Monday, June 29, 2026
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साधन सहकारी समिति पर बीज का अभाव, स्थान परिवर्तन से किसान परेशान

सिकंदरपुर /बलिया(राष्ट्र की परम्परा)

रबी सीजन की शुरुआत होते ही क्षेत्र के किसानों को बीज संकट का सामना करना पड़ रहा है। साधन सहकारी समिति नवानगर चाडी आवश्यक फसलों के बीज की उपलब्धता न होने से किसान काफी परेशान हैं। किसानों का कहना है कि बीज लेने के लिए उन्हें कई बार समिति का चक्कर लगाना पड़ रहा है, लेकिन हर बार निराशा ही हाथ लगती है। किसानों की परेशानी इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि पहले यह समिति नवानगर के पास स्थित थी, जिससे उन्हें आसानी होती थी। लेकिन समिति को स्थानांतरित कर लीलकर और कठौड़ा के बीच शिफ्ट कर दिया गया है। नए स्थान की दूरी अधिक होने के कारण किसानों को अतिरिक्त समय तथा खर्च का बोझ झेलना पड़ रहा है। छोटे किसानों के लिए यह स्थिति और अधिक कष्टदायक हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि बीज वितरण में लापरवाही और समय पर उपलब्धता न होना कृषि कार्यों को प्रभावित कर रहा है। कई किसान मजबूरी में महंगे दामों पर निजी दुकानों से बीज खरीदने को विवश हैं। किसानों ने संबंधित विभाग से मांग की है कि समिति पर तत्काल पर्याप्त बीज उपलब्ध कराया जाए और वितरण प्रक्रिया को सुचारु बनाया जाए, ताकि रबी की बुवाई प्रभावित न हो। वही गोदाम इंचार्ज ऑडियो एग्रीकल्चर हरिश्चंद्र यादव के द्वारा बताया गया कि बीज आज समाप्त हुआ है और बीज का डिमांड मैंने पहले ही कर दिया है बीज उपलब्ध होने पर किसानों को दिया जाएगा

बस स्टेशन चौराहा: चौधरी चरण सिंह पुस्तकालय-वाचनालय और यात्री निवास पर बढ़ा अतिक्रमण, व्यवस्था ध्वस्त

सिकंदरपुर/बलिया(राष्ट्र की परम्परा)

आदर्श नगर पंचायत क्षेत्र के बस स्टेशन चौराहे पर स्थित चौधरी चरण सिंह पुस्तकालय एवं वाचनालय तथा यात्री निवास पर बढ़ते अतिक्रमण ने स्थानीय लोगों में नाराज़गी पैदा कर दी है। नगर पंचायत की उपेक्षा के कारण यह महत्वपूर्ण सार्वजनिक परिसर अब अवैध कब्जों का गढ़ बन गया है। स्थिति यह है कि कहीं पर होल्डिंग बोर्ड गाड़ दिए गए हैं, तो कहीं सड़क किनारे ठेला-खुमचा लगाकर पूरे क्षेत्र को संकुचित कर दिया गया है।स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पुस्तकालय एवं वाचनालय जैसे सार्वजनिक संसाधन युवाओं और विद्यार्थियों के अध्ययन-मनन के लिए बनाए गए थे, वहीं यात्री निवास यात्रियों को सहज सुविधा देने के उद्देश्य से स्थापित हुआ था। लेकिन अवैध कब्जे और अनियंत्रित व्यापारिक गतिविधियों के कारण इनका मूल उद्देश्य ही प्रभावित हो रहा है। चौधरी चरण सिंह के नाम से संचालित यह परिसर अब अस्त-व्यस्त नजर आता है।व्यापारियों और राहगीरों के अनुसार अतिक्रमण के चलते न केवल यातायात बाधित हो रहा है, बल्कि चौराहे पर दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ गई है। कई बार शिकायतें करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई न होने से लोगों में नगर पंचायत प्रशासन के प्रति आक्रोश बढ़ रहा है। नागरिकों ने मांग की है कि तत्काल अतिक्रमण हटाकर पुस्तकालय, वाचनालय और यात्री निवास को पुनः व्यवस्थित किया जाए, ताकि अध्ययनरत युवाओं और आम यात्रियों को बेहतर सुविधा उपलब्ध हो सके।

ग्राम विकास अधिकारी व सचिव काली पट्टी बांधकर कार्य से विरत, ब्लॉक मुख्यालय पर धरना

बलिया(राष्ट्र की परम्परा)

प्रदेशभर में जारी अपनी मांगों को लेकर जनपद के ग्राम विकास अधिकारी (वीडीओ) एवं ग्राम विकास सचिवों ने शुक्रवार को काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराया और अपने नियमित कार्यों से विरत रहते हुए ब्लॉक मुख्यालय पर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि लंबे समय से लंबित मांगों पर सरकार ध्यान नहीं दे रही है, जिसके कारण उन्हें आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
धरना स्थल पर जुटे अधिकारियों एवं सचिवों ने कहा कि वे ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के संचालन, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और जनहित से जुड़े दायित्व निभाते हैं, लेकिन उनके पदों से संबंधित वेतन विसंगति, पदोन्नति, कैडर गठन सहित कई मुद्दे आज तक अनदेखे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। धरना के दौरान कर्मचारियों ने अपनी एकजुटता का परिचय देते हुए सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और ज्ञापन के माध्यम से अपनी समस्याओं से उच्च अधिकारियों को अवगत कराया। अधिकारियों का कहना है कि जब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होगा, आंदोलन चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा। आंदोलन के कारण ग्राम पंचायतों के कई कार्य प्रभावित रहे।

