहा असर

केवल परिवार ही नहीं, बल्कि समाज के स्तर पर भी बदलाव का गहरा प्रभाव पड़ रहा है। पड़ोसी, रिश्तेदार और मित्रता के संबंध अब पहले की तरह मजबूत नहीं रहे। यह सामाजिक अलगाव भी बढ़ती उपेक्षा का कारण बदलता परिवार के दायरे को और अधिक बढ़ा रहा है।

समाज में वृद्धाश्रमों की संख्या बढ़ना, अकेलेपन से जूझते बुज़ुर्गों की बढ़ती संख्या और मानसिक तनाव के मामले इस बात का सीधा प्रमाण हैं कि पारिवारिक मूल्यों में गिरावट आई है।

समस्या का समाधान: कैसे कम हो बढ़ती उपेक्षा

बढ़ती उपेक्षा का कारण बदलता परिवार जरूर है, लेकिन इसका समाधान भी संभव है। इसके लिए हमें कई स्तरों पर काम करना होगा।

  1. अंतरपीढ़ीगत संवाद को बढ़ावा देना होगा
    बच्चों और बुज़ुर्गों के बीच नियमित संवाद जरूरी है। स्कूलों और कॉलेजों में ऐसे कार्यक्रम होने चाहिए जो बच्चों को अपने परिवार, खासकर बुज़ुर्गों से जुड़ने के लिए प्रेरित करें।
  2. सामुदायिक जागरूकता अभियान
    समाज में ऐसे अभियान चलाए जाएँ जो परिवार के महत्व को फिर से स्थापित करने का काम करें। मीडिया की भूमिका इसमें सबसे महत्वपूर्ण हो सकती है।
  3. सरकारी और सामाजिक नीतियाँ
    बुज़ुर्गों के लिए मजबूत सुरक्षा, पेंशन, स्वास्थ्य सुविधा और सामाजिक सम्मान की नीतियों को और प्रभावी बनाने की जरूरत है।
  4. परिवार के साथ समय बिताने की आदत
    सप्ताह में कम से कम एक दिन “फैमिली डे” के रूप में मनाया जाए ताकि सभी सदस्य एक साथ समय बिता सकें।

बदलते समय में रिश्तों की नई परिभाषा
अगर हम समय रहते नहीं चेते, तो आने वाले वर्षों में बढ़ती उपेक्षा का कारण बदलता परिवार और भयावह रूप ले सकता है। इसलिए जरूरी है कि हम आधुनिकता को अपनाने के साथ-साथ अपनी जड़ों को भी संभाले रखें।

सच्चाई यही है कि परिवार केवल एक व्यवस्था नहीं, बल्कि भावनाओं, संस्कारों और संस्कृतियों का संगम है। उसे टूटने देना, समाज के अस्तित्व पर प्रश्नचिह्न लगाने के समान है।

बढ़ती उपेक्षा का कारण बदलता परिवार: आधुनिक समाज की सबसे बड़ी चुनौती

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सोमनाथ मिश्र की रिपोर्ट

आज के तेजी से बदलते सामाजिक परिवेश में एक सच्चाई सामने आ रही है कि “बढ़ती उपेक्षा का कारण बदलता परिवार” केवल एक विचार नहीं बल्कि एक गंभीर सामाजिक संकट बन चुका है। जहाँ कभी संयुक्त परिवार भारतीय संस्कृति की रीढ़ माने जाते थे, वहीं अब एकल परिवारों का बढ़ता चलन, व्यस्त जीवनशैली और बढ़ता व्यक्तिवाद उम्रदराज लोगों, बच्चों और सामाजिक संबंधों के बीच दूरियाँ पैदा कर रहा है।

बदलती पारिवारिक संरचना और उसका प्रभाव

बढ़ती उपेक्षा का कारण बदलता परिवार इसलिए भी माना जा रहा है क्योंकि पहले की तरह अब घरों में दादा-दादी, नाना-नानी और अन्य बुज़ुर्गों की उपस्थिति कम होती जा रही है। युवा पीढ़ी नौकरी, शिक्षा और बेहतर जीवन की तलाश में बड़े शहरों की ओर जा रही है। इस दौरान माता-पिता पीछे छूट जाते हैं और परिवार का वो भावनात्मक ताना-बाना कमजोर हो जाता है, जो भारतीय समाज की पहचान रहा है।

एक समय था जब परिवार केवल खून का रिश्ता नहीं बल्कि एक सामाजिक संस्था हुआ करता था। लेकिन अब बदलती जीवनशैली के कारण परिवार सिमटकर केवल माता-पिता और बच्चों तक सीमित हो गया है। इसी कारण बढ़ती उपेक्षा का कारण बदलता परिवार एक स्पष्ट सच्चाई बनकर उभर रहा है।

