Thursday, June 25, 2026
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रैमकी कंपनी के खिलाफ सफाईकर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल

विधायक रागिनी सिंह ने दिया न्याय का भरोसा


धनबाद (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) नगर निगम की सफाई एजेंसी रैमकी कंपनी के खिलाफ सफाईकर्मियों का आंदोलन दूसरे दिन भी जारी रहा। जनता श्रमिक संघ के नेतृत्व में करीब 550 सफाईकर्मी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर डटे हुए हैं। हड़ताल के कारण शहर की सफाई व्यवस्था प्रभावित हो रही है, हालांकि नगर निगम वैकल्पिक इंतजाम का दावा कर रहा है।

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झरिया विधायक सह जनता श्रमिक संघ की महामंत्री रागिनी सिंह बस स्टैंड परिसर स्थित धरना स्थल पर पहुंचीं और आंदोलनरत सफाईकर्मियों से सीधे संवाद किया। उन्होंने मजदूरों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और हर हाल में न्याय दिलाने का आश्वासन दिया।
धरना स्थल पर मौजूद सफाईकर्मियों ने रैमकी कंपनी पर कई गंभीर आरोप लगाए। मजदूरों का कहना है कि कंपनी पुराने कर्मचारियों को हटाकर नए कर्मियों की बहाली कर रही है, वेतन भुगतान में दोहरी व्यवस्था लागू की गई है और श्रमिक कानूनों का खुला उल्लंघन हो रहा है। इसके अलावा सड़क हादसे में मृत एक सफाईकर्मी के परिजनों को अब तक मुआवजा नहीं मिलने और मृतक की पत्नी को नौकरी नहीं दिए जाने को लेकर भी नाराजगी जताई गई।

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विधायक रागिनी सिंह ने स्पष्ट कहा कि मजदूरों के साथ किसी भी प्रकार की मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम प्रशासन और रैमकी कंपनी की मिलीभगत से मजदूरों के अधिकारों का हनन हो रहा है। रागिनी सिंह ने स्क्रैप चोरी और निगम की बसों को नियमों के विरुद्ध दूसरे राज्यों में लीज पर देने जैसे मामलों को गंभीर बताते हुए कहा कि इन सभी मुद्दों को वह सदन में प्रमुखता से उठाएंगी।

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धरना स्थल पर जनता श्रमिक संघ के केंद्रीय अध्यक्ष संतोष सिंह, शैलेंद्र सिंह उर्फ छोटू सिंह, संजय यादव, सेलो पासवान, संजय झा सहित बड़ी संख्या में मजदूर मौजूद रहे।
वहीं, नगर आयुक्त रवि राज शर्मा ने बताया कि हड़ताल के बावजूद नगर निगम अपने संसाधनों से शहर में सफाई कार्य करा रहा है।

दहेज के लिए नवविवाहिता की हत्या

परिजनों ने लगाया गला दबाकर मारने का आरोप

मदनपुर/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)
थाना मदानपुर क्षेत्र अंतर्गत सरिया खड़ेसर गांव में दहेज की मांग को लेकर एक नवविवाहिता की हत्या का सनसनीखेज मामला सामने आया है। मृतका की पहचान 27 वर्षीय सविता के रूप में हुई है, जिनकी शादी 6 नवंबर 2025 को हुई थी।
मृतका के मायके वालों के अनुसार सविता का विवाह सरया खड़ेसर निवासी नंद लाल यादव के साथ हुआ था। परिजनों आरोप है कि विवाह के कुछ समय बाद से ही ससुराल पक्ष द्वारा दो लाख रुपये दहेज की मांग को लेकर सविता को प्रताड़ित किया जाने लगा था।
आरोप है कि दहेज की मांग पूरी न होने पर सविता की गला दबाकर हत्या कर दी गई। घटना की सूचना मिलते ही मायके पक्ष में कोहराम मच गया। परिजन तत्काल मदनपुर थाना पहुंचे और लिखित तहरीर देकर सख्त कार्रवाई की मांग की।सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है, तथा पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर विधिक कार्रवाई की जाएगी।इस घटना के बाद गांव में तनाव का माहौल है। ग्रामीणों में दहेज उत्पीड़न को लेकर गहरा आक्रोश देखा जा रहा है। पुलिस ने पति नंदलाल यादव, जेठ दीनानाथ यादव, ननद संगीता के विरुद्ध एफ आई आर दर्ज कर भरोसा दिलाया है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।
नव विवाहिता बरहज थाना क्षेत्र अंतर्गत गौरा बरहज निवासी स्व
रामअवध यादव की पुत्री थी, घटना से मर्माहत माता ज्ञान्ति देवी का रो रो कर बुरा हाल हो गया है।

साइबर अपराधियों का नया तरीका, पुलिस ने किया खुलासा

मोतीहारी में सोशल मीडिया तस्वीर से साइबर अपराध, बच्चे की फर्जी किडनैपिंग दिखाकर 50 हजार की ठगी

मोतीहारी/बिहार (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)पूर्वी चंपारण के मोतीहारी शहर में सोशल मीडिया का दुरुपयोग कर साइबर ठगों ने एक परिवार को झकझोर देने वाली वारदात को अंजाम दिया। आजाद नगर मोहल्ला से लापता हुए 13 वर्षीय बच्चे की तस्वीर सोशल मीडिया पर डालना परिजनों के लिए भारी पड़ गया। अपराधियों ने तस्वीर का गलत इस्तेमाल कर बच्चे के अपहरण का फर्जी दृश्य तैयार किया और परिजनों से 50 हजार रुपये की फिरौती वसूल ली।

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जानकारी के अनुसार, ढाका थाना क्षेत्र के चंदनबाड़ा मूल निवासी और वर्तमान में आजाद नगर मानसपुरी में रह रहे परवेज आलम का भतीजा आरिफ आलम शनिवार शाम खेलने के लिए घर से निकला था, लेकिन वापस नहीं लौटा। परिजनों ने नगर थाना में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई और बच्चे की तलाश के लिए माइकिंग करवाई। साथ ही उसकी तस्वीर और संपर्क नंबर सोशल मीडिया पर साझा किए गए।
इसी दौरान साइबर अपराधियों ने सोशल मीडिया से बच्चे की फोटो लेकर एडिट की, जिसमें उसकी गर्दन पर चाकू दिखाया गया। इसके बाद व्हाट्सएप कॉल के जरिए परिजनों को धमकाया गया और एक लाख रुपये की मांग की गई। भयभीत परिजनों ने ठगों के बताए यूपीआई अकाउंट में 50 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए।