विश्व मृदा दिवस पर महराजगंज में किसानों का मेला लगासदर विधायक बोले— मिट्टी बचेगी तो भविष्य बचेगा, किसान खुशहाल होगा

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। विश्व मृदा दिवस पर शुक्रवार को जिला मुख्यालय पर आयोजित विशाल किसान गोष्ठी एक बड़े मेले का रूप ले गई, जहां अलग-अलग गांवों से पहुंचे किसानों ने नई तकनीक, आधुनिक खेती और मृदा संरक्षण से जुड़ी जानकारी उत्साह के साथ सुनी। कार्यक्रम में सदर विधायक जय मंगल कन्नौजिया ने कहा कि मृदा ही राष्ट्र की रीढ़ है, मिट्टी सुरक्षित होगी तो किसान समृद्ध होगा और देश आगे बढ़ेगा। विधायक ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि आज खेती में बढ़ती लागत का सबसे बड़ा कारण है—बिना परीक्षण के रासायनिक उर्वरकों का गलत उपयोग। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे मृदा परीक्षण को खेती की पहली जरूरत बनाएं और उसके आधार पर खाद का प्रयोग करें। इससे न केवल खेत की उपज बढ़ेगी बल्कि मिट्टी की शक्ति भी लंबे समय तक बनी रहेगी। गोष्ठी के दौरान कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को बताया कि समय के साथ मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ कम होते जा रहे हैं, जिससे उत्पादन प्रभावित होता है। उन्होंने फसल चक्र, जैविक उर्वरकों, प्राकृतिक खेती, और सतत कृषि पद्धतियों को अपनाने पर जोर दिया। विशेषज्ञों ने कहा कि वैज्ञानिक पद्धति अपनाने पर किसान कम लागत में अधिक उपज हासिल कर सकते हैं। कार्यक्रम में सदर विधायक ने किसानों को उन्नत किस्म के बीज, कीटनाशक और कृषि सामग्री वितरित की। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा संचालित मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना, जैविक खेती को बढ़ावा, और उन्नत तकनीक किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि इंजीनियर विवेक गुप्ता ने बताया कि सरकार समय से गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने के लिए विशेष निगरानी कर रही है, ताकि रबी व खरीफ दोनों मौसमों में किसान बेहतर उत्पादन कर सकें। इस अवसर पर केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी के प्रतिनिधि जगदीश मिश्रा, पूर्व जिला उपाध्यक्ष सानन्द पटेल, उप कृषि निदेशक संजीव कुमार, केंद्र प्रभारी संजय पटेल, राकेश अग्रहरी, हेमंत श्रीवास्तव सहित कई जनप्रतिनिधि और तकनीकी सहायक मौजूद रहें।

संसदीय अध्ययन समिति की समीक्षा बैठक में विभागों की कार्यप्रगति पर मंथन जनसमस्याओं के निस्तारण में तेजी लाएँ—मा० सभापति ने अधिकारियों को दिए निर्देश

बलिया(राष्ट्र की परम्परा) उत्तर प्रदेश विधान परिषद की संसदीय अध्ययन समिति की अध्यक्षता करते हुए मा० सभापति श्री किरण पाल कश्यप ने शुक्रवार को विकास भवन सभागार में जिला स्तरीय अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। बैठक की शुरुआत अधिकारियों के परिचय के साथ हुई। जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने मा० सभापति को पुष्पगुच्छ, साल एवं स्मृति चिन्ह भेंटकर उनका स्वागत किया। बैठक में वर्तमान सरकार के गठन से अब तक जनप्रतिनिधियों से प्राप्त पत्रों पर विभागवार की गई कार्यवाही की विस्तृत समीक्षा की गई। पुलिस, राजस्व, स्वास्थ्य, पंचायती राज, सिंचाई, बेसिक शिक्षा, विद्युत, कृषि, पूर्ति, पशुपालन, चकबंदी आदि विभागों द्वारा प्राप्त अधिकांश आवेदन पत्रों का निस्तारण किए जाने की जानकारी दी गई। हालांकि जिन विभागों ने निस्तारण की अद्यतन जानकारी समिति को उपलब्ध नहीं कराई थी, उन्हें तुरंत विवरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए। माध्यमिक शिक्षा विभाग के तीन आवेदन पत्र अब भी लंबित पाए गए, जिनके तत्काल निस्तारण के कड़े निर्देश दिए गए। वहीं विद्युत विभाग को सरकार की बिजली बिल छूट योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार लाउडस्पीकर के माध्यम से कराने के निर्देश दिए गए। जिला समाज कल्याण विभाग से अनुसूचित जाति/जनजाति छात्रवृत्ति की स्थिति पूछी गई, जबकि पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी ने बताया कि जिले के 61,000 छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति का लाभ दिया जा चुका है। मा० सभापति श्री किरण पाल कश्यप ने स्पष्ट कहा कि सभी विभाग प्राप्त आवेदन पत्रों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करें तथा प्रगति की जानकारी समिति को नियमित रूप से उपलब्ध कराएँ। साथ ही आगामी बैठक में विभागों को पूर्ण तैयारी के साथ उपस्थित होने के निर्देश दिए गए। बैठक में समिति सदस्य हंसराज विश्वकर्मा, अनु सचिव एवं समिति अधिकारी विनोद कुमार यादव, पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह, सीडीओ ओजस्वी राज, अपर निजी सचिव अमितेश पाल, प्रतिवेदन अधिकारी राम प्रकाश पाल, समीक्षा अधिकारी सौरभ दीक्षित, सीआरओ त्रिभुवन, सिटी मजिस्ट्रेट आसाराम शर्मा सहित सभी विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

रातों-रात कब्जे का खेल! डी एम के आदेश की धज्जियां उड़ाकर ग्रामसभा की जमीन पर मिट्टी डाल दी—लेखपाल पर मिलीभगत के आरोप!