व्यस्त जीवनशैली और तकनीकी निर्भरता

आज का युवा सुबह से रात तक काम की दौड़ में लगा रहता है। मोबाइल, लैपटॉप और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रयोग ने संबंधों की गर्माहट को धीरे-धीरे खत्म कर दिया है। बच्चे मोबाइल और इंटरनेट की दुनिया में इतने खो गए हैं कि घर के बुज़ुर्गों की बातें उन्हें अब बोझ सी लगने लगी हैं।

इस प्रकार, बढ़ती उपेक्षा का कारण बदलता परिवार केवल पारिवारिक ढाँचे में बदलाव नहीं बल्कि तकनीक के अत्यधिक प्रयोग से भी जुड़ा हुआ है। अब लोग एक ही घर में रहकर भी आपस में बात नहीं करते, जिससे भावनात्मक दूरी पैदा हो रही है।

पीढ़ियों के बीच बढ़ता अंतर और बदलती संवेदनाएँ

पहले बुज़ुर्गों का अनुभव परिवार के लिए मार्गदर्शक हुआ करता था, परंतु अब युवा यह मानने लगे हैं कि पुरानी सोच उनके आधुनिक जीवन में बाधा बनती है। इस मानसिकता के कारण पीढ़ियों के बीच संवाद कमजोर हुआ है।

यहीं से बढ़ती उपेक्षा का कारण बदलता परिवार और अधिक स्पष्ट हो जाता है। संवेदनाएँ धीमी हो रही हैं, रिश्ते औपचारिक बनते जा रहे हैं और साथ रहने का अर्थ केवल एक छत के नीचे रहना भर रह गया है।

सामुदायिक स्तर पर भी दिख रहा असर

केवल परिवार ही नहीं, बल्कि समाज के स्तर पर भी बदलाव का गहरा प्रभाव पड़ रहा है। पड़ोसी, रिश्तेदार और मित्रता के संबंध अब पहले की तरह मजबूत नहीं रहे। यह सामाजिक अलगाव भी बढ़ती उपेक्षा का कारण बदलता परिवार के दायरे को और अधिक बढ़ा रहा है।

समाज में वृद्धाश्रमों की संख्या बढ़ना, अकेलेपन से जूझते बुज़ुर्गों की बढ़ती संख्या और मानसिक तनाव के मामले इस बात का सीधा प्रमाण हैं कि पारिवारिक मूल्यों में गिरावट आई है।

समस्या का समाधान: कैसे कम हो बढ़ती उपेक्षा

बढ़ती उपेक्षा का कारण बदलता परिवार जरूर है, लेकिन इसका समाधान भी संभव है। इसके लिए हमें कई स्तरों पर काम करना होगा।

  1. अंतरपीढ़ीगत संवाद को बढ़ावा देना होगा
    बच्चों और बुज़ुर्गों के बीच नियमित संवाद जरूरी है। स्कूलों और कॉलेजों में ऐसे कार्यक्रम होने चाहिए जो बच्चों को अपने परिवार, खासकर बुज़ुर्गों से जुड़ने के लिए प्रेरित करें।
  2. सामुदायिक जागरूकता अभियान
    समाज में ऐसे अभियान चलाए जाएँ जो परिवार के महत्व को फिर से स्थापित करने का काम करें। मीडिया की भूमिका इसमें सबसे महत्वपूर्ण हो सकती है।
  3. सरकारी और सामाजिक नीतियाँ
    बुज़ुर्गों के लिए मजबूत सुरक्षा, पेंशन, स्वास्थ्य सुविधा और सामाजिक सम्मान की नीतियों को और प्रभावी बनाने की जरूरत है।
  4. परिवार के साथ समय बिताने की आदत
    सप्ताह में कम से कम एक दिन “फैमिली डे” के रूप में मनाया जाए ताकि सभी सदस्य एक साथ समय बिता सकें।

बदलते समय में रिश्तों की नई परिभाषा
अगर हम समय रहते नहीं चेते, तो आने वाले वर्षों में बढ़ती उपेक्षा का कारण बदलता परिवार और भयावह रूप ले सकता है। इसलिए जरूरी है कि हम आधुनिकता को अपनाने के साथ-साथ अपनी जड़ों को भी संभाले रखें।

सच्चाई यही है कि परिवार केवल एक व्यवस्था नहीं, बल्कि भावनाओं, संस्कारों और संस्कृतियों का संगम है। उसे टूटने देना, समाज के अस्तित्व पर प्रश्नचिह्न लगाने के समान है।