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अगले दिन एक अन्य व्यक्ति ने फोन कर बताया कि बच्चा सुरक्षित है और मुजफ्फरपुर में है। सूचना मिलते ही पुलिस ने कार्रवाई करते हुए बच्चे को सकुशल बरामद कर लिया। बताया गया कि रोते-बिलखते बच्चे को एक ठेला चालक ने अपने पास सुरक्षित रखा था।
सदर डीएसपी दिलीप कुमार ने प्रेस वार्ता में बताया कि यह मामला साइबर ठगी और डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड से जुड़ा है। जिस खाते में पैसे डलवाए गए, वह हैदराबाद का है। अकाउंट होल्डर की पहचान के लिए हैदराबाद पुलिस से संपर्क किया जा रहा है।

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पुलिस ने लोगों से अपील की है कि लापता मामलों में सोशल मीडिया का उपयोग सोच-समझकर करें और किसी भी धमकी या फिरौती कॉल की तुरंत सूचना पुलिस को दें।

अयोध्या धाम पहुंची 200 करोड़ की स्वर्ण व हीरा जड़ित राम प्रतिमा

  • कर्नाटक के भक्त की आस्था बनी ऐतिहासिक उदाहरण

अयोध्याधाम (राष्ट्र की परम्परा)। अयोध्या धाम में रामभक्ति की एक अद्वितीय मिसाल देखने को मिली है। कर्नाटक के एक भक्त द्वारा दान की गई लगभग 200 करोड़ रुपये मूल्य की स्वर्ण निर्मित और हीरों से जड़ी भव्य राम प्रतिमा विशेष सुरक्षा व्यवस्था के बीच अयोध्या पहुंच चुकी है। इस दान ने रामनगरी के धार्मिक और सांस्कृतिक इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है।

जानकारी के अनुसार यह प्रतिमा शुद्ध सोने से तैयार की गई है, जिसमें कीमती हीरों की आकर्षक जड़ाई की गई है। प्रतिमा की उत्कृष्ट कारीगरी और भव्य स्वरूप श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहा है। इसे तैयार करने में देश के अनुभवी शिल्पकारों ने लंबे समय तक मेहनत की है। अयोध्या पहुंचने पर मंदिर प्रशासन और संत समाज की उपस्थिति में विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर प्रतिमा का स्वागत किया गया।

राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े सूत्रों के अनुसार दानकर्ता ने यह प्रतिमा पूरी तरह नि:स्वार्थ भाव से राम के चरणों में अर्पित की है। उनका मानना है कि यह दान उनकी वर्षों की आस्था और भक्ति की भावना का प्रतीक है। संत समाज ने इस पहल को वर्तमान समय में भक्ति का प्रेरणादायी उदाहरण बताया।

इस प्रतिमा के अयोध्या आगमन से देशभर के रामभक्तों में उत्साह देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि यह दान धार्मिक महत्व के साथ-साथ अयोध्या को वैश्विक आस्था केंद्र के रूप में और सशक्त करेगा।

योगी सरकार का एक्शन, प्रमुख विभागों में नई तैनाती

उत्तर प्रदेश में IAS अधिकारियों का तबादला: प्रशासनिक फेरबदल से विकास कार्यों को मिलेगी नई रफ्तार

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)।उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य प्रशासन में व्यापक स्तर पर IAS अधिकारियों का तबादला करते हुए कई अहम पदों पर नई तैनातियां की हैं। इस प्रशासनिक फेरबदल को शासन की कार्यकुशलता बढ़ाने और विकास योजनाओं को गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। तबादलों की इस सूची में जिलों से लेकर राज्य स्तरीय विभागों तक के अधिकारी शामिल हैं।
जारी आदेश के अनुसार राजेश कुमार सिंह को देवरिया का नया मुख्य विकास अधिकारी (CDO) नियुक्त किया गया है। वहीं विनय कुमार सिंह को सुल्तानपुर जिले की विकास जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके साथ ही विधान जायसवाल को CDO कानपुर देहात बनाया गया है, जहां उनसे ग्रामीण विकास और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की उम्मीद की जा रही है।

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राज्य स्तर पर भी महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं। अंकुर कौशिक को मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO), उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण की जिम्मेदारी दी गई है। यह विभाग ग्रामीण सड़कों के निर्माण और रखरखाव में अहम भूमिका निभाता है, ऐसे में उनके नेतृत्व से सड़क परियोजनाओं में तेजी आने की संभावना है।
इसके अलावा श्याम बहादुर सिंह को विशेष सचिव, सिंचाई विभाग नियुक्त किया गया है, जो प्रदेश की जल प्रबंधन और सिंचाई योजनाओं को मजबूती देंगे। लक्ष्मी एन को मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष (VC) बनाया गया है, जहां धार्मिक पर्यटन और शहरी विकास पर विशेष ध्यान रहेगा। वहीं प्रत्यूष पांडे को विशेष सचिव, समन्वय विभाग उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिससे विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल की उम्मीद है।

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प्रशासनिक जानकारों के अनुसार, यह तबादला सूची शासन की प्राथमिकताओं को दर्शाती है, जिसमें विकास, समन्वय और पारदर्शिता पर विशेष जोर दिया गया है। आने वाले दिनों में इन अधिकारियों के कार्यभार संभालने के बाद जमीनी स्तर पर इसके प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।

युवा पर्वतारोही शिवम पटेल का भव्य स्वागत, थोरंग ला पास पर तिरंगा फहराकर बढ़ाया जिले का मान