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। प्रशासनिक रोक के बावजूद सार्वजनिक ज़मीन पर अवैध कब्जे का प्रयास, रातों-रात मिट्टी डालकर शुरू हुई तैयारीमहराजगंज सदर क्षेत्र में सार्वजनिक भूमि पर अवैध कब्जे का मामला एक बार फिर गर्मा गया है। ग्राम पंचायत सिरसिया व बैरिया की सीमा पर स्थित श्रीराम चौराहा के पास गाटा संख्या 706/98 (क, ख), जो राजस्व अभिलेखों में सामुदायिक भूमि व सार्वजनिक मार्ग के रूप में दर्ज है, पर फिर से कब्जे की नीयत से तेजी से गतिविधियां बढ़ी हैं। जानकारी के अनुसार, जिला प्रशासन द्वारा पूर्व में इस भूमि पर किसी भी प्रकार के निर्माण को सख्त रूप से रोक दिया गया था। तहसीलदार सदर ने मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य पर तत्काल प्रतिबंध लगाया था। इसके बावजूद, प्रशासनिक आदेश को दरकिनार करते हुए 4 दिसंबर की रात में वालिकरन पुत्र निर्मल द्वारा जेसीबी और ट्रैक्टर लगवाकर जमीन पर मिट्टी डलवा दी गई, जिससे अवैध निर्माण की तैयारी पूरी की जा सके। ग्रामीणों का कहना है कि यह हरकत न केवल जिलाधिकारी महराजगंज के आदेश की खुली अवहेलना है, बल्कि सार्वजनिक रास्ते पर कब्जा करने का गंभीर प्रयास भी है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि लेखपाल की शह पर यह सब संभव हुआ, जो पूरे प्रकरण में मिली-भगत करता नजर आ रहा है। शिकायतकर्ता गौरी देवी, पत्नी जितन, ने जिलाधिकारी महराजगंज को प्रार्थना पत्र देकर तत्काल कठोर कार्यवाही की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई पूरी तरह गैरकानूनी है और सार्वजनिक हित के खिलाफ है।ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि अवैध निर्माण में शामिल व्यक्तियों के विरुद्ध सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए और ग्रामसभा की भूमि को कब्जाधारियों से तत्काल मुक्त कराया जाए। स्थानीय लोगों का साफ कहना है कि यदि ऐसे मामलों पर कठोरता नहीं दिखाई गई, तो क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की स्थिति और भी खराब होगी तथा सार्वजनिक मार्ग बाधित होकर आमजन को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।

श्रीमद्भागवत कथा श्रवण मात्र से मिलता है मोक्ष : सीमा त्रिपाठी

बलिया(राष्ट्र की परम्परा) हिंदू धर्म के प्रमुख ग्रंथों में शामिल श्रीमद्भागवत कथा को मोक्षदायिनी माना गया है। शिक्षक एवं साहित्यकार सीमा त्रिपाठी ने बताया कि श्रीमद्भागवत पुराण का मूल आधार भक्ति योग है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण को देवाधिदेव एवं परब्रह्म के रूप में वर्णित किया गया है। श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं का सगुण-निर्वाचन इसी कथा में मिलता है। उन्होंने कहा कि कलयुग में श्रीमद्भागवत कथा एक कल्पवृक्ष के समान है। इसका श्रवण मन का शुद्धिकरण करता है, जन्म–जन्मांतर के पापों का नाश करता है तथा भक्ति, शांति और सद्बुद्धि प्रदान करता है। कथा सुनने से व्यक्ति का लौकिक एवं आध्यात्मिक दोनों प्रकार का विकास होता है।सीमा त्रिपाठी ने बताया कि राजा परीक्षित को भागवत कथा के श्रवण से ही मोक्ष प्राप्त हुआ था। आज भी इसके अनेक प्रत्यक्ष उदाहरण सामने आते हैं, जिससे सिद्ध होता है कि कथा का प्रभाव कलयुग में भी उतना ही प्रबल है। उन्होंने कहा कि कथा का लाभ प्राप्त करने में श्रोता और वक्ता दोनों की मन:स्थिति का विशेष महत्व है। यदि दोनों निष्काम और शुद्ध भाव से कथा में उपस्थित हों तो पूर्ण फल मिलता है। उन्होंने कहा कि मानव जीवन अत्यंत मूल्यवान है, किंतु सांसारिक मोह-माया में फंसकर मनुष्य अक्सर अपने जीवन का उद्देश्य भूल जाता है। ऐसे समय में सत्संग और कथा मनुष्य को सही दिशा प्रदान करते हैं। श्रीमद्भागवत कथा जीवन को अर्थपूर्ण बनाती है तथा व्यक्ति को ईश्वर की ओर अग्रसर करती है। सीमा त्रिपाठी के अनुसार कलयुग में श्रीमद्भागवत कथा का स्मरण मात्र करोड़ों पुण्यों का फल प्रदान करता है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि प्रत्येक व्यक्ति को समय निकालकर अवश्य ही कथा श्रवण करना चाहिए, क्योंकि इसके सुनने मात्र से प्राणी-मात्र का कल्याण संभव है।