कदम–कदम पर बदलती दिशाएं: मानव जीवन की कहानी

✍️ डॉ.सतीश पाण्डेय

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। मानव जीवन एक ऐसी अनवरत यात्रा है, जिसमें कोई भी राह स्थायी नहीं होती। पल–पल बदलते हालात, रोज नए मोड़ और अनगिनत अनिश्चितताएं—इन्हीं के बीच जीवन अपनी दिशा स्वयं तय करता है। इसीलिए कहा जाता है कि कदम–कदम पर बदलती दिशाएं ही मानव जीवन की असली कहानी हैं।

हर दिन, हर निर्णय और हर अनुभव इंसान की राह को बदल देता है, और इसी बदलाव में जीवन की वास्तविकता छिपी होती है। जीवन की शुरुआत सरल और सहज होती है। बचपन में दिशा का नियंत्रण दूसरों के हाथों में होता है—माता–पिता, परिवार और समाज बच्चे के लिए पहला मार्गदर्शक बनते हैं। इस उम्र में मासूमियत और सपनों के सहारे जो रेखाएं खींची जाती हैं, वही दिशा आगे के जीवन को आकार देती है।

लेकिन जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है, उसके सामने नई राहें खुलती हैं और वह स्वयं अपनी दिशा खोजने लगता है। युवावस्था वह मोड़ है जहां जीवन की वास्तविकता रूबरू सामने आती है। करियर, रिश्ते, आकांक्षाएं और संघर्ष—सब मिलकर हर कदम पर राह बदलते रहते हैं। कभी सफलता दिशा देती है तो कभी असफलता मार्ग बदलने पर मजबूर करती है। हर चुनौती एक नई सीख देती है और हर अनुभव जीवन का नया अध्याय लिखता है।

यही वह उम्र है जहां इंसान समझता है कि कोई भी रास्ता सदा सीधा नहीं होता—वह परिस्थितियों के हिसाब से बदलता रहता है। मध्य आयु में जीवन के मोड़ और भी जटिल हो जाते हैं। परिवार, ज़िम्मेदारियां, उम्मीदें और कर्तव्य एक–दूसरे से टकराते हैं। इस दौर में दिशा केवल स्वार्थ से नहीं, बल्कि रिश्तों और जिम्मेदारियों से निर्धारित होती है। एक तरफ भविष्य की सुरक्षा का दबाव, दूसरी तरफ वर्तमान को संभालने की चुनौती—इन्हीं के बीच व्यक्ति अपनी राहें तय करता है।

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यही समय जीवन को परिपक्वता सिखाता है, और यह समझ भी कि बदलती दिशाएं कमजोरी नहीं, बल्कि जीवन का स्वाभाविक नियम हैं। वृद्धावस्था में जीवन की कहानी बिल्कुल नई दिशा लेती है। यहां व्यक्ति तेजी नहीं, ठहराव को समझता है; महत्वाकांक्षा नहीं, संतोष को प्राथमिकता देता है। पिछले अनुभव इस काल में जीवन की दिशा दिखाने वाले दीपक बन जाते हैं। बुजुर्ग इंसानआखिरकार यह समझ पाता है कि हर मोड़, हर दिशा और हर बदलाव उसी को और मजबूत और समझदार बनाने के लिए हुआ था।

यही सोच जीवन के अंतिम पड़ाव में शांति और स्वीकार्यता प्रदान करती है। मानव जीवन की कहानी का सार यही है कि इसमें कोई दिशा स्थायी नहीं होती। हम योजनाएं बनाते हैं, लेकिन परिस्थितियां राह बदल देती हैं। हम तय करते हैं कि किस ओर जाना है, लेकिन जीवन ही बताता है कि हमें वास्तव में किस दिशा में बढ़ना चाहिए। यही अनिश्चितता जीवन को रोमांचक भी बनाती है और सीखों से भरपूर भी।

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अंततः जीवन हमें यही सिखाता है कि बदलती दिशाएं रुकावट नहीं, बल्कि आगे बढ़ने की नई संभावनाएं होती हैं।मानव जीवन की यही कहानी है—एक ऐसी यात्रा जहां रास्ते बदलते हैं, मंजिलें बदलती हैं, लेकिन सीख और अनुभव हमेशा साथ रहते हैं और हमें बेहतर इंसान बनने की ओर ले जाते हैं।