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। बर्फीली चोटियों पर तिरंगा फहराकर देश और जिले का नाम रोशन करने वाले युवा पर्वतारोही शिवम पटेल का मंगलवार को विकासखंड मिठौरा परिसर में भव्य स्वागत किया गया। जैसे ही शिवम ब्लॉक प्रांगण में पहुंचे, लोगों ने फूलमालाओं से लादकर उनका जोरदार अभिनंदन किया। एपीओ अंकित श्रीवास्तव ने सबसे पहले माला पहनाकर शिवम का स्वागत किया और उनके साहस व संकल्प की सराहना की।
इस अवसर पर एपीओ अंकित श्रीवास्तव ने कहा कि जहां चाह होती है, वहां राह खुद-ब-खुद निकल आती है। शिवम पटेल ने यह साबित कर दिया है कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी मजबूत इच्छाशक्ति इंसान को असंभव को संभव बनाने की ताकत देती है।उन्होंने कहा कि शिवम जैसे युवा पूरे समाज के लिए प्रेरणा हैं।
गौरतलब है कि विकासखंड मिठौरा अंतर्गत ग्राम पंचायत करौता, जनपद महराजगंज के निवासी युवा पर्वतारोही शिवम पटेल ने दुनिया के सबसे कठिन ट्रेकिंग पासों में शुमार थोरंग ला पास पर भारत का तिरंगा फहराकर इतिहास रच दिया। 5416 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस दुर्गम दर्रे पर तिरंगा फहराकर शिवम ने न केवल महराजगंज, बल्कि पूरे देश का मान बढ़ाया। बर्फ से ढकी संकरी पगडंडियां, तेज बर्फीली हवाएं और माइनस 20 डिग्री तक गिरता तापमान—इन जानलेवा हालातों के बीच शिवम ने 9 दिनों में करीब 170 किलोमीटर की कठिन यात्रा पूरी की।
शिवम ने बताया कि इस यात्रा के दौरान उन्हें करीब 49 किलो का जरूरी सामान पीठ पर लादकर पैदल सफर करना पड़ा। एवरेस्ट बेस कैंप और काला पत्थर जैसे अत्यंत दुर्गम इलाकों से गुजरते हुए उन्होंने अपनी शारीरिक और मानसिक क्षमता की कड़ी परीक्षा दी। 19 दिसंबर को सुबह 11:30 बजे जब उन्होंने थोरंग ला पास पर तिरंगा फहराया और राष्ट्रगान गाया, तो वह क्षण देशभक्ति से ओत-प्रोत हो गया।
यात्रा के दौरान हालात इतने कठिन हो गए कि हाई कैंप पर मौजूद 16 लोगों में से 6 की तबीयत बिगड़ गई, जिन्हें एयरलिफ्ट कर नीचे भेजना पड़ा। बावजूद इसके शिवम का हौसला नहीं डिगा और वे ठंड, थकान व ऑक्सीजन की कमी से जूझते हुए लक्ष्य तक पहुंचे।
उल्लेखनीय है कि शिवम पटेल इससे पहले भी कम उम्र में साइकिलिंग और ट्रेकिंग के क्षेत्र में कई कीर्तिमान स्थापित कर चुके हैं। नेपाल के दुर्गम पर्वतीय मार्गों पर हासिल की गई यह उपलब्धि उनके साहस, अनुशासन और दृढ़ संकल्प का जीवंत प्रमाण है।
स्वागत समारोह में आलोक कुमार रंजन, उग्रसेन सिंह, मनोज कुमार यादव, जितेंद्र कुमार, ब्लॉक रोजगार सेवक संघ अध्यक्ष रामआशीष पटेल, बिरजू चौधरी, इम्तियाज अहमद, राजदेव प्रजापति, रामकेश्वर रैना, विजय शर्मा, कंप्यूटर ऑपरेटर संजय कुमार गुप्ता, संत कुमार वर्मा, चंद्रभान पांडेय, संपूर्णानंद पांडेय, विशाल गुप्ता, चंद्रशेखर यादव, धनराज, नाथू, रोजगार सेवक सीमा विश्वकर्मा, ईश्वर चंद्र वर्मा सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। सभी ने शिवम के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उनके साहस को सलाम किया।

आयुष्मान आरोग्य मंदिर का एनक्यूएएस के लिए वर्चुअल निरीक्षण, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता परखी गई

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महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। आयुष्मान आरोग्य मंदिर नदुआ में
राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (एनक्यूएएस) प्रमाणीकरण के लिए भारत सरकार द्वारा नामित विशेषज्ञ टीम ने वर्चुअल माध्यम से विस्तृत निरीक्षण किया। इस निरीक्षण का उद्देश्य केंद्र पर दी जा रही स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, उपलब्धता और मानकों के अनुरूप क्रियान्वयन का आकलन करना रहा। निरीक्षण टीम में डॉ. शेखरलाल प्रधान एवं डॉ. ईश्माइल शेख शामिल रहे।
वर्चुअल निरीक्षण के दौरान कुल सात पैकेजों पर बिंदुवार समीक्षा की गई। टीम ने प्रसव पूर्व एवं प्रसवोत्तर सेवाएं, नियमित टीकाकरण, टेली कंसल्टेशन, गैर संचारी रोगों (एनसीडी) की स्क्रीनिंग, योग एवं वेलनेस सेवाएं, दवाओं की उपलब्धता, रिकॉर्ड संधारण, साफ-सफाई, बायो मेडिकल वेस्ट प्रबंधन तथा मरीजों को दी जा रही सुविधाओं की गहन जांच की। इसके साथ ही जनहित में संचालित विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के क्रियान्वयन की भी समीक्षा की गई।
निरीक्षण के दौरान आयुष्मान आरोग्य मंदिर के अधीक्षक डॉ. मनोज कुशवाहा ने टीम को केंद्र की संरचना, उपलब्ध मानव संसाधन, सेवाओं की निरंतरता तथा लाभार्थियों तक सेवाओं की पहुंच की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि शासन की मंशा के अनुरूप ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को गुणवत्तापूर्ण, सुलभ और भरोसेमंद स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए केंद्र निरंतर प्रयासरत है।
इस अवसर पर एचईओ उमेश शाही, फार्मासिस्ट विजय प्रताप सिंह, बीपीएम नवनीत उपाध्याय, बीसीपीएम अवनीश पटेल, सीएचओ भरत दयाल, एएनएम किरण यादव, निखिल सहित नदुआ उपकेंद्र की सभी आशा कार्यकर्त्रियां एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्त्रियां उपस्थित रहीं। सभी ने अपने-अपने कार्यों और जिम्मेदारियों से संबंधित जानकारी टीम के समक्ष प्रस्तुत की।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि एनक्यूएएस प्रमाणीकरण से आयुष्मान आरोग्य मंदिर की सेवाओं की गुणवत्ता में और अधिक सुधार होगा। इससे ग्रामीण क्षेत्र के नागरिकों को बेहतर, सुलभ और मानक आधारित स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी। निरीक्षण को लेकर केंद्र पर पूरे दिन गतिविधियां चलती रहीं और कर्मचारियों में खासा उत्साह देखने को मिला।