साइबर टीम कोपागंज द्वारा शिकायतकर्ता का मोबाईल कराया वापस

मऊ ( राष्ट्र की परम्परा ) पुलिस अधीक्षक इलमारन व अपर पुलिस अधीक्षक अनूप कुमार के निर्देशन में साइबर फ्रॉड की रोकथाम व जागरूकता तथा गुम मोबाईल बरामदगी के तहत चलाए जा रहे अभियान के क्रम में क्षेत्राधिकारी घोसी जितेंद्र सिंह व प्रभारी निरीक्षक रविन्द्रनाथ राय के कुशल नेतृत्व में थाने पर नियुक्त साईबर टीम द्वारा शिकायतकर्ता नौशाद अहमद पुत्र मुस्तकीन निवासी हकीमपुरा थाना कोपागंज जनपद मऊ की दिनांक 15.07.2024 को VIVO MOBILE जिसकी कीमत करीब 12,000 रूपये की है के गुम होने के सम्बन्ध में शिकायत दर्ज करायी गयी थी जिसके तहत थाना कोपागंज में नियुक्त साईबर टीम उपनिरीक्षक उमाशंकर सिंह, एएसआई अभिजीत पटेल, कांस्टेबल जीतू कन्नौजिया, अंकित चौरसिया के द्वारा कार्यवाही करके शिकायतकर्ता की उपरोक्त मोबाईल बरामद कर आज शुक्रवार को वापस करायी गयी।

दुकान में पति को दूसरी महिला संग देख भड़की पत्नी, बीच बाजार मचा हंगामा–पति हुआ फरार

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। निचलौल, गुरुवार शाम निचलौल कस्बे की थाना रोड उस समय सनसनी से भर उठी जब एक महिला ने अपने पति को दुकान के अंदर दूसरी महिला के साथ देखा और हंगामा खड़ा कर दिया। लोगों से भरी सड़क पर अचानक मचे इस बवाल से पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कुछ ही मिनटों में वहां भीड़ उमड़ पड़ी और हर कोई इस मामले को लेकर चर्चा करने लगा। सूत्रों के अनुसार, निचलौल क्षेत्र के एक गांव का एक युवक शाम करीब चार बजे कस्बे के एक जलपान केंद्र पर एक महिला के साथ बैठकर नाश्ता कर रहा था। तभी अचानक उसकी पत्नी वहां पहुंच गई। पति को दूसरी महिला संग देखकर वह आपा खो बैठी और दुकान के बाहर जोरदार हंगामा शुरू कर दिया। पत्नी के तीखे तेवर देख कर युवक भीड़ का फायदा उठाकर धीरे-धीरे वहां से खिसक गया और मौके से गायब हो गया।उधर गुस्साई पत्नी ने पति के साथ बैठी महिला को पकड़ लिया और सीधे थाने ले गई। इस दौरान उस स्थान पर भारी भीड़ जुट गई। दुकानदारों से लेकर राहगीरों तक सभी तमाशा देखने के लिए रुक गए और पूरे बाजार में इस घटना की चर्चा गर्म हो गई। मामले पर निचलौल थानाध्यक्ष अखिलेश कुमार वर्मा ने बताया कि इस संबंध में अभी तक किसी भी पक्ष की ओर से कोई तहरीर नहीं दी गई है। पुलिस को इस घटना की आधिकारिक सूचना भी प्राप्त नहीं हुई है, लेकिन पूरे प्रकरण की जानकारी जुटाई जा रही है।बाजार में हुई यह घटना लोगों के बीच दिनभर चर्चा का केंद्र बनी रही।

सिकंदरपुर में बोलेरो–कंबाइन की आमने-सामने टक्कर, चालक की मौत तीन गंभीर रूप से घायल

सिकंदरपुर /बलिया(राष्ट्र की परम्परा)

आदर्श नगर पंचायत में गुरुवार की देर शाम एचपी गैस एजेंसी के पास लगे पुलिया पर हुए भीषण सड़क हादसे ने पूरे क्षेत्र को दहला दिया। बोलेरो और कंबाइन मशीन की आमने-सामने जोरदार टक्कर में बोलेरो चालक की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। टक्कर इतनी भयावह थी कि बोलेरो का अगला हिस्सा पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया और घटना स्थल पर अफरा-तफरी मच गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बोलेरो में चार लोग सवार होकर सिकंदरपुर से हनुमानगंज की ओर जा रहे थे। बोलेरो चला रहे कृष्ण कुमार (37 वर्ष) निवासी हनुमानगंज, नवानगर में अपने चाची के तेरहवीं में शामिल होने आए थे। कार्यक्रम के बाद वह तीन अन्य साथियों के साथ वापस लौट रहे थे। जैसे ही वाहन एचपी गैस एजेंसी के समीप पुलिया के पास पहुंचा, सामने से आ रही कंबाइन मशीन से जोरदार भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी तेज थी कि वाहन का अगला हिस्सा चकनाचूर हो गया और चालक कृष्ण कुमार की मौके पर ही मौत हो गई। मृतक विकास भवन बलिया में स्वीपर पद पर कार्यरत थे। उनके निधन की सूचना मिलते ही हनुमानगंज और नवानगर क्षेत्र में कोहराम मच गया। स्थानीय लोग दुर्घटना स्थल पर दौड़ पड़े और लोगों ने मिलकर घायलों को बाहर निकाला। एंबुलेंस व निजी वाहनों से सभी को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सिकंदरपुर पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने चालक को मृत घोषित कर दिया। अन्य घायलों में 32 वर्षिय अजय निवासी रेवती, 32वर्षिय शशि कुमार निवासी बेल्थरा रोड और 55 वर्षिय बब्बन निवासी रतसर की हालत गंभीर बताई गई। सभी को प्राथमिक उपचार के बाद सदर अस्पताल बलिया रेफर कर दिया गया। सूचना मिलने पर सिकंदरपुर पुलिस मौके पर पहुंची, वाहनों को सड़क से हटवाकर यातायात बहाल कराया तथा मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया। हादसे की जानकारी घर पहुँचते ही मृतक के परिजनों में चीख-पुकार मच गई और पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। स्थानीय लोगों ने कहा कि सिकंदरपुर–नवानगर मार्ग पर आए दिन भारी वाहनों की तेज रफ्तार और लापरवाही के कारण हादसे बढ़ रहे हैं। लोगों ने प्रशासन से इस मार्ग पर निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने की मांग की है।