डॉक्टर नदारद स्वीपर पर ‘निर्भर’ पीएचसी भागलपुर

इलाज में लापरवाही से मरीज की हालत बिगड़ी

भागलपुर /देवरिया(राष्ट्र की परम्परा) प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भागलपुर में चिकित्सकों की लगातार अनुपस्थिति ने स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोलकर रख दी है। अस्पताल मात्र एक डॉक्टर के सहारे संचालित हो रहा है, जिसके कारण मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गुरुवार को अस्पताल में हुए एक गंभीर मामले ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार भागलपुर के रहने वाले राम सुंदर प्रसाद की तबीयत अचानक खराब होने पर परिजन उन्हें पीएचसी भागलपुर लेकर पहुंचे। परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर की अनुपस्थिति में अस्पताल में मानदेय पर तैनात स्वीपर उमेश ने मरीज का बीपी नापा और इंजेक्शन तक लगा दिया। कुछ देर बाद मरीज की हालत बिगड़ने लगी।
लगभग आधे घंटे बाद ओपीडी के डॉक्टर अविनाश कुशवाहा अस्पताल पहुंचे और मरीज की जांच कर आवश्यक निर्देश दिए। बाद में मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें देवरहवा बाबा मेडिकल कॉलेज देवरिया रेफर कर दिया गया।
स्थानीय लोगों ने बताया कि पीएचसी में डॉक्टरों की कमी के कारण यहां आसपास के सहरसो, मुरसो, बलिया, क्षेत्रपुर, देवसीया , बगहा, बगही, मोबाइली, इत्यादि दूर-दूर के गांवों से आने वाले मरीज को घंटों ओपीडी में बैठना पड़ता हैं। सुविधाओं के अभाव में अक्सर मरीजों को केवल रेफर कर दिया जाता है। खून जांच, एक्स-रे जैसी मूलभूत सेवाएं न होने से निजी जांच केंद्रों की चांदी कट रही है और इसका खामियाजा गरीब मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल में कम से कम तीन डॉक्टरों की जरूरत है, जबकि वर्तमान में केवल एक ही डॉक्टर मरीजों को देख पा रहे हैं। वहीं स्वीपर उमेश लंबे समय से कार्यरत है, और डॉक्टरों के सानिध्य में काम करते-करते काफी कुछ सीख गया है, जिसके चलते वह जरूरत पड़ने पर लोगों की मदद कर देता है।
घटना के दौरान जब डॉक्टर अविनाश कुशवाहा से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि “हम बाथरूम गए थे और इसी बीच मरीज को थोड़ी दिक्कत हुई है। ऐसा आमतौर पर नहीं होता है”
लोगों ने जल्द डॉक्टरों की संख्या बढ़ाने और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की मांग उठाई है।

मिट्टी की सेहत, देश का भविष्य: विश्व मृदा दिवस पर जागरूकता और संकल्प

नवनीत मिश्र


विश्व मृदा दिवस हर वर्ष 5 दिसंबर को हमें यह स्मरण कराता है कि धरती की यह साधारण दिखाई देने वाली परत ही जीवन का वास्तविक आधार है। मानव सभ्यता का उत्थान इसी मिट्टी पर हुआ है और आज भी कृषि, खाद्य सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक स्थिरता सब इसी पर निर्भर हैं। परंतु आधुनिक कृषि पद्धतियों में रसायनों और उर्वरकों के अनियंत्रित उपयोग ने मिट्टी की सेहत को गहरी चोट पहुंचाई है।
भारत जैसे कृषि प्रधान देश में मिट्टी की उर्वरता का गिरना केवल कृषि का संकट नहीं, बल्कि लाखों किसानों की आजीविका और सम्पूर्ण पर्यावरण का प्रश्न बन चुका है। रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशकों और तेज रासायनिक दवाओं के अत्यधिक प्रयोग से मिट्टी के जैविक गुण नष्ट हो रहे हैं। सूक्ष्मजीवों की संख्या घट रही है, पोषक तत्वों का संतुलन बिगड़ रहा है और उपजाऊ भूमि धीरे-धीरे बंजर होती जा रही है। यह स्थिति जल प्रदूषण और वायु प्रदूषण दोनों को बढ़ावा देती है।
ऐसे समय में जैविक कृषि ही वह विकल्प है जो मिट्टी की मूल संरचना को सुरक्षित रख सकता है। देसी गायों के गोबर और गोमूत्र से बने जैविक खाद न केवल पूरी तरह प्राकृतिक हैं, बल्कि मिट्टी में कार्बन की मात्रा बढ़ाकर उसकी उत्पादकता को लंबे समय तक बनाए रखते हैं। जैविक पद्धति से खेती करने पर फसल की गुणवत्ता बढ़ती है, लागत घटती है और भूमि की दीर्घकालिक सेहत सुधरती है। यह पर्यावरण-अनुकूल प्रणाली किसान और प्रकृति दोनों के लिए लाभकारी है।
विश्व मृदा दिवस हमें जागरूक होने का अवसर देता है कि यदि हम आज मिट्टी को बचाने के लिए कदम नहीं उठाते, तो भविष्य की खाद्य सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी। किसान हों या आम नागरिक हर किसी की जिम्मेदारी है कि मिट्टी को बचाने की मुहिम में योगदान दें। जैविक खादों का उपयोग, फसल विविधिकरण, जल संरक्षण तकनीकें, रासायनिक दवाओं में कमी और सतत कृषि के प्रति प्रतिबद्धता जैसे छोटे कदम बड़ी क्रांति का आधार बन सकते हैं।
आइए, हम सभी इस दिन संकल्प लें कि मिट्टी की उर्वरता को पुनर्जीवित करने, पर्यावरण संतुलन सुनिश्चित करने और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए सतत व जैविक खेती को प्राथमिकता देंगे। मिट्टी को बचाना केवल भूमि को बचाना नहीं, बल्कि जीवन को सुरक्षित करना है।