मार्निंग वॉकर चेकिंग अभियान से बढ़ा जनविश्वास, देवरिया में 17 स्थानों पर पुलिस की सघन कार्रवाई

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। देवरिया में जनसुरक्षा और कानून व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने के उद्देश्य से पुलिस अधीक्षक संजीव सुमन के निर्देशन में बुधवार सुबह “मार्निंग वॉकर चेकिंग अभियान” चलाया गया। यह अभियान प्रातः 05:00 बजे से 08:00 बजे तक जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में संचालित हुआ, जिसमें पुलिस और आमजन के बीच सीधा संवाद स्थापित किया गया।

अभियान के तहत सभी थाना प्रभारी एवं थानाध्यक्ष अपने-अपने थाना क्षेत्रों में मॉर्निंग वॉक पर निकले नागरिकों से मिले, उनकी समस्याएं सुनीं और सुरक्षा का भरोसा दिलाया। पुलिस अधिकारियों ने मित्रवत व्यवहार करते हुए सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा दिया और कई छोटे विवादों का मौके पर ही समाधान किया।

संदिग्धों और वाहनों की सघन जांच

मार्निंग वॉकर चेकिंग अभियान के दौरान संदिग्ध व्यक्तियों और वाहनों की व्यापक जांच की गई। पुलिस ने:

• चोरी की गाड़ियों की पहचान
• तीन सवारी चलने वालों के खिलाफ कार्रवाई
• मॉडिफाइड साइलेंसर वाले दुपहिया वाहनों का चालान
• नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने पर कार्रवाई
• अवैध गतिविधियों पर कड़ी निगरानी

इसके साथ ही अवैध असलहा और मादक पदार्थों की रोकथाम को लेकर भी सघन तलाशी अभियान चलाया गया।

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213 लोग और 127 वाहन जांच के दायरे में

अभियान के दौरान जनपद के 17 स्थानों पर चेकिंग की गई, जिसमें कुल 213 व्यक्तियों और 127 वाहनों की जांच की गई। मॉर्निंग वॉक पर निकले नागरिकों ने पुलिस की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इससे सुरक्षा की भावना मजबूत हुई है।

नियमित रूप से जारी रहेगा अभियान

जनपदीय पुलिस ने स्पष्ट किया कि इस तरह के अभियान भविष्य में भी नियमित रूप से जारी रहेंगे, ताकि देवरिया में शांति, सुरक्षा और कानून व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा सके।

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कक्षा दो के छात्र ने दीवारों पर लिखा ‘Help’, स्कूल में मानसिक प्रताड़ना का खुलासा, चार पर FIR

कानपुर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। सेनपश्चिम पारा थाना क्षेत्र स्थित सेठ आनंदराम जयपुरिया स्कूल में कक्षा दो के एक आठ वर्षीय छात्र के साथ कथित मानसिक प्रताड़ना का मामला सामने आया है। मासूम बच्चे द्वारा घर की दीवारों पर बार-बार ‘Help… Help…’ लिखने के बाद यह पूरा मामला उजागर हुआ, जिसके बाद स्कूल के डायरेक्टर समेत चार लोगों के खिलाफ पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है।

पेन चोरी के आरोप में मानसिक प्रताड़ना का आरोप

रमईपुर न्यू सोसाइटी रौतारा निवासी फौजी अभिषेक शंकर दुबे के बेटे आकाश (8) पर स्कूल में स्मार्ट टीवी का पेन चोरी करने का आरोप लगाया गया था। बच्चे की मां पूनम दुबे के अनुसार, 28 नवंबर को उनका बेटा स्कूल गया ही नहीं था, इसके बावजूद 12 दिसंबर को उन्हें स्कूल बुलाकर बच्चे पर चोरी का आरोप लगाया गया।
मां का आरोप है कि कक्षाध्यापिका संगीता मलिक, प्रधानाचार्य अनुप्रित रावत और शिक्षक स्वतंत्र अग्निहोत्री ने बच्चे को डराया-धमकाया और उसका वीडियो बनाकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया।

CCTV फुटेज मांगने पर किया गया इनकार

जब मां ने आरोपों के समर्थन में सीसीटीवी फुटेज मांगा, तो स्कूल प्रबंधन ने न केवल फुटेज देने से इनकार किया, बल्कि उन्हें धमकाया भी। इसके बाद से बच्चा गुमसुम रहने लगा और हर जगह ‘Help’ लिखने लगा।

नींद में बड़बड़ाने से खुला राज

मां के अनुसार बच्चा रात में नींद के दौरान डर के मारे बड़बड़ाने लगा—“मैम… मैंने पेन नहीं लिया।” जब उससे प्यार से बात की गई, तब उसने शिक्षक द्वारा डराने की बात बताई। मामले की शिकायत करने स्कूल जाने पर प्रबंधन ने कथित रूप से चोरी गए पेन की कीमत मांगी।

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चार के खिलाफ दर्ज हुई FIR

सेनपश्चिम पारा थाना प्रभारी प्रदीप कुमार सिंह ने बताया कि कई बार बुलाने के बावजूद स्कूल प्रबंधन थाने नहीं पहुंचा। इसके बाद मां की तहरीर पर स्कूल डायरेक्टर देवराज सिंह राजावत, प्रधानाचार्य अनुप्रित रावत, कक्षाध्यापिका संगीता मलिक और शिक्षक स्वतंत्र अग्निहोत्री के खिलाफ धमकाने और किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम 2015 की धारा 75 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।