विधानसभा शीतकालीन सत्र को लेकर रांची के कई इलाकों में निषेधाज्ञा

रांची(राष्ट्र की परम्परा)  विधानसभा भवन में षष्ठम झारखंड विधानसभा के चतुर्थ (शीतकालीन) सत्र 5 दिसंबर से 11 दिसंबर, 2025 तक आहूत है। रांची उपायुक्त एवं अपर जिला दंडाधिकारी विधि व्यवस्था के संयुक्तादेश में निहित निर्देश के आलोक में विधानसभा परिसर के 750 मीटर के दायरे में निषेधाज्ञा लगाया गया है। यह आज 5 दिसंबर के प्रातः 8 बजे से 11 दिसंबर, 2025 के रात 10 तक के लिए लागू रहेगा।निषेधाज्ञा लागू रहने के दौरान किसी तरह के जुलूस, रैली, प्रदर्शन, घेराव आदि आयोजित नहीं किये जा सकेंगे। इसके मद्देनजर सुरक्षा की दृष्टिकोण से अनुमंडल दंडाधिकारी, सदर, रांची ने बीएनएसएस की धारा-163 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए निषेधाज्ञा जारी किया है। इसमें झारखंड उच्च न्यायालय शामिल नहीं है।इसपर रहेगा प्रतिबंधउक्त क्षेत्र में पांच या पांच से अधिक व्यक्तियों का एक जगह जमा होना (सरकारी कार्य में लगे पदाधिकारियों/कर्मचारियों और सरकारी कार्यक्रम एवं शवयात्रा को छोड़कर)।किसी प्रकार का अस्त्र-शस्त्र, जैसे बंदूक, राईफल, रिवाल्वर, बम, बारूद आदि लेकर चलना (सरकारी कार्य में लगे पदाधिकारियों/कर्मचारियों को छोड़कर)।किसी प्रकार का अस्त्र-शस्त्र, जैसे बंदूक, राईफल, रिवाल्वर, बम, बारूद आदि लेकर चलना (सरकारी कार्य में लगे पदाधिकारियों/कर्मचारियों को छोड़कर)।किसी प्रकार का हरवे हथियार जैसे-लाठी-डंडा, तीर-धनुष, गड़ासा भाला आदि लेकर चलना (सरकारी कार्य में लगे पदाधिकारियों / कर्मचारियों को छोडकर)।किसी प्रकार का ध्वनि विस्तारक यंत्र का व्यवहार करना (सरकारी कार्य में लगे पदाधिकारियों / कर्मचारियों को छोडकर)।

किसान सभा द्वारा ग्रामीणों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़ने की तीखी निंदा

पेसा और वनाधिकार कानून का खुला उल्लंघन, भाजपा सरकार की नीतियां जिम्मेदार-किसान सभा

कोरबा/छत्तीसगढ़(राष्ट्र की परम्परा)
आदिवासीबहुल सरगुजा जिले में एसईसीएल की अमेरा कोयला खदान विस्तार परियोजना का विरोध कर रहे परसोड़ी कलाँ गांव के आदिवासी ग्रामीणों पर कल हुए लाठीचार्ज और बर्बर पुलिसिया दमन की अखिल भारतीय किसान सभा से संबद्ध छत्तीसगढ़ किसान सभा ने कड़ी निंदा की है। किसान सभा ने एसईसीएल की खदान विस्तार परियोजना को संविधान की पाँचवीं अनुसूची के प्रावधानों, पेसा अधिनियम और आदिवासी वनाधिकार कानून का खुला उल्लंघन बताया है तथा एसईसीएल के प्रशासनिक अधिकारियों और दोषी पुलिसकर्मियों एवं पर कार्यवाही की माँग की है।

छत्तीसगढ़ किसान सभा के प्रदेश संयुक्त सचिव प्रशांत झा ने कहा है कि पेसा कानून के अनुसार अनुसूचित क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण और खनन से पूर्व ग्रामसभा की लिखित सहमति अनिवार्य है और वनाधिकार कानून के तहत किसी भी परियोजना को लागू करने से पहले वन भूमि पर आदिवासी अधिकारों की स्थापना की जानी है। इन दोनों कानूनों को देश के किसी भी अन्य कानूनों पर वरीयता मिली हुई है। इस परियोजना में इन दोनों कानूनों का क्रियान्वयन नहीं हुआ है, इसके बावजूद एसईसीएल कोल बेयरिंग एक्ट के नाम पर गैर-कानूनी ढंग से भूमि अधिग्रहण का दावा कर रहा है। किसान सभा ने आरोप लगाया है कि ग्रामीणों की भूमि पर कब्जा करने के लिए पुलिस बल ने पहले झोपड़ियां और उनके शांतिपूर्ण धरना स्थल को तोड़ा और फिर किसानों के खलिहान में पड़ी फसल को आग लगाने की कोशिश की, जिससे तनाव पैदा हुआ और टकराव की नौबत आई है। किसान सभा ने आरोप लगाया है कि इस हिंसक झड़प के लिए भाजपा राज्य सरकार पूरी तरह से जिम्मेदार है, जो आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों की अनदेखी कर कॉर्पोरेट हितों की रक्षा में लगी है।