जानिए आज का दिन आपके लिए क्या संदेश लेकर आया है

🗓️ दैनिक राशिफल – 5 दिसंबर 2025 (शुक्रवार)
लेखक – पं. सत्य प्रकाश पाण्डेय
वैदिक ज्योतिष के अनुसार आज पौष कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि है। ग्रहों की स्थिति मन, कर्म, धन, शिक्षा, राजनीति और स्वास्थ्य सभी क्षेत्रों पर प्रभाव डाल रही है। आज कुछ राशियों को जहाँ शानदार अवसर मिलेंगे, वहीं कुछ को धैर्य और सतर्कता की आवश्यकता रहेगी।

🔴 1. मेष राशि (Aries ♈)
नाम के अक्षर – अ, च, ची, चू, चे, ला
कार्य/व्यवसाय – कार्यस्थल पर दबाव रहेगा, पर नेतृत्व क्षमता निखरेगी। सरकारी कार्यों में सफलता के योग।
शिक्षा – छात्रों को फोकस बढ़ाने की जरूरत
राजनीति/प्रशासन – प्रभाव बढ़ेगा, जनसमर्थन मिलेगा
कला-संगीत – नई प्रेरणा मिलेगी
आर्थिक स्थिति – मध्यम, खर्च बढ़ सकता है
शुभ रंग – लाल
शुभ अंक – 9
आराध्य देवता – हनुमान जी

🟡 2. वृषभ राशि (Taurus ♉)
नाम के अक्षर – ब, व, उ, ए, ओ
कार्य/व्यवसाय – धन लाभ के संकेत, रुके पैसे मिल सकते हैं
शिक्षा – नया कोर्स या विषय लाभदायक
राजनीति – स्थिरता बनी रहेगी
कला – सौंदर्य, फैशन से जुड़े लोगों के लिए शुभ
आर्थिक स्थिति – मजबूत
शुभ रंग – गुलाबी
शुभ अंक – 6
आराध्य देवता – माता लक्ष्मी

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🟢 3. मिथुन राशि (Gemini ♊)
नाम के अक्षर – क, की, कु, घ, छ
कार्य/व्यवसाय – नई योजनाएं बनेंगी, सफलता के संकेत
शिक्षा – प्रतियोगी छात्र सफल
राजनीति – नई जिम्मेदारी मिल सकती है
कला-मीडिया – तरक्की
आर्थिक – अच्छा समय
शुभ रंग – हरा
शुभ अंक – 5
आराध्य देवता – गणेश जी

⚪ 4. कर्क राशि (Cancer ♋)
नाम के अक्षर – ड, ही, हू, हो
कार्य क्षेत्र – कार्य में सहयोग मिलेगा
शिक्षा – मन लगेगा
राजनीति – सम्मान बढ़ेगा
आर्थिक – शुभ समाचार
शुभ रंग – सफेद
शुभ अंक – 2
आराध्य देवता – शिव जी

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🟠 5. सिंह राशि (Leo ♌)
नाम के अक्षर – म, ट, मी, मु, मा
व्यवसाय – चुनौतियाँ रहेंगी लेकिन जीत संभव
शिक्षा – आत्मविश्वास बढ़ेगा
राजनीति/प्रशासन – प्रभाव बना रहेगा
कला क्षेत्र – मेहनत रंग लाएगी
शुभ रंग – सुनहरा
शुभ अंक – 1
देवता – सूर्य देव

🟤 6. कन्या राशि (Virgo ♍)
नाम के अक्षर – प, पी, ढ, ठ, ण
कार्य/धन – बजट बनाकर चलना होगा
शिक्षा – विदेश से जुड़ा योग
राजनीति – छवि सुधरेगी
शुभ रंग – आसमानी
शुभ अंक – 5
देवता – विष्णु जी