स्कूल डायरेक्टर का पक्ष

स्कूल डायरेक्टर देवराज सिंह राजावत ने आरोपों को नकारते हुए कहा कि कक्षा में स्मार्ट टीवी का पेन चोरी हुआ था और अन्य बच्चों ने उसी छात्र का नाम बताया था। उन्होंने दावा किया कि बच्चे ने मां के सामने चोरी कबूली थी और इस दौरान बच्चे के पिता ने शिक्षकों से अभद्रता की। एफआईआर की जानकारी उन्हें मीडिया से मिली।

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उत्तर भारत में शीत दिवस और कोहरे का कहर, IMD ने जारी किया अलर्ट

दिल्ली-NCR में ठंड का डबल अटैक: कोहरे का अलर्ट, तापमान में गिरावट और प्रदूषण ने बढ़ाई चिंता

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद में मौसम विभाग के पूर्वानुमान के बावजूद फिलहाल घना कोहरा दिखाई नहीं दे रहा है, लेकिन ठंड का असर एक बार फिर तेज होने जा रहा है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार राजधानी दिल्ली में अगले सात दिनों के दौरान न्यूनतम तापमान 7 से 8 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है, जबकि अधिकतम तापमान 19 से 20 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना रहेगा। इससे ठिठुरन और ठंड का अहसास बढ़ेगा।
मौसम विभाग का कहना है कि क्रिसमस यानी 25 दिसंबर को मौसम सामान्य रहेगा, लेकिन 26 दिसंबर से दिल्ली-NCR सहित उत्तर भारत में घने कोहरे की स्थिति बनने लगेगी। उत्तर प्रदेश, हरियाणा, चंडीगढ़ और पंजाब में 29 दिसंबर को घना कोहरा छाने की संभावना है। वहीं उत्तराखंड में 28 दिसंबर को कोहरे का प्रभाव देखने को मिल सकता है।

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मध्य प्रदेश में 25 दिसंबर को घने कोहरे के आसार जताए गए हैं। इसके अलावा बिहार, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और ओडिशा में 28 दिसंबर को बेहद घना कोहरा पड़ने की चेतावनी दी गई है। पश्चिम बंगाल और झारखंड में 25 दिसंबर, छत्तीसगढ़ में 24 दिसंबर, उत्तर-पूर्वी भारत में 26 दिसंबर और बिहार में 26 से 28 दिसंबर के बीच अत्यधिक कोहरा छाए रहने की संभावना है। पूर्वी उत्तर प्रदेश और पूर्वी मध्य प्रदेश में शीत दिवस की स्थिति बन सकती है, जबकि बिहार में 23 से 28 दिसंबर तक शीत दिवस रहने का अनुमान है।
उत्तर प्रदेश के आगरा, बरेली, प्रयागराज, कानपुर, बहराइच, आजमगढ़, गोरखपुर, बलिया, अयोध्या, लखनऊ, वाराणसी, गाजीपुर, सुल्तानपुर, बांदा, कुशीनगर और गाजियाबाद के हिंडन एयरपोर्ट क्षेत्र में कोहरा परेशानी बढ़ा सकता है। हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर, पंजाब के अमृतसर और फरीदकोट तथा हरियाणा के हिसार और अंबाला में भी अगले दो दिनों तक दृश्यता कम रहने की आशंका है।
इस बीच दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण की स्थिति जस की तस बनी हुई है। राजधानी के 40 निगरानी केंद्रों में से अधिकांश में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 350 के पार दर्ज किया गया है, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है। प्रदूषण और ठंड के इस दोहरे प्रकोप से बुजुर्गों, बच्चों और सांस के मरीजों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
दिल्ली-NCR AQI स्थिति:
दिल्ली – 355 | नोएडा – 355 | ग्रेटर नोएडा – 344 | गुरुग्राम – 316

ग्रामीणों के जनआंदोलन का असर, बंधा व पक्का ठोकर निर्माण को लेकर सिंचाई विभाग हरकत में

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। केवलापुर खुर्द क्षेत्र के चानकी से जिनवापुर होते हुए आराजी सुबाईन तक बंधे के निर्माण तथा जिनवापुर और जगपुर गांव के पास पक्के ठोकर के निर्माण की लंबे समय से लंबित मांग को लेकर ग्रामीणों द्वारा किया गया जनआंदोलन आखिरकार प्रशासन और सिंचाई विभाग तक प्रभावी ढंग से पहुंचा। ग्रामीणों के निरंतर दबाव, एकजुटता और धरना-प्रदर्शन के बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर सिंचाई विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थलीय निरीक्षण किया, जिससे वर्षों पुरानी समस्या के समाधान की उम्मीद जगी है।
सिंचाई खंड द्वितीय के अवर अभियंता के.एम. सिंह के नेतृत्व में विभागीय टीम ने चानकी, जिनवापुर, जगपुर, जोगिया और आराजी सुबाईन गांवों का विस्तार से निरीक्षण किया। अधिकारियों ने नदी की धारा, कटान की स्थिति, बाढ़ से प्रभावित क्षेत्र, ग्रामीण आबादी की दूरी और पूर्व में हुए नुकसान का बारीकी से जायजा लिया। इस दौरान ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनी गईं और पूर्व वर्षों में आई बाढ़ से हुए नुकसान की जानकारी भी ली गई।
गौरतलब है कि बीते शुक्रवार को जिला पंचायत सदस्य सुरेश चंद साहनी एवं सामाजिक कार्यकर्ता रवींद्र जैन के नेतृत्व में केवलापुर खुर्द स्थित राजगढ़ समय माता मंदिर परिसर में दो सूत्रीय मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया गया था। धरने में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए और उन्होंने बंधा तथा पक्का ठोकर निर्माण को लेकर प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई। ग्रामीणों का कहना था कि हर वर्ष बाढ़ के दौरान नदी का पानी गांवों में घुस जाता है, जिससे फसलों, घरों और जनजीवन को भारी नुकसान उठाना पड़ता है।
धरने की गंभीरता को देखते हुए शुक्रवार की रात करीब नौ बजे उपजिलाधिकारी सदर जितेंद्र कुमार, सिंचाई खंड द्वितीय के सहायक अभियंता जितेंद्र पटेल तथा थानाध्यक्ष चौक ओमप्रकाश गुप्ता धरना स्थल पर पहुंचे। अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच करीब एक घंटे तक गहन वार्ता हुई। ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े रहे और तत्काल ठोस कार्रवाई की मांग की। अधिकारियों ने समस्याओं के स्थायी समाधान का आश्वासन दिया, जिसके बाद ग्रामीणों ने आंदोलन स्थगित किया।
निरीक्षण के उपरांत अवर अभियंता के.एम. सिंह ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देश पर पूरे क्षेत्र का तकनीकी निरीक्षण किया गया है। बाढ़ से प्रभावित गांवों, नदी की स्थिति और संभावित खतरे का आंकलन कर विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इस कार्ययोजना को शासन को भेजा जाएगा और स्वीकृति व धनराशि प्राप्त होते ही बंधा एवं पक्का ठोकर निर्माण का कार्य शीघ्र शुरू कराया जाएगा।
निरीक्षण के दौरान जिला पंचायत सदस्य सुरेश चंद साहनी, सामाजिक कार्यकर्ता रवींद्र जैन, अवर अभियंता मनीष वर्मा, जेई सुशील कुमार चौधरी के साथ-साथ अंगद चौहान, हरीश आर्य, धर्मेंद्र सिंह, सुनील सिंह, गणेश चौहान, ओमप्रकाश मौर्य, दिनेश यादव सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। ग्रामीणों ने निरीक्षण पर संतोष व्यक्त करते हुए मांग की कि कार्ययोजना को शीघ्र स्वीकृति दिलाकर निर्माण कार्य जल्द शुरू कराया जाए, ताकि आने वाली बाढ़ से स्थायी राहत मिल सके।