किसान सभा के जिला सचिव दीपक साहू ने कहा है कि खनन परियोजना के लिए ग्रामीणों के दमन का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले हसदेव अरण्य के परसा कोल ब्लॉक क्षेत्र में और रायगढ़ क्षेत्र में भी फर्जी ग्रामसभा प्रस्तावों के आधार पर पुलिस बल की मौजूदगी में पेड़ों की कटाई और अवैध खनन गतिविधियाँ जारी हैं। कोरबा जिले में कोल इंडिया के सबसे बड़े मेगा प्रोजेक्ट गेवरा में भी खदान विस्तार के खिलाफ विरोध कर रहे भू-विस्थापितों को पर बर्बर लाठीचार्ज किया गया था। जिला प्रशासन की अगुआई में बिना एनओसी के ही पेड़ों की कटाई जारी है। किसान सभा नेता ने आरोप लगाया है कि खदान विस्तार के लिए पूरे प्रदेश में भाजपा सरकार दमन का सहारा ले रही है। लेकिन इससे विस्थापन के खिलाफ आंदोलन और तेज ही होगा।
किसान सभा नेताओं ने कहा कि यह दुर्भाग्य की बात है कि एक तरफ़ प्रदेश के उप मुख्यमंत्री पेसा क़ानून का प्रभावी तरीक़े से पालन करने की बात कर रहे हैं, वही दूसरी ओर एसईसीएल और जिला प्रशासन इसका खुला उल्लंघन कर रहा है। खनन के लिए आदिवासियों की बेदखली की मुहिम से भाजपा सरकार का दोगला चरित्र बेनकाब हो गया है। उन्होंने भाजपा राज्य सरकार से अपनी कॉर्पोरेटपरस्त खनन नीतियों को पलटने, पेसा और वनाधिकार कानूनों का उल्लंघन कर चलाई जा रही सभी खनन परियोजनाओं को निलंबित करने और अमेरा खदान विस्तार परियोजना पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है।
उन्होंने बताया कि किसान सभा और सहयोगी संगठनों का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल शीघ्र ही अमेरा क्षेत्र का दौरा करेगा और नाजायज भूमि अधिग्रहण और विस्थापन के खिलाफ प्रदेशव्यापी आंदोलन विकसित करने की रणनीति बनाएगा।

नेल्सन मंडेला: साहस, समता और शांति के वैश्विक पुरोधा

पुनीत मिश्र


नेल्सन मंडेला केवल दक्षिण अफ्रीका के प्रथम अश्वेत राष्ट्रपति नहीं थे, वे आधुनिक मानवता के उन उज्ज्वल नक्षत्रों में से हैं जिन्होंने अपने जीवन से यह सिद्ध किया कि अन्याय के विरुद्ध संघर्ष का सर्वोत्तम मार्ग हिंसा नहीं, बल्कि करुणा, धैर्य और अटूट संकल्प है। मंडेला का समूचा जीवन रंगभेद जैसे अमानवीय तंत्र के खिलाफ सत्य, नैतिकता और समान अधिकारों के लिए लड़ी गई ऐतिहासिक लड़ाई का विराट प्रतीक है।
मंडेला का जन्म 18 जुलाई 1918 को म्वेजो गांव में हुआ था। प्रारंभिक शिक्षा से ही उनमें न्याय की समझ और सामाजिक चेतना विकसित होने लगी। युवावस्था में उन्होंने अफ्रीकन नेशनल कांग्रेस (ANC) के साथ जुड़कर दक्षिण अफ्रीका के अश्वेतों पर चल रहे दमन के खिलाफ संघर्ष शुरू किया। रंगभेद के विरुद्ध आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाने के कारण 1964 में मंडेला को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई और उन्होंने अपने जीवन के 27 वर्ष कठोर कारागारों में बिताए।
लेकिन जेल की लंबी अवधि ने उन्हें क्षीण नहीं किया, बल्कि और अधिक सशक्त बनाया। रॉबेन द्वीप की जेल में भी उन्होंने अन्य कैदियों में आशा का संचार किया और देश की जनता के लिए प्रेरणा बने रहे। उनका यह अटल विश्वास—कि स्वतंत्रता केवल अपनी नहीं, बल्कि दूसरों की स्वतंत्रता के प्रति सम्मान में निहित हैl उन्हें एक साधारण नेता से महामानव की श्रेणी में ले जाता है।
1990 में जेल से रिहा होने के बाद मंडेला वैश्विक मंच पर शांति और मेल-मिलाप के प्रतीक बनकर उभरे। 1994 में वे दक्षिण अफ्रीका के पहले लोकतांत्रिक राष्ट्रपति चुने गए। उन्होंने अपने कार्यकाल में ‘ट्रुथ एंड रिकंसिलिएशन कमीशन’ की स्थापना कर देश में सदियों के घावों को भरने का अद्भुत प्रयास किया, जिससे दुनिया ने प्रतिशोध नहीं, क्षमा और सहअस्तित्व की शक्ति को पहचाना।
यह भी अत्यंत महत्वपूर्ण है कि रंगभेद विरोधी आंदोलन में उनकी महान भूमिका और मानवाधिकारों के संरक्षण में उनके अविस्मरणीय योगदान के लिए वर्ष 1990 में भारत ने उन्हें अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया। पाकिस्तानी नागरिक खान अब्दुल गफ्फार खान के अलावा, वह यह सम्मान पाने वाले एकमात्र गैर-भारतीय हैं। यह गौरव दर्शाता है कि मंडेला का व्यक्तित्व केवल दक्षिण अफ्रीका तक सीमित नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए प्रेरणा प्रकाश था।
आज दुनिया जब नस्ल, धर्म, भाषा और विचारों के नाम पर बंटी नजर आती है, मंडेला की विरासत हमें याद दिलाती है कि नफरत की दीवारें केवल संवाद, समझ और करुणा से टूटती हैं। उनका सपना था कि एक ऐसा विश्व जहाँ किसी का मूल्य उसके रंग से नहीं, बल्कि उसके चरित्र से आंका जाए।
नेल्सन मंडेला का जीवन यह संदेश देता है कि असंभव केवल तब तक असंभव है, जब तक कोई उसे संभव करने का साहस न करे। उनका संघर्ष, उनका मानवीय दृष्टिकोण और उनकी दृढ़ता आज भी पूरे विश्व के लिए एक शाश्वत प्रेरणा है।