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🔵 7. तुला राशि (Libra ♎)
नाम के अक्षर – र, री, त, तू
व्यवसाय – नए अनुबंध
स्वास्थ्य – सजग रहें
राजनीति – विवाद से दूर
शुभ रंग – नीला
शुभ अंक – 7
देवी – दुर्गा माँ

🖤 8. वृश्चिक राशि (Scorpio ♏)
नाम के अक्षर – न, नी, नो, या
कार्य – साहस से काम करें
राजनीति – कूटनीतिक लाभ
शिक्षा – रिसर्च में लाभ
शुभ रंग – मैरून
शुभ अंक – 8
देवता – भैरव जी

🟣 9. धनु राशि (Sagittarius ♐)
नाम के अक्षर – भ, ध, फ, ढ
कार्य – नए अवसर
शिक्षा – सफलता
कला/यात्रा – शुभ
शुभ रंग – पीला
शुभ अंक – 3
देवता – विष्णु भगवान

🔷 10. मकर राशि (Capricorn ♑)
नाम के अक्षर – ख, ज, ग
कार्य – प्रमोशन योग
राजनीति – लाभ
धन – निवेश उचित
शुभ रंग – स्लेटी
शुभ अंक – 4
आराध्य देव – शनिदेव

🟢 11. कुंभ राशि (Aquarius ♒)
नाम के अक्षर – गू, गे, स
व्यवसाय – नए प्रोजेक्ट
स्वास्थ्य – ध्यान दें
राजनीति – जनहित का समर्थन
शुभ रंग – बैंगनी
शुभ अंक – 11
देवता – शिव जी

🔵 12. मीन राशि (Pisces ♓)
नाम के अक्षर – द, दी, झ, थ
धन – पुराने निवेश से लाभ
शिक्षा – एकाग्रता बढ़ेगी
कला/संगीत – विशेष लाभ
शुभ रंग – हल्का नीला
शुभ अंक – 12
देवता – कृष्ण भगवान

⚠️ डिस्क्लेमर
यह राशिफल ज्योतिषाचार्य पं. सत्य प्रकाश पाण्डेय द्वारा सामान्य जनकल्याण हेतु तैयार किया गया है।
“राष्ट्र की परम्परा” इस ज्योतिष की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता। कृपया अपनी जन्मकुंडली किसी विशेषज्ञ को अवश्य दिखाएं।

भारत और विश्व के इतिहास में 5 दिसंबर

5 दिसंबर – इतिहास के वे अमर सितारे, जिनकी विदाई ने समय को भी नम कर दिया

5 दिसंबर का दिन इतिहास के पन्नों में उन महान व्यक्तित्वों के लिए विशेष स्थान रखता है, जिन्होंने अपने विचारों, संघर्ष और रचनात्मकता से दुनिया को वोनई दिशा दी। यह दिन कई ऐसे व्यक्तियों की पुण्यतिथि है, जिनकी विरासत आज भी लोगों के जीवन को प्रेरित करती है।

तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता (जन्म: 24 फरवरी 1948, मैसूर, कर्नाटक) का निधन 5 दिसंबर 2016 को हुआ। वे ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (AIADMK) की प्रमुख नेता थीं। अपने सशक्त नेतृत्व, जनकल्याण योजनाओं और महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को बढ़ाने के लिए वे विशेष रूप से जानी जाती हैं। तमिलनाडु के विकास में उनका योगदान ऐतिहासिक रहा।

नेल्सन मंडेला (जन्म: 18 जुलाई 1918, म्वेज़ो, दक्षिण अफ्रीका) का निधन 5 दिसंबर 2013 को हुआ। वे दक्षिण अफ्रीका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति थे और उन्हें भारत सरकार द्वारा भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया। रंगभेद के खिलाफ उनका संघर्ष पूरी दुनिया के लिए समानता, शांति और मानवाधिकारों की प्रतीक बन गया।

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गुरबचन सिंह सालारिया (जन्म: 29 नवंबर 1935, गुरदासपुर, पंजाब) ने देश की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर किए और उन्हें मरणोपरांत परम वीर चक्र से सम्मानित किया गया। उनका बलिदान भारतीय सेना के शौर्य का अमिट उदाहरण है।

हुसैन अहमद मदनी (जन्म: 1879, बांकीपुर, बिहार) एक महान इस्लामी विद्वान और स्वतंत्रता सेनानी थे। उन्होंने विदेशी शासन के विरुद्ध आवाज़ उठाई और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई।

प्रसिद्ध उर्दू शायर मजाज़ लखनवी 1955 (जन्म: लखनऊ, उत्तर प्रदेश) की शायरी युवाओं में क्रांति और प्रेम की भावना जगाती थी। उनकी कविताएँ आज भी साहित्य जगत में अमर हैं।