बलिदान सप्ताह: क्रिसमस की चकाचौंध में विस्मृत इतिहास

नवनीत मिश्र

21 दिसंबर से 27 दिसंबर तक का सप्ताह भारतीय इतिहास में अद्वितीय बलिदान का प्रतीक है। इन्हीं सात दिनों में गुरु गोबिंद सिंह का संपूर्ण परिवार धर्म और राष्ट्र की रक्षा करते हुए शहादत के पथ पर अग्रसर हुआ। दुर्भाग्य है कि आज इस ऐतिहासिक सत्य से समाज का बड़ा वर्ग अनभिज्ञ होता जा रहा है।
21 दिसंबर को आनंदपुर साहिब का किला छोड़ने से लेकर 27 दिसंबर को सरहिंद में छोटे साहिबजादों के बलिदान तक की घटनाएँ केवल सिख इतिहास नहीं, बल्कि सम्पूर्ण भारतीय चेतना का अभिन्न अंग हैं। एक समय था जब पंजाब में इस सप्ताह को शोक और स्मरण के रूप में मनाया जाता था। लोग धरती पर शयन करते थे, क्योंकि इसी अवधि में माता गुजर कौर ने अपने दो छोटे पुत्रों के साथ सरहिंद के किले की ठंडी बुर्ज में अमानवीय परिस्थितियाँ झेली थीं।
आज स्थिति भिन्न है। पूरा देश इस कालखंड में केवल उत्सवों और बधाइयों में व्यस्त दिखाई देता है, जबकि बलिदान की यह अमर गाथा स्मृतियों से ओझल होती जा रही है। यह प्रश्न विचारणीय है कि क्या मात्र तीन शताब्दियों में ही हम अपने इतिहास और त्याग को भूल बैठे हैं?
इतिहास साक्षी है कि जो समाज अपने अतीत के बलिदानों को भुला देता है, वह स्वयं इतिहास के पन्नों में सिमट कर रह जाता है। आज विशेष रूप से युवाओं और बच्चों को इस कालखंड की जानकारी देना आवश्यक है, ताकि वे यह समझ सकें कि स्वतंत्रता और सांस्कृतिक अस्मिता केवल शब्द नहीं, बल्कि त्याग और तपस्या से अर्जित मूल्य हैं।

21 दिसंबर
गुरु गोबिंद सिंह ने परिवार सहित आनंदपुर साहिब का किला छोड़ा।

22 दिसंबर
गुरु अपने दोनों बड़े पुत्रों के साथ चमकौर पहुँचे। माता गुजर कौर और दोनों छोटे पुत्रों को गंगू अपने साथ ले गया।
चमकौर के युद्ध में बड़े पुत्र अजित सिंह (17 वर्ष) और जुझार सिंह (14 वर्ष) ने मुट्ठी भर साथियों के साथ विशाल सेना का सामना करते हुए वीरगति प्राप्त की।

23 दिसंबर
विश्वासघात के कारण माता गुजर कौर और दोनों छोटे पुत्रों को पकड़कर मोरिंडा होते हुए आगे ले जाया गया। इसी दौरान गुरु गोबिंद सिंह को चमकौर छोड़ना पड़ा।

24 दिसंबर
तीनों को सरहिंद पहुँचाकर ठंडी बुर्ज में नजरबंद किया गया।

25–26 दिसंबर
छोटे साहिबजादों पर धर्म परिवर्तन का दबाव डाला गया, जिसे उन्होंने दृढ़ता से अस्वीकार कर दिया।

27 दिसंबर
जोरावर सिंह (8 वर्ष) और फतेह सिंह (6 वर्ष) को अमानवीय यातनाओं के बाद जीवित दीवार में चिनवाकर शहीद कर दिया गया। यह समाचार सुनते ही माता गुजर कौर ने भी प्राण त्याग दिए।

अमर बलिदान की विरासत
चमकौर का युद्ध केवल एक सैन्य संघर्ष नहीं था, बल्कि यह साहस, संकल्प और आस्था की पराकाष्ठा थी। सीमित संसाधनों और अल्प संख्या के बावजूद, सिख योद्धाओं ने अद्भुत पराक्रम का परिचय दिया। यह विश्व इतिहास की विरल घटना है, जहाँ एक पिता ने अपने पुत्रों को धर्म और सत्य की वेदी पर अर्पित कर दिया।