भारत में संगठित अपराध का खतरनाक नेटवर्क: पंजाब से अन्य राज्यों तक फैलती आपराधिक श्रृंखला

भारत एक लोकतांत्रिक और विविधताओं से भरा देश है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में संगठित अपराध की जड़ें कुछ राज्यों में गहराती जा रही हैं। विशेष रूप से पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में यह समस्या गंभीर रूप लेती जा रही है। यह केवल एक राज्य की समस्या नहीं रही, बल्कि यह एक आपराधिक तंत्र बन गया है जो अंतरराज्यीय स्तर पर फैल रहा है। यह नेटवर्क नशीले पदार्थों की तस्करी, हथियारों की अवैध खरीद-बिक्री, जबरन वसूली, मानव तस्करी और साइबर अपराध जैसे कई आपराधिक गतिविधियों से जुड़ा हुआ है।

आज स्थिति यह है कि कई युवा इस जाल में फंस रहे हैं। बेरोजगारी, नशे की लत और जल्दी अमीर बनने की चाह उन्हें अपराध की दुनिया की ओर धकेल रही है। अपराधी गिरोह सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर युवाओं को फांसते हैं और धीरे-धीरे उन्हें संगठित अपराध का हिस्सा बना लेते हैं।

पंजाब केंद्र में क्यों है?

पंजाब लंबे समय से सीमा राज्य होने के कारण सुरक्षा चुनौतियों का सामना करता रहा है। पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आने वाली नशीली दवाओं की तस्करी के रूट्स पंजाब से होकर गुजरते हैं। यही कारण है कि कई अंतरराष्ट्रीय ड्रग माफिया और आतंकी संगठन पंजाब के रास्ते भारत में अपना नेटवर्क खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं।

इसके अलावा गैंगवार, सुपारी किलिंग और अवैध हथियारों की तस्करी भी पंजाब में तेजी से बढ़ी है। कई मामलों में पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन और विदेशों में बैठे गैंगस्टर मिलकर भारत में अस्थिरता फैलाने की कोशिश करते हैं। ये अपराधी गिरोह युवाओं को पैसे और ताकत का सपना दिखाकर उन्हें अपना मोहरा बना लेते हैं।

अन्य राज्यों पर भी असर

पंजाब के साथ-साथ हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे राज्य भी इस संगठित अपराध नेटवर्क के प्रभाव में आ रहे हैं। उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में हथियारों की तस्करी और नकली नोटों के रैकेट सामने आ चुके हैं। वही हरियाणा में गैंगस्टर गतिविधियां चिंता का विषय बनी हुई हैं।

दिल्ली-NCR में जबरन वसूली, भूमि कब्जा और चिटफंड घोटालों के पीछे भी ऐसे ही संगठित गिरोहों का हाथ पाया गया है। अपराधियों ने व्यवसायियों, बिल्डरों और स्थानीय नेताओं को भी अपने शिकंजे में लेना शुरू कर दिया है, जिससे सामान्य नागरिकों की सुरक्षा पर बड़ा खतरा उत्पन्न हो गया है।

डिजिटल अपराध का बढ़ता दायरा

जहां एक ओर पारंपरिक अपराध बढ़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर संगठित गिरोहों ने तकनीक का भी गलत उपयोग करना शुरू कर दिया है। साइबर अपराध, ऑनलाइन ठगी, फर्जी कॉल सेंटर, फेक वेबसाइट और डिजिटल वॉलेट फ्रॉड जैसी घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। अंतरराष्ट्रीय गिरोह अब इंटरनेट के माध्यम से आम जनता को निशाना बना रहे हैं।

सोशल मीडिया पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर लोगों को ब्लैकमेल करना, छात्रों और बुजुर्गों को ठगना और फर्जी लोन ऐप का जाल फैलाना अब आम बात हो चुकी है। इससे न केवल आर्थिक नुकसान हो रहा है, बल्कि मानसिक तनाव और आत्महत्याओं के मामले भी सामने आ रहे हैं।

सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की भूमिका

सरकार इस खतरे को गंभीरता से ले रही है। एनआईए, सीबीआई, एटीएस और राज्य पुलिस मिलकर बड़े अपराध नेटवर्क को तोड़ने के लिए लगातार कार्रवाई कर रहे हैं। कई बड़े गैंगस्टरों को गिरफ्तार किया जा चुका है और उनकी संपत्ति जब्त की गई है।

इसके साथ ही सीमा सुरक्षा बल (BSF) और तटरक्षक बल के द्वारा सीमाओं पर निगरानी बढ़ाई गई है। ड्रोन गतिविधियों पर भी खास नजर रखी जा रही है क्योंकि अब नशे और हथियार ड्रोन के माध्यम से भी पहुंचाए जा रहे हैं।

हालांकि, केवल पुलिस कार्रवाई से यह समस्या खत्म नहीं होगी। इसके लिए समाज, शिक्षा व्यवस्था और परिवार को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।