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भारतीय कला के जनक कहे जाने वाले अवनीन्द्रनाथ ठाकुर 1951 (जन्म: कोलकाता, पश्चिम बंगाल) ने बंगाल स्कूल ऑफ आर्ट की स्थापना की। उन्होंने भारतीय चित्रकला को नई पहचान दी।

अरबिंदो घोष 1950 (जन्म: कोलकाता, पश्चिम बंगाल) एक महान दार्शनिक, लेखक और योगी थे। उनके विचार आज भी अध्यात्म और राष्ट्रीय चेतना का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

प्रसिद्ध चित्रकार अमृता शेरगिल 1941 (जन्म: बुडापेस्ट, हंगरी; भारतीय मूल – पंजाब) आधुनिक भारतीय कला की अग्रदूत थीं। उन्होंने भारतीय ग्रामीण जीवन और स्त्री भावनाओं को अपने चित्रों में जीवंत रूप दिया।

एस. सुब्रह्मण्य अय्यर 1924 (जन्म: 1866, तमिलनाडु) एक स्वतंत्रता सेनानी, पत्रकार और समाज सुधारक थे। उन्होंने सामाजिक चेतना फैलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

इन महान आत्माओं का योगदान केवल इतिहास नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का दीपस्तंभ है। 5 दिसंबर केवल एक तारीख नहीं, बल्कि त्याग, संघर्ष और सेवा की अनंत कहानी है।

प्रसिद्ध जन्मतिथि और उनका ऐतिहासिक महत्व

“5 दिसंबर: इतिहास के वे सितारे, जिन्होंने शब्दों, साहस और संस्कार से अपना युग बदल दिया”

5 दिसंबर का दिन केवल एक तारीख नहीं, बल्कि इतिहास के स्वर्णिम पन्नों में दर्ज उन महान व्यक्तित्वों का जन्मदिवस है, जिन्होंने अपने कार्य, संघर्ष, प्रतिभा और विचारों से समाज, राजनीति, साहित्य, खेल और पत्रकारिता को एक नई दिशा दी। नीचे 5 दिसंबर को जन्म लेने वाले उन महान हस्तियों के जीवन पर विस्तृत प्रकाश डाला गया है जिन्होंने आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्ग प्रशस्त किया।

रवीश कुमार (जन्म: 5 दिसंबर 1974) – भारत के निर्भीक पत्रकार

रवीश कुमार का जन्म बिहार के मोतिहारी जनपद में हुआ था। उन्होंने जनसंचार में दिल्ली विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की और पत्रकारिता की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई। वे एनडीटीवी से लंबे समय तक जुड़े रहे और आम जनता के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने के लिए जाने गए।

रवीश कुमार ने ग्रामीण भारत, बेरोजगारी, शिक्षा और लोकतंत्र जैसे विषयों पर खुलकर आवाज उठाई। उन्हें रैमन मैग्सेसे पुरस्कार जैसे प्रतिष्ठित सम्मान से भी नवाजा गया। उनकी लेखनी और रिपोर्टिंग शैली उन्हें आम लोगों की आवाज बनाती है। भारत में खोजी और संवेदनशील पत्रकारिता को नई ऊंचाई देने में उनका बड़ा योगदान रहा है।

अंजलि भागवत (जन्म: 5 दिसंबर 1969) – निशाने की महारानी

अंजलि भागवत का जन्म महाराष्ट्र के मुंबई में हुआ। वे भारत की सबसे सफल महिला निशानेबाजों में गिनी जाती हैं। उन्होंने 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में भारत का प्रतिनिधित्व कई अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं और ओलंपिक में किया।

उन्होंने 1998 के एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा। अंजलि भागवत ने भारतीय खेल जगत में महिलाओं को प्रेरित किया और यह दिखाया कि धैर्य, एकाग्रता और अभ्यास से विश्व मंच पर विजय पाई जा सकती है। बाद में वे खेल प्रशासन और खिलाड़ियों के प्रशिक्षण से भी जुड़ीं।

रघुवीर चौधरी (जन्म: 5 दिसंबर 1938) – गुजराती साहित्य का स्तंभ

रघुवीर चौधरी का जन्म गुजरात के अहमदाबाद जनपद में हुआ। वे एक प्रसिद्ध गुजराती लेखक, शिक्षाविद और चिंतक रहे हैं। उन्होंने गुजराती साहित्य को नई ऊंचाई देने में अहम भूमिका निभाई।