इतिहास में ऐसे उदाहरण अत्यंत दुर्लभ हैं, जहाँ इतने कम आयु के बालक अपने विश्वास और संस्कारों के लिए प्राणोत्सर्ग को तैयार हो गए हों। यह केवल एक परिवार की शहादत नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता की आत्मा का प्रमाण है।
दुर्भाग्य यह है कि हमारी शिक्षा और सामाजिक चेतना में इन प्रसंगों को वह स्थान नहीं मिला, जिसके वे अधिकारी हैं। अनेक पीढ़ियाँ इन बलिदानों से अनजान रह गईं, जबकि इन्हीं त्यागों के कारण आज हमारी सांस्कृतिक पहचान सुरक्षित है।

स्मरण ही सच्ची श्रद्धांजलि
यह हमारा दायित्व है कि हम आने वाली पीढ़ियों को इस इतिहास से अवगत कराएँ। केवल उत्सव मनाना ही नहीं, बल्कि बलिदान को समझना और उससे प्रेरणा लेना भी उतना ही आवश्यक है।
गुरु गोबिंद सिंह और उनके साहिबजादों का त्याग हमें यह सिखाता है कि मूल्य, विश्वास और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान भी छोटा पड़ सकता है।
बलिदान सप्ताह केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए एक नैतिक संदेश है। अपने इतिहास को जानो, समझो और सहेजो।

“विघ्नों के पार: जब गणेश सिखाते हैं समत्व का धर्म”

🕉️ “ज्ञान का प्रकाश, करुणा की धारा और धैर्य का पात्र — जब जीवन स्वयं गणेश बन जाता है”
शास्त्रोक्त गणेश कथा

भूमिका: जब जीवन ही पूजा बन जाए
“ज्ञानं दीपः, करुणा ईंधनं, धैर्यः पात्रम्” — यह सूत्र केवल एक काव्यात्मक पंक्ति नहीं, बल्कि संपूर्ण भारतीय दर्शन का सार है। जब मनुष्य अपने जीवन को ज्ञान के दीप से प्रकाशित करता है, करुणा को ईंधन बनाता है और धैर्य को पात्र, तब उसके जीवन में गणेश केवल पूज्य नहीं रहते, साक्षात् जीवन-मार्गदर्शक बन जाते हैं।
पिछले एपिसोड में हमने जाना कि कैसे प्रत्येक श्वास पूजा बन सकती है। अब एपिसोड–7 में हम प्रवेश करते हैं उस शास्त्रोक्त कथा में, जहाँ गणेश केवल विघ्नहर्ता नहीं, बल्कि विवेक, समता और धर्म के प्रतीक बनकर प्रकट होते हैं।

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शास्त्रोक्त कथा: गणेश और ‘समत्व का रहस्य’
ब्रह्मवैवर्त पुराण और मुद्गल पुराण में वर्णित एक गूढ़ कथा के अनुसार, एक बार देवताओं और असुरों के मध्य यह विवाद उत्पन्न हुआ कि संसार में सबसे बड़ा बल कौन-सा है — शक्ति, बुद्धि या भक्ति?
इस प्रश्न का उत्तर जानने के लिए सभी ब्रह्मलोक पहुँचे। ब्रह्मा जी ने मुस्कराकर कहा—
“जिसने समत्व को साध लिया, वही सर्वश्रेष्ठ है।”

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परंतु देव और असुर इस उत्तर से संतुष्ट नहीं हुए। तब ब्रह्मा जी ने गणेश का स्मरण किया।
गणेश का प्राकट्य
गणेश प्रकट हुए—
एक दंत टूटा हुआ,
पेट में ब्रह्मांड समाए,
और नेत्रों में करुणा की अथाह गहराई।

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गणेश ने कहा—
“जो सुख में अहंकार न करे और दुःख में टूटे नहीं — वही ज्ञानी है।
जो अपने और पराए में भेद न करे — वही करुणावान है।
और जो समय की प्रतीक्षा कर सके — वही धैर्यवान है।”
उन्होंने देवताओं और असुरों को एक ही फल दिया—मोदक।
किसी ने स्वाद को मीठा कहा, किसी ने सामान्य।
तब गणेश मुस्कराए और बोले—
“फल वही था, भेद केवल मन का था।”
यही समत्व का रहस्य है।

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गणेश जी की शास्त्रोक्त महिमा: क्यों वे सबसे पहले पूजे जाते हैं?
स्कंद पुराण में कहा गया है—
“न विघ्नं तस्य कार्येषु यः स्मरेत् गणनायकम्।”
अर्थात जो कार्य के आरंभ में गणनायक का स्मरण करता है, उसके मार्ग के विघ्न स्वतः शांत हो जाते हैं।
गणेश का अग्रपूजन केवल परंपरा नहीं, बल्कि मानसिक अनुशासन है।
वे हमें सिखाते हैं कि—
बड़े कान: अधिक सुनो, कम बोलो
छोटी आँखें: सूक्ष्म को देखो
टूटा दंत: अहंकार का त्याग
विशाल पेट: जीवन के अनुभवों को पचाने की क्षमता
गणेश और समानता का दर्शन
गणेश का वाहन मूषक (चूहा) है — जो समाज में तुच्छ समझा जाता है।
यह शास्त्रोक्त संकेत है कि ईश्वर किसी को छोटा या बड़ा नहीं मानता।
जो स्वयं को सबसे छोटा समझ ले, वही सबसे बड़ा बनता है।

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आज के समाज में जब भेद, वर्ग और अहंकार बढ़ रहा है, गणेश का यह संदेश अत्यंत प्रासंगिक है—
“सब समान हैं, भेद केवल दृष्टि का है।”
गणेश कथा से जीवन शिक्षा
एपिसोड–7 की यह कथा हमें तीन अमूल्य सूत्र देती है—
1️⃣ ज्ञान बिना करुणा अधूरा है
केवल बुद्धिमान होना पर्याप्त नहीं, जब तक उसमें करुणा न हो।
2️⃣ करुणा बिना धैर्य दिशाहीन है
भावना तभी फलती है, जब उसे धैर्य का आधार मिले।
3️⃣ धैर्य बिना ज्ञान बोझ बन जाता है
जो समय की प्रतीक्षा नहीं कर सकता, वह सत्य को भी खो देता है।
आज के युग में गणेश की प्रासंगिकता
आज का मनुष्य तेज़ है, पर स्थिर नहीं।
सूचित है, पर संवेदनशील नहीं।