समाज और युवाओं की जिम्मेदारी

युवाओं को सही दिशा में ले जाना आज की सबसे बड़ी जरूरत है। रोजगार के अवसर, स्किल डेवलपमेंट, खेल और शिक्षा के बेहतर संसाधन ही उन्हें अपराध की ओर जाने से रोक सकते हैं। माता-पिता और शिक्षकों को बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखने और उन्हें सही मार्ग दिखाने की आवश्यकता है।

साथ ही, नशा मुक्ति अभियान व जन जागरूकता कार्यक्रमों को भी व्यापक स्तर पर चलाया जाना चाहिए। मीडिया और सामाजिक संगठनों को भी इस मुद्दे पर खुलकर बात करनी चाहिए ताकि लोगों में डर के बजाय जागरूकता और सतर्कता बढ़े।

भारत में संगठित अपराध नेटवर्क एक गंभीर और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा विषय बन चुका है। यदि इसे अभी नियंत्रित नहीं किया गया, तो आने वाले समय में इसका प्रभाव और गहरा हो सकता है। सरकार, प्रशासन और जनता – तीनों के संयुक्त प्रयास ही इस समस्या का स्थायी समाधान ला सकते हैं।

अब समय आ गया है कि समाज सिर्फ अपराध की खबर न पढ़े, बल्कि उसके खिलाफ आवाज भी उठाए। जब प्रत्येक नागरिक जागरूक और सतर्क होगा, तभी एक सुरक्षित और शांतिपूर्ण भारत की कल्पना साकार हो सकेगी।

बढ़ती उपेक्षा का कारण बदलता परिवार: आधुनिक समाज की सबसे बड़ी सामाजिक चुनौती

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। बदलते सामाजिक ढाँचे और तेज होती जीवनशैली के बीच भारतीय परिवारों में उपेक्षा का भाव तेजी से बढ़ रहा है। संयुक्त परिवारों का टूटना, एकल परिवारों का विस्तार, तकनीक पर बढ़ती निर्भरता और पीढ़ियों के बीच संवाद की कमी ने एक गंभीर सामाजिक समस्या को जन्म दिया है—“बढ़ती उपेक्षा का कारण बदलता परिवार।”

संयुक्त परिवार से एकल परिवार की ओर बदलाव

एक समय में भारतीय समाज की पहचान रहे संयुक्त परिवार अब तेजी से सिमटते जा रहे हैं। युवा पीढ़ी नौकरी, शिक्षा और बेहतर अवसरों की तलाश में बड़े शहरों की ओर जा रही है।
परिणामस्वरूप बुज़ुर्ग माता-पिता, रिश्तेदार और परिवार का व्यापक सामाजिक ताना-बाना धीरे-धीरे कमजोर पड़ रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि परिवार का यह बदलाव न सिर्फ संबंधों में दूरी बढ़ा रहा है, बल्कि भावनात्मक सहारे की कमी भी पैदा कर रहा है।

आधुनिक जीवनशैली और तकनीक का प्रभाव

तेजी से भागती जिंदगी और डिजिटल दुनिया ने परिवारों के बीच संवाद को सीमित कर दिया है।

• बच्चे मोबाइल, गेम और सोशल मीडिया में अधिक समय बिताते हैं

• कार्यालयी व्यस्तता के कारण माता-पिता के पास परिवार के लिए समय कम होता जा रहा है

• घर में साथ रहकर भी बातचीत का समय घट रहा है

विशेषज्ञ इसे “इमोशनल डिस्कनेक्ट” की स्थिति बताते हैं, जो उपेक्षा की भावना को और गहरा करती है।

पीढ़ियों के बीच बढ़ती दूरियाँ

जहाँ पहले बुज़ुर्गों का अनुभव और मार्गदर्शन परिवार की धुरी माना जाता था, वहीं आज कई युवा पारंपरिक सोच को आधुनिक जीवन का विरोधी मानने लगे हैं।
इस सोच ने संवाद और सम्मान की परंपरा को कमजोर किया है, जिससे दो पीढ़ियों के बीच मानसिक दूरी बढ़ रही है।

सामाजिक रिश्तों पर भी असर

केवल परिवार ही नहीं, समाज के स्तर पर भी इसका प्रभाव स्पष्ट दिख रहा है।

• पड़ोसियों के बीच दूरी

• रिश्तों का औपचारिक होना

• वृद्धाश्रमों की बढ़ती संख्या

• अकेलेपन और मानसिक तनाव की बढ़ती शिकायतें

ये सब संकेत हैं कि बदलता परिवार ढांचा समाज के सामुदायिक ताने-बाने को भी प्रभावित कर रहा है।

समाधान: कैसे कम हो उपेक्षा और दूरी

  1. पीढ़ियों के बीच संवाद बढ़ाना
    घर में नियमित बातचीत और साझा समय परिवार को मजबूत बनाता है।
  2. सामुदायिक अभियान
    स्कूल, कॉलेज और समाज स्तर पर परिवार के महत्व पर आधारित कार्यक्रम जरूरी हैं।
  3. सरकारी नीतियों को मजबूत करना
    बुज़ुर्गों के लिए सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण योजनाओं को और प्रभावी बनाने की जरूरत है।
  4. फैमिली टाइम की आदत
    सप्ताह में एक दिन परिवार के लिए विशेष रूप से रखा जाए, ताकि संबंध मजबूत बने रहें।

रिश्तों को बचाने की जरूरत

आधुनिकता के इस दौर में परिवार की परिभाषा बदल रही है, लेकिन उसकी भावनात्मक ज़रूरत वही है।
परिवार केवल एक संरचना नहीं, बल्कि संवेदनाओं, संस्कारों और सामाजिक मूल्यों का केंद्र है।
अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो उपेक्षा और दूरी का यह संकट समाज को और गहरी चुनौतियों की ओर ले जा सकता है।