उनकी रचनाएं भारतीय समाज, राजनीति और संस्कृति की गहराई को दर्शाती हैं। उनका प्रसिद्ध उपन्यास “अमृता” साहित्य जगत में विशेष पहचान रखता है। वे कई वर्षों तक विश्वविद्यालयों से भी जुड़े रहे और नई पीढ़ी को साहित्य की ओर प्रेरित किया। उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।

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रामानुज प्रसाद सिंह (जन्म: 5 दिसंबर 1935) – आवाज़, जो बन गई पहचान

रामानुज प्रसाद सिंह का जन्म बिहार के सारण जिले में हुआ था। वे आकाशवाणी (ऑल इंडिया रेडियो) के सबसे प्रसिद्ध समाचार वाचकों में से एक रहे हैं। उनकी आवाज़ में एक विशेष गंभीरता और स्पष्टता थी, जो श्रोताओं पर गहरा प्रभाव डालती थी।

उन्होंने देशभर में रेडियो माध्यम से खबरें पहुंचाईं और रेडियो समाचार वाचन की परंपरा को एक नई पहचान दी। उनका योगदान भारतीय प्रसारण इतिहास में अमूल्य माना जाता है।

नादिरा (जन्म: 5 दिसंबर 1932) – सशक्त अभिनय की पहचान

नादिरा का जन्म बगदाद, इराक में हुआ था, लेकिन उन्होंने भारतीय सिनेमा में अपनी मजबूत पहचान बनाई। वे हिंदी फिल्मों की प्रसिद्ध अभिनेत्रियों में से एक थीं, जो अक्सर सशक्त और साहसी भूमिकाओं के लिए जानी जाती थीं।

फिल्म “श्री 420” में उनका अभिनय आज भी याद किया जाता है। उन्होंने अपने दौर की पारंपरिक महिला छवि से हटकर अलग किरदार निभाए और हिंदी सिनेमा को नई सोच दी।

रमाकांत आचरेकर (जन्म: 5 दिसंबर 1932) – भारतीय क्रिकेट के गुरू

रमाकांत आचरेकर का जन्म महाराष्ट्र के मुंबई में हुआ। वे एक महान क्रिकेट कोच थे, जिन्होंने भारत को कई दिग्गज खिलाड़ी दिए, जिनमें सचिन तेंदुलकर का नाम सबसे प्रमुख है।

शिवाजी पार्क में अपनी कोचिंग से उन्होंने बच्चों को अनुशासन, मेहनत और खेल की सच्ची भावना सिखाई। उनके मार्गदर्शन ने भारतीय क्रिकेट को विश्व स्तर पर नई मजबूती प्रदान की।

शेख मोहम्मद अब्दुल्ला (जन्म: 5 दिसंबर 1905) – कश्मीर की आवाज़

शेख मोहम्मद अब्दुल्ला का जन्म श्रीनगर, जम्मू-कश्मीर में हुआ। वे कश्मीर के प्रमुख राजनीतिक नेता और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रहे। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के पहले प्रधानमंत्री और बाद में मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया।

उनका योगदान कश्मीर की राजनीति और भारत के लोकतांत्रिक ढांचे में अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने सामाजिक समानता और लोगों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया।

जोश मलीहाबादी (जन्म: 5 दिसंबर 1894) – क्रांति की कविता

जोश मलीहाबादी का जन्म उत्तर प्रदेश के मलीहाबाद (लखनऊ) में हुआ था। वे उर्दू साहित्य के महान कवि और शायर थे, जिनकी कविताओं में क्रांति, राष्ट्रप्रेम और जागरूकता की झलक मिलती है।

उनकी शायरी युवा पीढ़ी में जोश भरने का काम करती थी। भारत और पाकिस्तान दोनों जगह उन्हें समान रूप से सराहा गया।

एच. सी. दासप्पा – भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सिपाही

एच. सी. दासप्पा का जन्म कर्नाटक में हुआ था। वे स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रहे और बाद में प्रशासनिक तथा राजनीतिक क्षेत्र में भी योगदान दिया। उन्होंने देश सेवा को अपना सर्वोच्च धर्म माना।

भाई वीर सिंह (जन्म: 5 दिसंबर 1872) – आधुनिक पंजाबी साहित्य के जनक

भाई वीर सिंह का जन्म अमृतसर, पंजाब में हुआ। वे कवि, विचारक और समाज सुधारक थे। उन्होंने पंजाबी भाषा को प्रतिष्ठा दिलाई और उसे साहित्य की ऊंचाइयों तक पहुँचाया।

उनकी कविताएँ आध्यात्मिक चेतना, राष्ट्रप्रेम और मानवीय मूल्यों से ओतप्रोत थीं। उन्हें आधुनिक पंजाबी साहित्य का जनक माना जाता है।