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यहीं गणेश हमें रोककर कहते हैं—
“पहले भीतर के विघ्न हटाओ, बाहर के अपने आप हट जाएंगे।”
जब हम गणेश को केवल मूर्ति नहीं, जीवन दर्शन मान लेते हैं, तब हर दिन गणेश चतुर्थी बन जाता है और हर श्वास पूजा।
गणेश बाहर नहीं, भीतर हैं
गणेश कोई दूरस्थ देवता नहीं,
वे हमारे विवेक, करुणा और धैर्य का समन्वय हैं।
जब यह तीनों जागृत हो जाते हैं—
तब जीवन स्वयं एक शास्त्रोक्त यज्ञ बन जाता है।

पुत्र के निर्माण में माता-पिता की निर्णायक भूमिका: संस्कार, संवाद और जिम्मेदारी की सीख

डॉ. सतीश पाण्डेय
महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)।
पुत्र का जीवन केवल जन्म से लेकर शिक्षा और रोजगार तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह संस्कार, संवेदना, नैतिकता और सामाजिक जिम्मेदारी की एक सतत और दीर्घकालिक प्रक्रिया है। इस पूरी यात्रा में माता-पिता की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण और निर्णायक होती है। वे केवल पालन-पोषण करने वाले अभिभावक नहीं, बल्कि जीवन के पहले, स्थायी और सबसे प्रभावी गुरु होते हैं। पुत्र जैसा इंसान, नागरिक और व्यक्तित्व बनता है, उसमें माता-पिता की सोच, आचरण, जीवन-शैली और मूल्यों की स्पष्ट छाप दिखाई देती है।
बाल्यावस्था में माता बच्चे के लिए सुरक्षा, स्नेह और विश्वास की पहली पाठशाला होती है। उसी के सान्निध्य में पुत्र प्रेम, करुणा, संवेदना और अपनत्व के संस्कार सीखता है। वहीं पिता अनुशासन, परिश्रम, संघर्ष और कर्तव्यबोध का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। माता की ममता और पिता के अनुशासन का संतुलन ही बच्चे के व्यक्तित्व को मजबूती देता है। जिन घरों में सकारात्मक वातावरण, संवाद की परंपरा और संस्कारों की नींव मजबूत होती है, वहां पलने वाला पुत्र आत्मविश्वासी, संतुलित और जिम्मेदार नागरिक के रूप में विकसित होता है।
किशोरावस्था पुत्र के जीवन का सबसे नाजुक और संवेदनशील दौर माना जाता है। इस समय भावनात्मक उतार-चढ़ाव, मित्रों का प्रभाव, सोशल मीडिया और नई जिज्ञासाएं उसे कई दिशाओं में आकर्षित करती हैं। ऐसे समय में माता-पिता का मित्रवत व्यवहार अत्यंत आवश्यक हो जाता है। डांट-फटकार और कठोर अनुशासन के बजाय संवाद, समझ और विश्वास की आवश्यकता होती है। यदि इस अवस्था में माता-पिता संवाद से दूर हो जाएं या मार्गदर्शन देने में चूक जाएं, तो पुत्र गलत रास्तों पर भटक सकता है। वहीं सही समय पर दी गई एक सकारात्मक सलाह उसके पूरे जीवन की दिशा बदल सकती है।
युवावस्था में प्रवेश करते ही पुत्र स्वतंत्रता चाहता है और अपने निर्णय स्वयं लेने की आकांक्षा रखता है। इस चरण में माता-पिता की भूमिका नियंत्रक की नहीं, बल्कि मार्गदर्शक और मजबूत सहारा बनने की होती है। उन्हें चाहिए कि वे पुत्र को जिम्मेदारियां सौंपें, उसे गलतियों से सीखने का अवसर दें और हर परिस्थिति में नैतिक मूल्यों, ईमानदारी और सामाजिक दायित्व से जुड़े रहने की प्रेरणा देते रहें।
आज के भौतिकतावादी, प्रतिस्पर्धात्मक और तेज़ रफ्तार जीवन में माता- पिता की जिम्मेदारी पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। केवल सफलता, धन और पद ही जीवन की उपलब्धि नहीं हैं। माता-पिता को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनका पुत्र संवेदनशील, अनुशासित, कर्तव्यनिष्ठ और समाज के लिए उपयोगी नागरिक बने। क्योंकि अंततः पुत्र की सोच, आचरण और परिपक्वता ही माता-पिता के संस्कारों, परवरिश और मूल्यों की सबसे बड़ी पहचान और सच्ची परीक्षा होती है।

पुलिस ने अवैध तमंचे के साथ युवक को किया गिरफ्तार

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)
थाना चिलुआताल पुलिस ने चेकिंग के दौरान अवैध हथियार के साथ एक युवक को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए अभियुक्त के कब्जे से 315 बोर का एक अवैध तमंचा बरामद हुआ है।
पुलिस के अनुसार, चेकिंग के दौरान प्रिन्स साहनी पुत्र गणेश साहनी, निवासी ग्राम कुशहरा, थाना चिलुआताल, जनपद गोरखपुर को संदिग्ध अवस्था में पकड़ा गया। तलाशी लेने पर उसके पास से अवैध तमंचा बरामद हुआ। इसके बाद उसे हिरासत में लेकर आवश्यक कार्रवाई की गई।
इस संबंध में थाना चिलुआताल पर मु0अ0सं0 823/2025, धारा 9/25 आर्म्स एक्ट के तहत अभियोग पंजीकृत किया गया है। पुलिस द्वारा अभियुक्त के खिलाफ अग्रिम विधिक कार्यवाही की जा रही है।
गिरफ्तारी करने वाली पुलिस टीम में उपनिरीक्षक रवि राजन कुमार, कांस्टेबल विवेक यादव, कांस्टेबल अमरजीत यादव एवं कांस्टेबल सुजीत सिंह शामिल रहे।